सावन के महीने में घर पर बनाएं हलवाई जैसी राजस्थानी फीणी, जानिए आसान रेसिपी और सीक्रेट टिप्स सावन और तीज के त्योहारों पर बाजारों में 400 से 600 रुपये प्रति किलो बिकने वाली पारंपरिक राजस्थानी फीणी को अब घर पर ही बहुत आसानी से तैयार किया जा सकता है। पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही रसोईघर से लेकर हलवाइयों की दुकानों तक पारंपरिक व्यंजनों की खूशबू बिखरने लगती है। इस मौसम में मालपुआ, घेवर और मलाईदार रबड़ी का अपना अलग ही क्रेज होता है, लेकिन अगर आप इस बार कुछ हटकर और पूरी तरह पारंपरिक ट्राई करने का मन बना रहे हैं, तो राजस्थानी फीणी एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। इसकी महीन रेशेदार बनावट और हल्का सा कुरकुरा स्वाद हर किसी को भाता है। राजस्थान में तीज, सावन और अन्य खास पर्वों के दौरान इस मिठाई की भारी मांग रहती है, जिसके चलते बाजार में यह 400 से 600 रुपये प्रति किलो के भाव तक बेची जाती है। अच्छी बात यह है कि इस शाही मिठाई को तैयार करने के लिए किसी जटिल मशीन या बेहद कठिन तकनीकी कौशल की आवश्यकता नहीं होती है। यदि सही प्रक्रिया और सटीक माप का ध्यान रखा जाए, तो घर की रसोई में ही बिल्कुल बाजार जैसी खस्ता और लजीज फीणी बनाई जा सकती है। इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी सामग्री और कुछ खास बातों को नीचे विस्तार से समझाया गया है, जिनकी मदद से आपकी फीणी पहली बार में ही एकदम perfect बनेगी। राजस्थानी संस्कृति में फीणी का विशेष स्थान राजस्थान अपनी समृद्ध पाक कला और शानदार पारंपरिक मिठाइयों के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखता है। जिस तरह घेवर, मावा कचौरी और मोहनथाल इस क्षेत्र की शान हैं, उसी श्रेणी में फीणी भी आती है। इसकी मुख्य विशेषता इसकी बेहद बारीक और परतदार बनावट है, जो मुंह में जाते ही मक्खन की तरह घुल जाती है। इसे आमतौर पर गरमागरम दूध, केसर के धागों और कटे हुए सूखे मेवों के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। घर पर इस तरह तैयार करें परफेक्ट राजस्थानी फीणी इसकी शुरुआत करने के लिए एक बड़े बर्तन में मैदा लें और उसमें पर्याप्त मात्रा में देसी घी मिलाकर अच्छी तरह मोयन लगा लें। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा करके पानी या दूध मिलाते हुए एक मुलायम आटा गूंथकर तैयार कर लें। इस गुंथे हुए आटे को लगभग 20 मिनट के लिए किसी सूती कपड़े से ढककर एक तरफ रख दें ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए। इस बीच एक अलग कटोरी में घी और कॉर्नफ्लोर को आपस में अच्छी तरह फेंटकर एक चिकना मिश्रण बना लें। यह पेस्ट फीणी में पतली और अलग-अलग परतें बनाने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें सामान्य रोटियों की तरह पतला बेल लें। एक बेली हुई रोटी पर तैयार किया गया घी और कॉर्नफ्लोर का मिश्रण समान रूप से फैलाएं और उसके ऊपर दूसरी बेली हुई रोटी रख दें। इसी तरह कुल तीन से चार परतों को एक के ऊपर एक सेट कर लें। अब इन सभी परतों को एक साथ रोल करते हुए लंबा बेलनाकार आकार दें और इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर लें। हर एक टुकड़े को अपने हाथों से बहुत हल्के दबाव के साथ खींचते हुए रेशेदार रूप दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा जोर न लगाएं, अन्यथा इसकी नाजुक परतें टूट सकती हैं। तलने की सही तकनीक और चाशनी में डुबाने का तरीका एक कढ़ाई में पर्याप्त मात्रा में घी या तलने वाला तेल गर्म करें और तैयार की गई फीणी को धीमी या मध्यम आंच पर सुनहरा रंग आने तक तलें। यदि इसे तेज आंच पर पकाया जाएगा, तो यह ऊपर से तो सिक जाएगी लेकिन अंदर से कच्ची रह जाएगी और अपेक्षित कुरकुरापन नहीं आएगा। दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में चीनी और पानी को मिलाकर हल्की चिपचिपी चाशनी तैयार कर लें। इस चाशनी में खुशबू और स्वाद के लिए इलायची पाउडर तथा केसर मिला दें। अब तली हुई फीणी को इस हल्की गर्म चाशनी में सिर्फ कुछ सेकंड के लिए डुबोकर तुरंत बाहर निकाल लें। यदि आपको ज्यादा मीठा पसंद है, तो आप ऊपर से भी अतिरिक्त चाशनी डाल सकते हैं। अंत में बादाम के कतरन, पिस्ता और केसर के साथ इसकी गार्निशिंग करें। इसे गर्मागरम दूध के साथ परोसने पर इसका असली स्वाद खुलकर सामने आता है। फीणी बनाते वक्त इन बातों का रखें विशेष ध्यान इसे बनाते समय हमेशा आंच को धीमा या मध्यम ही रखें, क्योंकि इससे इसकी परतें अंदर तक सिककर खस्ता बनती हैं। घी और कॉर्नफ्लोर के मिश्रण को परतों के बीच बराबर मात्रा में लगाना जरूरी है, वरना रेशेदार बनावट नहीं उभर पाएगी। रेशे खींचते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी न दिखाएं, क्योंकि धैर्य से काम लेने पर ही यह बाजार जैसी खूबसूरत दिखती है। त्योहारों के सीजन में क्यों बढ़ जाती है इसकी कीमत? सावन के महीने, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों के दौरान राजस्थानी फीणी की मांग में अचानक भारी उछाल आ जाता है। कई प्रमुख शहरों में इसकी खुदरा कीमत 400 से 600 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि आप इसे घर पर ही बना लेते हैं, तो न केवल आपके काफी पैसे बचेंगे, बल्कि परिवार को एकदम ताजी, शुद्ध और हाइजीनिक मिठाई खाने को मिलेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि एक बार तैयार होने के बाद इसे एयरटाइट डिब्बे में भरकर कई दिनों तक आसानी से स्टोर किया जा सकता है। इसका आप पर असर भारत में: सावन और तीज के त्योहारों पर पारंपरिक मिठाइयों की बढ़ती कीमतों के बीच घर पर फीणी बनाने से घरेलू बजट पर पड़ने वाले खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. राजस्थानी फीणी बाजार में किस कीमत पर बिकती है? सावन और त्योहारों के सीजन के दौरान बाजार में फीणी 400 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिकती है। 2. फीणी की परतें बनाने के लिए किस मिश्रण का उपयोग किया जाता है? फीणी की पतली और रेशेदार परतें तैयार करने के लिए घी और कॉर्नफ्लोर के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। 3. फीणी को तलते समय आंच कैसी रखनी चाहिए? फीणी को हमेशा धीमी या मध्यम आंच पर ही तलना चाहिए ताकि वह अंदर तक कुरकुरी हो सके। 4. फीणी को किस चीज के साथ परोसा जाता है? फीणी को आमतौर पर गर्म दूध, केसर और सूखे मेवों के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/savana-ke-mahine-men-ghara-para-banaen-halavai-jaisi-rajasthan-i-feeni-janie-asana-resipi-aura-sikreta-tipsa-10880 TrendKia — Har trend, sabse pehle.