गैजेट्स की असली मिल्कियत वापस पाने के लिए अमेरिका में खड़ा हुआ जनआंदोलन लुई रॉसमैन के नेतृत्व में चल रहा अभियान टेक कंपनियों के मनमाने सब्सक्रिप्शन मॉडल और उपकरणों पर थोपे गए डिजिटल प्रतिबंधों के खिलाफ मुखर हो गया है। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को उनके खरीदे गए सामान पर पूरा कानूनी और वास्तविक नियंत्रण दिलाना है। कैलिफोर्निया के सैन जोस में शुक्रवार की एक शाम को जब लुई रॉसमैन अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, तो पास की पटरियों से तेज रफ्तार ट्रेन सीटी बजाते हुए गुजरी। उनसे पहले जितने भी वक्ता आए, वे ट्रेन के भारी शोर और हार्न की आवाज के बीच रुक जाते थे और माहौल शांत होने के बाद ही अपना भाषण दोबारा शुरू करते थे। मगर रॉसमैन अपनी बात के प्रवाह में इतने डूबे थे कि वे रुके नहीं। उन्होंने अपनी आवाज को और बुलंद किया और शोर पर हावी होते हुए अपने मुद्दे पर जोर-शोर से बोलना जारी रखा। यह कार्यक्रम किसी बड़ी कॉन्फ्रेंस का हिस्सा नहीं था, बल्कि ग्राहकों के कानूनी स्वामित्व के अधिकारों को लेकर चल रही एक राष्ट्रव्यापी मुहिम का पड़ाव था। ओन योर शिट दौरे का सैन जोस पड़ाव यह सभा ओन योर शिट नामक दौरे का सैन जोस पड़ाव थी, जिसे यूट्यूबर और मरम्मत के अधिकारों के हिमायती लुई रॉसमैन ने अपने गैर-लाभकारी संगठन फूफू के सहयोग से अमेरिका के कई शहरों में आयोजित किया है। सैन जोस में एक शराब भट्टी यानी ब्रूअरी के संकरे पोर्च में लगभग 80 लोग इस चर्चा को सुनने के लिए जुटे थे। इस राष्ट्रव्यापी श्रृंखला का अंतिम कार्यक्रम मैरीलैंड के सिल्वर स्प्रिंग्स में 1 अक्टूबर को निर्धारित है। लोगों की भीड़ यह साफ दर्शा रही थी कि तकनीकी कंपनियों के रवैये से आम उपभोक्ता कितने खफा हैं। रॉसमैन के बोलने से पहले इस मंच पर कई अन्य महत्वपूर्ण संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे। इनमें इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन के एक पैरोकार, सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी की फिक्सिट वर्कशॉप के छात्र, और फिस्कर ओनर्स एसोसिएशन के एक प्रमुख शामिल थे। यह आखिरी समूह ऐसे वाहन मालिकों का मंच है जो अपनी आधुनिक कारों को कंपनी की बेरुखी या तकनीकी रुकावटों की वजह से कबाड़ बनने देने से इनकार कर चुके हैं। इन सभी की सबसे बड़ी साझा मांग एक बेहद खास कानून को रद्द कराने की है, जिसे डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट की धारा 1201 के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1998 में लागू किए गए डीएमसीए के इस प्रावधान के तहत विनिर्माताओं द्वारा किसी उपकरण में लगाए गए डिजिटल तालों या सॉफ्टवेयर सीमाओं को तोड़ना अथवा बाईपास करना गैरकानूनी माना जाता है। सॉफ्टवेयर के ताले और डिजिटल अधिकारों की लड़ाई शुरुआत में इस कानून को गैजेट्स और डिजिटल सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर पेश किया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ मरम्मत और उपभोक्ता अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने पाया कि बड़ी तकनीकी कंपनियां इसका इस्तेमाल पूरी तरह अपने फायदे के लिए कर रही हैं। कंपनियां हार्डवेयर उपकरणों पर सॉफ्टवेयर आधारित ताले जड़ देती हैं और बाद में खरीदार को उसी के खरीदे गए उपकरण का पूरा उपयोग करने के लिए अतिरिक्त पैसे चुकाने पर मजबूर करती हैं। इसी मनमानी का मुकाबला करने के लिए रॉसमैन ने केविन ओ'रेली के साथ मिलकर फूफू नाम की गैर-लाभकारी संस्था शुरू की है। यह संगठन ऐसे लोगों को आर्थिक इनाम यानी बाउंटी देता है जो किसी उपकरण पर लगे इन डिजिटल तालों को निष्क्रिय करने में सफल होते हैं, भले ही इसके लिए कंपनियों की ओर से कानूनी धमकियों का जोखिम ही क्यों न उठाना पड़े। सैन जोस के कार्यक्रम में रॉसमैन ने सीधे तौर पर वहां मौजूद भीड़ से पूछा कि कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें कंपनियों से मुकदमे की धमकियां मिलने पर मजा आता है। इस सवाल पर वहां मौजूद चार या पांच लोगों ने हाथ उठाए, जिनमें संघीय कंज्यूमर फाइनेंशियल प्रोटेक्शन ब्यूरो के पूर्व निदेशक रोहित चोपड़ा भी मुस्कुराते हुए शामिल थे। रॉसमैन ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि जब कोई कंपनी उन पर मुकदमा चलाने की कोशिश करती है तो उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि जब कंपनियां उन्हें कानूनी धमकियां भेजती हैं, तो वे उन चिट्ठियों को बाकायदा फ्रेम करवाकर अपने पास रख लेते हैं। सब्सक्रिप्शन और कंपनियों के मनमाने प्रतिबंधों का विरोध अपने भाषण में रॉसमैन ने उन सभी कंपनियों के मामलों को सिलसिलेवार उठाया जिनसे वे लगातार लड़ते आ रहे हैं। उन्होंने अमेज़न का उदाहरण दिया, जिसने अतीत में कई उपभोक्ताओं के किंडल से किताबें तक हटा दी थीं। इसके अलावा उन्होंने पानी के पाइप में लीकेज पकड़ने वाले सेंसर बनाने वाली कंपनी रूस्ट की भी तीखी आलोचना की, जिसने अपने स्टैंड-अलोन वाई-फाई उपकरणों को बंद कर दिया, जिससे उनके पुराने ग्राहकों के हाथ निराशा लगी। रॉसमैन के निशाने पर व्हीलचेयर बनाने वाली कंपनियां, एप्पल और सोनी भी रहीं। उन्होंने बीएमडब्ल्यू की उस हालिया हरकत पर भी कड़ा विरोध जताया जिसमें कंपनी ने अपने ग्राहकों की कारों की डैशबोर्ड स्क्रीन पर स्पाइडर-मैन फिल्म के विज्ञापनों को दिखा दिया था। रॉसमैन ने कंपनियों द्वारा किसी उत्पाद को बेचे जाने के बाद उसमें जबरन पेड सब्सक्रिप्शन जोड़ने की प्रवृत्ति को फिरौती सॉफ्टवेयर यानी रैनसमवेयर का एक रूप करार दिया। शराब भट्टी के उस तंग हिस्से में मौजूद लोगों में यह गुस्सा साफ देखा जा सकता था। जैसे-जैसे रॉसमैन उदाहरण दे रहे थे, भीड़ उनके समर्थन में नारे लगा रही थी और लोग खुद के साथ हुई ऐसी ही नाइंसाफियों के किस्से चिल्लाकर साझा कर रहे थे। रॉसमैन उन सभी लोगों की आवाज बन चुके थे जो हर सेवा के लिए सब्सक्रिप्शन मांगे जाने, सीडी और डीवीडी जैसे भौतिक मीडिया के खात्मे, और अपने ही खरीदे गए उपकरणों को खुद ठीक न कर पाने की मजबूरी से बेहद परेशान हैं। डिजिटल लाइब्रेरी से सामान गायब और वैश्विक स्तर पर कानून यह राष्ट्रव्यापी अभियान ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब तकनीकी कंपनियों के प्रति जनता की नाराजगी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। सोनी जैसी कंपनियां धीरे-धीरे डिस्क सपोर्ट को खत्म कर रही हैं और उपभोक्ताओं की डिजिटल लाइब्रेरी से खरीदे गए सामान को चुपचाप मिटा रही हैं। गूगल ने भी हाल ही में कुछ ऐसा ही किया और एक उपभोक्ता की डिजिटल लाइब्रेरी से द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स की कॉपी को हटा दिया। वहीं अमेज़न ने अपने बिल्कुल ठीक काम कर रहे पुराने किंडल मॉडलों के लिए सपोर्ट पूरी तरह बंद कर दिया है। आज के दौर में जब गैजेट्स और तकनीकी सामान लगातार महंगे होते जा रहे हैं, तब आम लोग आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं और अपनी पुरानी मशीनों को लंबे समय तक चालू रखना चाहते हैं। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन में नीति और वकालत की निदेशक कैथरीन ट्रेंडाकोस्टा ने भी मंच संभाला। उन्होंने टेक कंपनियों द्वारा हर छोटी-बड़ी सुविधा को सब्सक्रिप्शन सेवा में तब्दील करने की चाल पर गंभीर सवाल उठाए। ट्रेंडाकोस्टा ने स्पष्ट किया कि कंपनियों को न केवल लगातार सब्सक्रिप्शन का पैसा मिलता है बल्कि वे ग्राहकों का निजी डेटा भी हासिल कर लेती हैं। उनके मुताबिक यह व्यवस्था कंपनियों के लिए हर तरह से जीत और आम उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से हार का सौदा बनकर रह गई है। नियमों में सख्ती और नियामकों की नई पहल भले ही यह दौरा अपने समापन की तरफ बढ़ रहा हो, लेकिन दुनिया भर में उपकरणों की मरम्मत के अधिकार यानी राइट टू रिपेयर से जुड़े नियमों को लेकर दबाव बढ़ रहा है। इसी साल यूरोपीय संघ में ऐसे नए नियम लागू किए गए हैं जो कंपनियों के लिए यह अनिवार्य बनाते हैं कि वे उपभोक्ता उत्पादों के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद करें। इन नियमों के तहत उपकरणों को आसानी से ठीक करने योग्य बनाना और उनकी बैटरियों को आसानी से बदले जाने लायक रखना कंपनियों के लिए जरूरी कर दिया गया है। कृषि उपकरण बनाने वाली मशहूर कंपनी जॉन डीरे, जो लंबे समय से मरम्मत के सख्त नियमों के लिए सवालों के घेरे में रही है, उसे 99 मिलियन डॉलर के मुकदमे का सामना करना पड़ा है और अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन के एक आदेश के तहत उसे अपने उत्पादों को ठीक करने योग्य बनाने का निर्देश दिया गया है। अमेरिका में भी इस अधिकार के समर्थकों ने मरम्मत विरोधी कई विधेयकों को खारिज करवाने में सफलता पाई है और वे वाहनों की बेहतर मरम्मत तथा उत्पादों की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए कड़े संघीय नियमों की लगातार मांग कर रहे हैं। इसी बीच कंज्यूमर फाइनेंशियल प्रोटेक्शन ब्यूरो के पूर्व निदेशक रोहित चोपड़ा अब कैलिफोर्निया में एक नई भूमिका में हैं। वे उस कैलिफोर्निया बिजनेस एंड कंज्यूमर सर्विसेज एजेंसी के प्रमुख बन चुके हैं, जिसका गठन जुलाई के महीने में कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम द्वारा किया गया था। इस सभा के बाद हुई बातचीत में चोपड़ा ने अपनी इस नई एजेंसी के भावी लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को सामने रखा। चोपड़ा ने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक का मकसद सिर्फ बड़ी कंपनियों के बोर्डरूम में बैठे अधिकारियों या बड़े पदों पर काबिज लोगों को फायदा पहुंचाना नहीं होना चाहिए। उनके शब्दों में, तकनीक को हम सभी की जिंदगी बेहतर बनानी चाहिए, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि कई बार इसे लोगों के साथ धोखाधड़ी करने, उनकी जेब काटने, या उन्हें वास्तविक नुकसान पहुंचाने के इरादे से डिजाइन किया जाता है। जो लोग केवल अपना साधारण जीवन चलाने का प्रयास कर रहे हैं, वे इन व्यापारिक तौर-तरीकों से खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस करते हैं। चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में उनके आने का मकसद नई एजेंसी के बारे में जागरूकता फैलाना था ताकि उपभोक्ता अपने जनप्रतिनिधियों से संपर्क करें और अनुचित व्यावसायिक तरीकों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि उनकी एजेंसी अवैध हरकतों पर सख्त नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि नियमों का सही ढंग से पालन हो, ताकि नई तकनीक सचमुच हर नागरिक के हित में काम कर सके। सभा खत्म होने के बाद जब रॉसमैन से इस पूरे दौरे के अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें अंदेशा था कि लोग शायद सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले पिज्जा के लालच में आ रहे होंगे। लेकिन पूरे देश के अलग-अलग शहरों में लोगों की गहरी भागीदारी, उत्साह और इस मुद्दे के प्रति उनका गुस्सा देखकर वे बेहद सुखद रूप से हैरान हैं। रॉसमैन ने अपने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि आखिरकार अब बदलाव की लहर चल पड़ी है। इसका आप पर असर बड़ी टेक कंपनियों द्वारा गैजेट्स पर लगाए जाने वाले सॉफ्टवेयर तालों और मनमाने सब्सक्रिप्शन मॉडल का सीधा असर आपके खरीदे गए सामान की उम्र और जेब पर पड़ता है। • भारत में: यदि आप महंगे स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी या ऑटोमोबाइल खरीदते हैं, तो कंपनियों द्वारा हार्डवेयर को सॉफ्टवेयर से बांधने के कारण बाहर से मरम्मत कराना असंभव हो जाता है। इसके चलते ग्राहकों को मामूली खराबी पर भी आधिकारिक सर्विस सेंटर पर भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती है या नया उपकरण खरीदना पड़ता है। • अमेरिका में: कैलिफोर्निया और संघीय स्तर पर बन रहे कड़े नियमों से उपभोक्ताओं को अपने ट्रैक्टर, कार और इलेक्ट्रॉनिक्स को स्वतंत्र दुकानों पर ठीक कराने की कानूनी छूट मिल सकती है। इससे ग्राहकों के मरम्मत का खर्च घटेगा और कंपनियों द्वारा पुराने गैजेट्स को सॉफ्टवेयर अपडेट बंद करके कबाड़ बनाने की चाल पर रोक लगेगी। • गैजेट खरीदारों के लिए: कंपनियां बिक्री के बाद भी आपके उपकरण के फीचर्स पर मंथली सब्सक्रिप्शन थोपने या आपकी डिजिटल लाइब्रेरी से खरीदी गई फिल्में हटाने जैसी मनमानी नहीं कर सकेंगी। इससे आपकी खरीदी हुई डिजिटल सामग्री और भौतिक हार्डवेयर पर आपका वास्तविक और कानूनी मालिकाना हक सुरक्षित रहेगा। • खर्च और बचत: स्वतंत्र मैकेनिकों और खुद से मरम्मत करने की सुविधा मिलने से किसी भी गैजेट का इस्तेमाल दोगुने समय तक किया जा सकेगा। इससे हर दो या तीन साल में नया फोन या लैपटॉप खरीदने का वित्तीय बोझ सीधे तौर पर कम होगा। ऐसा क्यों हुआ यह जनआंदोलन इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि टेक कंपनियों ने कॉपीराइट सुरक्षा के नाम पर बने पुराने कानूनों का इस्तेमाल उपभोक्ताओं के हार्डवेयर पर अपना मनमाना नियंत्रण थोपने के लिए शुरू कर दिया था। • डीएमसीए की धारा 1201 का दुरुपयोग: 1998 के इस कॉपीराइट कानून का मूल उद्देश्य डिजिटल पायरेसी रोकना था, लेकिन निर्माताओं ने इसका इस्तेमाल अपने गैजेट्स पर सॉफ्टवेयर लॉक लगाने में किया ताकि कोई स्वतंत्र रूप से उनकी मरम्मत न कर सके। इसके चलते अपने ही उपकरण के लॉक को हटाना या उसे ठीक करना कानूनी जुर्म बना दिया गया। • सब्सक्रिप्शन आधारित मुनाफाखोरी: हार्डवेयर बिक्री के बाद भी लगातार कमाई बनाए रखने के लिए कंपनियों ने उपकरणों के बुनियादी फीचर्स पर मासिक शुल्क लगाना शुरू कर दिया। बीएमडब्ल्यू द्वारा डैशबोर्ड पर विज्ञापन दिखाना या अमेज़न द्वारा पुराने किंडल का सपोर्ट खत्म करना इसी रणनीति का नतीजा है। • डिजिटल मालिकाना हक का छलावा: जब ग्राहकों ने पाया कि उनके द्वारा पूरे पैसे देकर खरीदी गई फिल्में और किताबें कंपनियां एक झटके में उनकी लाइब्रेरी से हटा सकती हैं, तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा। इसी असंतोष ने लुई रॉसमैन जैसे एक्टिविस्ट्स को पूरे देश में इस मुहिम को खड़ा करने की जमीन दी। सवाल-जवाब 1. ओन योर शिट टूर का आयोजन किसने और क्यों किया? इस दौरे का आयोजन यूट्यूबर और मरम्मत अधिकार कार्यकर्ता लुई रॉसमैन ने अपने गैर-लाभकारी संगठन फूफू के जरिए किया है, ताकि कंपनियों द्वारा थोपे गए डिजिटल प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाई जा सके। 2. डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट की धारा 1201 क्या है? यह 1998 में बना अमेरिकी कानून है जो विनिर्माताओं द्वारा किसी उपकरण में लगाए गए डिजिटल तालों या सॉफ्टवेयर प्रतिबंधों को हटाने अथवा बायपास करने पर रोक लगाता है। 3. फूफू संगठन किस काम के लिए आर्थिक इनाम देता है? फूफू उन तकनीकी विशेषज्ञों को नकद इनाम देता है जो उपकरणों पर कंपनियों द्वारा लगाए गए डिजिटल तालों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय करते हैं। 4. इस राष्ट्रव्यापी दौरे का अंतिम कार्यक्रम कब और कहां होगा? इस दौरे का अंतिम कार्यक्रम 1 अक्टूबर को अमेरिका में मैरीलैंड के सिल्वर स्प्रिंग्स में आयोजित किया जाएगा। 5. जॉन डीरे कंपनी के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई है? मरम्मत विरोधी नीतियों के कारण जॉन डीरे पर 99 मिलियन डॉलर का मुकदमा हुआ है और अमेरिकी एफटीसी ने उसे अपने उत्पाद ठीक करने योग्य बनाने का निर्देश दिया है। https://trendkia.com/gear/gaijetsa-ki-asali-milkiyata-vapasa-pane-ke-lie-america-men-khara-hua-janaandolana-34166 TrendKia — Har trend, sabse pehle.