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  "type": "article",
  "title": "संसद भवन के पास 83 वर्षों से महक रही पारंपरिक मिठास, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों तक पहुंची खास पत्तों की खुशबू",
  "summary": "दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में सन 1943 से संचालित पांडेय पान अपनी प्राकृतिक सामग्रियों, बनारसी पत्तों और तंबाकू मुक्त 150 किस्मों के कारण वैश्विक दिग्गजों की पसंद बना हुआ है।",
  "content": "देश की राजधानी में खान-पान के अनगिनत ठिकाने मौजूद हैं, किंतु लुटियंस जोन के नॉर्थ एवेन्यू में पार्लियामेंट हाउस के समीप स्थित पांडेय पान की ऐतिहासिक पहचान बिल्कुल जुदा है। सन 1943 के दौर में स्थापित इस प्रतिष्ठान को आज परिवार की तीसरी पीढ़ी संभाल रही है, जिसने पारंपरिक भारतीय मुखवास को एक नए स्तर पर पहुंचाया है। करीब 83 साल की इस लंबी यात्रा में आम राहगीरों के साथ-साथ सत्ता के गलियारों में बैठने वाले शीर्ष राजनेता, सिनेमा जगत के दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी यहां के खास पत्तों का जायका ले चुकी हैं।\n\nस्वाद का सफर और तीसरी पीढ़ी का विजन\nइस प्रतिष्ठान के सूत्रधार देवी प्रसाद पांडे के अनुसार, शुरुआत से ही उनका लक्ष्य सामान्य दुकानों से हटकर एक अनूठा स्वाद परोसने का रहा। उन्होंने सामग्री के चयन, मिश्रण और तैयारी की विधियों पर कई निजी प्रयोग किए, जिसकी बदौलत आज भी इस दुकान की साख कायम है। समय के साथ ग्राहकों की जीवनशैली और पसंद में गहरा बदलाव आया है। युवाओं के बीच सिगरेट और तंबाकू से दूरी बनाने का रुझान स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जिसके चलते प्रतिष्ठान पर मीठी व सादी वैरायटी की मांग निरंतर सबसे अधिक बनी हुई है।\n\nप्राकृतिक अवयवों से सजी 150 वैरायटी\nयहां के मेन्यू की सबसे बड़ी ताकत लगभग 150 तरह के मीठे और सादे पान हैं, जिन्हें पूरी तरह शुद्ध सामग्रियों से तैयार किया जाता है। कृत्रिम रासायनिक रंगों, नकली एसेंस या सिंथेटिक फ्लेवर के स्थान पर हर किस्म में वास्तविक खाद्य पदार्थों का समावेश किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, गुलकंद बनाने में असली गुलाब की ताजी पंखुड़ियां और चीनी काम में ली जाती हैं। मैंगो फ्लेवर में आम का वास्तविक टुकड़ा, ब्लूबेरी वाले पान में असली बेरीज और बादाम वाले पान में साबुत मेवे का प्रयोग होता है, जिससे स्वाद पूरी तरह प्राकृतिक रहता है।\n\nअभिनेत्री के नाम पर तैयार हुआ माधुरी पान\nमेन्यू के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में माधुरी पान शुमार है, जिसके पीछे एक दिलचस्प वाकया जुड़ा हुआ है। संचालक बताते हैं कि जाने-माने कलाकार हुसैन साहब नियमित तौर पर अभिनेत्री माधुरी के लिए यहां से यह विशेष पान ले जाते थे। उन्हें इसका स्वाद बेहद भाया, जिसके पश्चात उनके सुझाव पर इस वैरायटी को माधुरी नाम देकर मेन्यू में स्थायी स्थान दिया गया। दुकान पर अनेक जानी-मानी हस्तियों के चित्र प्रदर्शित हैं, मगर माधुरी पान के साथ कोई अतिरिक्त तस्वीर या लेबल लगाए बिना इसे सीधे मेन्यू कार्ड में शामिल रखा गया है।\n\nविदेशी नेताओं के लिए विशेष तैयारी\nइस प्रतिष्ठान की शोहरत दिल्ली की सीमाओं से निकलकर वैश्विक पटल तक पहुंची है। अनेक प्रसिद्ध क्रिकेटरों, फिल्मी सितारों और राजनेताओं के अलावा डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा जैसे वैश्विक नेताओं के लिए भी यहां से पान तैयार किए गए। डोनाल्ड ट्रंप के लिए खास वॉफल पान तैयार किया गया था, जो अपनी अत्यधिक कोमलता, दुर्लभ विदेशी पत्तों और अनूठी सामग्री के मेल के लिए जाना जाता है। इसके अलावा राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक भोजों के अवसर पर भी यहां से आपूर्ति भेजी जाती रही है।\n\nराष्ट्रपति भवन पहुंचे थे बराक ओबामा के पैकेट\nबराक ओबामा के भारत दौरे से जुड़ी एक स्मरणीय घटना साझा करते हुए देवी प्रसाद पांडे बताते हैं कि जब वह राष्ट्रपति भवन ठहरे थे, तब उनके लिए विशेष तौर पर पान बनवाकर भेजे गए थे। इस दौरान उनके लिए 15 पान पैक किए गए थे, और उनकी पत्नी ने भी कई पैकेट साथ रखे थे। उनके दल को यह स्वाद इतना अनोखा लगा कि उन्होंने इसकी तुलना पहले कभी चखे किसी भी स्वाद से बिल्कुल अलग अनुभव के रूप में की।\n\nतीन वर्ष के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए उपयुक्त\nदुकान की सबसे बड़ी नीति तंबाकू का पूरी तरह बहिष्कार करना है, ताकि नई पीढ़ी हानिकारक नशों से दूर रहकर प्राकृतिक मिठास की ओर आकर्षित हो सके। यही कारण है कि तीन साल के नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, हर आयु वर्ग के लोग इसे बिना किसी संकोच के खा सकते हैं। पान बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला विशेष पानी भी यहां की पहचान है, जिससे मुंह के भीतर गहरा लाल रंग नहीं चढ़ता। इसके अतिरिक्त पुदीना, सौंठ, लौंग और हरी इलायची से बने कूलिंग पान की भी व्यापक रेंज उपलब्ध है।\n\nबनारस से आता है खास जगन्नाथी पत्ता\nपान का आधार बनने वाले पत्ते विशेष रूप से बनारस के चुनिंदा थोक विक्रेताओं से मंगवाए जाते हैं। प्रतिष्ठान के साथ विगत आठ वर्षों से कार्यरत कर्मचारी सौरभ पाठक के अनुसार, यहां सबसे प्रमुखता से जगन्नाथी पत्ते का उपयोग किया जाता है। यह पत्ता अपनी कोमलता और घुलनशील प्रकृति के लिए विख्यात है, जो मुंह में रखते ही स्वतः घुल जाता है और इसे चबाने के बाद अलग से थूकने की कतई आवश्यकता नहीं पड़ती।\n\n15 रुपये से 100 रुपये तक की सुलभ कीमतें\nप्रतिष्ठान की अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के बावजूद इसकी मूल्य सूची बेहद जनसुलभ रखी गई है। सबसे सादे पत्ते की शुरुआत लगभग 15 रुपये से हो जाती है, जबकि सबसे उन्नत प्रीमियम किस्म अधिकतम 100 रुपये तक जाती है। लोकप्रिय विकल्पों में माधुरी पान के अलावा बटरस्कॉच स्वीट कॉर्न और फोर्थ इडियट स्वीट कॉर्न शामिल हैं। फोर्थ इडियट का नामकरण प्रसिद्ध सिनेमाई शीर्षक थ्री इडियट्स से प्रेरित है, जो प्राकृतिक बेरी के स्वाद को पहचानने की एक रोचक पहेली से उपजा था।\n\nइसका आप पर असर\nइस ऐतिहासिक प्रतिष्ठान की सफलता यह साबित करती है कि पारंपरिक भारतीय खानपान को तंबाकू और रसायनों से दूर रखकर भी बेहद लोकप्रिय बनाया जा सकता है।\n\n• भारत में: नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं को तंबाकू मुक्त और शुद्ध प्राकृतिक मीठे विकल्पों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। इससे पारंपरिक कुटीर व्यवसायों और किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पत्ते उगाने का सीधा प्रोत्साहन मिलता है।\n• दिल्ली में: नॉर्थ एवेन्यू या संसद भवन के आसपास जाने वाले आगंतुक मात्र 15 रुपये में बिना किसी कृत्रिम रंग के शुद्ध पान का स्वाद चख सकते हैं। स्थानीय परिवारों और बच्चों के लिए यह एक सुरक्षित और सांस्कृतिक खान-पान का अनुभव प्रदान करता है।\n• स्वास्थ्य के लिहाज से: मुंह में तंबाकू या रासायनिक रंगों का जोखिम उठाए बिना लोग प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, इलायची और सौंठ का पाचन लाभ ले सकते हैं। इससे मुखवास की पुरानी परंपरा स्वास्थ्यवर्धक रूप में पुनर्जीवित होती है।\n• छोटे व्यवसायों के लिए: स्थानीय स्ट्रीट वेंडर्स यह सीख सकते हैं कि नवाचार और स्वच्छता के दम पर 83 वर्षों तक वैश्विक साख बनाई जा सकती है। गुणवत्ता बनाए रखने से सामान्य दुकानें भी अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान बना सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह दुकान अपनी 83 साल पुरानी विरासत, पारिवारिक समर्पण और तंबाकू मुक्त प्राकृतिक सामग्रियों के प्रयोग के कारण इतनी प्रसिद्ध हुई है। देवी प्रसाद पांडे की तीसरी पीढ़ी ने पारंपरिक स्वाद को आधुनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालकर इसे विशिष्ट बनाए रखा।\n\n• प्राकृतिक अवयवों पर अटूट भरोसा: कृत्रिम रंगों और रसायनों के बजाय असली ताजे फल, असली गुलाब की पंखुड़ियों वाला गुलकंद और साबुत मेवे का उपयोग इसकी प्रमुख वजह बना। इस निष्ठा ने स्वास्थ्य के प्रति सचेत नई पीढ़ी का विश्वास जीता।\n• तंबाकू मुक्त स्वास्थ्य नीति: संस्थान ने शुरुआत से ही तंबाकू और हानिकारक नशों से दूरी बनाकर केवल मीठी और सादी वैरायटी पर ध्यान केंद्रित किया। इस निर्णय ने तीन साल के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए इसे सुरक्षित विकल्प बना दिया।\n• विशेष बनारसी पत्तों का चयन: मुंह में स्वतः घुल जाने वाले उच्च गुणवत्ता के जगन्नाथी पत्तों के प्रयोग ने खाने के अनुभव को पूरी तरह सहज बना दिया। चबाने के बाद अलग से थूकने की जरूरत न होना ग्राहकों के लिए सबसे सुखद पहलू साबित हुआ।\n• वीआईपी व सांस्कृतिक जुड़ाव: हुसैन साहब जैसी हस्तियों के माध्यम से इसका प्रचार हुआ और राष्ट्रपति भवन के औपचारिक भोजों में आपूर्ति ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कर दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पांडेय पान की दुकान दिल्ली में कहां स्थित है और यह कितनी पुरानी है?\nयह दुकान दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में पार्लियामेंट हाउस के पास स्थित है और इसकी शुरुआत सन 1943 में हुई थी, जिसे अब करीब 83 वर्ष हो चुके हैं।\n\n2. इस दुकान पर पान की शुरुआती और अधिकतम कीमत क्या है?\nयहां पान की कीमतें करीब 15 रुपये से शुरू होकर सबसे उन्नत वैरायटी के लिए अधिकतम 100 रुपये तक जाती हैं।\n\n3. दुकान में पान के लिए कौन से खास पत्ते उपयोग किए जाते हैं?\nयहां इस्तेमाल होने वाले पत्ते बनारस से मंगाए जाते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख जगन्नाथी पत्ता है जो मुंह में आसानी से घुल जाता है।\n\n4. माधुरी पान का नाम किसके सुझाव पर रखा गया था?\nकलाकार हुसैन साहब अभिनेत्री माधुरी के लिए यहां से पान ले जाते थे और उनके ही सुझाव पर इसका नाम मेन्यू में माधुरी पान रखा गया।\n\n5. किन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेताओं के लिए यहां से पान तैयार किए गए हैं?\nअमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा के भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति भवन में उनके लिए यहां से विशेष पान भेजे गए थे।\n\n6. क्या इस दुकान पर तंबाकू वाले पान भी बेचे जाते हैं?\nनहीं, यह दुकान पूरी तरह तंबाकू मुक्त है और यहां केवल प्राकृतिक व मीठी सामग्रियां ही बेची जाती हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nपांडेय पान की तीन पीढ़ियों की यह यात्रा दर्शाती है कि निष्ठा, स्वच्छता और सिद्धांतों पर टिके रहकर एक साधारण दुकान को भी वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।\n\n• गुणवत्ता से कभी समझौता न करना: 83 वर्षों तक रसायनों और सस्ते कृत्रिम फ्लेवर को नकारते हुए केवल असली सामग्रियों का प्रयोग करना सिखाता है कि ईमानदारी से ही दीर्घकालिक ब्रांड बनता है।\n• सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ व्यापार: मुनाफे के लिए तंबाकू बेचने के बजाय समाज की भलाई के लिए केवल सुरक्षित मीठे पान परोसना एक अनुकरणीय नैतिक कदम है।\n• सार्थक नवाचार और प्रयोग: पारंपरिक पेशे में 150 नई किस्में विकसित करके नई पीढ़ी और अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की पसंद के अनुसार खुद को प्रासंगिक बनाए रखा जा सकता है।\n• सुलभता और विनम्रता: वैश्विक नेताओं की मेजबानी करने के बाद भी शुरुआती कीमत मात्र 15 रुपये रखकर आम जनता से जुड़े रहना सच्ची सफलता का प्रतीक है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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