# मैदान से बाहर बच्चों की जिंदगी संवारने में जुटी प्रीमियर लीग, नेक्स्टजेन पहल से जमीनी स्तर पर तैयार हो रहे नए मेंटर्स

> प्रीमियर लीग का नेक्स्टजेन कोच प्रोग्राम ऑस्कर फाउंडेशन के सहयोग से भारत में ग्रासरूट फुटबॉल कोचों को सामाजिक बदलाव और बच्चों के समग्र विकास का माध्यम बना रहा है।

**Type:** article · **Category:** फुटबॉल · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/football/maidana-se-bahara-bachchon-ki-jindagi-snvarane-men-juti-premier-league-nextgen-pahala-se-jamini-stara-para-taiyara-ho-rahe-nae-men-45496 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रीमियर लीग, नेक्स्टजेन कोच प्रोग्राम, ऑस्कर फाउंडेशन, ग्रासरूट फुटबॉल, भारतीय फुटबॉल, कीर्ति कश्यप, नरिंदर टोकस

फुटबॉल के किसी भी मैच का परिणाम सामान्यतः नब्बे मिनट के खेल और स्कोरबोर्ड पर दर्ज अंकों से तय होता है, मगर खेल जगत में कई ऐसे प्रयास भी होते हैं जिनका प्रभाव सीमा रेखाओं से कहीं आगे तक महसूस किया जाता है। भारत के खेल परिदृश्य में कम्युनिटी कोच की भूमिका केवल ड्रिल्स करवाने वाले प्रशिक्षक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की बन रही है। इस सोच का बुनियादी लक्ष्य खेल के माध्यम से नई पीढ़ी को शिक्षित करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें जीवन में सही दिशा देना है। प्रीमियर लीग का नेक्स्टजेन कोच प्रोग्राम इसी दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने का काम कर रहा है। यह पहल केवल बेहतर रणनीति सिखाने वाले प्रशिक्षक तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बस्तियों और समुदायों को भीतर से सशक्त बनाने का जरिया है जहां से ये युवा खिलाड़ी आते हैं।

## मैदान के हुनर से आगे व्यक्तित्व निर्माण की दिशा
भारत में संचालित इस विशेष प्रशिक्षण अभियान का दायरा साधारण फुटबॉल तकनीकों से कहीं अधिक विस्तृत है। यहां कोचों को तकनीकी जानकारियों के साथ-साथ ऐसे मेंटर्स के रूप में ढाला जा रहा है, जो मैदान पर बच्चों के खेल कौशल को निखारने के साथ उनके मनोबल, मानसिक मजबूती और मानवीय सोच को भी सशक्त बना सकें। यह पूरी प्रक्रिया खिलाड़ी को सिर्फ गेंद पर नियंत्रण रखने वाले एथलीट के बजाय एक संपूर्ण और संवेदनशील इंसान के रूप में विकसित करने पर जोर देती है। जब जमीनी स्तर पर काम करने वाला प्रशिक्षक बच्चों की सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने लगता है, तो खेल अपने आप सामाजिक बदलाव का जरिया बन जाता है।

## भारतीय खेल परिदृश्य में दो दशकों की सतत यात्रा
प्रीमियर लीग का भारतीय जमीनी खेलों के साथ संबंध लगभग दो दशक पुराना है। इस दीर्घकालिक साझेदारी का औपचारिक सफर वर्ष 2007 में प्रीमियर स्किल्स कार्यक्रम के जरिए शुरू हुआ था। बीते वर्षों में यह अभियान देश के अलग-अलग कोनों तक अपनी पहुंच बना चुका है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और गोवा जैसे प्रमुख फुटबॉल केंद्रों से लेकर केरल, कर्नाटक, ओडिशा और तमिलनाडु तक इस पहल के तहत विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं।

शहरी केंद्रों के साथ-साथ इस अभियान ने समावेशी खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए हैं। इसी क्रम में मुंबई के भीतर दिव्यांग बच्चों के लिए एक विशेष फुटबॉल पहल शुरू की गई, ताकि शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे बच्चे भी खेल की मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह अभियान अब तक देश के 18 राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। इन राज्यों में 7,500 से अधिक कोच, रेफरी और शारीरिक शिक्षा से जुड़े शिक्षक इस व्यवस्था से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसके माध्यम से 1.64 लाख से ज्यादा युवाओं तक प्रत्यक्ष खेल और व्यक्तित्व विकास के अवसर पहुंचे हैं।

## मुंबई में आगामी सत्र और गोवा के अनुभव
नेक्स्टजेन पहल की इस कड़ी का अगला चरण मुंबई में अक्टूबर के महीने में आयोजित होने जा रहा है। ऑस्कर फाउंडेशन (OSCAR Foundation) के साथ साझीदारी में आगे बढ़ रहे इस कार्यक्रम की नींव मई 2026 में गोवा में रखे गए पहले संस्करण के दौरान मजबूत हुई थी। गोवा के उस आरंभिक शिविर में 30 से अधिक स्थानीय कोचों ने प्रतिभाग किया था। उस दौरान इन प्रशिक्षकों ने प्रीमियर लीग के अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी कोचों और अनुभवी भारतीय कोच एजुकेटरों के सानिध्य में गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण हासिल किया था। मुंबई का यह नया सत्र उसी सीख को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

## अनुभवी प्रशिक्षकों की जुगलबंदी और मार्गदर्शक दृष्टि
आगामी प्रशिक्षण सत्रों में कीर्ति कश्यप और नरिंदर टोकस अपने वर्षों के मैदानी अनुभवों और तकनीकी दृष्टि को साझा करेंगे। इन दोनों कोच एजुकेटर्स की खेल यात्राएं और शैक्षणिक पृष्ठभूमि भले ही अलग रही हों, मगर दोनों का मूल विचार एक बिंदु पर पूरी तरह सहमत है कि फुटबॉल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक बेहद असरदार माध्यम है।

एएफसी ‘B’ (AFC ‘B’) लाइसेंस धारक कोच कीर्ति कश्यप ने यूथ फुटबॉल, प्रशिक्षक प्रशिक्षण और खेल आधारित शिक्षण प्रणालियों में लंबे समय तक व्यापक काम किया है। उनके कोचिंग अनुभव में दिल्ली अंडर-17 (U17) गर्ल्स टीम के साथ काम करने के अलावा इंडियन सुपर लीग (ISL) के प्रमुख क्लबों दिल्ली डायनामोज एफसी (Delhi Dynamos FC) और ओडिशा एफसी (Odisha FC) के युवा विकास सेटअप का मार्गदर्शन करना शामिल रहा है। कीर्ति की यह यात्रा दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन से फुटबॉल कोचिंग को कैसे व्यापक सामाजिक स्तर तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने ब्रिटिश काउंसिल और प्रीमियर लीग के प्रीमियर स्किल्स कार्यक्रम से जुड़कर अपनी औपचारिक यात्रा शुरू की थी, जिसका बुनियादी मकसद स्थानीय कोचों और मैच अधिकारियों को ऐसे प्रोजेक्ट्स बनाने में सक्षम करना था जो समाज के हर वर्ग के लिए पूरी तरह खुले और सुलभ हों।

दूसरी तरफ नरिंदर टोकस के लिए कोचिंग कभी भी केवल गेंद पास करने या टैक्टिक्स सिखाने तक सीमित नहीं रही। शारीरिक शिक्षा, एथलेटिक ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स लीडरशिप के क्षेत्र में उनका करियर 18 साल से अधिक का रहा है। अपने इस लंबे अनुभव के दौरान उनका मुख्य जोर हमेशा एक ऐसा सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल तैयार करने पर रहा है जहां कोई भी युवा बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सके और खुद को अभिव्यक्त कर सके। उनकी कोचिंग पद्धति का मूल आधार यह है कि हर बच्चे को खेल के जरिए एक सार्थक और सुखद अनुभव मिलना चाहिए।

इसी सोच को अमलीजामा पहनाने के लिए नरेंद्र ने प्रीमियर लीग कोच एजुकेशन प्रोग्राम से सीखे गए स्टेप्स (STEPS) और स्माइल्स (SMILES) फ्रेमवर्क को अपने प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य कोचों को सामान्य ड्रिल्स से आगे ले जाकर यह सोचने के लिए प्रेरित करना है कि वे अपने सत्र को बच्चों के सामने कैसे प्रस्तुत करते हैं। इन अवधारणाओं में सुरक्षित, समावेशी, आनंददायक और सीखने पर केंद्रित सत्र आयोजित करने पर बल दिया जाता है, साथ ही कोचों को जरूरी व्यावहारिक टूल्स दिए जाते हैं। टोकस ने इन तरीकों को अन्य कोचों तक भी पहुंचाया है ताकि स्कूलों और अकादमियों में युवा शिक्षार्थियों के साथ काम करने का स्तर बेहतर हो सके। दोनों ही विशेषज्ञों के लिए यह नेक्स्टजेन आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यशाला नहीं, बल्कि अनुभवी खेल प्रेमियों के साथ ज्ञान का आदान-प्रदान करने और उसे समुदायों तक पहुंचाने का सशक्त जरिया है।

## जमीनी प्रशिक्षकों पर निवेश की आवश्यकता
नेक्स्टजेन कोच प्रोग्राम को पूरी तरह से ग्रासरूट स्तर पर फुटबॉल के विकास को रफ्तार देने के लिए तैयार किया गया है। इसकी मूल अवधारणा इस सरल सत्य पर टिकी है कि किसी प्रशिक्षण का लाभ सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए जो कार्यशाला के कमरे में उपस्थित है। यह पाठ्यक्रम स्थानीय कम्युनिटी कोचों की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता को निखारने का कार्य करता है।

ऑस्कर फाउंडेशन के सहयोग से संचालित यह अभियान प्रशिक्षकों को ऐसी व्यावहारिक समझ और तकनीक प्रदान करता है जिससे वे अपने-अपने इलाकों में जाकर बच्चों के संपूर्ण विकास को गति दे सकें। नेक्स्टजेन का ढांचा पारंपरिक खेल कोचिंग की सीमाओं से काफी आगे निकल जाता है, क्योंकि इसमें संवाद कौशल, नेतृत्व, खिलाड़ियों की शारीरिक व मानसिक भलाई, सामुदायिक जुड़ाव और एक सुरक्षित माहौल बनाने पर विशेष बल दिया जाता है। मई 2026 के गोवा शिविर में 30 से ज्यादा प्रतिभागियों ने जिस गहराई से इन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीख हासिल की थी, उसी स्तर की तैयारी अब मुंबई सत्र के लिए भी की जा रही है।

## इसका आप पर असर
यह पहल खेल प्रशिक्षण के जरिए स्थानीय बस्तियों और स्कूलों के बच्चों के सामाजिक व मानसिक विकास को सीधा सहारा देती है।

- **भारत में:** देश भर के 18 राज्यों में खेलों से जुड़े 7,500 से अधिक कोच और शिक्षक प्रशिक्षित हो रहे हैं जिससे 1.64 लाख से ज्यादा बच्चों को सुरक्षित माहौल में खेल सीखने का अवसर मिल रहा है। इससे जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति और सकारात्मक सोच को व्यापक विस्तार मिल रहा है।
- **मुंबई में:** अक्टूबर के महीने में आयोजित हो रहे इस सत्र से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कम्युनिटी कोचों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अतिरिक्त यहां दिव्यांग बच्चों के लिए भी विशेष खेल पहल से समावेशी वातावरण तैयार किया जा रहा है।
- **अभिभावकों और युवाओं के लिए:** स्थानीय बस्तियों के बच्चों को ऐसे मेंटर्स मिल रहे हैं जो खेल के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और जीवन कौशलों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इससे मैदान में जाने वाले बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में खुद को निखारने का मौका मिलता है।
- **खेल प्रशिक्षकों के लिए:** ग्रासरूट स्तर पर काम करने वाले स्थानीय कोचों को आधुनिक खेल विज्ञान और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों की व्यवहारिक ट्रेनिंग मिल रही है। इस ज्ञान की बदौलत वे अपनी अकादमियों और स्कूलों में बच्चों को बेहतर मार्गदर्शन देने में सक्षम हो रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय खेलों में केवल तकनीकी प्रशिक्षण के बजाय समग्र सामाजिक विकास और बच्चों के कल्याण पर केंद्रित मेंटरशिप की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी अंतर को पाटने के लिए प्रीमियर लीग और ऑस्कर फाउंडेशन ने जमीनी कोचों को आधुनिक व समावेशी शिक्षण पद्धतियों से लैस करने का निर्णय लिया।

- **सीमित पारंपरिक प्रशिक्षण:** पारंपरिक कोचिंग में अक्सर सारा जोर मैच जीतने और शारीरिक ड्रिल्स पर होता था, जिससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी विकास की अनदेखी हो जाती थी। इस असंतुलन को ठीक करने के लिए मेंटरशिप आधारित प्रशिक्षण की सख्त जरूरत महसूस की गई।
- **दो दशकों की निरंतर भागीदारी:** वर्ष 2007 से चल रहे प्रीमियर स्किल्स कार्यक्रम के अनुभव ने यह साबित किया कि जमीनी स्तर के कोचों को सक्षम बनाकर समुदायों में गहरा सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। इसी लंबी साझीदारी ने नेक्स्टजेन जैसी विशेष पहलों की जमीन तैयार की।
- **समावेशी खेल की आवश्यकता:** खेल के मैदानों पर सभी वर्गों और दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देने के लिए ऐसे प्रशिक्षकों की मांग थी जो सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार कर सकें। इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए व्यावहारिक शिक्षण टूल्स को जमीनी स्तर पर साझा किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रीमियर लीग का नेक्स्टजेन कोच प्रोग्राम क्या है?
यह एक विशेष खेल प्रशिक्षण पहल है जिसका उद्देश्य भारत में जमीनी स्तर के फुटबॉल कोचों को बेहतर मेंटर्स के रूप में तैयार करना है ताकि वे बच्चों के खेल के साथ उनके समग्र विकास में मदद कर सकें।

### 2. नेक्स्टजेन का अगला संस्करण कब और कहां आयोजित होगा?
इस कार्यक्रम का अगला संस्करण अक्टूबर के महीने में मुंबई में आयोजित किया जा रहा है।

### 3. इस कार्यक्रम का पहला संस्करण कब और कहां हुआ था?
नेक्स्टजेन प्रोग्राम का पहला संस्करण मई 2026 में गोवा में आयोजित हुआ था, जिसमें 30 से अधिक स्थानीय कोचों ने भाग लिया था।

### 4. मुंबई सत्र में मुख्य कोच एजुकेटर्स के रूप में कौन मार्गदर्शन करेगा?
इस कार्यक्रम में एएफसी 'B' लाइसेंस कोच कीर्ति कश्यप और 18 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले नरिंदर टोकस अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे।

### 5. भारत में इस अभियान से अब तक कितने राज्यों और लोगों को फायदा मिला है?
यह पहल 18 राज्यों में पहुंच चुकी है, जहां 7,500 से ज्यादा कोच, रेफरी और शिक्षक जुड़े हैं और 1.64 लाख से अधिक युवाओं तक इसकी पहुंच बनी है।

### 6. नरेंद्र टोकस अपने प्रशिक्षण में किन विशेष फ्रेमवर्क्स का उपयोग करते हैं?
वे अपने कोचिंग सत्रों को सुरक्षित, समावेशी और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए प्रीमियर लीग से सीखे गए स्टेप्स (STEPS) और स्माइल्स (SMILES) फ्रेमवर्क का उपयोग करते हैं।

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