क्यूरिग अल्टा से बदलेगा कॉफी का अंदाज, प्लास्टिक और एल्युमीनियम पॉड्स की होगी छुट्टी क्यूरिग ने कंपोस्टेबल अल्टापाउंड्स पर आधारित नया अल्टा कॉफी मेकर पेश किया है, जो बिना प्लास्टिक कचरे के एस्प्रेसो और स्पेशलिटी ड्रिंक्स तैयार करता है। अमेरिकी घरों और दफ्तरों में लगभग तीन दशकों से प्लास्टिक के डिस्पोजेबल पॉड्स से कॉफी तैयार करने का चलन रहा है, लेकिन अब कॉफी बनाने का यह पारंपरिक तरीका बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। सालों की तकनीकी रिसर्च के बाद क्यूरिग ने अपने नए सिंगल-सर्व कॉफी मेकर अल्टा का अनावरण किया है। यह आधुनिक उपकरण पर्यावरण के अनुकूल ऐसे पॉड्स का उपयोग करता है जो प्लास्टिक और एल्युमीनियम से पूरी तरह मुक्त हैं। यदि यह नया सिस्टम व्यापक स्तर पर लोकप्रिय होता है, तो 1998 से चले आ रहे पारंपरिक के-कप का दौर धीरे-धीरे समाप्त हो सकता है। अमेरिका के करीब 5 करोड़ घरों में रोजाना कॉफी बनाने के लिए लोग जिस ब्रांड पर निर्भर रहते हैं, वह अब पर्यावरण अनुकूल दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। सीवीड आवरण और संपीड़ित कॉफी की नई तकनीक पारंपरिक पॉड्स के कचरे से निजात पाने के लिए कंपनी ने अल्टापाउंड्स नाम से संपीड़ित कॉफी राउंड तैयार किए हैं। इन गोलाकार पॉड्स के बाहरी हिस्से पर समुद्री शैवाल यानी सीवीड से बना एक प्राकृतिक प्लांट-बेस्ड आवरण चढ़ाया गया है। यह सुरक्षा परत कॉफी के ताजेपन को बरकरार रखती है और उसे सुरक्षित रखती है, जिससे किसी प्लास्टिक या एल्युमीनियम कंटेनर की आवश्यकता नहीं पड़ती। उपयोगकर्ता को कॉफी बीन्स पीसने, नापने या दबाव सेट करने की कोई जरूरत नहीं होती। मशीन में इस राउंड को डालते ही इसका टचस्क्रीन इंटरफेस सक्रिय हो जाता है, जिसके बाद सिस्टम आवरण में सुराख करके 10 बार के उच्च दबाव से तरल कॉफी निष्कर्षण करता है। इस्तेमाल के बाद बचे हुए कंपोस्टेबल अवशेष एक अलग आंतरिक बॉक्स में जमा हो जाते हैं। स्पेशलिटी पेय और एस्प्रेसो की बढ़ती मांग न्यूयॉर्क शहर में आयोजित एक प्रस्तुति कार्यक्रम के दौरान इस नई प्रणाली की आवश्यकताओं को रेखांकित किया गया। क्यूरिग के फ्यूचर कॉफी सिस्टम्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट फिल ड्रेपो ने उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं पर जोर दिया। ड्रेपो के मुताबिक, आधुनिक उपभोक्ता केवल सामान्य ड्रिप कॉफी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि कैपुचीनो और सॉल्टेड कैरेमल जैसे जटिल एस्प्रेसो पेय घर पर ही बनाना पसंद करते हैं। “We wouldn’t be able to do any of that with K-Cup,” ड्रेपो ने कहा। पारंपरिक के-कप तकनीक मूल रूप से केवल सामान्य ब्रू की गई कॉफी के लिए डिजाइन की गई थी, जिसके कारण तापमान और दबाव के बारीक संतुलन पर बनने वाले थर्ड-वेव कॉफी ड्रिंक्स उससे तैयार करना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। इसलिए एक सर्वथा नए सिस्टम का आविष्कार अनिवार्य हो गया था। मशीन का आकार, मिल्क फ्रॉदर और हाइब्रिड क्षमताएं पहली पीढ़ी की यह अल्टा मशीन आधुनिक फिनिश के साथ आती है, लेकिन रसोई के काउंटर पर इसका आकार काफी बड़ा स्थान घेरता है। सामान्य कॉफी मेकर, ग्राइंडर और किसी पारंपरिक एस्प्रेसो उपकरण की कुल जगह के बराबर इसका फैलाव है। हालांकि, इस अतिरिक्त आकार के साथ कई उन्नत सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसमें लट्टे जैसे पेय पदार्थों के लिए एक इन-बिल्ट मिल्क फ्रॉदर शामिल है, जो दूध का झाग तैयार करके लट्टे आर्ट तक बनाने की सहूलियत देता है। इसके अलावा, कंपनी ने इसमें एक बिल्ट-इन के-कप ब्रूअर भी बरकरार रखा है। यह हाइब्रिड डिजाइन उपयोगकर्ताओं को उन फ्लेवर्स का आनंद लेने की छूट देता है जो अभी नए प्रारूप में उपलब्ध नहीं हैं, अथवा जब किसी को बेहद कम समय में झटपट ड्रिंक तैयार करनी हो। शुरुआत में यह नया सिस्टम सिंगल एस्प्रेसो, डबल एस्प्रेसो और रेगुलर कॉफी विकल्पों के साथ पेश किया जा रहा है। उपयोग में सरलता, स्वाद और प्रक्रिया का समय मैनुअल एस्प्रेसो मशीनों की तुलना में इस मशीन को संचालित करना बेहद आसान है। हालांकि पॉड डालने से लेकर कप में पेय तैयार होने तक की पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लगता है, फिर भी यह पारंपरिक कॉफी मशीनों से कहीं तेज है। निकाले गए पेय की ऊपरी सतह पर गाढ़ा और खुशबूदार क्रीमा तैयार होता है, जो एस्प्रेसो प्रेमियों के लिए एक जरूरी पैमाना माना जाता है। उन उपभोक्ताओं के लिए जो सालों से साधारण ड्रिप पॉड्स पीते रहे हैं, घर पर इस गुणवत्ता का पेय मिलना एक उल्लेखनीय अपग्रेड साबित होता है। कीमत, पैकेजिंग और बाजार में उपलब्धता अमेरिकी बाजार में कंपनी ने इस सिस्टम का एक विशेष प्री-ऑर्डर बंडल 500 डॉलर की कीमत पर पेश किया। इस पैकेज में चार अलग-अलग रंगों में उपलब्ध अल्टा ब्रूअर, अल्टापाउंड्स के चार डिब्बे और विशेष फ्लर ग्लास शामिल किए गए। लॉन्च के तुरंत बाद ही इसका प्रारंभिक स्टॉक पूरी तरह बिक गया, जो बाजार की गहरी दिलचस्पी को दर्शाता है। हालांकि व्यापक रिटेल बिक्री की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन केवल मशीन की कीमत भी लगभग 500 डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं आठ अल्टापाउंड्स वाले एक पैक का मूल्य 10 डॉलर से 11 डॉलर के बीच रखा जाएगा। यद्यपि पॉड्स स्वयं कंपोस्टेबल हैं, फिर भी बाहरी पैकेजिंग में अभी कार्डबोर्ड और फॉयल रैपर्स का इस्तेमाल हो रहा है। डीआरएम विवाद और भविष्य की चुनौतियां तकनीकी मोर्चे पर, प्रत्येक अल्टापाउंड पर एक क्यूआर कोड मुद्रित होता है जिसे मशीन का आंतरिक स्कैनर पढ़कर सटीक तापमान और दबाव निर्धारित करता है। यह व्यवस्था अतीत के उस विवाद की याद दिलाती है जब कंपनी ने प्रिंटर-टोनर की तर्ज पर डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (डीआरएम) लागू करके थर्ड-पार्टी पॉड्स को ब्लॉक करने का प्रयास किया था, जिसका भारी विरोध हुआ था। वर्तमान में उपभोक्ताओं के लिए केवल क्यूरिग और उसकी पैरेंट कंपनी के स्वामित्व वाले पीटस ब्रांड के फ्लेवर्स ही उपलब्ध हैं। क्या कंपनी आने वाले समय में अन्य कॉफी निर्माताओं को इस इकोसिस्टम में शामिल होने की अनुमति देगी, यह देखना बाकी है। उच्च प्रारंभिक कीमत और सीमित फ्लेवर्स के कारण प्लास्टिक आधारित पॉड्स को बाजार से पूरी तरह हटने में अभी लंबा वक्त लगेगा। इसका आप पर असर पर्यावरण अनुकूल पॉड तकनीक आने से घर पर कॉफी पीने वाले उपभोक्ताओं की लागत और कचरा प्रबंधन पर सीधा असर पड़ेगा। • प्लास्टिक कचरे में कमी: डिस्पोजेबल प्लास्टिक पॉड्स का उपयोग करने वाले परिवार अब पूरी तरह कंपोस्टेबल सीवीड-कोटेड राउंड्स अपना सकेंगे। इससे रोजाना उत्पन्न होने वाले नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कचरे में भारी गिरावट आएगी। • किचन बजट पर असर: आठ पॉड्स के पैक की कीमत 10 से 11 डॉलर रखी गई है, जो सामान्य पॉड्स से काफी महंगी है। नियमित उपभोक्ताओं को प्रति कप कॉफी के लिए लगभग 1.25 से 1.35 डॉलर तक खर्च करने होंगे। • काउंटर स्पेस की जरूरत: इस मशीन का आकार सामान्य कॉफी मेकर और ग्राइंडर से कहीं बड़ा है। इसे किचन में स्थापित करने के लिए उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त स्लैब स्पेस खाली करना पड़ेगा। • पुराने पॉड्स का इस्तेमाल: मशीन में पारंपरिक के-कप स्लॉट भी दिया गया है। इससे पुराने पॉड्स का स्टॉक रखने वाले लोगों को तुरंत उन्हें फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक प्लास्टिक पॉड्स से होने वाले भारी पर्यावरणीय प्रदूषण और स्पेशलिटी एस्प्रेसो ड्रिंक्स की बढ़ती उपभोक्ता मांग के कारण कंपनी ने यह कदम उठाया। • पर्यावरण संबंधी दबाव: 1998 में शुरू हुए प्लास्टिक के-कप दशकों से लैंडफिल कचरे का एक बड़ा कारण बने हुए थे। पर्यावरण प्रेमियों और उपभोक्ताओं की लगातार मांग के बाद कंपनी को प्लास्टिक-मुक्त विकल्प तैयार करने पर मजबूर होना पड़ा। • स्पेशलिटी कॉफी का क्रेज: आम उपभोक्ता अब साधारण ड्रिप कॉफी के बजाय लट्टे, कैपुचीनो और क्रीमा युक्त एस्प्रेसो पसंद कर रहे हैं। पुरानी के-कप तकनीक में इस तरह के गाढ़े पेय तैयार करने की तकनीकी क्षमता नहीं थी। • प्रेशर एक्सट्रैक्शन की जरूरत: एस्प्रेसो निष्कर्षण के लिए 10 बार के उच्च दबाव और सटीक तापमान की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया केवल संपीड़ित और मजबूत सीवीड-कोटेड राउंड्स के जरिए ही संभव हो सकी। • इकोसिस्टम पर नियंत्रण: प्रत्येक पॉड पर क्यूआर कोड लगाकर मशीन सेटिंग्स को स्वचालित किया गया है। इससे कंपनी को अपने मालिकाना इकोसिस्टम की गुणवत्ता और पॉड बिक्री पर मजबूत पकड़ बनाए रखने का अवसर मिलता है। सवाल-जवाब 1. क्यूरिग अल्टा की मुख्य खासियत क्या है? यह प्लास्टिक और एल्युमीनियम से मुक्त कंपोस्टेबल अल्टापाउंड्स का उपयोग करके 10 बार के दबाव से असली एस्प्रेसो और कॉफी बनाती है। 2. अल्टापाउंड्स की बाहरी परत किस चीज से बनी है? इन पॉड्स के बाहरी हिस्से पर समुद्री शैवाल यानी सीवीड से बनी एक प्राकृतिक प्लांट-बेस्ड कोटिंग है जो कॉफी को ताजा और संपीड़ित रखती है। 3. क्या अल्टा मशीन में पुराने के-कप इस्तेमाल किए जा सकते हैं? हां, इस मशीन में एक इन-बिल्ट के-कप ब्रूअर भी मौजूद है जिससे पुराने पॉड्स से भी कॉफी बनाई जा सकती है। 4. अल्टा कॉफी मेकर और इसके पॉड्स की कीमत कितनी है? मशीन का प्री-ऑर्डर बंडल 500 डॉलर में पेश किया गया था, जबकि 8 अल्टापाउंड्स के पैक की कीमत 10 से 11 डॉलर है। 5. क्या इस मशीन में दूध का झाग बनाने की सुविधा है? हां, मशीन में एक अलग इन-बिल्ट मिल्क फ्रॉदर दिया गया है जो लट्टे और कैपुचीनो के लिए दूध का झाग तैयार करता है। 6. अल्टापाउंड्स पर क्यूआर कोड क्यों दिया गया है? मशीन का आंतरिक स्कैनर क्यूआर कोड पढ़कर यह पहचानता है कि कौन सा पॉड डाला गया है और उसी अनुसार तापमान व दबाव सेट करता है। https://trendkia.com/gear/keurig-alta-se-badalega-kophi-ka-andaja-plastika-aura-elyuminiyama-podsa-ki-hogi-chhutti-42743 TrendKia — Har trend, sabse pehle.