# उत्तराखंड की पारंपरिक गहत की दाल से बढ़ाएं सर्दियों का जायका, जानें बनाने की बेहद आसान विधि

> उत्तराखंड की पारंपरिक और पौष्टिक कुलथ (गहत) की दाल बनाने की आसान विधि, जो सर्दियों के मौसम में पहाड़ों का असली स्वाद और गर्माहट आपके घर तक लाएगी।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/uttarakhand-ki-parnparika-gahat-ki-dala-se-barhaen-sardiyon-ka-jayaka-janen-banane-ki-behada-asana-vidhi-31633 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तराखंड, कुलथ की दाल, गहत की दाल, पहाड़ी व्यंजन, सर्दियों की रेसिपी, पारंपरिक रेसिपी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की पाक कला वहां की जलवायु, संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से गहराई से जुड़ी हुई है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है कुलथ की दाल, जिसे स्थानीय स्तर पर कुल्थ या गहत की दाल के नाम से भी जाना जाता है। पहाड़ी इलाकों में सर्दियों के ठंडे महीनों के दौरान इस दाल को विशेष रूप से चाव से बनाया और खाया जाता है, क्योंकि यह शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्माहट प्रदान करती है। साधारण सामग्रियों से तैयार होने वाली यह दाल अपने बेमिसाल स्वाद और पोषण के लिए जानी जाती है।

 

## गहत की दाल का महत्व और तैयारी की प्रक्रिया

कुलथ एक विशेष प्रकार की दाल है, जिसका रंग आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली अन्य दालों की तुलना में थोड़ा गहरा और मटमैला होता है। इसका स्वाद काफी अनोखा और मिट्टी की सोंधी खुशबू से भरपूर होता है। पहाड़ी परिवारों में इसे बेहद सादगी के साथ तैयार कर चावल या गरमा-गरम रोटियों के साथ परोसा जाता है। केवल दाल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड में इस दाल का उपयोग करके गहत की फाणू, गाढ़ी तरी वाली गहत की दाल और गहत के स्वादिष्ट पराठे जैसे कई पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं।

स्वादिष्ट कुलथ की दाल बनाने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम इसकी सही तैयारी है। इसके लिए सबसे पहले दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। धोने के बाद दाल को करीब 6 से 8 घंटे या फिर पूरी रात के लिए पानी में भिगोकर रख दें। दाल को भिगोने से इसके दाने नरम हो जाते हैं, जिससे यह पकने में बहुत कम समय लेती है और इसका पाचन भी बेहतर होता है।

 

## दाल को उबालने और पकाने का सही तरीका

जब दाल अच्छी तरह भीग जाए, तो अतिरिक्त पानी को छानकर इसे प्रेशर कुकर में डालें। अब कुकर में लगभग 3 कप पानी, थोड़ी सी हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और इसे मध्यम आंच पर पकने के लिए रख दें। दाल को तब तक पकाएं जब तक कि इसके दाने पूरी तरह से गल न जाएं। जब प्रेशर कुकर की भाप अपने आप निकल जाए, तो ढक्कन खोलें और एक कड़छी की मदद से पकी हुई दाल को हल्का सा मैश यानी मसल लें। ऐसा करने से दाल का सूप गाढ़ा हो जाता है और इसका प्राकृतिक स्वाद पूरी तरह से निखर कर आता है।

 

## तड़का तैयार करने की विधि

इस पारंपरिक दाल का असली स्वाद इसके तड़के में छिपा होता है। तड़का लगाने के लिए एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तो इसमें जीरा डालें। जीरा चटकने के बाद कड़ाही में बारीक कटा हुआ लहसुन, हरी मिर्च और कटा हुआ प्याज डालकर अच्छी तरह भूनें। जब प्याज का रंग हल्का सुनहरा होने लगे, तो इसमें कटे हुए टमाटर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर मिलाएं। इस मसाले को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि टमाटर पूरी तरह गल न जाएं और मसाले से तेल अलग होता हुआ दिखाई न देने लगे।

 

## दाल को पकाना और परोसने का तरीका

मसाला अच्छी तरह पक जाने के बाद, इसमें पहले से उबाली और मसली हुई कुलथ की दाल डाल दें। सभी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिलाएं। यदि आपको दाल बहुत गाढ़ी लगे, तो अपनी आवश्यकता के अनुसार इसमें थोड़ा पानी मिला सकते हैं। अब आंच को धीमा कर दें और दाल को 5 से 10 मिनट तक अच्छी तरह उबलने दें ताकि मसाले का स्वाद दाल में पूरी तरह समा जाए। गैस बंद करने के बाद ऊपर से बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालकर सजाएं। इस गरमा-गरम और पौष्टिक कुलथ की दाल को आप उबले हुए चावल, मंडुवे यानी रागी की रोटी या फिर सामान्य गेहूं की रोटी के साथ परोसा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
यह रेसिपी आपको घर बैठे पहाड़ों का पारंपरिक स्वाद और स्वास्थ्य लाभ देगी।

- **घर पर पहाड़ी स्वाद:** आप आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से उत्तराखंड का प्रामाणिक भोजन तैयार कर सकते हैं। इससे आपके दैनिक भोजन में एक नया और स्वादिष्ट विकल्प जुड़ेगा।
- **सर्दियों में गर्माहट:** गहत की दाल की तासीर गर्म होती है। सर्दियों के मौसम में इसका सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्म रखने में मदद करता है।
- **बदलाव की रसोई:** रोज़मर्रा की सामान्य अरहर या मूंग दाल से हटकर यह एक बेहतरीन बदलाव है। यह मेहमानों के लिए भी एक अनोखा व्यंजन साबित हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गहत की दाल की लोकप्रियता वहां की भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु के कारण है।

- **कठिन जलवायु की आवश्यकता:** पहाड़ों में सर्दियों के दौरान तापमान काफी गिर जाता है। इस मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और गर्माहट देने वाले खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है, जिसे गहत पूरी करता है।
- **भौगोलिक अनुकूलता:** कुलथ या गहत की फसल कम पानी और पथरीली मिट्टी में भी आसानी से उग जाती है। इसलिए यह उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की मुख्य फसलों में से एक है।
- **पारंपरिक जीवनशैली:** पहाड़ी जीवन में शारीरिक श्रम अधिक होता है। गहत की दाल जैसे पोषक तत्वों से भरपूर व्यंजन स्थानीय लोगों को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. कुलथ की दाल को उत्तराखंड में और किस नाम से जाना जाता है?
उत्तराखंड में कुलथ की दाल को स्थानीय स्तर पर कुल्थ या गहत की दाल भी कहा जाता है।

### 2. दाल को पकाने से पहले कितनी देर भिगोना चाहिए?
इस दाल को अच्छी तरह धोकर करीब 6 से 8 घंटे या फिर पूरी रात के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए।

### 3. गहत की दाल से दाल के अलावा और कौन से व्यंजन बनाए जा सकते हैं?
गहत की दाल से गहत की फाणू, गाढ़ी पहाड़ी तरी और गहत के भरवां पराठे जैसे व्यंजन भी बनाए जाते हैं।

### 4. इस दाल को पारंपरिक रूप से किन चीजों के साथ परोसा जाता है?
इसे गरमा-गरम चावल, मंडुवे (रागी) की रोटी या फिर सामान्य गेहूं की रोटी के साथ परोसा जा सकता है।

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