# शिवपुरी में बारिश के साथ जमती है गरमागरम मंगोड़ों की चौपाल, चंबल के पारंपरिक स्वाद का खास तरीका

> मध्य प्रदेश के शिवपुरी और चंबल अंचल में मानसून की दस्तक के साथ ही मूंग दाल के कुरकुरे मंगोड़े बनाने की परंपरा जीवंत हो उठती है। मेहमाननवाजी से लेकर शाम की चाय तक, यह खास व्यंजन यहां की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान का अहम हिस्सा है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/shivpuri-men-barisha-ke-satha-jamati-hai-garamagarama-mngoron-ki-chaupala-chambal-ke-parnparika-svada-ka-khasa-tarika-26813 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिवपुरी, चंबल, मूंग दाल मंगोड़े, मध्य प्रदेश व्यंजन, मानसून स्नैक्स, पारंपरिक रेसिपी, भारतीय खानपान

मध्य प्रदेश का चंबल अंचल केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां का स्थानीय खानपान भी अपनी एक अलग छाप छोड़ता है। मानसून की पहली फुहार गिरते ही शिवपुरी समेत पूरे चंबल क्षेत्र के घरों की रसोई से गरमागरम मंगोड़ों की सोंधी महक आने लगती है। मूंग दाल से तैयार होने वाले ये कुरकुरे और मसालेदार मंगोड़े केवल एक साधारण नाश्ता नहीं हैं, बल्कि यह इस पूरे अंचल की पारंपरिक मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। शाम की कड़क चाय के साथ या बारिश का लुत्फ उठाते हुए, मंगोड़ों की थाली हर उम्र के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।

## पारंपरिक सिलबट्टा और आधुनिक मिक्सी का हुनर
गांवों और ग्रामीण इलाकों में मंगोड़े तैयार करने का तरीका आज भी बेहद पारंपरिक है। इसके लिए धुली मूंग दाल को रात भर पानी में भिगोया जाता है और फिर सिलबट्टे पर दरदरा पीसा जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि सिलबट्टे पर पिसी दाल से मंगोड़े अधिक कुरकुरे, खस्ता और स्वादिष्ट बनते हैं। दूसरी ओर, शहरी इलाकों में लोग सहूलियत के लिए मिक्सी का प्रयोग करते हैं। हालांकि, शहर हो या गांव, सबसे महत्वपूर्ण बात यह ध्यान में रखी जाती है कि दाल में ज्यादा पानी न मिलाया जाए और उसे दरदरा ही पीसा जाए। यही दरदरापन मंगोड़ों के असली स्वाद और बनावट की मुख्य खासियत है।

## मंगोड़े बनाने की आवश्यक सामग्री और सटीक विधि
उत्कृष्ट स्वाद वाले मंगोड़े बनाने के लिए सही सामग्री और सही तकनीक का होना आवश्यक है। इसमें मुख्य रूप से एक कप धुली मूंग दाल ली जाती है, जिसे चार से पांच घंटे तक पानी में भिगोया जाता है। इसके अलावा एक छोटा चम्मच कद्दुकस किया हुआ अदरक और तलने के लिए सरसों का तेल या रिफाइंड तेल इस्तेमाल किया जाता है।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले भीगी हुई मूंग दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे सिलबट्टे या मिक्सी में बिना अतिरिक्त पानी के दरदरा पीस लें। अब इस पिसे हुए मिश्रण में हींग, जीरा, कद्दुकस अदरक, बारीक कटी हरी मिर्च, धनिया पाउडर, स्वादानुसार नमक और ताजा हरा धनिया अच्छी तरह मिला लें। मंगोड़ों को स्पंजी और हल्का बनाने का मुख्य रहस्य यह है कि इस तैयार घोल को तीन से पांच मिनट तक लगातार एक ही दिशा में फेंटा जाए। फेंटने से मिश्रण में हवा भर जाती है और मंगोड़े फूले हुए बनते हैं। इसके बाद कड़ाही में तेल गरम करें और छोटे-छोटे आकार के मंगोड़े डालकर मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें।

## तीखी चटनियां और कड़क चाय का बेहतरीन संगम
चंबल क्षेत्र में मंगोड़े परोसने का अंदाज भी बेहद खास है। इन्हें केवल मंगोड़े के रूप में नहीं, बल्कि कई तरह की स्वादिष्ट चटनियों के साथ पेश किया जाता है। आमतौर पर इन्हें हरी धनिया-पुदीना चटनी, लहसुन की तीखी चटनी और इमली की मीठी-खट्टी चटनी के साथ थाली में सजाया जाता है। अनेक परिवारों में बारिश के मौसम में सुबह या शाम के नाश्ते में कड़क चाय के साथ मंगोड़े परोसने का रिवाज है। जब भी कोई रिश्तेदार या मेहमान घर आता है, तो सबसे पहले उनके सामने मंगोड़ों का यह गरमागरम नाश्ता ही पेश किया जाता है, जो चंबल की समृद्ध खानपान परंपरा को दर्शाता है।

## इसका आप पर असर
मानसून के दौरान पारंपरिक व्यंजनों का आनंद स्थानीय अर्थव्यवस्था, पारिवारिक मेल-मिलाप और क्षेत्रीय खानपान की संस्कृति को बढ़ावा देता है।

- **भारत में:** देश भर के स्वाद प्रेमियों के लिए बारिश के मौसम में पारंपरिक और स्वास्थ्यप्रद स्नैक्स बनाने की यह एक बेहतरीन घरेलू रेसिपी है। इससे डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फ़ूड के बजाय पौष्टिक दाल-आधारित व्यंजनों को प्राथमिकता मिलती है।
- **शिवपुरी और चंबल में:** स्थानीय बाजारों में मूंग दाल, मसालों और सरसों तेल की मांग बढ़ती है। इसके साथ ही यह व्यंजन चंबल की ऐतिहासिक मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. चंबल और शिवपुरी में मानसून के दौरान कौन सा व्यंजन खास तौर पर बनता है?
मानसून में शिवपुरी और चंबल क्षेत्र के घरों में मूंग दाल के गरमागरम और कुरकुरे मंगोड़े खास तौर पर बनाए जाते हैं।

### 2. पारंपरिक मंगोड़े बनाने के लिए दाल को कैसे पीसा जाता है?
ग्रामीण क्षेत्रों में भीगी हुई मूंग दाल को रातभर भिगोने के बाद सिलबट्टे पर दरदरा पीसा जाता है, जिससे मंगोड़े ज्यादा कुरकुरे और स्वादिष्ट बनते हैं।

### 3. मंगोड़े को हल्का और फूला हुआ बनाने का क्या तरीका है?
दाल के दरदरे मिश्रण में सभी मसाले और नमक मिलाने के बाद उसे 3 से 5 मिनट तक अच्छी तरह फेंटा जाता है, जिससे मंगोड़े हल्के और फूले बनते हैं।

### 4. मंगोड़े के घोल में कौन-कौन सी सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
इसमें 1 कप धुली मूंग दाल (4-5 घंटे भीगी हुई), 1 छोटा चम्मच कद्दुकस अदरक, हींग, जीरा, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, नमक, हरा धनिया और तलने के लिए तेल का उपयोग होता है।

### 5. चंबल अंचल में मंगोड़े किन चटनियों के साथ परोसे जाते हैं?
मंगोड़ों को हरी धनिया-पुदीना चटनी, लहसुन की तीखी चटनी और इमली की मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है।

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