अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ चुनाव से पहले खेल सुधार का 12 सूत्रीय खाका तैयार दिसंबर में होने वाले अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के चुनावों से पहले खेल के पुनरुद्धार और जमीनी बदलाव के लिए 12 अहम सुधारों की रूपरेखा सामने आई है। दिसंबर में होने वाले अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के चुनाव देश में फुटबॉल की दशा और दिशा तय करने के लिहाज से बेहद निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। महासंघ की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कौन जीत हासिल करता है, यह एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि निर्वाचित पदाधिकारी पदभार संभालने के बाद खेल के वास्तविक विकास के लिए क्या कदम उठाते हैं। शीर्ष पद हासिल करना कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश भर में फुटबॉल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक बहुत बड़ी जवाबदेही है। इसी परिप्रेक्ष्य में नए नेतृत्व के सामने भारतीय फुटबॉल को नई ऊर्जा देने और उसकी व्यवस्था सुधारने के लिए 12 महत्वपूर्ण रणनीतिक सुझाव रखे गए हैं। पारदर्शी चुनाव और निष्पक्ष जांच प्रणाली प्रशासनिक स्तर पर सबसे पहली जरूरत चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और लोकतांत्रिक विश्वास कायम करने की है। महासंघ के आगामी चुनावों को किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न कराने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। निर्वाचित होने वाले पदाधिकारियों को निजी महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर पूर्ण सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्रीय खेल हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। महासंघ के भीतर गुटबाजी और व्यक्तिगत संबंधों की संस्कृति को पूरी तरह समाप्त कर केवल योग्यता और प्रदर्शन को कामकाज का आधार बनाना आवश्यक है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है या फुटबॉल के हितों को आघात पहुंचाने वाली शिकायतें आती हैं, तो उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उचित जांच प्रक्रिया के तहत दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। स्वतंत्र सलाहकार समूह का गठन फुटबॉल के तकनीकी और रणनीतिक फैसलों को बेहतर बनाने के लिए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को पांच प्रतिष्ठित और सम्मानित फुटबॉल दिग्गजों का एक स्वतंत्र सलाहकार समूह गठित करना चाहिए। इस समूह में ऐसे अनुभवी चेहरे शामिल होने चाहिए जिनके पास खेल की गहरी समझ, प्रशासनिक कुशलता, सत्यनिष्ठा और गलत फैसलों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने का साहस हो। यह स्वतंत्र समूह महासंघ को नियमित मार्गदर्शन देने के साथ-साथ दीर्घकालिक खेल विकास नीतियों को तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। पारंपरिक टूर्नामेंट और संस्थागत टीमों की वापसी देश के फुटबॉल इतिहास को समृद्ध बनाने वाली पुरानी प्रतियोगिताओं की खोई हुई प्रतिष्ठा को बहाल करना एक प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए। मुंबई के ऐतिहासिक रोवर्स कप, दिल्ली के प्रतिष्ठित डूरंड कप और हैदराबाद के मशहूर निजाम गोल्ड कप जैसे टूर्नामेंटों को नई चमक देने के लिए संबंधित आयोजक संस्थाओं के साथ तत्काल साझा पहल करने की दरकार है। इसके अतिरिक्त पंजाब, तमिलनाडु और केरल जैसे पारंपरिक फुटबॉल केंद्रों में भी मजबूत अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन होना चाहिए। इसी के साथ संस्थागत लीग की प्रणाली को दोबारा पुनर्जीवित करना अनिवार्य है। अतीत में एयर इंडिया, रेलवे, बीएसएफ (BSF), ओएनजीसी (ONGC), पंजाब बिजली बोर्ड, रेलवे कोच फैक्टरी, एफसीआई (FCI), असम पुलिस, पंजाब पुलिस और भारतीय लेखा परीक्षा जैसे संस्थानों की टीमों ने देश को कई महान और प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। इन टीमों की बहाली से खिलाड़ियों को वित्तीय सुरक्षा और रोजगार के स्थायी अवसर प्राप्त होंगे। पूर्वोत्तर प्रतिभाओं का राष्ट्रीय एकीकरण असम सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं का अपार भंडार है, जिसे मुख्यधारा के राष्ट्रीय मंच पर समुचित स्थान मिलना चाहिए। इसके लिए देश की राजधानी दिल्ली में पूर्वोत्तर फुटबॉल टूर्नामेंट को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही गुवाहाटी सहित पूर्वोत्तर के विभिन्न शहरों में नियमित स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों और जमीनी प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय खेल व्यवस्था से सीधे जोड़ा जा सके। जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और आधुनिक तकनीक गांवों, स्कूलों और छोटे कस्बों में क्षेत्रीय और जोनल प्रतियोगिताओं का एक व्यापक जाल बिछाने की योजना बनाई जाए। गुवाहाटी, मुंबई, नागपुर और अन्य प्रमुख केंद्रों पर विशेष प्रतिभा पहचान शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। इन शिविरों में वीडियो रिकॉर्डिंग, आधुनिक तकनीकी विश्लेषण और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाए, ताकि बिना किसी पक्षपात के वास्तविक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके। प्रशिक्षकों का उन्नयन और मीडिया संवाद मैदान पर खेल का स्तर उठाने के लिए फीफा (FIFA) के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कोचों और रेफरियों के व्यवस्थित प्रशिक्षण, प्रमाणन तथा नियमित मूल्यांकन की सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। आधुनिक खेल तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों और योग्यता आधारित नियुक्तियों से भारतीय फुटबॉल के तकनीकी स्तर में व्यापक सुधार लाया जा सकता है। प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को वरिष्ठ खेल पत्रकारों, संपादकों और प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ प्रत्येक दस दिन में औपचारिक संवाद सत्र आयोजित करने चाहिए। इस मंच के जरिए जमीनी स्तर के फुटबॉल, खिलाड़ियों की वास्तविक उपलब्धियों और खेल की चुनौतियों को खुलकर सामने रखा जाए। साथ ही हिंदी, अंग्रेजी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में फुटबॉल के प्रचार-प्रसार और मीडिया कवरेज का विस्तार किया जाना चाहिए। बुनियादी ढांचे का विस्तार और दिग्गजों का अनुभव विभिन्न प्रतियोगिताओं के भव्य और सफल आयोजन के लिए राज्य सरकारों, पर्यटन विभागों, कॉर्पोरेट प्रायोजकों और स्थानीय प्रशासन का सक्रिय सहयोग लिया जाना चाहिए। बेहतर खेल मैदानों, खिलाड़ियों के उच्चस्तरीय आवास, यात्रा और रसद सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को तेजी से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके अलावा बिमल घोष और अनादि बरुआ जैसे अनुभवी फुटबॉल व्यक्तित्वों के विशाल तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का समुचित लाभ उठाया जाए। महिला फुटबॉल के विस्तार, युवा विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय टीमों के लिए योग्य प्रशिक्षकों के चयन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है। खेल से जुड़ी सभी नियुक्तियां पूरी तरह से खुली और मेरिट आधारित होनी चाहिए। राजधानी दिल्ली में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। राष्ट्रपति भवन परिसर में मौजूद छह खेल मैदानों में से तीन मैदानों पर तय समय सीमा के दौरान जूनियर खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करने की अनुमति देने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत की जाए। यह कदम सुरक्षा मानकों और औपचारिक स्वीकृतियों के दायरे में रहकर युवा खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध करा सकता है। इसी तरह दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस भवन के समीप स्थित ऐतिहासिक फुटबॉल मैदान की वर्तमान स्थिति और उपलब्धता की समीक्षा की जाए, ताकि नियमानुसार अनुमति मिलने पर उसे स्कूली प्रतियोगिताओं, युवा प्रशिक्षण और स्थानीय फुटबॉल गतिविधियों के लिए फिर से जीवंत किया जा सके। इसका आप पर असर यह सुधार प्रस्ताव भारतीय फुटबॉल व्यवस्था, उभरते खिलाड़ियों और स्थानीय प्रशंसकों के लिए नए अवसर और पारदर्शी मंच तैयार कर सकता है। • भारत में: देश भर के युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को पारदर्शी ट्रायल और आधुनिक कोचिंग का सीधा लाभ मिलेगा। इससे राष्ट्रीय टीमों के लिए जमीनी स्तर से नई खेल प्रतिभाओं के सामने आने का रास्ता साफ होगा। • दिल्ली और महानगरों में: दिल्ली, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में पुराने मैदानों की बहाली और नए अभ्यास स्थल मिलने से स्कूली बच्चों को खेलने की बेहतर जगह मिलेगी। स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक टूर्नामेंट दोबारा शुरू होने से खेल प्रेमियों को उच्चस्तरीय मैच देखने को मिलेंगे। • पूर्वोत्तर राज्यों में: असम और आसपास के राज्यों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में नियमित भागीदारी का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित खिलाड़ियों को राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की सीधी नजर में आने में मदद मिलेगी। • पेशेवर एथलीटों के लिए: संस्थागत लीग और सार्वजनिक क्षेत्र की टीमों की बहाली से युवा खिलाड़ियों को खेल के साथ सरकारी नौकरियों का विकल्प मिल सकेगा। यह कदम खिलाड़ियों को वित्तीय सुरक्षा और दीर्घकालिक करियर का भरोसा देगा। ऐसा क्यों हुआ भारतीय फुटबॉल में लंबे समय से प्रशासनिक शिथिलता, ऐतिहासिक प्रतियोगिताओं के बंद होने और जमीनी प्रतिभाओं की अनदेखी के चलते यह सुधार प्रस्ताव सामने रखा गया है। • आगामी महासंघ चुनाव: दिसंबर में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के संगठनात्मक चुनाव होने हैं, जो नई विकास नीतियों को लागू करने का उपयुक्त समय माने जा रहे हैं। नए नेतृत्व के सामने प्राथमिकताओं को तय करने के लिए यह सुधारात्मक एजेंडा तैयार किया गया है। • संस्थागत और ऐतिहासिक मंचों का पतन: रोवर्स कप, निजाम गोल्ड कप और संस्थागत लीग जैसे पारंपरिक मंच बंद होने से खिलाड़ियों के लिए नौकरी और प्रतिस्पर्धी फुटबॉल के अवसर घट गए थे। इस कमी ने जमीनी प्रतिभाओं के विकास तंत्र को काफी कमजोर किया था। • पूर्वोत्तर और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा: देश के कई ग्रामीण और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में बेहतरीन खिलाड़ी होने के बावजूद नियमित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और आधुनिक सुविधाओं का अभाव बना रहा है। तकनीकी विश्लेषण और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं की अनुपस्थिति भी इस बदलाव का मुख्य कारण बनी। सवाल-जवाब 1. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के चुनाव कब निर्धारित हैं? महासंघ के चुनाव दिसंबर के महीने में आयोजित होने वाले हैं। 2. चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या सुझाव दिया गया है? चुनावों को किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने का सुझाव दिया गया है। 3. सलाहकार समूह में कितने सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव है? महासंघ को मार्गदर्शन देने के लिए पांच अनुभवी फुटबॉल विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र समूह बनाने का प्रस्ताव है। 4. किन ऐतिहासिक टूर्नामेंटों को दोबारा शुरू करने की बात कही गई है? मुंबई के रोवर्स कप, दिल्ली के डूरंड कप और हैदराबाद के निजाम गोल्ड कप को दोबारा प्रतिष्ठा दिलाने की सिफारिश की गई है। 5. अतीत में कौन सी प्रमुख संस्थागत टीमें प्रतिभाशाली खिलाड़ी देती थीं? एयर इंडिया, रेलवे, बीएसएफ, ओएनजीसी, पंजाब बिजली बोर्ड, रेलवे कोच फैक्टरी, एफसीआई, असम पुलिस और पंजाब पुलिस जैसी टीमें खिलाड़ियों को मंच देती थीं। 6. पूर्वोत्तर फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में क्या योजना सुझाई गई है? दिल्ली में पूर्वोत्तर फुटबॉल टूर्नामेंट को फिर से शुरू करने का सुझाव दिया गया है। 7. प्रतिभा खोज शिविर किन प्रमुख शहरों में लगाने का प्रस्ताव है? गुवाहाटी, मुंबई, नागपुर और अन्य केंद्रों पर प्रतिभा पहचान शिविर लगाने की बात कही गई है। 8. राष्ट्रपति भवन के खेल मैदानों को लेकर क्या प्रस्ताव दिया गया है? परिसर के छह में से तीन मैदानों पर तय समय में जूनियर खिलाड़ियों को अभ्यास की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। 9. प्रशिक्षकों और रेफरियों के विकास के लिए किस मानक की सिफारिश की गई है? फीफा के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उनके प्रशिक्षण, प्रमाणन और नियमित मूल्यांकन की सिफारिश की गई है। 10. मीडिया संवाद को लेकर महासंघ के लिए क्या समय सीमा तय की गई है? महासंघ को प्रत्येक दस दिन में वरिष्ठ खेल पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के साथ संवाद सत्र आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। https://trendkia.com/football/akhila-bharatiya-football-mahasngha-chunava-se-pahale-khela-sudhara-ka-12-sutriya-khaka-taiyara-52805 TrendKia — Har trend, sabse pehle.