# उपवास के भोजन में नया स्वाद जोड़ेगी खिली-खिली साबूदाना खिचड़ी, जानें मूंगफली और मसालों के साथ पकाने की आसान विधि

> उपवास के दौरान एक जैसा फलाहार खाकर ऊब चुके लोगों के लिए कुरकुरी मूंगफली, आलू और मसालों से तैयार साबूदाना खिचड़ी एक बेहतरीन विकल्प है। सही तरीके से भिगोने और धीमी आंच पर भूनने से यह चिपचिपी नहीं बनती।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/upavasa-ke-bhojana-men-naya-svada-joregi-khili-khili-sabudana-khichdi-janen-peanuts-aura-masalon-ke-satha-pakane-ki-asana-vidhi-46750 · **Language:** Hindi
**Tags:** साबूदाना खिचड़ी, नवरात्रि व्रत, फलाहार रेसिपी, व्रत का खाना, मूंगफली खिचड़ी, उपवास व्यंजन

उपवास के दिनों में खानपान को लेकर अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं, खासकर जब कई दिनों तक एक ही प्रकार के फलाहार का सेवन करना पड़े। अगर आप भी उपवास में हर रोज वही पारंपरिक व्यंजन खाकर ऊब महसूस कर रहे हैं, तो साबूदाना खिचड़ी एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और बेहद त्वरित विकल्प साबित हो सकती है। उबले हुए आलू, साबूदाना, कुटी हुई मूंगफली और चुनिंदा उपवास-अनुकूल मसालों के मेल से यह व्यंजन रसोई में बहुत कम समय में तैयार हो जाता है। दिल्ली की रहने वाली सुषमा ने इस खिचड़ी को खास अंदाज में पकाने की विधि साझा की है। इस व्यंजन की खासियत यह है कि इसमें व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्वाद और उपवास के नियमों के आधार पर मूंगफली के साथ-साथ सूखे मेवे भी शामिल कर सकता है।

## उपवास के नियमों के अनुसार सामग्री का चयन
इस खास रेसिपी में मुख्य रूप से टमाटर और काली मिर्च का प्रयोग किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर कई लोग उपवास के दौरान टमाटर या काली मिर्च का सेवन करने से परहेज करते हैं। यदि आपके परिवार में भी इस तरह के सख्त नियम माने जाते हैं, तो आप इन दोनों सामग्रियों को पूरी तरह छोड़कर भी यह खिचड़ी बना सकते हैं। ऐसे में केवल तेल में कटी हरी मिर्च और उबले आलू को हल्का भूनकर, उसमें साबूदाना और भुनी-कुटी मूंगफली मिलाकर भी एक बेहद उम्दा और स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार की जा सकती है।

## आवश्यक सामग्री की सूची
इस पौष्टिक फलाहार को तैयार करने के लिए रसोई में निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी

- साबूदाना, जिसे पकाने से पहले सही तरीके से भिगोया गया हो
- उबले हुए आलू, छोटे टुकड़ों में कटे हुए
- टमाटर, बारीक कटे हुए
- हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
- पिसी हुई काली मिर्च
- स्वादानुसार सेंधा नमक
- भुनी और दरदरी कुटी हुई मूंगफली
- बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया
- पकाने के लिए थोड़ा सा खाद्य तेल या घी
- इच्छानुसार काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे

## साबूदाना भिगोने और छौंक लगाने की शुरुआती तैयारी
खिचड़ी को खिला-खिला और स्वादिष्ट बनाने का सबसे पहला और बुनियादी कदम साबूदाने को सही ढंग से भिगोना है। साबूदाने को रात में पर्याप्त पानी में धोकर भिगोकर छोड़ देना सबसे बेहतर माना जाता है, जिससे अगली सुबह तक उसके दाने भीतर तक अच्छी तरह फूल जाते हैं। हालांकि, भिगोने का समय साबूदाने के दानों के आकार और उसकी किस्म पर भी निर्भर करता है। जब दाने पूरी तरह फूल जाएं और दबाने पर आसानी से मैश होने लगें, तब आगे की प्रक्रिया शुरू करें। सबसे पहले एक कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। तेल के गर्म होते ही उसमें बारीक कटी हरी मिर्च और थोड़ी सी काली मिर्च डालें। इसके तुरंत बाद कटे हुए टमाटर कड़ाही में डाल दें और उन्हें लगभग 2 से 4 मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दें।

## मसालों का मेल और आलू का मिश्रण
यदि टमाटर को तेजी से गलाना हो, तो कड़ाही में बिल्कुल हल्का सा पानी का छींटा दिया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएं और टमाटर के पूरी तरह नरम होने तक चमचे से चलाते हुए पकने दें। जब टमाटर अच्छी तरह गलकर तेल छोड़ने लगें, तब उसमें पहले से उबले हुए आलू के टुकड़े मिला दें। आलू की मात्रा आप अपने परिवार के सदस्यों की संख्या और निजी पसंद के अनुसार घटा या बढ़ा सकते हैं। आलू को मसालों के साथ कुछ सेकंड भूनने के बाद, पानी निथारा हुआ भीगा साबूदाना कड़ाही में पलट दें और सभी सामग्रियों को आपस में एकसार मिला लें।

## धीमी आंच पर पकाने और गार्निश करने का तरीका
साबूदाना डालने के बाद आंच को धीमा कर दें और कड़ाही को लगातार या बीच-बीच में हल्के हाथों से चलाते रहें। जब साबूदाना अच्छी तरह सिकने लगे और उसके दाने पूरी तरह नरम होकर हल्के पारदर्शी दिखाई देने लगें, तब समझें कि वह पक चुका है। इस अवस्था में कड़ाही में दरदरी कुटी मूंगफली डालकर अच्छी तरह मिला दें। यदि आप समृद्ध स्वाद चाहते हैं, तो इसी समय भुने हुए काजू और बादाम के टुकड़े भी डाल सकते हैं। अंत में गैस बंद करने के बाद ऊपर से ताजा कटा हुआ हरा धनिया डालकर व्यंजन को सजाएं और गरमा-गरम परोसें।

## खिली-खिली खिचड़ी के लिए ध्यान रखने योग्य सावधानियां
साबूदाना खिचड़ी बनाते वक्त सबसे बड़ी चुनौती उसके दानों को आपस में चिपकने से बचाना होती है। इसके लिए सबसे आवश्यक यह है कि भिगोने के बाद साबूदाने में अतिरिक्त पानी बिल्कुल न बचे। यदि दानों में नमी ज्यादा रह जाएगी, तो पकाते समय खिचड़ी लसलसी और चिपचिपी बन जाएगी। इसी प्रकार, साबूदाने को बहुत तेज आंच पर या बहुत लंबे समय तक पकाने से भी दाने आपस में जुड़कर गांठ बन सकते हैं। इसलिए साबूदाना मिलाने के बाद उसे केवल जरूरत भर ही धीमी आंच पर भूनें। इस पूरी विधि में हरी मिर्च और काली मिर्च तीखापन प्रदान करती हैं, जबकि मूंगफली हर कौर में मनभावन कुरकुरापन जोड़ती है।

## इसका आप पर असर
उपवास के दौरान ऊर्जावान और स्वस्थ रहने के लिए सही फलाहार चुनना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

- **दैनिक खानपान में विविधता:** यह आसान रेसिपी उपवास के दौरान बिना ज्यादा समय गंवाए रोजाना के एकरस फलाहार से राहत देती है। इसमें उबले आलू और साबूदाने का संतुलित मिश्रण शरीर को दिनभर के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है।
- **ऊर्जा और पाचन संतुलन:** मूंगफली और मेवों से भरपूर यह व्यंजन उपवास के दौरान लंबे समय तक पेट भरा रखता है। सही ढंग से पकाने पर यह हल्का रहता है और पचने में बहुत आसान होता है।
- **नियमों के अनुसार लचीलापन:** जिन परिवारों में टमाटर या काली मिर्च वर्जित है, वे इसे बिना किसी झंझट के हटा सकते हैं। केवल आलू, हरी मिर्च और मूंगफली से भी इसका स्वाद बरकरार रहता है।
- **किचन बजट और सरलता:** घर में पहले से मौजूद साधारण फलाहारी सामग्रियों से बनने के कारण यह बेहद किफायती विकल्प है। इसे बनाने में किसी खास फैंसी सामग्री या जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।

## ऐसा क्यों हुआ
उपवास के दौरान साबूदाना खिचड़ी को सबसे लोकप्रिय फलाहार माना जाता है क्योंकि यह पोषण, त्वरित ऊर्जा और स्वादिष्ट स्वाद का सहज संतुलन प्रदान करती है।

- **तत्काल ऊर्जा की आवश्यकता:** उपवास में अन्न का त्याग करने पर शरीर को त्वरित और सुपाच्य कैलोरी की दरकार होती है। साबूदाना और आलू दोनों ही प्राकृतिक रूप से स्टार्च से भरपूर होते हैं, जो तुरंत शक्ति प्रदान करते हैं।
- **परंपरा और स्वीकार्यता:** हिंदू उपवास परंपराओं में साबूदाना, सेंधा नमक और मूंगफली पूरी तरह से सात्विक और स्वीकृत माने जाते हैं। यही वजह है कि अधिकांश परिवारों में व्रत के समय इसे प्राथमिक विकल्प माना जाता है।
- **स्वाद और कुरकुरापन:** साबूदाने का अपना कोई तीखा स्वाद नहीं होता, इसलिए यह मसालों और तड़के को आसानी से सोख लेता है। मूंगफली का कुरकुरापन इस व्यंजन को साधारण उबले फलाहार की तुलना में कहीं अधिक स्वादिष्ट बना देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. साबूदाना खिचड़ी को चिपकने से कैसे बचाया जा सकता है?
साबूदाने को सही मात्रा में भिगोने के बाद उसका पूरा पानी अच्छी तरह निथार लें और कड़ाही में डालने के बाद केवल धीमी आंच पर जरूरत भर ही पकाएं।

### 2. साबूदाना कितनी देर भिगोना चाहिए?
साबूदाने को रातभर भिगोकर रखना सबसे अच्छा होता है, हालांकि यह उसके दानों के आकार और किस्म पर भी निर्भर करता है।

### 3. यदि व्रत में टमाटर और काली मिर्च न खाते हों तो क्या करें?
आप टमाटर और काली मिर्च हटाकर केवल तेल में हरी मिर्च, उबले आलू, साबूदाना और कुटी मूंगफली डालकर सादी खिचड़ी बना सकते हैं।

### 4. क्या इस खिचड़ी में ड्राई फ्रूट्स मिलाए जा सकते हैं?
हां, अपनी पसंद के अनुसार इसमें भुने हुए काजू और बादाम के टुकड़े भी मिलाए जा सकते हैं।

### 5. टमाटर को जल्दी गलाने के लिए क्या तरीका अपनाया जा सकता है?
कड़ाही में टमाटर पकाते समय थोड़ा सा पानी का छींटा देने और सेंधा नमक मिलाने से वे जल्दी नरम हो जाते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._