# सावन और तीज के त्योहार पर रसोई में आसानी से तैयार करें बाजार जैसी क्रिस्पी जालीदार घेवर

> सावन, हरियाली तीज और रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पारंपरिक राजस्थानी मिठाई घेवर की मिठास घर पर ही घोली जा सकती है। सही तापमान, ठंडे बैटर और कुछ आसान तकनीकों से आप बिल्कुल हलवाई जैसा जालीदार घेवर तैयार कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-08-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/sawan-aura-teej-ke-tyohara-para-rasoi-men-asani-se-taiyara-karen-bajara-jaisi-krispi-jalidara-ghevara-12840 · **Language:** Hindi
**Tags:** घेवर रेसिपी, सावन स्पेशल, हरियाली तीज, रक्षाबंधन मिठाई, राजस्थानी घेवर, घेवर बैटर टिप्स, भारतीय पारंपरिक मिठाई

सावन के महीने की शुरुआत होते ही भारतीय परिवारों में खुशहाली और मिठास का माहौल छा जाता है। रिमझिम बारिश, चारों ओर फैली हरियाली, देवालयों में गूंजते मधुर भजन और रसोई से आती पारंपरिक पकवानों की खुशबू इस मौसम को बेहद खास बना देती है। सावन के इस पावन महीने में अगर मिठाइयों की बात की जाए और घेवर की चर्चा न हो, तो त्योहार की रौनक अधूरी सी प्रतीत होती है। राजस्थान की यह विश्व प्रसिद्ध और पारंपरिक मिठाई अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सावन, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख अवसरों पर पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ बनाई और खाई जाती है। पारंपरिक रूप से लोग इसे हलवाई की दुकानों से खरीदना पसंद करते थे, परंतु अब गृहणियों में इसे घर पर ही तैयार करने का रुझान तेजी से बढ़ा है। सही सामग्री, सटीक बैटर, नियंत्रित तापमान और थोड़े से धैर्य के साथ घर की रसोई में भी हलवाई जैसा कुरकुरा और जालीदार घेवर आसानी से बनाया जा सकता है।

## जालीदार घेवर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर शुद्ध और स्वादिष्ट घेवर बनाने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली लगभग सभी सामग्रियां भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध होती हैं। इसके लिए किसी विशेष या दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। घेवर का आधार तैयार करने के लिए मुख्य रूप से मैदा, शुद्ध देसी घी, बर्फ के टुकड़े, ठंडा दूध और ठंडे पानी की जरूरत होती है। तलने के लिए आप देसी घी या किसी भी गंधरहित रिफाइंड तेल का उपयोग कर सकते हैं। मिठास और चाशनी के लिए चीनी, पानी, छोटी इलायची का पाउडर और केसर के धागे प्रयोग किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त ऊपर से सजावट और स्वाद बढ़ाने के लिए भुना हुआ मावा, बारीक कटे बादाम, पिस्ता और इच्छा अनुसार चांदी का वर्क इस्तेमाल किया जाता है। स्वाद और सुंदरता में नयापन लाने के लिए गुलाब की ताजी पंखुड़ियां या गुलकंद भी मिलाया जा सकता है।

## मलाईदार और बहने योग्य बैटर तैयार करने की सटीक विधि
घेवर की सफलता पूरी तरह से इसके बैटर की बनावट पर निर्भर करती है। यदि बैटर सही तरीके से नहीं बना, तो घेवर में वह पारंपरिक जाली नहीं बन पाएगी। सबसे पहले एक बड़े और गहरे बर्तन में पिघला हुआ शुद्ध देसी घी लें। अब इसमें बर्फ के कुछ टुकड़े डालकर तीन से चार मिनट तक लगातार और तेजी से फेंटें। फेंटते-फेंटते घी जमने लगेगा और धीरे-धीरे उसका रंग हल्का होकर मलाई जैसा सफेद और मुलायम हो जाएगा। जब घी पूरी तरह से मलाईदार रूप ले ले, तब बर्फ के बचे हुए टुकड़ों को बाहर निकाल दें। अब इस मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा करके मैदा मिलाएं और हाथ या मथानी की सहायता से मिलाते रहें। इसके बाद इसमें ठंडा दूध डालें। अंत में धीरे-धीरे एकदम ठंडा या बर्फ का पानी मिलाते हुए एक बहुत ही पतला और बहने योग्य घोल तैयार करें। बैटर की कंसिस्टेंसी इतनी पतली होनी चाहिए कि चम्मच से गिराने पर वह बिना रुके एक धार में नीचे गिरे। यही पतलापन और ठंडा तापमान जब गर्म तेल के संपर्क में आता है, तो घेवर में अनगिनत छोटे छिद्र यानी जालीदार बनावट पैदा करता है।

## कढ़ाई में तलने की तकनीक और जाली बनाने का तरीका
घेवर को तलना एक कला है और इसके लिए थोड़ी सावधानी की आवश्यकता होती है। तलने के लिए एक गहरी और भारी पेंदे वाली कढ़ाई या पतीले का चुनाव करें। बर्तन में आधा या तीन-चौथाई हिस्से तक देसी घी अथवा रिफाइंड तेल भरें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। ध्यान रखें कि तेल न तो बहुत अधिक खौलता हुआ होना चाहिए और न ही ठंडा। जब तेल सही तापमान पर आ जाए, तब एक बड़ी करछी या बोतल की मदद से तैयार ठंडे बैटर को थोड़ी ऊंचाई से धीरे-धीरे तेल के बिल्कुल बीच में धार बनाकर डालें। जैसे ही ठंडा बैटर गर्म तेल में गिरता है, तेल में तेज सनसनाहट होती है और बैटर किनारों की ओर फैलते हुए बीच में छोटे-छोटे छेद बनाने लगता है। झाग थोड़ा कम होने पर, लगभग कुछ सेकंड बाद, दोबारा थोड़ा सा बैटर ठीक उसी central बिंदु पर डालें। घेवर की मजबूत और सुंदर परतें तैयार करने के लिए इस प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराया जाता है। यदि बीच का छेद बंद होने लगे, तो किसी पतली लकड़ी या बेलन की मदद से बीच में जगह बनाते रहें। जब घेवर का रंग हल्का सुनहरा और कुरकुरा दिखने लगे, तब इसे किसी लंबी सीख या चिमटे की सहायता से बहुत सावधानी से तेल से बाहर निकाल लें और अतिरिक्त तेल निकालने के लिए टिश्यू पेपर या जाली पर रख दें।

## एक तार की चाशनी, मावा और मेवों से सजावट
तलकर तैयार किए गए घेवर में मिठास घोलने के लिए चाशनी बनाई जाती है। एक अलग पैन में चीनी और पानी को मिलाकर मध्यम आंच पर उबलने के लिए रखें। जब चीनी पूरी तरह घुल जाए और मिश्रण उबलने लगे, तो इसे तब तक पकाएं जब तक कि एक तार की चाशनी तैयार न हो जाए। चाशनी की जांच करने के लिए उंगली और अंगूठे के बीच एक बूंद दबाकर देखें, यदि एक बारीक तार बनता है तो चाशनी तैयार है। इस चाशनी में खुशबू के लिए इलायची पाउडर और सुंदर रंग के लिए केसर के धागे मिला दें। अब तैयार कुरकुरे घेवर को एक से दो मिनट के लिए हल्की गर्म चाशनी में डुबोएं ताकि चाशनी अंदर तक समा जाए, फिर इसे प्लेट में निकाल लें। मिठास चढ़ने के बाद इसके ऊपर भुना हुआ मावा समान रूप से फैलाएं। फिर बारीक कटे बादाम और पिस्ता छिड़ककर इसे समृद्ध रूप दें। यदि आप इसे बिल्कुल हलवाई जैसा लुक देना चाहते हैं, तो ऊपर से चांदी का वर्क लगाएं। इसके अलावा ताजी गुलाब की पंखुड़ियां या थोड़ा सा गुलकंद लगाने से इसका स्वाद और सुगंध दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं।

## परफेक्ट घेवर बनाने के लिए हलवाइयों वाले जरूरी टिप्स
घर पर पहली बार घेवर बना रहे लोगों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि परिणाम पहली बार में ही बेहतरीन मिले। पहली बात यह है कि बैटर कभी भी गाढ़ा नहीं होना चाहिए। गाढ़ा बैटर कढ़ाई में डालते ही थक्का बन जाएगा और जालीदार संरचना नहीं बन पाएगी। दूसरी बात, तलते समय आंच हमेशा मध्यम रखें। बहुत तेज आंच पर पकाने से घेवर बाहर से तुरंत भूरा हो जाएगा लेकिन अंदर से कच्चा रह जाएगा, जबकि धीमी आंच पर यह बहुत अधिक तेल सोख लेगा। तीसरी महत्वपूर्ण सलाह यह है कि एक समय में केवल एक ही घेवर तलें, जिससे उसे पकने और सही गोल आकार लेने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। साथ ही, बैटर को पूरे समय ठंडा बनाए रखने के लिए बैटर वाले बर्तन को बर्फ के पानी से भरे किसी बड़े बर्तन के ऊपर रखा जा सकता है।

## त्योहारों में घोलें घर के बने पकवानों की मिठास
सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार और प्रियजनों के साथ मिलकर जीवन के आनंद और पारंपरिक व्यंजनों का उत्सव मनाने का समय है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों की तुलना में घर पर अपने हाथों से तैयार किया गया शुद्ध और ताजा घेवर न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर होता है, बल्कि त्योहार के उत्साह को भी दोगुना कर देता है। इस बार सावन, हरियाली तीज और रक्षाबंधन पर जब आप अपने हाथों से बना जालीदार घेवर परिवार के सदस्यों और आने वाले मेहमानों के सामने परोसेंगे, तो हर कोई आपकी पाक कला की सराहना करेगा और यह त्योहार हमेशा के लिए यादगार बन जाएगा।

## इसका आप पर असर
**त्योहार प्रेमियों और गृहणियों के लिए:** सावन, हरियाली तीज और रक्षाबंधन पर बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय घर पर ही कम खर्च में शुद्ध और हाइजीनिक घेवर तैयार किया जा सकता है।

**स्वाद और सेहत के लिहाज से:** घर की रसोई में बने घेवर में मिलावट का खतरा नहीं रहता और सामग्री की गुणवत्ता पूरी तरह आपके नियंत्रण में रहती है।

## सवाल-जवाब

### 1. घेवर में जालीदार बनावट कैसे बनती है?
बर्फ के पानी से बने बेहद पतले और ठंडे बैटर को जब गर्म तेल में ऊंचाई से डाला जाता है, तो तापमान के अंतर से तुरंत छेद और जाली बनती है।

### 2. घेवर तलते समय तेल का तापमान कितना होना चाहिए?
तेल का तापमान मध्यम होना चाहिए। तेज आंच पर घेवर जल सकता है और धीमी आंच पर यह अधिक तेल सोख लेता है।

### 3. घेवर के लिए चाशनी किस कंसिस्टेंसी की होनी चाहिए?
घेवर के लिए एक तार की चाशनी बनाई जाती है, जिसमें इलायची और केसर मिलाया जाता है।

### 4. घेवर की सजावट के लिए किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
ऊपर से भुना मावा, कटे बादाम, पिस्ता, चांदी का वर्क और इच्छा अनुसार गुलाब की पंखुड़ियां या गुलकंद लगाया जाता है।

### 5. बैटर को ठंडा रखना क्यों जरूरी है?
ठंडा बैटर गर्म तेल में जाते ही तेजी से फैलता है और सही जालीदार परत तैयार करने में मदद करता है।

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