# रीवा में मीठी बूंदी और तीखे सेव की जुगलबंदी, जानिए बघेलखंड के इस पारंपरिक स्वाद का पूरा सफर

> बघेलखंड के खानपान में मीठी बूंदी और नमकीन सेव की जोड़ी बेहद लोकप्रिय है, जिसे पूजा-पाठ और मेहमाननवाजी का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। रीवा में तीन दशकों से तैयार हो रहे इस पारंपरिक मिष्ठान की रेसिपी और खासियतें जानिए।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/rewa-men-mithi-bundi-aura-tikhe-sev-ki-jugalabndi-janie-baghelkhand-ke-isa-parnparika-svada-ka-pura-saphara-44665 · **Language:** Hindi
**Tags:** मीठी बूंदी, बघेलखंड, रीवा, पारंपरिक मिठाई, नमकीन सेव, देसी खानपान

मध्य प्रदेश के बघेलखंड अंचल में खानपान की परंपराएं सदियों से जनजीवन का गहरा हिस्सा रही हैं। यहां की सांस्कृतिक पहचान में लोक-संस्कृति और बोली के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों का स्थान भी बेहद अहम है। इसी कड़ी में मीठी बूंदी एक ऐसा पारंपरिक मिष्ठान है, जिसे गांवों की चौपालों से लेकर शहरी बाजारों तक हर वर्ग के लोग बड़े चाव से खाते हैं। पूजा-पाठ का प्रसंग हो या घर आए मेहमानों का सत्कार, यह सादा लेकिन रसीला पकवान हर मौके पर थाली की शोभा बढ़ाता है।

## चाशनी और बेसन से तैयार होती है रसीली बूंदी
इस पारंपरिक मिठाई को तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक कारीगरी पर आधारित है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बेसन में आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर एक पतला और चिकना घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद कड़ाही में घी या तेल को तेज आंच पर गर्म किया जाता है। कारीगर लोहे या पीतल के छिद्रदार झारे के ऊपर बेसन का घोल डालते हैं, जिससे गर्म तेल में गोल-गोल बूंदियां गिरती हैं और कुरकुरी होने तक तली जाती हैं। दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में चीनी और पानी को मिलाकर चाशनी पकाई जाती है, जिसमें मनमोहक खुशबू और रंग के लिए इलायची, केसर अथवा हल्का खाद्य रंग मिलाया जाता है। तली हुई कुरकुरी बूंदी को गर्म चाशनी में डुबोकर लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे बूंदी अंदर तक रस पीकर पूरी तरह रसीली और मुलायम बन जाती है।

## रीवा में तीन दशकों से बरकरार है स्वाद
रीवा शहर के प्रमुख बाजार शिल्पी प्लाजा में स्थित बंगाल स्वीट्स के संचालक पवन चौरसिया बीते लगभग 30 वर्षों से यह पारंपरिक मिठाई तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मीठी बूंदी बघेलखंड की विशुद्ध देसी और पारंपरिक मिठाई है। इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व भी काफी गहरा है। किसी भी शुभ अनुष्ठान, मांगलिक अवसर या सत्यनारायण भगवान की कथा में इसे मुख्य प्रसाद के रूप में अर्पित करने और भक्तों में वितरित करने की अटूट परंपरा रही है। बाजार में यह लोकप्रिय मिठाई ₹200 प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध कराई जाती है।

## तीखे सेव के साथ मीठे का अनूठा मेल
बघेलखंड के देहाती इलाकों और कस्बों में इस मिठाई को खाने का एक खास देशी अंदाज भी प्रचलित है। यहां लोग मीठी बूंदी को तीखे और कुरकुरे नमकीन सेव या भुजिया के साथ मिलाकर खाना पसंद करते हैं। मिठास और चटपटेपन का यह अनोखा मेल सुबह के नाश्ते के समय बहुत चाव से खाया जाता है। इसके अलावा त्योहारों पर मिलने-जुलने के दौरान और शाम की चाय के साथ भी स्थानीय लोग नमकीन सेव और मीठी बूंदी के इस मेल का आनंद लेते हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर पारंपरिक भारतीय खानपान, स्थानीय खाद्य व्यापार और बजट के अनुकूल प्रामाणिक स्वादों की जानकारी देती है।

- **भारत में:** देश भर के खाद्य प्रेमी स्थानीय और पारंपरिक स्वादों के संरक्षण के महत्व को समझ सकते हैं। यह दर्शाता है कि आधुनिक पैकेज्ड फूड के दौर में भी प्रामाणिक क्षेत्रीय मिष्ठान अपनी लोकप्रियता बनाए हुए हैं।
- **रीवा में:** रीवा और आसपास के स्थानीय निवासी शिल्पी प्लाजा जाकर ₹200 प्रति किलो के किफायती दाम पर ताजा पारंपरिक बूंदी खरीद सकते हैं। त्योहारों और पारिवारिक अनुष्ठानों के लिए यह शुद्ध और प्रामाणिक मिष्ठान का एक सुलभ विकल्प प्रस्तुत करता है।
- **खरीदारों के लिए:** उपभोक्ता सामान्य चाय के नाश्ते में नमकीन सेव और मीठी बूंदी का पारंपरिक संयोजन आजमा सकते हैं। यह कम खर्च में घर पर तैयार होने वाला एक स्वादिष्ट और अनोखा नाश्ता विकल्प प्रदान करता है।
- **धार्मिक आयोजनों के लिए:** सत्यनारायण कथा और अन्य पूजा कार्यक्रमों के लिए श्रद्धालु इसे किफायती और पारंपरिक प्रसाद के रूप में चुन सकते हैं। आधा घंटा पहले मंगवाकर ताजा रसीली बूंदी को पूजा में वितरित करना काफी सुविधाजनक रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बघेलखंड में मीठी बूंदी की निरंतर लोकप्रियता के पीछे इसकी सुलभ सामग्री, धार्मिक मान्यताएं और अनूठा स्वाद संतुलन है।

- **सुलभ सामग्री और विधि:** यह मिठाई बेसन, चीनी और पानी जैसी मूलभूत सामग्रियों से तैयार हो जाती है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध रहती हैं। इसी सादगी के चलते यह सदियों से हर रसोई और हलवाई की दुकान का अहम हिस्सा बनी रही।
- **धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाज:** सत्यनारायण भगवान की कथा और पारिवारिक आयोजनों में इसे प्रसाद के रूप में बांटने की पारंपरिक मान्यता ने इसकी मांग को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखा है। शुभ अवसरों पर इसे प्रसाद बनाने की परंपरा ने इसे सांस्कृतिक स्थायित्व दिया है।
- **स्वाद का अनूठा संतुलन:** मीठी बूंदी के साथ तीखे और नमकीन सेव का मेल अत्यधिक मिठास को संतुलित करता है, जिससे यह नियमित नाश्ते के रूप में भी अत्यधिक लोकप्रिय हो गया। इस खट्टे-मीठे और नमकीन स्वाद के मेल ने इसे नाश्ते की स्थायी पसंद बना दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. बघेलखंड में मीठी बूंदी को किस नमकीन के साथ मिलाकर खाया जाता है?
बघेलखंड में मीठी बूंदी को तीखे और कुरकुरे सेव अथवा भुजिया के साथ मिलाकर खाने की परंपरा है।

### 2. मीठी बूंदी को रसीला बनाने के लिए चाशनी में कितनी देर रखा जाता है?
तली हुई बूंदी को चाशनी में लगभग आधे घंटे के लिए भिगोकर रखा जाता है ताकि वह रस पूरी तरह सोख ले।

### 3. रीवा के शिल्पी प्लाजा में यह मिठाई किस दुकान पर और किस कीमत पर मिलती है?
यह मिठाई शिल्पी प्लाजा स्थित बंगाल स्वीट्स पर ₹200 प्रति किलोग्राम की दर से मिलती है।

### 4. किन धार्मिक अवसरों पर इस पारंपरिक मिठाई का प्रसाद बांटा जाता है?
सत्यनारायण भगवान की कथा, त्योहारों और अन्य मांगलिक व शुभ कार्यों में इसे मुख्य रूप से प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

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