सर्दियों के नाश्ते में बनाएं कुरकुरा मूली का पराठा, सीखें स्टफिंग न फटने का आसान तरीका सर्दियों की सुबह मक्खन, दही और तीखे मसालों के साथ मूली का कुरकुरा पराठा स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। सर्दियों के दिनों में सुबह के नाश्ते की मेज पर गरमागरम मूली के पराठे बेहद पसंद किए जाते हैं। मक्खन की एक पिघलती डली, ताजा दही और तीखे अचार के साथ परोसे जाने पर इनका स्वाद और बढ़ जाता है। स्वाद के अलावा मूली सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें पर्याप्त फाइबर, विटामिन C और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। अगर सही तकनीक का इस्तेमाल न किया जाए तो मूली बेलते वक्त पानी छोड़ देती है और पराठा फट जाता है, इसलिए इसे तैयार करने की पूरी विधि और जरूरी सावधानियों को समझना जरूरी है। मूली तैयार करने और पानी सुखाने का नियम पराठे बनाने की शुरुआत मूली को अच्छी तरह पानी से धोने और छीलने से होती है। साफ की गई मूली को कद्दूकस कर लें। इसके बाद कद्दूकस की हुई मूली में थोड़ा सा नमक मिलाएं और इसे 10 मिनट के लिए अलग रख दें। नमक के संपर्क में आते ही मूली का सारा अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है। 10 मिनट बीत जाने के बाद मूली को अपनी दोनों हथेलियों से कसकर दबाएं और पूरा पानी निचोड़ लें। ध्यान रखें कि इस निचोड़े हुए पानी को फेंकने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल गेहूं का आटा गूंथने में किया जा सकता है, जिससे पराठे और अधिक पौष्टिक बनते हैं। मसालेदार स्टफिंग तैयार करना निचोड़ी हुई सूखी मूली को एक चौड़े बर्तन में निकालें। अब इसमें एक छोटा चम्मच कद्दूकस की हुई अदरक, कटी हुई हरी मिर्च, अजवाइन, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालें। सभी मसालों को मूली के साथ एकसार मिला लें। यह मिश्रण पराठे के लिए चटपटी और खुशबूदार स्टफिंग का काम करता है। अजवाइन का इस्तेमाल करने से न केवल पराठे की महक अच्छी आती है, बल्कि यह मूली के भारीपन को हल्का कर पाचन को भी बेहतर बनाती है। आटा गूंथना और पराठे को सही तरीके से बेलना स्टफिंग के साथ ही पराठे का बाहरी आवरण भी लचीला होना चाहिए। इसके लिए गेहूं के आटे में हल्का नमक मिलाएं और जरूरत अनुसार पानी या मूली का बचा पानी डालकर एकदम नरम आटा गूंथ लें। गूंथे हुए आटे को करीब 15 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें ताकि उसमें खिंचाव आ सके। 15 मिनट बाद आटे की मध्यम आकार की लोइयां तैयार कर लें। एक लोई लें और उसे चकले पर थोड़ा सा बेल लें। अब इसके केंद्र में तैयार की गई मूली की स्टफिंग रखें। चारों किनारों को एक साथ लाकर ऊपर से अच्छी तरह बंद कर दें और हल्का सा दबाएं। अब हल्के हाथों से बिना ज्यादा दबाव डाले इसे पराठे के गोल आकार में बेलें, क्योंकि अधिक जोर लगाने से स्टफिंग बाहर फैल सकती है। सेंकने का सही तरीका और खास टिप्स गैस पर तवा चढ़ाएं और उसे अच्छी तरह गर्म होने दें। बेले हुए पराठे को तवे पर डालें और दोनों तरफ से पहले हल्का-हल्का सूखा ही सेक लें। इसके बाद अपनी पसंद के अनुसार देसी घी या तेल लगाएं और धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से तब तक सेंकें जब तक कि वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। धीमी आंच पर सेंकने से पराठा अंदर तक अच्छी तरह पकता है। पराठे को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए स्टफिंग में थोड़ा भुना हुआ जीरा भी मिलाया जा सकता है। इसी आसान विधि से बाकी बची लोइयों के भी गर्मागर्म पराठे तैयार कर लें। इसका आप पर असर घर पर आसानी से बिना फटे कुरकुरे मूली के पराठे तैयार करने से नाश्ते में पोषण और विविधता दोनों शामिल की जा सकती है। • दैनिक खानपान पर असर: सर्दियों के नाश्ते में मूली को शामिल करने से शरीर को भरपूर फाइबर और विटामिन C आसानी से मिल जाता है। परिवार के सदस्यों के लिए यह एक पौष्टिक और लंबे समय तक तृप्त रखने वाला घरेलू विकल्प बनता है। • रसोई की बचत और समझदारी: मूली से निकले हुए अतिरिक्त पानी से ही आटा गूंथकर पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा आटा नरम रखने से पराठे बेलते समय स्टफिंग बिखरने की बर्बादी रुक जाती है। • पाचन और स्वास्थ्य: स्टफिंग में अजवाइन का नियमित इस्तेमाल मूली के भारीपन को कम करके पेट को हल्का बनाए रखता है। इससे सुबह के समय पेट में गैस या भारीपन की समस्या पैदा नहीं होती। • पकाने की तकनीक: धीमी और मध्यम आंच पर तवे पर सेकने से घी या तेल का संतुलित इस्तेमाल होता है और पराठे अंदर तक सिकते हैं। इस विधि से बहुत ज्यादा चिकनाई का प्रयोग किए बिना भी पराठे खस्ता बनते हैं। ऐसा क्यों हुआ मूली के पराठे बनाते समय अक्सर पानी छूटने की वजह से लोई फट जाती है, जिसके पीछे सब्जी की प्राकृतिक बनावट और नमी मुख्य कारण होती है। • सब्जी में अत्यधिक पानी होना: मूली में स्वाभाविक रूप से जल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो कद्दूकस करने के बाद बाहर आने लगती है। जब इसमें नमक मिलाया जाता है, तो ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के कारण मूली तुरंत सारा पानी छोड़ देती है। • नमी न निकालने पर आटा फटना: अगर कद्दूकस की गई मूली को सीधे आटे में भरा जाए, तो बेलन का दबाव पड़ते ही नमी आटे को गीला कर देती है। नमी से आटा पतला होकर फट जाता है और भरावन तवे पर बिखरने लगता है। • अजवाइन और अदरक की आवश्यकता: मूली की तासीर और इसके पाचन में समय लगने के कारण स्टफिंग में अदरक और अजवाइन मिलाई जाती है। यह संयोजन स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट फूलने की समस्या को रोकता है। • मध्यम आंच पर पकाने का नियम: मोटी स्टफिंग वाले पराठों को तेज आंच पर पकाने से बाहरी परत जल जाती है जबकि अंदर का आटा कच्चा रह जाता है। मध्यम आंच गर्मी को भीतर तक पहुंचने देती है, जिससे परत कुरकुरी बनती है। सवाल-जवाब 1. मूली के पराठे बेलते समय क्यों फटने लगते हैं? कद्दूकस की हुई मूली में पानी अधिक होने से आटा गीला हो जाता है, इसलिए नमक मिलाकर 10 मिनट बाद पानी निचोड़ना जरूरी है। 2. मूली से निकाले गए पानी का क्या उपयोग किया जा सकता है? इस पानी को फेंकने के बजाय गेहूं का आटा गूंथने में इस्तेमाल करें, जिससे पराठे अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक बनते हैं। 3. मूली के पराठों में कौन-कौन से मुख्य मसाले डाले जाते हैं? स्टफिंग में कद्दूकस अदरक, कटी हरी मिर्च, अजवाइन, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और बारीक हरा धनिया मिलाया जाता है। 4. पराठों को अधिक कुरकुरा बनाने के लिए आंच कैसी रखनी चाहिए? तवे पर पराठे को धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ घी या तेल लगाकर सेंकना चाहिए ताकि वह अंदर तक पककर खस्ता बने। https://trendkia.com/food/sardiyon-ke-nashte-men-banaen-kurakura-mooli-ka-paratha-sikhen-staphinga-na-phatane-ka-asana-tarika-56241 TrendKia — Har trend, sabse pehle.