सिर्फ भूनने और धीमी आंच का कमाल, जमुई के इस ढाबे के मटन के लिए पटना-मुजफ्फरपुर से आते हैं ग्राहक जमुई के मुन्ना ढाबा में शंभू गुप्ता पिछले करीब 20 साल से हाथों से मटन बना रहे हैं, जिसकी वजह से पटना और मुजफ्फरपुर से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं। शंभू के मुताबिक स्वाद का राज मसालों की मात्रा में नहीं, बल्कि सही भूनने और धीमी आंच पर पकाने में छिपा है। बिहार के जमुई में एक ढाबे का मटन ऐसा मशहूर हुआ है कि पटना और मुजफ्फरपुर से लोग सिर्फ इसे चखने के लिए गाड़ी दौड़ाकर पहुंचते हैं। इस स्वाद के पीछे एक ही नाम है, शंभू गुप्ता, जो पिछले करीब 20 साल से अपने हाथों से यह मटन तैयार कर रहे हैं। दो दशक की मेहनत से बनी पहचान शंभू गुप्ता फिलहाल जमुई के मुन्ना ढाबा में मटन तैयार करने की जिम्मेदारी संभालते हैं। यहां आने वाले हर ग्राहक की थाली में परोसा जाने वाला मटन उन्हीं के हाथों से पककर आता है। खास बात यह है कि जो ग्राहक एक बार उनके हाथ का मटन चख लेता है, वह दोबारा लौटकर जरूर आता है। यही वजह है कि जमुई के स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे जिलों से भी लोग खिंचे चले आते हैं। मौसम कोई भी हो, डिमांड में कमी नहीं जमुई में साल के किसी भी मौसम में, चाहे झुलसाने वाली गर्मी हो या हड्डी कंपाने वाली ठंड, मांसाहारी खाने के शौकीनों की भीड़ में कमी नहीं आती। इसी लगातार बनी रहने वाली मांग के बीच शंभू के हाथ के मटन ने अपनी अलग पहचान बना ली है, जिससे यह सिर्फ ढाबे की एक डिश भर नहीं रह गया। मसाला नहीं, तरीका है असली राज शंभू का मानना है कि लजीज मटन बनाने के लिए मसालों का ढेर लगाना जरूरी नहीं। उनके मुताबिक असली कमाल भूनने और पकाने के तरीके में छिपा है। वह सबसे पहले प्याज को अच्छी तरह भूनते हैं, फिर उसमें मटन और मसाले डालकर कड़ाही में अच्छी तरह भूना जाता है। इसके बाद पूरी डिश को धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे मसाले मटन के अंदर तक उतर जाते हैं और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। ग्राहक चुन सकते हैं अपनी पसंद का पीस मुन्ना ढाबा की एक और खासियत यह है कि यहां हर ग्राहक को अपने मनपसंद पीस के हिसाब से मटन चुनने की सुविधा मिलती है। जिन्हें हड्डी वाला मटन पसंद है, वे चाप या नल्ली मंगा सकते हैं, तो जिन्हें बिना हड्डी का गोश्त भाता है, उनके लिए सीना और केवल हड्डी रहित पीस भी उपलब्ध हैं। यानी हर स्वाद और जरूरत के हिसाब से यहां विकल्प मौजूद है। थाली की कीमत जेब पर हल्की कीमत की बात करें तो यहां महज 190 रुपये में चावल के साथ मटन के दो पीस वाली एक थाली परोसी जाती है। जिन्हें ज्यादा मटन चाहिए, वे 370 रुपये में चार पीस मंगा सकते हैं। पसंद का पीस चुनने की सुविधा दोनों ही विकल्पों में बनी रहती है। ढाबे से निकलकर घरों तक पहुंचा स्वाद शंभू के हाथ का यह स्वाद सिर्फ ढाबे की मेज तक सीमित नहीं रह गया है। कई लोग घर पर किसी खास मौके के लिए भी उनसे मटन बनवाना पसंद करते हैं। ऐसे ग्राहक अपना मटन खुद लेकर आते हैं और शंभू उसे पकाकर तैयार कर देते हैं। इस काम के बदले वे प्रति किलो मटन पकाने के 300 रुपये चार्ज करते हैं। करीब दो दशक की इस मेहनत ने शंभू के हाथ के स्वाद को अब जमुई की एक अलग पहचान बना दिया है। इसका आप पर असर अगर आप मटन खाने के शौकीन हैं, तो इस खबर से आपके लिए कुछ काम की बातें निकलती हैं। • देशभर में: स्वादिष्ट मटन बनाने के लिए मसालों का ढेर नहीं, बल्कि सही तरीके से भूनने और धीमी आंच पर पकाने की तकनीक ज्यादा मायने रखती है। घर पर मटन बनाने वाले लोग इस सीधी तरकीब को आजमा सकते हैं। • जमुई/बिहार में: जमुई के मुन्ना ढाबा में महज 190 रुपये में चावल के साथ दो पीस मटन वाली थाली मिल जाती है, जबकि चार पीस के लिए 370 रुपये चुकाने होंगे। पटना और मुजफ्फरपुर से आने वाले लोग भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। • घर के आयोजन के लिए: शादी या किसी खास मौके पर घर पर मटन बनवाना हो, तो शंभू खुद मटन पकाने की सेवा देते हैं, जिसका चार्ज सिर्फ 300 रुपये प्रति किलो है। ग्राहक को बस अपना मटन खुद लाना होता है। • पसंद के मुताबिक पीस चुनने की सुविधा: चाप, नल्ली, सीना या बिना हड्डी के मटन में से अपनी पसंद का पीस चुना जा सकता है, जिससे हर तरह के ग्राहक की जरूरत पूरी होती है। सवाल-जवाब 1. शंभू गुप्ता कौन हैं? शंभू गुप्ता जमुई के मुन्ना ढाबा में करीब 20 साल से अपने हाथों से मटन बनाने का काम कर रहे हैं। 2. उनके मटन के स्वाद का राज क्या है? उनके मुताबिक ज्यादा मसाले नहीं, बल्कि सही तरीके से भूनना और धीमी आंच पर पकाना ही असली राज है। 3. मुन्ना ढाबा में मटन थाली की कीमत क्या है? 190 रुपये में चावल के साथ दो पीस मटन मिलता है, जबकि चार पीस के लिए 370 रुपये चुकाने होते हैं। 4. ग्राहक कौन-कौन से पीस चुन सकते हैं? चाप, नल्ली, सीना और बिना हड्डी का मटन, इनमें से ग्राहक अपनी पसंद का पीस चुन सकते हैं। 5. घर पर मटन बनवाने के लिए क्या करना होगा? ग्राहक को अपना मटन खुद लाना होता है, और शंभू उसे पकाकर देते हैं, जिसके लिए 300 रुपये प्रति किलो चार्ज लिया जाता है। 6. दूर-दराज से लोग जमुई क्यों आते हैं? पटना और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों के लोग भी सिर्फ शंभू के हाथ के मटन का स्वाद लेने के लिए जमुई पहुंचते हैं। प्रेरणा और सबक शंभू गुप्ता की कहानी बताती है कि किसी भी हुनर में महारत रातोंरात नहीं, बल्कि बरसों की मेहनत से आती है। • तकनीक को तवज्जो दें, दिखावे को नहीं: शंभू ने ज्यादा मसालों के बजाय सही भूनने और धीमी आंच पर पकाने की तकनीक पर भरोसा किया, जो सिखाता है कि क्वालिटी हमेशा क्वांटिटी से बेहतर होती है। • निरंतरता का असर: लगातार करीब 20 साल तक एक ही काम को बेहतर बनाते रहने से शंभू का हुनर जमुई ही नहीं, आसपास के जिलों में भी पहचाना जाने लगा। • ग्राहक की जरूरत समझना: हर ग्राहक को अपनी पसंद का पीस चुनने का विकल्प देकर उन्होंने दिखाया कि छोटे कारोबार में भी लचीलापन बड़ा फर्क डालता है। • सेवा का दायरा बढ़ाना: घर या खास मौकों पर मटन बनाकर देने की सेवा शुरू कर उन्होंने अपने हुनर से कमाई के नए रास्ते भी खोले। https://trendkia.com/food/sirpha-bhunane-aura-dhimi-ancha-ka-kamala-jamui-ke-isa-dhabe-ke-matana-ke-lie-patna-muzaffarpur-se-ate-hain-grahaka-28567 TrendKia — Har trend, sabse pehle.