सुल्तानपुर के डाकखाना चौराहे पर 10 रुपये में मिल रहा खास हींग-मटर का समोसा, 1986 से जारी है तीन पीढ़ियों का जायका सुल्तानपुर के डाकखाना चौराहे पर सूरज मोदनवाल 1986 से अपने दादा और पिता की समोसे की विरासत को संभाल रहे हैं। मूंगफली, हींग और हरी मटर के अनूठे मिश्रण से बना 10 रुपये का यह समोसा आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों का भी पसंदीदा बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्ट्रीट फूड के शौकीनों के लिए डाकखाना चौराहे के पास स्थित मोदनवाल समोसा दुकान एक बेहद खास जगह बनी हुई है। वर्ष 1986 से शुरू हुए इस स्वाद के सफर को आज परिवार की तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। सूरज मोदनवाल अपने पारंपरिक तरीकों और मसालों के सही संतुलन के जरिए शहरवासियों को एक अनूठा स्वाद परोस रहे हैं। यहाँ मिलने वाले समोसे की सबसे बड़ी पहचान उसकी भरावन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री है, जो इसे साधारण आलू समोसे से बिल्कुल अलग और अधिक जायकेदार बनाती है। 1986 से शुरू हुआ तीन पीढ़ियों का स्वाद सफर इस प्रसिद्ध समोसे की शुरुआत वर्ष 1986 में सूरज मोदनवाल के पिता द्वारा की गई थी। समय के साथ दुकान की देखरेख जीत मोदनवाल और उनके बेटे सूरज मोदनवाल के हाथों में आ गई। सूरज ने अपनी औपचारिक स्कूली शिक्षा दसवीं कक्षा तक पूरी करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और पारिवारिक कारोबार में अपना हाथ बटाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने दादा और पिता द्वारा शुरू किए गए इस काम को न केवल अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया, बल्कि अपने कौशल और कड़ी मेहनत से समोसा बनाने की कला में महारत भी हासिल कर ली। आज वह इस व्यवसाय को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमाने के साथ-साथ पारिवारिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। मसालों का अनूठा संतुलन और खास भरावन यहाँ के समोसे का मुख्य आकर्षण उसका अनूठा मसाला और अंदर भरी जाने वाली सामग्री है। समोसा तैयार करते समय खड़े मसालों और पिसे हुए मसालों का एक विशेष अनुपात में मिश्रण तैयार किया जाता है। इसमें खड़ी धनिया, हल्दी, हरी मिर्च, गरम मसाला, सोंठ, अदरक, मूंगफली, हरी मटर, हींग और हल्का अजवाइन शामिल होता है। इस खास मसाले के साथ जब मूंगफली, हरी मटर और हींग का मेल होता है, तो समोसे से आने वाली खुशबू और इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। मूंगफली का कुरकुरापन और हरी मटर की मिठास हींग की तीखी महक के साथ मिलकर हर बाइट को बेहद स्वादिष्ट बना देती है। आम नागरिकों से लेकर अधिकारियों तक में दीवानगी सूरज मोदनवाल के हाथों से बने समोसे की लोकप्रियता केवल सुल्तानपुर शहर तक ही सीमित नहीं है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज़ के इलाकों से भी लोग इस खास समोसे का स्वाद चखने के लिए रोजाना खिंचे चले आते हैं। दुकान पर दोपहर बाद से ही ग्राहकों का तांता लगना शुरू हो जाता है। इतना ही नहीं, सुल्तानपुर के प्रशासनिक हलकों और सरकारी दफ्तरों में भी इस समोसे की भारी माँग रहती है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी अपने जलपान और बैठकों के दौरान विशेष रूप से इसी दुकान से समोसे मंगवाना पसंद करते हैं, जो इसकी गुणवत्ता और लोकप्रियता को बयां करता है। किफायती दाम, शाम का समय और चटनी का स्वाद महंगाई के इस दौर में भी सूरज मोदनवाल ने समोसे की कीमत को बेहद किफायती रखा है। ग्राहक केवल 10 रुपये प्रति पीस की दर से इस लजीज समोसे का आनंद ले सकते हैं। यह दुकान प्रतिदिन शाम 3 बजे खुलती है और रात 9 बजे तक ग्राहकों की सेवा में लगी रहती है। समोसे का स्वाद बढ़ाने के लिए इसके साथ दो तरह की विशेष चटनियाँ भी परोसी जाती हैं। यहाँ मिलने वाली ताज़ा हरी चटनी और लाल चटनी समोसे के जायके को दोगुना कर देती हैं, जिसे ग्राहक बहुत चाव से पसंद करते हैं। दुकान तक पहुँचने की सटीक लोकेशन यदि आप सुल्तानपुर में हैं और इस मशहूर समोसे का स्वाद लेना चाहते हैं, तो यहाँ पहुँचना बेहद आसान है। इसके लिए आपको सुल्तानपुर जिला कलेक्ट्रेट से शाहगंज चौराहे की ओर बढ़ना होगा। रास्ते में पड़ने वाले डाकखाना चौराहे से दाईं ओर मुड़ने पर गुरु नानक रोड आती है। इसी गुरु नानक रोड में सूरज मोदनवाल की यह प्रसिद्ध समोसा दुकान स्थित है, जहाँ शाम के समय स्वादिष्‍ट व्यंजनों के शौकीनों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। इसका आप पर असर भारत में: यह कहानी दिखाती है कि कैसे पारंपरिक स्ट्रीट फूड व्यवसाय गुणवत्ता और अनूठे जायके के बल पर दशकों तक अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं। सुल्तानपुर में: कलेक्ट्रेट और डाकखाना चौराहे के आसपास रहने वाले या गुजरने वाले लोग गुरु नानक रोड पर शाम 3 से रात 9 बजे के बीच 10 रुपये में खास मटर-हींग वाला ताजा समोसा और चटनी का स्वाद ले सकते हैं। सवाल-जवाब 1. सूरज मोदनवाल की समोसे की दुकान सुल्तानपुर में कहाँ स्थित है? यह दुकान सुल्तानपुर जिला कलेक्ट्रेट से शाहगंज चौराहे की तरफ जाने वाले रास्ते पर डाकखाना चौराहे से दाईं ओर गुरु नानक रोड में स्थित है। 2. इस समोसे में कौन-कौन से विशेष मसाले और सामग्रियाँ डाली जाती हैं? इस समोसे में मूंगफली, हरी मटर, हींग, खड़ी धनिया, हल्दी, हरी मिर्च, गरम मसाला, सोंठ, अदरक और हल्का अजवाइन मिलाया जाता है। 3. यह दुकान कब शुरू हुई थी और इसे कौन चला रहा है? यह दुकान वर्ष 1986 में शुरू हुई थी, जिसे वर्तमान में सूरज मोदनवाल अपने पिता जीत मोदनवाल के साथ मिलकर चला रहे हैं। 4. दुकान के खुलने का समय और समोसे की कीमत क्या है? यह दुकान रोजाना शाम 3 बजे से रात 9 बजे तक खुलती है और समोसे की कीमत 10 रुपये प्रति पीस है। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • कौशल और हुनर पर भरोसा: औपचारिक पढ़ाई 10वीं तक सीमित रहने के बावजूद सूरज मोदनवाल ने अपने हाथों के हुनर को निखार कर खुद को सफल बनाया। • पारंपरिक विरासत का सम्मान: दादा और पिता द्वारा 1986 में शुरू की गई छोटी दुकान को आगे बढ़ाकर एक सफल पारिवारिक व्यवसाय में बदला। • उत्पाद में विशिष्टता: साधारण समोसे की जगह हींग, मूंगफली और हरी मटर का विशेष मिश्रण चुनकर अपनी अलग पहचान बनाई। • किफायती और जनप्रिय मूल्य: समोसे का दाम 10 रुपये रखकर हर वर्ग के ग्राहक का विश्वास जीता। https://trendkia.com/food/sultanpur-ke-dakkhana-chaurahe-para-10-rupaye-men-mila-raha-khasa-hinga-matara-ka-samosa-1986-se-jari-hai-tina-pirhiyon-ka-jayaka-20159 TrendKia — Har trend, sabse pehle.