# त्योहारी मौसम में तैयार करें दक्षिण भारतीय मुरक्कू, लंबे समय तक ताजा और कुरकुरा रहेगा यह पारंपरिक स्नैक

> चावल और उड़द दाल के संतुलित मिश्रण से तैयार होने वाला मुरक्कू चाय के साथ परोसने के लिए बेहतरीन विकल्प है, जिसे सही तरीके से रखकर पूरे एक महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/south-india-ka-prasiddh-murukku-kaise-banayein-lambe-samay-tak-kharaab-nahin-hoti-chakli-55503 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुरक्कू रेसिपी, दक्षिण भारतीय स्नैक्स, दिवाली नाश्ता, चावल के आटे की चकली, उड़द दाल की चकली, कुरकुरा नाश्ता

त्योहारी सीजन में अगर पारंपरिक व्यंजनों के साथ कुछ अलग और कुरकुरा परोसने की योजना बन रही है, तो दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन मुरक्कू एक शानदार चुनाव साबित हो सकता है। स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। अगर इसे ठीक ढंग से बनाकर सुरक्षित रखा जाए, तो यह लगभग एक महीने तक अपनी ताजगी और कुरकुरापन नहीं खोता। शाम की चाय के साथ यह कुरकुरा नाश्ता बेहद स्वादिष्ट लगता है। चावल के आटे और उड़द की दाल के मेल से तैयार होने वाला यह स्नैक बेहद आसान विधि से घर की रसोई में बनाया जा सकता है।

## सटीक अनुपात और दाल तैयार करने का तरीका
एकदम सही बनावट और स्वाद पाने के लिए सामग्री का नाप सही होना बेहद आवश्यक है। इस नाश्ते के लिए मुख्य रूप से चावल के आटे और उड़द दाल के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। सामग्री का अनुपात 4 अनुपात 1 रखा जाता है, यानी अगर 4 कप चावल का आटा लिया गया है, तो उसके साथ 1 कप उड़द दाल का आटा मिलाया जाएगा। चावल के आटे को हमेशा बारीक छलनी से छानकर इस्तेमाल करें।

उड़द दाल का आटा बाजार से खरीदा जा सकता है या इसे घर पर भी सरलता से बनाया जा सकता है। घर पर तैयार करने के लिए बिना छिलके वाली साबुत या धुली उड़द दाल लें और उसे धीमी आंच पर कड़ाही में सूखा भूनें। दाल को तब तक भूनना चाहिए जब तक कि उसमें से हल्की सौंधी सुगंध न आने लगे। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दाल का रंग अधिक गहरा या भूरा न होने पाए। भूनने के बाद दाल को पूरी तरह ठंडा होने दें, फिर मिक्सी के जार में डालकर एकदम महीन पीस लें। इसके बाद इसे छलनी से छानकर 1 कप नाप लें।

## मसालों का संतुलन और आटा गूंथने की तकनीक
तैयारी के अगले चरण में छाने हुए चावल के आटे और उड़द दाल के आटे को एक बड़े बर्तन में एक साथ मिलाएं। खस्तापन लाने के लिए इस मिश्रण में 1 से 2 चम्मच शुद्ध घी या मक्खन मिलाएं। स्वाद और पाचन के लिए इसमें अपनी पसंद के अनुसार थोड़ी अजवाइन या जीरा डाला जा सकता है। इसके साथ ही मिश्रण में हल्का सा नमक और जरा सी लाल मिर्च पाउडर डालकर सभी सूखी सामग्रियों को हाथों से अच्छी तरह मिला लें।

अब मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालते हुए आटा गूंथना शुरू करें। तैयार किया जाने वाला आटा न तो बहुत अधिक कड़ा होना चाहिए और न ही अत्यधिक मुलायम, बल्कि इसे मध्यम लचीला रखना जरूरी है। आटा तैयार होने के बाद उसे एक गीले कपड़े से ढककर 15 से 20 मिनट के लिए रख दें ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। समय पूरा होने पर कपड़े को हटाएं, आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से गूंथ लें और इसी दौरान गैस पर कड़ाही में तलने के लिए तेल गर्म होने रख दें।

## मुरक्कू गढ़ने और तलने की सावधानियां
मुरक्कू बनाने वाले पारंपरिक सांचे के भीतरी हिस्से में थोड़ा तेल लगाकर उसे अच्छी तरह चिकना कर लें ताकि आटा अंदर चिपके नहीं। तैयार आटे का एक हिस्सा सांचे में भरें और छोटी-छोटी चकली का आकार देते हुए दबाएं। इन चकलियों को पार्चमेंट पेपर, किसी थाली के उल्टे हिस्से या चौड़ी कलछी के ऊपर बनाकर निकालें, जिससे उन्हें उठाकर सीधे गर्म तेल में छोड़ना बेहद आसान हो जाए।

एक साथ बहुत अधिक चकली बनाकर न छोड़ें और न ही पुरानी बनी चकलियों को सूखने दें। जैसे ही 4 से 5 चकलियां बनकर तैयार हों, उन्हें मध्यम गर्म तेल में आराम से डाल दें। तलते समय आंच को मध्यम ही रखें ताकि वे अंदर तक अच्छी तरह पककर कुरकुरी बनें। चकलियों को दोनों तरफ से उलट-पलटकर सुनहरा होने तक सेक लें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बचे हुए आटे को हमेशा गीले कपड़े से ढककर रखें ताकि उसमें नमी बनी रहे।

## सुरक्षित भंडारण और परोसने का तरीका
तलते समय एक बेहद जरूरी सावधानी यह रखनी चाहिए कि चकली का अंतिम सिरा दबाकर अच्छी तरह चिपका दें। यदि सिरा खुला रह गया तो गर्म तेल में जाते ही चकली खुलकर अपना आकार खो सकती है। हालांकि आकार बिगड़ने पर भी स्वाद में कोई कमी नहीं आती, लेकिन दिखने में यह सुंदर लगे इसलिए सिरा सील करना बेहतर रहता है।

कड़ाही से निकालने के बाद जब मुरक्कू पूरी तरह ठंडे होकर सामान्य तापमान पर आ जाएं, तब उन्हें किसी साफ और एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रख दें। हवा न लगने से यह स्नैक हफ्तों तक सीलन से बचा रहता है और खराब नहीं होता। इसे गर्मागर्म चाय के साथ खुद भी खाएं और घर आए मेहमानों को भी परोसें। घर पर तैयार इस पारंपरिक और कुरकुरे नाश्ते का स्वाद हर किसी को जरूर पसंद आएगा।

## इसका आप पर असर
घर पर मुरक्कू बनाने से त्योहारों पर बाजार के मिलावटी तेल और बासी स्नैक्स से बचते हुए किफायती और लंबे समय तक चलने वाला नाश्ता तैयार किया जा सकता है।

- **किफायती विकल्प:** घर पर उपलब्ध चावल और उड़द दाल से बहुत कम खर्च में भारी मात्रा में नाश्ता तैयार हो जाता है। इससे बाजार के महंगे पैकेटबंद स्नैक्स पर होने वाला खर्च बचता है।
- **लंबा शेल्फ लाइफ:** एक बार तैयार करके एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह पूरा एक महीना चलता है। व्यस्त गृहिणियों और कामकाजी लोगों को बार-बार नया नाश्ता बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- **शुद्धता की गारंटी:** घर में ताजे तेल और साफ मसालों के उपयोग से पेट की गड़बड़ी और एलर्जी की आशंका नहीं रहती। त्योहारी मिलावट के दौर में यह बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
- **मेहमान नवाजी में आसानी:** त्योहार पर अचानक आने वाले मेहमानों के सामने इसे तुरंत चाय के साथ परोसा जा सकता है। इससे ऐन वक्त पर बाजार से नाश्ता मंगाने की हड़बड़ी से मुक्ति मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुरक्कू अपनी अनोखी बनावट और लंबे समय तक टिकने की क्षमता के कारण भारतीय उत्सवों और रोजमर्रा के खानपान में एक लोकप्रिय व्यंजन बना हुआ है।

- **उड़द दाल और चावल का संतुलन:** उड़द की दाल का सोंधापन और चावल के आटे का सूखापन मिलकर इसे विशेष कुरकुरापन प्रदान करते हैं। यह मेल आटे को ऐसा लचीलापन देता है जिससे सांचे से चकली निकालना आसान होता है।
- **नमी की कमी से लंबी शेल्फ लाइफ:** मध्यम आंच पर पूरी तरह तलने से इसके अंदर की नमी समाप्त हो जाती है। नमी न होने के कारण बैक्टीरिया या फंगस नहीं पनपते और यह महीनेभर ताजा बना रहता है।
- **घी या मक्खन का योगदान:** आटे में एक से दो चम्मच घी मिलाने से तलने के बाद मुरक्कू बहुत ज्यादा सख्त या कड़क नहीं होता। यह मोयन मुरक्कू को मुंह में आसानी से घुलने लायक खस्तापन देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मुरक्कू बनाने के लिए चावल और उड़द दाल के आटे का क्या अनुपात होना चाहिए?
मुरक्कू के लिए 4 कप चावल के आटे के साथ 1 कप उड़द दाल का आटा मिलाया जाना चाहिए।

### 2. उड़द दाल का आटा घर पर कैसे तैयार किया जाता है?
बिना छिलके वाली दाल को धीमी आंच पर खुशबू आने तक सूखा भूनें, फिर ठंडा करके मिक्सी में पीसकर छान लें।

### 3. मुरक्कू का आटा गूंथते समय किन मसालों और चीजों की जरूरत होती है?
आटे में 1 से 2 चम्मच घी या मक्खन, अजवाइन या जीरा, थोड़ा नमक, जरा सी लाल मिर्च और गुनगुना पानी मिलाया जाता है।

### 4. आटा गूंथने के बाद उसे कितनी देर ढककर रखना चाहिए?
आटे को गीले कपड़े से ढककर 15 से 20 मिनट के लिए आराम देना चाहिए।

### 5. मुरक्कू तलते समय कौन सी मुख्य सावधानी बरतनी चाहिए?
चकली का अंतिम सिरा हल्का दबाकर चिपका दें ताकि तेल में जाकर उसका आकार न खुले, और आंच मध्यम रखें।

### 6. बना हुआ मुरक्कू कितने दिनों तक खराब नहीं होता?
पूरी तरह ठंडा होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में बंद रखने पर यह करीब एक महीने तक बिल्कुल खराब नहीं होता।

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