बिना ड्राइवर वाली कारों में लेटकर सफर करना कितना सुरक्षित? क्रैश टेस्ट के नियम बदलने की तैयारी सेल्फ-ड्राइविंग कारों में झुककर या लेटकर बैठने का चलन पारंपरिक सुरक्षा मानकों और क्रैश टेस्ट डमीज को पूरी तरह बदलने पर मजबूर कर रहा है। जब कार को चलाने के लिए स्टीयरिंग व्हील पकड़ने की मजबूरी खत्म हो जाती है, तो सफर के तौर-तरीके भी पूरी तरह बदल जाते हैं। ऐसी गाड़ियों की अगली सीट पर बैठा व्यक्ति खाना खाने, वीडियो गेम खेलने, फिल्में देखने या दफ्तर का काम निपटाने के लिए आजाद होता है। कई लोग इस खाली समय में आराम से सोने को प्राथमिकता देते हैं। टेस्ला के साइबरकैब जैसे वाहनों में सीटें काफी पीछे तक झुक सकती हैं, जिससे यात्री बिल्कुल लेटकर सफर करने की सुविधा महसूस करते हैं। हालांकि, तकनीक के इस आरामदेह पहलू के पीछे एक गहरा सुरक्षा संकट भी छिपा हुआ है, जिस पर अब दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां नए सिरे से ध्यान दे रही हैं। सवारी से जुड़े आधिकारिक दिशा-निर्देशों में टेस्ला स्पष्ट करता है कि स्वायत्त वाहनों में सफर करने वालों को अपनी सीट की पीठ को सीधी स्थिति से 35 डिग्री से अधिक पीछे नहीं झुकाना चाहिए। इसके साथ ही सीटबेल्ट को कूल्हों पर ठीक से कसा होना चाहिए और दोनों पैर फर्श पर टिके रहने चाहिए। इस तरह बैठने से किसी अचानक ब्रेक या टक्कर की स्थिति में चोट का जोखिम काफी कम हो जाता है। ऑटोमोबाइल सुरक्षा शोधकर्ताओं का भी मानना है कि पारंपरिक सीधी मुद्रा से अलग बैठने पर किसी भी गाड़ी में गंभीर चोट लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है, भले ही यात्री ने सीटबेल्ट बांध रखी हो। अमेरिका के संघीय सुरक्षा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में सड़क हादसों में जान गंवाने वाले 42 लोग ऐसे पाए गए थे जिनकी सीट सामान्य सीधी स्थिति में नहीं थी बल्कि पीछे झुकी हुई थी। सीट पर झुककर बैठने के अनदेखे खतरे और डेटा की कमी सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि 42 मौतों का यह आंकड़ा हकीकत से काफी कम हो सकता है। इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट फॉर हाईवे सेफ्टी की वरिष्ठ शोध इंजीनियर बेकी मुलर के अनुसार, किसी भीषण दुर्घटना के बाद यह पता लगाना बेहद मुश्किल होता है कि हादसे से ठीक पहले या टक्कर के दौरान व्यक्ति किस मुद्रा में बैठा था। जबरदस्त टक्कर इंसानी शरीर को अपनी जगह से पूरी तरह हिला देती है। इसके अलावा, आपातकालीन बचाव दल का मुख्य मकसद क्षतिग्रस्त वाहनों से घायलों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकालना होता है। ऐसे नाजुक पलों में शायद ही कोई यह दर्ज करने की स्थिति में होता है कि पीड़ित व्यक्ति किस कोण पर झुककर बैठा था। अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) के प्रवक्ता ने भी स्वीकार किया है कि दुर्घटनाओं में झुकी हुई स्थिति में बैठे यात्रियों से जुड़ा जमीनी डेटा बेहद सीमित है। हालांकि, टेस्ला साइबरकैब जैसी बिना ड्राइवर वाली गाड़ियों के बाजार में आने से सरकारी नियामकों को इस पुराने लेकिन बेहद खतरनाक विषय की गहन पड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ा है। एजेंसी के अनुसार, जब ड्राइविंग की आवश्यकता ही नहीं रहेगी, तब अधिकांश यात्री झुककर या लेटकर यात्रा करना पसंद करेंगे। इसी संभावना को देखते हुए स्वचालित वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा की समीक्षा का पहला आधार झुकी हुई मुद्रा को बनाया गया है। पुराने नियम और इंसानी शरीर पर सीटबेल्ट का दबाव मौजूदा वाहन सुरक्षा नियम और मानक कई दशक पहले तय किए गए थे, जो यह मानकर चलते हैं कि यात्री बिल्कुल सीधे बैठे हैं और उनका चेहरा आगे की तरफ है। गाड़ियों में लगे एयरबैग्स भी इसी सीधी मुद्रा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। यहां तक कि क्रैश टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक डमीज के कूल्हे मुड़ते नहीं हैं, जिसका मतलब है कि वे इंसानों की तरह झुक या ढीली मुद्रा में आ ही नहीं सकतीं। नए सुरक्षा नियम बनाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययनों के प्रस्ताव लाने पड़ते हैं, बजट जुटाना होता है और फिर जनता तथा उद्योगों से राय लेनी पड़ती है, जिसमें कई साल लग जाते हैं। पारंपरिक सीटबेल्ट इंसानी शरीर के मजबूत पेल्विक हिस्से यानी कूल्हे की हड्डी पर दबाव रोकने के लिए डिजाइन की गई हैं। जब कोई व्यक्ति सीट को पीछे झुकाकर लेट जाता है या तिरछा बैठता है, तो सीटबेल्ट अपनी सही जगह पर नहीं रह पाती। दुर्घटना के दौरान यह बेल्ट मजबूत हड्डी के बजाय पेट के नरम हिस्से पर भयानक दबाव डालती है। इसके कारण अंदरूनी रक्तस्राव, रीढ़ की निचली हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर, कूल्हे की चोटें और नाजुक अंगों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। पैरों और पंजों में भी गंभीर चोटें आ सकती हैं, जो ठीक होने के बाद भी व्यक्ति के सामान्य चलने-फिरने की क्षमता को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकती हैं। अस्थायी अनुमतियों से लेकर उन्नत डमीज के परीक्षण तक नई सीटिंग व्यवस्था वाली बिना ड्राइवर की कारें उतारने वाली कंपनियों को फिलहाल विशेष सरकारी मंजूरी की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अमेजन की सहायक कंपनी जूक्स ने एक ऐसी गाड़ी बनाई है जिसमें स्टीयरिंग व्हील नहीं है और यात्री आमने-सामने की बेंचों पर बैठते हैं। जूक्स ने 2022 में स्वयं सुरक्षा मानकों की पुष्टि करने की कोशिश की थी जिसे नियामक ने खारिज कर दिया। बाद में 2025 के अंत में औपचारिक आवेदन के महीनों बाद कंपनी को दो साल के लिए 5,000 रोबोटैक्सी चलाने की सीमित अनुमति मिली। टेस्ला भी साइबरकैब को लेकर इसी तरह की प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसकी जांच चल रही है। सुरक्षा नियामक अब इस समस्या का स्थायी समाधान तलाश रहे हैं। अमेरिकी संसद को सौंपी गई मार्च की रिपोर्ट में NHTSA ने बताया कि वह विभिन्न आकारों के यात्रियों की शारीरिक प्रतिक्रिया और चोटों को समझने पर काम कर रहा है। इसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी क्रैश डमी निर्माता कंपनी ह्यूमेनेटिक्स ने विशेष आधुनिक डमीज तैयार की हैं। इन आधुनिक डमीज को थॉर (THOR) कहा जाता है। ह्यूमेनेटिक्स ने 2019 से थॉर-एवी (THOR-AV) नामक एक विशेष मॉडल का परीक्षण शुरू किया है। इस डमी का पेल्विस काफी लचीला है और इसे 25, 45 तथा 65 डिग्री के कोणों पर झुकाया जा सकता है। इन डमीज में सैकड़ों सेंसर लगे होते हैं और इनकी कीमत लाखों डॉलर होती है। वैश्विक दौड़ में चीन आगे और अमेरिका पर उठते सवाल ह्यूमेनेटिक्स के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस ओ'कॉनर के मुताबिक, फिलहाल किसी भी देश के कानून में थॉर-एवी डमी से क्रैश टेस्ट अनिवार्य नहीं किया गया है। लेकिन उनका मानना है कि इस तकनीक को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने वाला पहला देश अमेरिका नहीं बल्कि चीन होगा। चीन के प्रमाणन निकाय सीसीएआरआई ने थॉर-एवी के साथ सैकड़ों परीक्षण पूरे कर लिए हैं और अगले दो से तीन वर्षों में वहां झुकी हुई सीटों का क्रैश टेस्ट अनिवार्य होने की उम्मीद है। यूरोप की जो कंपनियां चीन में गाड़ियां बेचती हैं, उन्हें भी इन मानकों को अपनाना होगा। चीन के ऑटो नियामक ने जून में तथाकथित जीरो-ग्रेविटी सीटों पर भी कड़े नियम प्रस्तावित किए हैं, जो शरीर का वजन बराबर बांटकर लेटने की सुविधा देती हैं। इन प्रस्तावों के तहत ड्राइवर की सीट को 35 डिग्री से अधिक झुकने से रोका जाएगा और तेज रफ्तार पर सीट झुकने पर चेतावनी जारी की जाएगी। क्रिस ओ'कॉनर का मानना है कि अमेरिका इस मामले में पीछे छूट गया है क्योंकि वर्षों तक यह भरोसा दिलाया गया कि बिना ड्राइवर की गाड़ियां कभी थकेंगी या लड़खड़ायेंगी नहीं, जिससे नए सुरक्षा नियमों की जरूरत ही नहीं समझी गई। वहीं, आईआईएचएस की वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक एलेक्स मुलर चेतावनी देती हैं कि नियमों को आधुनिक और तेज बनाने की होड़ में बुनियादी सुरक्षा मानकों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि गाड़ी के डिजाइन में मामूली बदलाव भी पूरी सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से परखने की मांग करता है। इसका आप पर असर ड्राइवरलेस कारों में लेटकर सफर करने की आदत गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में जानलेवा साबित हो सकती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। • सीट की स्थिति: सफर के दौरान सीट की पीठ को 35 डिग्री से ज्यादा पीछे झुकाकर न बैठें। ऐसा करने से किसी भी अचानक झटके या टक्कर में रीढ़ की हड्डी और पेट के अंगों को गंभीर चोट से बचाया जा सकता है। • सीटबेल्ट का सही इस्तेमाल: सीटबेल्ट का निचला हिस्सा हमेशा कूल्हों की मजबूत हड्डी पर कसा होना चाहिए। अगर आप सीट झुकाकर बैठते हैं, तो बेल्ट पेट के नाजुक हिस्से पर खिसक जाती है जिससे अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है। • पैरों की सुरक्षा: यात्रा करते समय दोनों पैरों को गाड़ी के फर्श पर सीधा टिकाकर रखें। पैरों को सीट पर सिकोड़कर या ऊपर उठाकर रखने से टक्कर के वक्त पैर और पंजों में स्थाई अपंगता का खतरा रहता है। • नई कारों के नियम: आने वाले समय में गाड़ियां खरीदते समय आधुनिक क्रैश रेटिंग और जीरो-ग्रेविटी सीटों की चेतावनियों पर गौर करना जरूरी होगा। सुरक्षा नियमों में बदलाव के बाद ही नए मॉडल पूरी तरह सुरक्षित माने जाएंगे। ऐसा क्यों हुआ यह विषय इसलिए चर्चा में आया क्योंकि स्वचालित गाड़ियों के आने के बाद यात्रियों के लेटकर या झुककर बैठने की संभावना बढ़ गई है, जबकि मौजूदा सुरक्षा प्रणालियां सिर्फ सीधी मुद्रा के लिए बनी हैं। • ड्राइविंग से मुक्ति का चलन: जब स्टीयरिंग थामने की जरूरत खत्म हो जाती है, तो यात्री सफर में आराम करने या सोने के लिए सीटें पीछे झुकाते हैं। इस बदलती मानवीय आदत ने पारंपरिक सुरक्षा मानकों की खामियों को उजागर कर दिया है। • दशकों पुराने सुरक्षा मानक: मौजूदा सुरक्षा नियम और क्रैश टेस्ट डमीज केवल आगे की तरफ सीधे बैठे यात्रियों के हिसाब से डिजाइन किए गए थे। इन पुरानी डमीज के कूल्हे मुड़ नहीं सकते, जिससे झुकी हुई मुद्रा के खतरों का सटीक परीक्षण नहीं हो पा रहा था। • दुर्घटनाओं के आंकड़े और खतरे: अमेरिकी संघीय आंकड़ों में झुकी सीटों के कारण दर्जनों मौतों का पता चला है, जिससे नियामकों को इस पुराने खतरे की नए सिरे से जांच शुरू करनी पड़ी। सवाल-जवाब 1. टेस्ला साइबरकैब में सीट को कितने डिग्री तक झुकाने की सलाह दी जाती है? टेस्ला के आधिकारिक राइडर गाइड के अनुसार, सीट की पीठ को सीधी स्थिति से अधिकतम 35 डिग्री तक ही झुकाना चाहिए। 2. सीट झुकाकर बैठने पर सीटबेल्ट किस तरह नुकसान पहुंचा सकती है? झुककर बैठने से सीटबेल्ट कूल्हे की हड्डी से फिसलकर पेट पर आ जाती है, जिससे टक्कर में अंदरूनी अंगों और रीढ़ को गंभीर चोट लग सकती है। 3. थॉर-एवी (THOR-AV) क्रैश टेस्ट डमी की क्या खासियत है? इस आधुनिक डमी का पेल्विस लचीला है, जिसे 25, 45 और 65 डिग्री के कोणों पर झुकाकर ड्राइवरलेस कारों की सुरक्षा जांची जा सकती है। 4. कौन सा देश सबसे पहले झुकी हुई सीटों का क्रैश टेस्ट अनिवार्य कर सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अगले दो से तीन वर्षों में झुकी सीटों के लिए क्रैश टेस्ट नियम लागू करने वाला पहला देश बन सकता है। https://trendkia.com/gear/bina-draivara-vali-karon-men-letakara-saphara-karana-kitana-surakshita-crash-test-ke-niyama-badalane-ki-taiyari-34293 TrendKia — Har trend, sabse pehle.