# दाल-बाटी से अलग हटकर ट्राई करें राजस्थानी ढोकला कढ़ी, घर पर ऐसे बनाएं पारंपरिक देसी स्वाद

> राजस्थानी खाने में दाल-बाटी के अलावा एक और खास पारंपरिक डिश ढोकला कढ़ी का स्वाद ले सकते हैं, जिसे गेहूं के आटे, बेसन और कद्दूकस की हुई लौकी से भाप में तैयार किया जाता है। सोशल मीडिया पर गीता चौधरी ने इसकी बेहद आसान रेसिपी शेयर की है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/try-rajasthani-dhokla-kadhi-instead-of-dal-baati-learn-how-to-make-this-traditional-dish-32024 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थानी रेसिपी, ढोकला कढ़ी, दाल बाटी विकल्प, भारतीय नाश्ता, गीता चौधरी रेसिपी, पारंपरिक खाना

राजस्थानी खानपान की जब भी चर्चा होती है, तो सबसे पहले दाल-बाटी का नाम जहन में आता है। हालांकि, अगर आप इस पारंपरिक स्वाद से थोड़ा हटकर कुछ नया और अनोखा ट्राई करना चाहते हैं, तो राजस्थानी ढोकला कढ़ी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिखने में छोटी-छोटी बाटियों जैसे लगने वाले ये ढोकले और उनके साथ परोसी जाने वाली गरमा-गरम कढ़ी इस डिश को बेहद खास बनाती है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और इसका ठेठ देसी स्वाद है, जिसे बनाने के लिए किसी कठिन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है। रोजमर्रा की रसोई में मिलने वाली सामान्य सामग्री जैसे गेहूं का आटा, बेसन, ताजी लौकी और कुछ बुनियादी मसालों की मदद से इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है।

डिश के इस अनोखे रूप को सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने का काम राजस्थानी महिला गीता चौधरी ने किया है, जिन्होंने इस देसी रेसिपी को बनाने का बहुत ही आसान तरीका साझा किया है। ऊपर से शुद्ध देसी घी की खुशबू और साथ में तीखी-चटपटी कढ़ी मिल जाए, तो साधारण सी भोजन थाली भी किसी शाही दावत से कम नहीं लगती है। इस रेसिपी में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर चीजें हर घर की रसोई में आसानी से उपलब्ध होती हैं, जिससे इसे बनाना और भी ज्यादा सुविधाजनक हो जाता है।

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## सामग्री और आटा गूंथने की सही प्रक्रिया
इस अनूठी रेसिपी का मुख्य आधार गेहूं का आटा, बेसन और कद्दूकस की हुई ताजी लौकी है। लौकी का उपयोग ढोकलों को अंदर से मुलायम और स्पंजी बनाए रखने में मदद करता है, जबकि अजवाइन, सौंफ, जीरा, हींग और साबुत धनिया जैसे मसाले इसे एक असली राजस्थानी स्वाद देते हैं। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बड़ी परात में एक बाउल गेहूं का आटा लें। अब इसमें लगभग चार से पांच चम्मच बेसन और एक कप कद्दूकस की हुई लौकी मिला लें। इसके बाद इसमें बारीक कटी हुई हरी मिर्च, प्याज, लहसुन, हरा धनिया, सौंफ, अजवाइन, जीरा, हींग, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। मोयन के लिए थोड़ा सा मीठा सोडा या पापड़ खार और दो से तीन चम्मच तेल मिलाना न भूलें।

आटा गूंथते समय एक छोटी सी सावधानी रखनी जरूरी है कि लौकी में पहले से ही नमी और पानी होता है, इसलिए शुरुआत में ऊपर से पानी मिलाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। सभी चीजों को अपने हाथों से अच्छी तरह मिलाते हुए लौकी के प्राकृतिक पानी को छूटने दें। यदि जरूरत महसूस हो, तभी बहुत थोड़ा-थोड़ा पानी छिड़कते हुए मध्यम सख्त आटा गूंथकर तैयार करें। ध्यान रखें कि अगर आटा बहुत ज्यादा नरम हो जाएगा, तो ढोकलों को सही आकार देना मुश्किल हो सकता है।

## ढोकलों को देना बाटी जैसा खास आकार
जब आटा अच्छी तरह गूंथकर तैयार हो जाए, तो उसमें से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें। इन लोइयों को अपनी हथेलियों के बीच गोल घुमाते हुए हल्का सा चपटा कर लें। इसके बाद अपनी उंगली की सहायता से हर लोई के ठीक बीच में एक छोटा सा छेद या गड्ढा बना दें। यह छोटा सा छेद ही इन ढोकलों को बिल्कुल बाटी जैसा रूप देता है और साथ ही भाप को अंदर तक समान रूप से पहुंचने में मदद करता है, जिससे वे अंदर तक अच्छी तरह पक जाते हैं।

## भाप में पकाने की पूरी विधि
ढोकलों को पकाने के लिए एक कड़ाही या स्टीमर में पानी गर्म करने के लिए रखें। उसके ऊपर एक स्टैंड लगाकर जाली वाली प्लेट रखें और उस प्लेट पर थोड़ा सा तेल लगाकर चिकना कर लें ताकि ढोकले चिपके नहीं। अब तैयार किए गए ढोकलों को जाली के ऊपर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर व्यवस्थित रूप से रख दें। बर्तन का ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें और इन्हें मध्यम आंच पर लगभग 20 से 22 मिनट तक भाप में पकने दें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बार-बार ढक्कन खोलने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से अंदर की भाप बाहर निकल सकती है और ढोकलों को पकने में अधिक समय लग सकता है। लगभग 20 मिनट का समय बीत जाने के बाद एक चाकू या टूथपिक को ढोकले के अंदर चुभाकर जांच लें। यदि चाकू बिल्कुल साफ बाहर निकलता है, तो इसका मतलब है कि आपके ढोकले पूरी तरह पककर तैयार हो चुके हैं।

## सर्व करने का सही तरीका
भाप में अच्छी तरह पक जाने के बाद इन ढोकलों को एक प्लेट में बाहर निकाल लें। अब इनके ऊपर से थोड़ा सा शुद्ध देसी घी या मूंगफली का तेल डाल दें, जो इनके स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है। इसके बाद इन स्वादिष्ट ढोकलों को गरमा-गरम कढ़ी, कटे हुए ताजे प्याज और हरी मिर्च के साथ प्लेट में परोसें। कढ़ी इन ढोकलों के साथ मिलकर उनके मसालों के स्वाद को और अधिक उभार देती है, जिससे खाने का असली मजा आ जाता है।

## इसका आप पर असर
इस पारंपरिक राजस्थानी रेसिपी को घर पर आजमाने से आपके रोजमर्रा के नाश्ते या खाने के मेनू में एक नया और स्वादिष्ट बदलाव आता है, जिससे कम खर्च में पौष्टिक भोजन तैयार होता है।

- **भारत में:** यह अनोखी डिश उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो पारंपरिक भारतीय खानपान में कुछ नया और हेल्दी ढूंढ रहे हैं।
- **रसोई और बजट पर असर:** इस रेसिपी में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्रियां जैसे गेहूं का आटा, बेसन और लौकी बेहद किफायती हैं और आसानी से हर घर में मिल जाती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पारंपरिक व्यंजन राजस्थानी संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली की सादगी से उपजा है, जहां आसानी से मिलने वाली सब्जियों और अनाजों से पौष्टिक भोजन तैयार किया जाता है।

- **सामग्री की उपलब्धता:** गेहूं का आटा, बेसन और लौकी जैसी चीजें हर ग्रामीण और शहरी रसोई में सरलता से उपलब्ध होती हैं।
- **पारंपरिक तकनीक:** भाप में पकाने की यह प्राचीन विधि भोजन को बिना ज्यादा तेल के स्वादिष्ट और सेहतमंद बनाए रखती है।
- **स्वाद का संतुलन:** हल्के मसालों और कढ़ी का संयोजन इसे एक संपूर्ण और पाचक आहार बनाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थानी ढोकला कढ़ी बनाने के लिए मुख्य सामग्रियां क्या हैं?
इस रेसिपी को बनाने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, बेसन और कद्दूकस की हुई लौकी का उपयोग किया जाता है।

### 2. ढोकलों को भाप में पकाने में कितना समय लगता है?
ढोकलों को मध्यम आंच पर कड़ाही या स्टीमर में करीब 20 से 22 मिनट तक भाप में पकाना पड़ता है।

### 3. आटा गूंथते समय पानी का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता है?
लौकी में पहले से ही प्राकृतिक नमी होती है, इसलिए शुरुआत में पानी की जरूरत नहीं होती; केवल जरूरत पड़ने पर थोड़ा पानी मिलाया जाता है।

### 4. इस रेसिपी को सोशल मीडिया पर किसने साझा किया है?
इस पारंपरिक देसी रेसिपी को राजस्थानी महिला गीता चौधरी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है।

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