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  "type": "article",
  "title": "बघेलखंड में ठंड का खास स्वाद, चने की भाजी की मांग बढ़ी और रेसिपी",
  "summary": "मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में सर्दियों की दस्तक के साथ ही पारंपरिक चने की भाजी की मांग तेजी से बढ़ गई है। रीवा के बाजारों में बिकने वाली इस खास रेसिपी को ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में चावल के साथ बहुत चाव से खाया जाता है।",
  "content": "मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में सर्दियों के आगमन के साथ ही पारंपरिक चने की भाजी की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया है। ताजे हरे पौधों से तैयार होने वाली यह स्वादिष्ट भाजी स्थानीय खानपान संस्कृति का एक बेहद अहम हिस्सा है, जिसे ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में विशेष तौर पर पसंद किया जाता है। ठंड के मौसम की शुरुआत होते ही रीवा और आसपास के इलाकों के घरों तथा बाजारों में चने की खूशबू और इसकी मांग दोनों साफ महसूस की जाने लगती है। खेतों से सीधे ताजी मिलने वाली यह पारंपरिक भाजी ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बीच चावल के साथ बड़े चाव से परोसी जाती है। ठंड के इन ठिठुरते महीनों में रीवा शहर के सिरमौर चौराहे पर कई महिलाएं इसे बेचकर अपने परिवारों का गुजर-बसर करती हैं और अपनी आजीविका चलाती हैं।\n\nरीवा के बाजारों में कारोबार और महिलाओं की आजीविका\nरीवा के सिरमौर चौराहे पर इन दिनों चने की भाजी बेचने वाली दर्जनों महिलाएं अपनी दुकानें सजाए नजर आ रही हैं। कोनिया साकेत नामक विक्रेता ने जानकारी देते हुए बताया कि वह मैहर मंडी से चने की भाजी खरीदकर रीवा लेकर आती हैं। मैहर में करीब 300 रुपये के भाव पर खरीदी जाने वाली यह हरी भाजी रीवा के बाजारों में 400 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर बेची जाती है। अक्टूबर के महीने से शुरू होने वाला यह मौसमी बिक्री का सिलसिला लगातार दिसंबर और जनवरी के महीनों तक चलता रहता है। बघेलखंड के ग्रामीण और आदिवासी परिवारों में ठंड के कड़क मौसम के दौरान इस पारंपरिक व्यंजन को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल किया जाता है।\n\nचने की पारंपरिक भाजी तैयार करने की विधि\nबघेलखंड की पारंपरिक शैली में चने की भाजी बनाने के लिए कुछ चुनिंदा और सामान्य सामग्री की जरूरत होती है। इसमें ताजी चने की भाजी, 2 से 3 चम्मच तेल, जरूरत के अनुसार हींग, 5 से 10 लहसुन की कलियां, 1 चम्मच दरदरी पिसी हुई मूंग, मसूर या अरहर की दाल, 2 चम्मच आटा, आवश्यकतानुसार नमक और पानी शामिल हैं। इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने की शुरुआत ताजी भाजी को अच्छी तरह साफ करके बारीक काटने से होती है। इसके बाद एक लोहे की कड़ाही में तेल को अच्छी तरह गर्म किया जाता है और उसमें हींग तथा लहसुन का तड़का लगाया जाता है। जब लहसुन अच्छी तरह भुन जाता है, तब उसमें दरदरी पिसी हुई दाल और कटी हुई भाजी को एक साथ मिला दिया जाता है。\n\nपकाने की प्रक्रिया और परोसने का सही तरीका\nभाजी में बेहतरीन गाढ़ापन लाने के लिए इस प्रक्रिया में दो चम्मच आटा भी मिलाया जाता है। इसके बाद आवश्यकतानुसार पानी और नमक डालकर इस मिश्रण को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाता है। जब यह भाजी पककर पूरी तरह गाढ़ी हो जाती है, तब यह खाने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है। बघेलखंड के पारंपरिक खानपान में इस पौष्टिक भाजी को मुख्य रूप से चावल और गरमागरम रोटी के साथ खाने का पुराना चलन है, जो ठंड के दिनों में शरीर को गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पारंपरिक व्यंजन सर्दियों के दौरान स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधि और खानपान की आदतों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।\n\n• रीवा में: स्थानीय विक्रेता मैहर से भाजी लाकर सिरमौर चौराहे पर बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं, जहां इसका भाव 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है।\n• मध्य प्रदेश में: बघेलखंड के ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए यह मौसमी व्यंजन ठंड के मौसम में खानपान और चावल के साथ परोसे जाने वाले मुख्य आहार का अहम हिस्सा बनता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबघेलखंड में सर्दियों के मौसम में चने की भाजी की मांग बढ़ने के पीछे मौसमी पैदावार और पारंपरिक खानपान की गहरी प्राथमिकताएं जुड़ी हैं।\n\n• मौसमी फसल चक्र: अक्टूबर से शुरू होने वाले सर्दियों के महीनों में ताजे चने के हरे पौधे खेतों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।\n• सांस्कृतिक पसंद: बघेलखंड के ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में ठंड के दौरान चावल के साथ इस पौष्टिक भाजी को खाने की पुरानी परंपरा है।\n• आपूर्ति श्रृंखला: मैहर मंडी से रीवा जैसे बड़े शहरी बाजारों तक भाजी के परिवहन और स्थानीय महिलाओं द्वारा इसकी खुदरा बिक्री से यह व्यापार संचालित होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चने की भाजी की मांग किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़ती है?\nमध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में सर्दियों की शुरुआत के साथ चने की भाजी की मांग बहुत बढ़ जाती है।\n\n2. रीवा में चने की भाजी किस चौराहे पर मुख्य रूप से बिकती है?\nरीवा के सिरमौर चौराहे पर इन दिनों चने की भाजी बेचने वाली दर्जनों महिलाएं नजर आती हैं।\n\n3. मैहर और रीवा में चने की भाजी का क्या भाव रहता है?\nमैहर मंडी में यह भाजी करीब 300 रुपये में खरीदी जाती है और रीवा में 400 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।\n\n4. बघेलखंड में चने की भाजी मुख्य रूप से किसके साथ खाई जाती है?\nबघेलखंड में इसे मुख्य रूप से चावल और रोटी के साथ खाने का चलन है।\n\n5. चने की भाजी बनाने में कौन सी दाल का उपयोग किया जाता है?\nइस पारंपरिक रेसिपी में 1 चम्मच दरदरी पिसी मूंग, मसूर या अरहर की दाल मिलाई जाती है।",
  "url": "https://trendkia.com/food/winter-special-recipe-and-rising-demand-for-traditional-chane-ki-bhaji-in-baghelkhand-52615",
  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-10-28",
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    "चने की भाजी",
    "बघेलखंड रेसिपी",
    "रीवा समाचार",
    "सर्दियों का खानपान",
    "पारंपरिक व्यंजन",
    "मध्य प्रदेश फूड"
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  "site": "TrendKia"
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