वैश्विक सीफूड खपत में शीर्ष पर बना चीन, जानिए मछली खाने की सूची में भारत किस पायदान पर आता है दुनियाभर में मछली की कुल खपत के मामले में चीन शीर्ष स्थान पर है, जबकि प्रति व्यक्ति खपत में जापान आगे माना जाता है। उत्पादन में दूसरा स्थान हासिल करने के बावजूद भारत मछली खाने की सूची में 129वें नंबर पर मौजूद है। दुनिया के हर हिस्से में भोजन की विविधता और परंपराएं बिल्कुल अलग-अलग नजर आती हैं। कहीं मुख्य आहार के रूप में चावल को प्राथमिकता दी जाती है तो किसी क्षेत्र में गेहूं से बनी रोटी थाली की शान बनती है। शाकाहारी व्यंजनों के साथ-साथ मांसाहारी भोजन भी वैश्विक आबादी के बड़े हिस्से की दैनिक खुराक में शामिल है। मांसाहारी आहार की बात करें तो चिकन और मटन के मुकाबले मछली को स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन डी और कई आवश्यक खनिज तत्व मौजूद होते हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी सीफूड की मांग में तेजी आई है। कुल खपत में चीन का दबदबा अगर विश्व स्तर पर मछली की कुल खपत के आंकड़ों पर नजर डालें तो चीन इस सूची में पहले स्थान पर काबिज है। चीन की विशाल आबादी और वहां की खानपान संस्कृति में मछली का मुख्य स्थान होना इसकी सबसे बड़ी वजह है। वहां के पारंपरिक व्यंजनों में समुद्री जल के जीवों के अलावा मीठे पानी की नदियों और झीलों से मिलने वाली मछलियों का व्यापक उपयोग किया जाता है। स्थानीय बाजारों में प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के सीफूड की भारी बिक्री दर्ज की जाती है। उत्पादन और निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र चीन में मछली की अधिक खपत के पीछे उसकी लंबी भौगोलिक समुद्री तटरेखा और विकसित मत्स्य पालन ढांचा जिम्मेदार है। प्राकृतिक रूप से मछली पकड़ने के साथ-साथ वहां आधुनिक तकनीक के जरिए बहुत बड़े पैमाने पर फिश फार्मिंग की जाती है। वर्तमान में चीन दुनिया का सबसे बड़ा मछली उत्पादक राष्ट्र है। अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद चीन दुनिया भर के कई देशों में समुद्री खाद्य पदार्थों और संसाधित मछलियों का निर्यात करता है। इस विशाल उद्योग के माध्यम से देश के लाखों लोगों को रोजगार और आजीविका मिलती है। प्रति व्यक्ति खपत में जापान आगे कुल खपत में भले ही चीन की विशाल आबादी के कारण उसका पलड़ा भारी हो, लेकिन जब औसतन प्रति व्यक्ति मछली खाने की बात आती है तो जापान अग्रणी देशों में गिना जाता है। जापानी भोजन शैली में सुशी और साशिमी जैसे विश्वप्रसिद्ध सीफूड व्यंजन दैनिक आहार का अनिवार्य हिस्सा हैं। वहां के निवासी नियमित आधार पर ताजा समुद्री भोजन का सेवन करते हैं, जिससे औसतन हर व्यक्ति द्वारा खाई जाने वाली मछली की मात्रा काफी अधिक दर्ज की जाती है। चीन और जापान के अलावा इंडोनेशिया, वियतनाम और भारत में भी मछली खाने वालों की संख्या करोड़ों में है, जहां तटीय जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण यह भोजन का मुख्य आधार बना हुआ है। उत्पादन में दूसरे नंबर पर होकर भी खपत में 129वें स्थान पर भारत मछली उत्पादन के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है। भारत के पास एक विशाल समुद्री तटरेखा है, साथ ही आंतरिक राज्यों में नदियों, नहरों, तालाबों और झीलों के माध्यम से अंतर्देशीय मत्स्य पालन बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके बावजूद, खपत के मोर्चे पर भारत की स्थिति एकदम उलट नजर आती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रति व्यक्ति मछली की खपत के मामले में भारत वैश्विक सूची में लगभग 129वें स्थान पर आता है। इस निचले पायदान का मुख्य कारण भारत की एक बहुत बड़ी आबादी का पूर्णतः शाकाहारी होना है। इसके अतिरिक्त, देश के कई मैदानी और आंतरिक राज्यों में मछली खाने का चलन बेहद सीमित है। शरीर और दिमाग के लिए मछली खाने के स्वास्थ्य लाभ पोषण विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार में मछली को शामिल करना सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है। इसमें मौजूद उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत में मदद करता है। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को घटाने और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखने में सहायक साबित होता है। मछली में विटामिन डी और कैल्शियम की प्रचुरता हड्डियों को मजबूती प्रदान करती है। आंखों, त्वचा और बालों की सेहत पर सकारात्मक असर नियमित रूप से उपयुक्त मात्रा में मछली का सेवन आंखों की रोशनी और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। शोध बताते हैं कि ओमेगा 3 फैटी एसिड बढ़ती उम्र के साथ आंखों में होने वाली समस्याओं से बचाव करने में मदद करता है। इसके अलावा मछली में मौजूद स्वास्थवर्धक वसा, प्रोटीन और विटामिन त्वचा की रंगत को बनाए रखने तथा बालों की जड़ों को जरूरी पोषण देने में मददगार साबित होते हैं। हालांकि इन स्वास्थ्य लाभों का पूरा असर व्यक्ति के समग्र खानपान और उसकी दैनिक जीवन शैली पर निर्भर करता है। इसका आप पर असर भारत में: भारत मछली उत्पादन में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद खपत में 129वें नंबर पर है, जिससे घरेलू बाजार में सीफूड की उपलब्धता और विविधता बेहतर बनी रहती है। आम पाठकों के लिए: भोजन में नियमित रूप से मछली शामिल करने से शरीर को प्रोटीन, ओमेगा 3 और विटामिन डी मिलता है जो दिल, दिमाग और हड्डियों को स्वस्थ रखने में मददगार है। सवाल-जवाब 1. दुनिया में सबसे ज्यादा मछली किस देश में खाई जाती है? कुल खपत के मामले में चीन दुनिया में पहले स्थान पर है, जहां की बड़ी आबादी दैनिक आहार में मछली का सेवन करती है। 2. प्रति व्यक्ति मछली खाने के मामले में कौन सा देश शीर्ष पर है? औसतन प्रति व्यक्ति मछली की खपत के मामले में जापान को सबसे आगे माना जाता है। 3. मछली उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है? भारत दुनिया भर में मछली उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर आता है। 4. मछली खपत के मामले में भारत किस नंबर पर है? उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मछली खाने की वैश्विक सूची में भारत लगभग 129वें स्थान पर मौजूद है। 5. भारत में मछली की कम खपत का क्या कारण है? देश की एक बड़ी आबादी का शाकाहारी होना और कई आंतरिक राज्यों में मछली न खाना इसका मुख्य कारण है। 6. मछली खाने से स्वास्थ्य को कौन से मुख्य पोषक तत्व मिलते हैं? मछली से प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन डी और कैल्शियम प्राप्त होते हैं। https://trendkia.com/food/vaishvika-siphuda-khapata-men-shirsha-para-bana-china-janie-machhali-khane-ki-suchi-men-india-kisa-payadana-para-ata-hai-12505 TrendKia — Har trend, sabse pehle.