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  "type": "article",
  "title": "निजी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने की योजना रद्द होने के बाद फीफा अध्यक्ष जिआनी इन्फेंटिनो के खिलाफ यूईएफए का हमला, नेतृत्व से खत्म हुआ भरोसा",
  "summary": "विश्व कप समेत प्रमुख टूर्नामेंटों में निजी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का विवादित प्रस्ताव वापस लेने के बावजूद फीफा अध्यक्ष जिआनी इन्फेंटिनो के खिलाफ वैश्विक विरोध तेज हो गया है। यूरोप समेत कई प्रमुख फुटबॉल महासंघों ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं।",
  "content": "विश्व कप जैसी प्रमुख प्रतियोगिताओं में निजी इक्विटी फर्मों को हिस्सेदारी बेचने की गुप्त योजना रद्द होने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्रशासन में गहरा संकट पैदा हो गया है। यूरोपीय फुटबॉल गवर्निंग बॉडी, यूईएफए ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसे अब फीफा अध्यक्ष जिआनी इन्फेंटिनो के नेतृत्व पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। यूईएफए ने इन्फेंटिनो पर पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही के उन वादों को तोड़ने का आरोप लगाया है, जो उन्होंने पद संभालते समय किए थे। हालांकि शनिवार को विवाद बढ़ता देख फीफा प्रमुख को इस वाणिज्यिक योजना से पीछे हटने का ऐलान करना पड़ा, लेकिन इस कदम से महासंघों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। मार्च में होने वाले फीफा कांग्रेस में चौथे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने जा रहे इन्फेंटिनो पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।\n\nव्यावसायिक हिस्सेदारी बेचने की योजना रद्द होने से उपजा बड़ा संकट\nजिआनी इन्फेंटिनो फरवरी 2016 से फीफा के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। उनके नौ साल से अधिक के कार्यकाल में वित्तीय विस्तार पर जोर दिया जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक व्यावसायिक योजना ने फुटबॉल जगत की नींव हिला दी। फीफा ने अपनी प्रमुख प्रतियोगिताओं और विशेष रूप से विश्व कप के संचालन के लिए एक अलग व्यावसायिक सहायक कंपनी बनाने का खाका तैयार किया था। इस योजना के तहत बाहरी निजी निवेशकों को उस नई संस्था में गैर-नियंत्रण वाली अल्पसंख्यक हिस्सेदारी खरीदने का अवसर दिया जाना था। जैसे ही इस गुप्त सौदे की जानकारी सार्वजनिक हुई, खेल प्रशासन से जुड़े दिग्गजों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया।\n\nविरोध की तीव्रता को देखते हुए शनिवार को फीफा प्रमुख ने घोषणा की कि गवर्निंग बॉडी प्रतियोगिताओं के अधिकार बेचने के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ेगी। इस वापसी को स्वीकार करते हुए यूईएफए ने इसे पूरे खेल की जीत करार दिया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि इस फैसले से नेतृत्व संकट खत्म नहीं हो जाता। यूईएफए के अनुसार, फीफा में विश्वास बहाल करने की प्रक्रिया अभी केवल शुरू हुई है और वर्तमान नेतृत्व अपने मूल दायित्वों को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।\n\nविवादित निवेश प्रस्ताव और उसकी अंदरूनी बातें\nइस पूरे विवाद के केंद्र में फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज नाम की एक नई संस्था का गठन था। फीफा और उसके रणनीतिक सलाहकारों ने विश्व कप जैसे मेगा इवेंट्स से मिलने वाले राजस्व को कई गुना बढ़ाने के उद्देश्य से इस सहायक कंपनी की रूपरेखा तैयार की थी। इसके जरिए वॉल स्ट्रीट और निजी इक्विटी फंडों से अरबों डॉलर की पूंजी जुटाने का लक्ष्य रखा गया था।\n\nनिवेशकों को लुभाने के लिए अमरीकी वेंचर कैपिटल फर्म थ्राइव इटर्नल को इस निवेशक समूह का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था। थ्राइव इटर्नल की स्थापना जोशुआ कुशनर ने की थी, जो अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड के भाई हैं। हालांकि, योजना के सामने आते ही उपजे विवाद और भारी जनविरोध के कारण इस निवेश फर्म के लिए स्थिति साख के संकट में बदल गई, जिससे अंततः फीफा को इस कदम को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।\n\nवॉल स्ट्रीट का दस्तावेज और वित्तीय खाका\nइन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन द्वारा तैयार किए गए 25 पन्नों के गोपनीय दस्तावेज में फीफा की योजनाओं का विस्तार से ब्योरा दिया गया था। इस दस्तावेज में फुटबॉल विश्व कप को दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल आयोजन बताया गया, लेकिन साथ ही यह टिप्पणी भी की गई कि फीफा वर्तमान में अपनी इस संपत्ति से क्षमता के अनुसार वित्तीय लाभ कमाने में पीछे रहा है।\n\nनिवेश प्रस्ताव के तहत फीफा टूर्नामेंटों के स्वरूप को और बड़ा करने की योजना थी, जिससे 2035-2039 के चक्र के दौरान प्रत्येक सदस्य राष्ट्रीय संघ को लगभग 24 मिलियन यूरो (लगभग £20.5 मिलियन) का संभावित भुगतान किया जा सके। सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि इस पूरे 25 पन्नों के रणनीतिक खाके में महिला फुटबॉल का एक बार भी उल्लेख नहीं किया गया था। इस उपेक्षा ने महिला खेल से जुड़े संगठनों और समर्थकों को भी गहरे तनाव में डाल दिया।\n\nदुनियाभर के फुटबॉल महासंघों का कड़ा विरोध और फीफा का यू-टर्न\nजैसे ही इस योजना की खबरें बाहर आईं, यूरोप से लेकर अमरीका और एशिया तक फुटबॉल प्रशासक एकजुट हो गए। यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था यूईएफए ने गुरुवार को एक आपातकालीन बैठक की और सर्वसम्मति से प्रस्ताव के पारित होने पर भविष्य के विश्व कप का पूरी तरह से बहिष्कार करने का वोट दिया। यूईएफए ने कड़े शब्दों में कहा कि फुटबॉल विश्व कप कोई सामान्य वित्तीय निवेश उत्पाद नहीं है जिसे बाजार में बेचा जा सके।\n\nयूरोप के रुख का समर्थन करते हुए उत्तर, मध्य अमरीका और कैरेबियन क्षेत्र के फुटबॉल महासंघ कॉनकेकैफ ने भी इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। कॉनकेकैफ के अधिकांश सदस्य संघों ने स्वीकार किया कि उनका इन्फेंटिनो के नेतृत्व से भरोसा उठ चुका है। इसके साथ ही एशियाई फुटबॉल महासंघ (एएफसी) ने भी यूईएफए और कॉनकेकैफ के साथ एकजुटता दिखाई, जिससे फीफा मुख्यालय अलग-थलग पड़ गया।\n\n2016 के वादों का हवाला देकर यूईएफए का तीखा हमला\nफीफा द्वारा प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा के कुछ घंटों बाद यूईएफए ने एक विस्तृत और आक्रामक बयान जारी किया। बयान में सीधे तौर पर इन्फेंटिनो के 2016 के चुनावी भाषण को उद्धृत किया गया, जिसमें उन्होंने फीफा अध्यक्ष बनते समय पारदर्शिता और जवाबदेही का वादा किया था। इन्फेंटिनो ने उस समय राष्ट्रीय संघों से कहा था कि फीफा का पैसा अध्यक्ष का नहीं बल्कि संघों का है और इसका इस्तेमाल केवल फुटबॉल के विकास के लिए होना चाहिए।\n\nयूईएफए ने कहा कि इन्फेंटिनो अपने दोनों प्रमुख वादों को पूरा करने में असफल रहे हैं। गुप्त तरीके से पीछे के दरवाजे से तैयार किए गए इस अस्पष्ट सौदे में पारदर्शिता का नामोनिशान नहीं था। यूईएफए ने यह भी आरोप लगाया कि फीफा अपने बैंक खातों में निष्क्रिय पड़े भारी-भरकम फंड का उपयोग खेल के विकास के लिए नहीं कर रहा है। यूईएफए का कहना था कि जब बैंक में पैसा मौजूद है, तो खेल की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए फुटबॉल की प्रमुख परिसंपत्तियों को बेचने की कोई आवश्यकता नहीं है।\n\nहाई-प्रोफाइल इस्तीफे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं\nइस विवाद का असर फीफा के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे पर भी देखने को मिला। वैश्विक रणनीति और शासन मामलों में इन्फेंटिनो के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कॉर्डेरो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉर्डेरो ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव फुटबॉल के हितों के खिलाफ है और यह खेल के भविष्य को गिरवी रखने जैसा है।\n\nखेल जगत से बाहर राजनीतिक गलियारों में भी इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई। यूके के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा कि जिआनी इन्फेंटिनो फीफा का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं। विभिन्न महाद्वीपों के प्रशासकों और राजनीतिक हस्तियों के एक साथ आने से फीफा अध्यक्ष पर दबाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया।\n\nचौथे कार्यकाल की दौड़ और इन्फेंटिनो के सामने अनिश्चित भविष्य\nमार्च में आयोजित होने वाले फीफा कांग्रेस में जिआनी इन्फेंटिनो चौथे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस हालिया विवाद ने उनके चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। महासंघों के भीतर असंतोष इतना गहरा है कि चुनाव में उनकी निर्विरोध जीत या निर्बाध वापसी पर बड़े सवालिया निशान लग गए हैं।\n\nयूईएफए ने स्पष्ट किया है कि वह अन्य महाद्वीपीय महासंघों और राष्ट्रीय संघों के साथ मिलकर एक ऐसा सुरक्षात्मक ढांचा तैयार करेगा ताकि भविष्य में कोई भी नेतृत्व इस तरह के गुप्त सौदे न कर सके। इसके अलावा, फीफा फॉरवर्ड कार्यक्रम के माध्यम से संसाधनों के पारदर्शी और न्यायसंगत वितरण के लिए एक नई योजना प्रस्तावित की जाएगी। इस संकट ने साबित कर दिया है कि फुटबॉल की प्रमुख संपत्तियों के व्यावसायीकरण की कोशिशों को खेल समुदाय किसी भी कीमत पर स्वीकार करने को तैयार नहीं है।\n\nइसका आप पर असर\nफुटबॉल प्रशंसकों और खेल प्रेमियों के लिए:\n\n• विश्व कप जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के निजीकरण और वाणिज्यिक अधिकार बेचने की योजना रुक गई है, जिससे टूर्नामेंट की पारंपरिक पहचान सुरक्षित रहेगी।\n• फीफा के बैंक खातों में जमा निष्क्रिय धन का उपयोग दुनिया भर में बुनियादी (ग्रासरूट्स) फुटबॉल के विकास में करने का दबाव बढ़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूईएफए ने जिआनी इन्फेंटिनो के नेतृत्व पर सवाल क्यों उठाए?\nयूईएफए ने आरोप लगाया कि इन्फेंटिनो ने 2016 के अपने चुनावी वादों को तोड़ा है और बिना परामर्श के फीफा की प्रतियोगिताओं में निजी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का अपारदर्शी सौदा तैयार किया।\n\n2. फीफा का विवादित निवेश प्रस्ताव क्या था?\nफीफा विश्व कप जैसे मुख्य आयोजनों को संचालित करने के लिए फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज नामक एक व्यावसायिक कंपनी बनाना चाहता था और उसमें निजी निवेशकों को अल्पसंख्यक हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव था।\n\n3. किन अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्थाओं ने इस योजना का विरोध किया?\nयूरोप की गवर्निंग बॉडी यूईएफए, उत्तर व मध्य अमरीका की संस्था कॉनकेकैफ और एशियाई फुटबॉल महासंघ (एएफसी) ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।\n\n4. इस योजना के विरोध में किसने इस्तीफा दिया?\nजिआनी इन्फेंटिनो के वैश्विक रणनीति और शासन मामलों के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कॉर्डेरो ने इस प्रस्ताव को खेल के भविष्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।\n\n5. इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन के दस्तावेज में क्या कहा गया था?\n25 पन्नों के दस्तावेज में विश्व कप को सबसे ज्यादा देखा जाने वाला आयोजन लेकिन कम कमाई करने वाली संपत्ति बताया गया था, और 2035-2039 चक्र में राष्ट्रीय संघों को 24 मिलियन यूरो के भुगतान का लक्ष्य रखा गया था।",
  "url": "https://trendkia.com/football/niji-niveshakon-ko-hissedari-bechane-ki-yojana-radda-hone-ke-bada-fifa-adhyaksha-gianni-infantino-ke-khilapha-uefa-ka-hamala-netri-12736",
  "category": "फुटबॉल",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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