सर्दियों में बनाएं स्वादिष्ट और सेहतमंद साबुत मूंग दाल के पराठे, जानें आसान विधि सर्दियों के मौसम में आम पराठों से हटकर साबुत मूंग दाल के पराठे एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प हैं। इन्हें घर पर आसानी से बनाकर सुबह के नाश्ते या बच्चों के टिफिन में परोसा जा सकता है। सर्दियों के मौसम में आलू, पालक और बथुआ के पराठे तो हर घर में बनते और खाए जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी साबुत मूंग दाल से बने पराठों का स्वाद चखा है। ये पराठे न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं। इन्हें घर पर बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है और सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें बनाने के लिए सभी जरूरी सामग्री आसानी से रसोई घर में ही मिल जाती है। सुबह के नाश्ते से लेकर शाम के खाने तक या फिर बच्चों के स्कूल के टिफिन के लिए यह एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। मूंग दाल उबालने और तैयार करने की प्रक्रिया साबुत मूंग दाल के पराठे बनाने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले साबुत मूंग दाल को पांच से छह घंटे के लिए पर्याप्त पानी में भिगोकर रख देना चाहिए। इसके बाद दाल को कुकर में डालकर जरूरत के अनुसार पानी मिलाया जाता है और दो से तीन सीटी आने तक अच्छी तरह से उबाल लिया जाता है। दाल के पक जाने के बाद उसका अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दिया जाता है और इसे एक साफ कटोरे में निकालकर हाथों की मदद से हल्का दरदरा कर लिया जाता है ताकि स्टफिंग के लिए सही बनावट मिल सके। मसालेदार और स्वादिष्ट स्टफिंग तैयार करना दाल तैयार होने के बाद गैस पर कड़ाही रखकर उसमें दो चम्मच सरसों का तेल गर्म किया जाता है। तेल के अच्छे से गर्म होने पर उसमें जीरा और सौंफ का तड़का लगाया जाता है। इसके बाद बारीक कटी हुई हरी मिर्च, प्याज, लहसुन और अदरक के साथ लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, थोड़ी सी हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर मसालों को अच्छी तरह से भूना जाता है। मसाले भुन जाने के बाद इसमें उबली और दरदरी की हुई मूंग दाल मिलाई जाती है और लगातार दो से तीन मिनट तक चलाते हुए पकाया जाता है, जिससे पराठे के अंदर भरी जाने वाली स्वादिष्ट स्टफिंग पूरी तरह तैयार हो जाती है। आटा गूंथना और पराठे बेलने की विधि स्टफिंग तैयार करने के बाद पराठे के लिए गेहूं के आटे को नरम गूंथकर लगभग पांच मिनट के लिए ढककर रख दिया जाता है ताकि आटा सेट हो जाए। इसके बाद गूंथें हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और उन्हें हल्का सा बेल लिया जाता है। अब तैयार की गई मूंग दाल की स्टफिंग को बेली हुई रोटी के बीच में रखा जाता है और किनारों को चारों तरफ से अच्छी तरह बंद कर दिया जाता है। इसके बाद इसे सावधानी से गोल आकार में बेल लिया जाता है ताकि स्टफिंग बाहर न निकले। सेकने का सही तरीका और परोसने के सुझाव अब गर्म तवे पर इस तैयार पराठे को डालकर दोनों तरफ से अच्छी तरह से सेंका जाता है। पराठे को अधिक कुरकुरा और स्वादिष्ट बनाने के लिए जरूरत के अनुसार घी या तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसे मध्यम आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि पराठे का दोनों तरफ से प्यारा सुनहरा रंग न आ जाए। इसी प्रक्रिया से बाकी के सभी पराठे भी तैयार कर लिए जाते हैं। गरमा-गरम मूंग दाल के पराठे का स्वाद नाश्ते या दोपहर के खाने में बेहद लाजवाब लगता है। दही और चटनी के साथ परोसने का आनंद साबुत मूंग दाल के पराठों को घर पर ताजा दही, हरी चटनी या फिर अपनी पसंद के किसी भी अचार के साथ गरमा-गरम परोसा जा सकता है। सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों के टिफिन में रखने के लिए भी यह एक बेहतरीन और ऊर्जावान नाश्ता है। इसके अलावा घर पर अचानक मेहमान आ जाने पर भी नाश्ते में इन पराठों को झटपट तैयार किया जा सकता है। स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ मूंग दाल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो इसे रोजमर्रा के खानपान में शामिल करने के लिए एक आदर्श और सेहतमंद विकल्प बनाता है। इसका आप पर असर खानपान में पौष्टिक बदलाव से सर्दियों के मौसम में ऊर्जा बनी रहती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। • दैनिक खानपान: भारत में: सर्दियों के दौरान प्रोटीन और फाइबर से भरपूर साबुत मूंग दाल के पराठे को सुबह के नाश्ते में शामिल करने से शरीर में ऊर्जा का स्तर लंबे समय तक बना रहता है। • घर-परिवार में: इस पौष्टिक रेसिपी को अपनाने से बच्चों और बड़ों दोनों को एक ही नाश्ते में बेहतरीन स्वाद के साथ भरपूर पोषण मिल जाता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के मौसम में शरीर को अधिक ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पारंपरिक अनाजों और दालों का उपयोग किया जाता है। • मौसमी आवश्यकताएं: पारंपरिक चलन: सर्दियों के दिनों में ताजे मसालों और दालों से बने गर्म पराठे खाने की भारतीय संस्कृति में पुरानी परंपरा रही है। • पोषण का महत्व: साबुत मूंग दाल में पाए जाने वाले प्राकृतिक प्रोटीन और फाइबर सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। सवाल-जवाब 1. साबुत मूंग दाल के पराठे बनाने के लिए दाल को कितनी देर भिगोना चाहिए? साबुत मूंग दाल को पराठे बनाने से पहले पांच से छह घंटे तक पानी में भिगोकर रखना जरूरी होता है। 2. मूंग दाल को उबालने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता है? भीगोई हुई दाल को कुकर में आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर दो से तीन सीटी आने तक अच्छी तरह उबाला जाता है। 3. स्टफिंग तैयार करते समय कौन से मसालों का उपयोग किया जाता है? स्टफिंग के लिए जीरा, सौंफ, हरी मिर्च, प्याज, लहसुन, अदरक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी और नमक का उपयोग किया जाता है। 4. इन पराठों को किसके साथ परोसा जा सकता है? साबुत मूंग दाल के पराठों को दही, हरी चटनी या अचार के साथ गरमा-गरम परोसा जा सकता है। 5. मूंग दाल के पराठे खाने के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं? मूंग दाल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो इसे एक सेहतमंद और पौष्टिक नाश्ता बनाता है। https://trendkia.com/food/sardiyon-men-banaen-svadishta-aura-sehatamnda-whole-moong-dal-parathas-janen-asana-vidhi-51076 TrendKia — Har trend, sabse pehle.