मेटा का नया एआई एजेंट म्यूज: डिजिटल मदद के नाम पर गहराती डेटा निगरानी का खतरा मेटा के ऑटोनॉमस एआई एजेंट म्यूज को रोजमर्रा के काम संभालने के लिए पेश किया गया है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली निजी वित्तीय और व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा करने पर ज्यादा केंद्रित नजर आती है। स्मार्टफोन स्क्रीन पर अचानक उभरने वाले विज्ञापनों और पॉप-अप संदेशों में अक्सर यह दावा किया जाता है कि रोजमर्रा के थकाऊ काम अब मशीनों के हवाले किए जा सकते हैं। डील्स खोजने, रेस्टोरेंट और नाश्ते की बुकिंग करने या फिर लगातार भरते ईमेल इनबॉक्स को व्यवस्थित करने जैसी जिम्मेदारियों को खुद से अलग करके किसी डिजिटल सहायक को सौंपने की सुविधा पहली नजर में बेहद लुभावनी लगती है। टेक जगत की दिग्गज कंपनी मेटा ने इसी सोच के तहत अपने नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यक्तिगत सहायक म्यूज को पेश किया है। मुफ्त इस्तेमाल के वादे के साथ आने वाला यह टूल उपयोगकर्ता के ईमेल और बैंक खाते जैसे संवेदनशील डेटा स्रोतों से सहजता से जुड़ जाता है। इस सहायक का डिफॉल्ट अवतार हल्के भूरे रंग का है, जो लोकप्रिय फंतासी किरदारों इवॉक और लाबुबू के मिश्रण जैसा दिखता है, जिसके फैले हुए हाथ मानो उपयोगकर्ता की हर निजी जानकारी समेटने के लिए तैयार बैठे हों। सिलिकॉन वैली में ओपनक्लॉ और इंस्टिंक्ट जैसे टास्क ऑटोमेशन टूल्स पहले से काफी चर्चा में रहे हैं, लेकिन मेटा ने म्यूज के जरिए ऐसे एआई एजेंट्स को आम जनता तक पहुंचाने का बड़ा दांव खेला है। सेंसर टॉवर के आंकड़ों से पता चलता है कि अपनी रिलीज के पहले ही हफ्ते में म्यूज ऐप नौ लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। म्यूज का इंटरफेस किसी पारंपरिक चैटबॉट को जटिल प्रॉम्प्ट देने जैसा बिल्कुल नहीं लगता, बल्कि यह किसी दोस्त को मैसेज भेजकर काम करवाने जैसा सरल अहसास कराता है। जब भी इसे कोई काम सौंपा जाता है, यह थम्स-अप इमोजी के साथ प्रतिक्रिया देता है और बैकग्राउंड में अपना काम शुरू कर देता है। मेटा ने इसे अपने लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप के जरिए भी उपलब्ध कराया है, ताकि आम उपयोगकर्ताओं को इसे अपनाने में कोई परेशानी न हो। हालांकि, जब इस सिस्टम का व्यावहारिक इस्तेमाल शुरू होता है, तो धीरे-धीरे यह अहसास गहराने लगता है कि यह डिजिटल टूल असल में काम निपटाने से कहीं ज्यादा उपयोगकर्ता का व्यक्तिगत डेटा जुटाने में दिलचस्पी रखता है। जब इस तरह की चिंताओं पर सवाल उठते हैं, तो मेटा के प्रवक्ता एमिल वाज्केज़ का कहना है कि म्यूज हर किसी के लिए तैयार किया गया पहला पर्सनल एआई एजेंट है, जिसमें सुरक्षा और यूजर कंट्रोल इनबिल्ट हैं ताकि लोग इसे अपनी शर्तों पर इस्तेमाल कर सकें, और यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है कि इसे बनाते वक्त इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया। वेब ब्राउजिंग की क्षमता और ऑनलाइन खरीदारी का व्यावहारिक परीक्षण तकनीकी नजरिए से देखा जाए तो म्यूज की इंटरनेट सर्फिंग क्षमता काफी उन्नत है। किसी भी काम को पूरा करने के लिए म्यूज एक वर्चुअल मशीन का सहारा लेता है, जिसके जरिए वह यूजर की तरफ से खुद इंटरनेट ब्राउज करता है, वेब सर्च चलाता है और अलग-अलग पेजों पर जरूरी क्लिक करता है। पिछले साल जब चैटजीपीटी एजेंट जैसे शुरुआती टूल्स सामने आए थे, तब उनमें ब्राउजिंग के दौरान कई गलतियां और भटकाव देखने को मिलते थे, लेकिन म्यूज वेब ब्राउजिंग करते हुए शायद ही कभी भटकता है। इसका वास्तविक परीक्षण करने के लिए सैन फ्रांसिस्को में पर्यटकों के बीच मशहूर स्थानीय बेकरी कानफेक्शन्स से सुबह का नाश्ता ऑर्डर करने का काम सौंपा गया। निर्देश यह था कि दुकान के सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक को पिक-अप के लिए चुना जाए। म्यूज ने तुरंत बेकरी की वेबसाइट खोली और गार्लिक एओली, चेडर चीज, अंडा और बेकन से बना एक बिस्किट सैंडविच ऑनलाइन कार्ट में जोड़ दिया। खरीदारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए स्ट्राइप पेमेंट प्रोसेसर के जरिए क्रेडिट कार्ड जोड़ने का विकल्प सामने आया। अंतिम मंजूरी मांगते समय म्यूज ने अपने काम का ब्योरा देते हुए लिखा कि वेबसाइट केवल एक ही तरह का चीज चुनने की अनुमति दे रही थी, इसलिए उसने चेडर चीज चुना और साथ में एक नोट छोड़ दिया कि यदि संभव हो तो स्विस चीज भी जोड़ दें। गौर करने वाली बात यह रही कि म्यूज ने टिप के विकल्प में शून्य राशि का चयन किया। ऑनलाइन शॉपिंग और ऑटोमेशन के इस पूरे अनुभव में यह साफ दिखा कि सिस्टम तकनीकी रूप से जटिल फॉर्म और वेबसाइट के नियमों को समझने में सक्षम है, भले ही अंतिम भुगतान के लिए वित्तीय जानकारी दर्ज कराने की मांग उठती हो। मेटा के इकोसिस्टम का फायदा और फेसबुक मार्केटप्लेस का अनुभव म्यूज को तेजी से लोगों तक पहुंचाने के लिए मेटा अपने विशाल प्लेटफॉर्म नेटवर्क का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और सर्विस इंटीग्रेशन के लिए वॉट्सऐप और मैसेंजर का सहारा लिया जा रहा है, जबकि इंस्टाग्राम पर इसे प्रमुखता से जगह दी गई है ताकि एजेंट्स रील्स वीडियो की विशाल लाइब्रेरी को खंगाल सकें। हालांकि, इस टूल का सबसे प्रभावी प्रदर्शन फेसबुक मार्केटप्लेस के साथ इसके जुड़ाव में देखने को मिलता है। जब बजट और स्थानीय दायरे के तय मानकों के आधार पर सस्ते सोफे तलाशने को कहा गया, तो म्यूज ने तुरंत उपयुक्त विकल्प खोज निकाले और सामान उठाने का समय तय करने के लिए विक्रेताओं को खुद मैसेज भेजने की पेशकश भी कर दी। यह एजेंट बातचीत को जारी रखने के लिए प्रोग्राम किया गया है, इसलिए अगले ही दिन इसने यूजर को फिर से याद दिलाया कि जो सोफा सबसे ज्यादा पसंद आया था, क्या उसे खरीदने का मन बना लिया गया है। उपयोगकर्ता की पसंद और प्राथमिकताओं का पूरा लेखा-जोखा रखने के लिए म्यूज ऐप में स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में मौजूद अवतार पर टैप करने पर मेमोरी नाम का एक दस्तावेज खुलता है। ऐप के भीतर इसे यूजर की चुनिंदा दीर्घकालिक याददाश्त बताया गया है, जिसमें स्थायी तथ्य, पसंद और प्रतिबद्धताएं दर्ज होती हैं। इस मेमोरी डेटा को मिटाने के लिए चैट के जरिए अनुरोध भेजा जा सकता है या फाइल को खुद संपादित किया जा सकता है, लेकिन मेटा ने अभी तक इस मेमोरी फीचर को पूरी तरह बंद करने का कोई आसान स्विच उपलब्ध नहीं कराया है। डेटा संग्रह की भूख और विचारों की आड़ में निजी जानकारी की मांग ऐप के भीतर आइडियाज नाम का एक अलग टैब दिया गया है, जहां म्यूज लगातार अतिरिक्त जानकारी जोड़ने के सुझाव देता रहता है। उदाहरण के लिए, जब किसी छुट्टी के लिए पैसे बचाने में मदद मांगी गई, तो म्यूज ने तुरंत सुझाव दिया कि यूजर अपने सेविंग्स ट्रैकर को सीधे अपने असली बैंक बैलेंस से जोड़ दे। इसके लिए केवल कुछ बटन दबाकर चेकिंग और बचत खातों के डेटा को लिंक करने की बात कही गई, ताकि साप्ताहिक सारांश और वित्तीय अलर्ट किसी अनुमान के बजाय बिल्कुल सटीक आंकड़ों पर काम कर सकें। म्यूज का यह रवैया स्पष्ट करता है कि वह अधिक व्यक्तिगत सेवाएं देने के बदले उपयोगकर्ता से और अधिक निजी डेटा की मांग करता है। डिजिटल अधिकारों की पैरोकारी करने वाले संगठन इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन के ओपन एक्सेस निदेशक रोरी मीर इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हैं। रोरी मीर का कहना है कि लोग अक्सर यह नहीं समझ पाते कि जब वे किसी एआई से संवाद कर रहे होते हैं, तो वे असल में उस एआई को होस्ट करने वाली कंपनी से सीधे बात कर रहे होते हैं। चैट विंडो, जिसे आमतौर पर दो इंसानों के बीच की निजी बातचीत समझा जाता है, वास्तव में मेटा के सर्वरों में अपनी निजी जानकारी सीधे दर्ज कराने का एक जरिया मात्र है। म्यूज के जरिए सुझाए जाने वाले विचार धीरे-धीरे निजी डेटा जुटाने का बहाना लगने लगते हैं। इसके सुझावों में पूरे इनबॉक्स को स्कैन करके जरूरी ईमेल छांटने की इजाजत मांगना, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तस्वीरें खींचने को कहना ताकि म्यूज उन्हें भर सके, खाने की तस्वीरें देखकर कैलोरी का हिसाब लगाना, और यहां तक कि पासपोर्ट तथा ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति तिथि दर्ज कराने जैसे अनुरोध शामिल हैं। एआई ट्रेनिंग की शर्तें और यूजर ट्रस्ट का पुराना विवाद म्यूज का उपयोग करने वाले लोगों को स्वतः ही इस बात के लिए सहमत मान लिया जाता है कि उनके संवाद का इस्तेमाल भविष्य के एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा। मेटा का दावा है कि एआई ट्रेनिंग से पहले इस डेटा को सैनिटाइज किया जाता है ताकि किसी की पहचान उजागर न हो, हालांकि यह प्रक्रिया किस तरह काम करती है, यह स्पष्ट नहीं है। इस डेटा संग्रह के दायरे में वह जानकारी भी आ सकती है जिसे म्यूज संदर्भ के रूप में उपयोग करता है, जैसे कि कनेक्ट किए गए ईमेल इनबॉक्स या बैंक खातों की सामग्री। यदि उपयोगकर्ता इस डेटा संग्रह से बचना चाहते हैं, तो उन्हें म्यूज ऐप की सेटिंग्स में जाकर डेटा कंट्रोल्स विकल्प चुनना होगा और हेल्प इम्प्रूव अवर एआई मॉडल्स वाले टॉगल को खुद बंद करना होगा। उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षकों का मानना है कि उपयोगकर्ताओं को एआई डेटा ट्रेनिंग से खुद बाहर निकलने (ऑप्ट-आउट) के लिए मजबूर करना एक बड़ी चेतावनी है। इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेसी इंफॉर्मेशन सेंटर की वरिष्ठ वकील कैली श्रोडर का कहना है कि यह रवैया दर्शाता है कि पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा गया है और इससे इस बात पर भरोसा करना और मुश्किल हो जाता है कि लोग अपनी सारी जानकारी म्यूज को सौंप दें। श्रोडर ने हाल ही में मेटा द्वारा इंस्टाग्राम के सभी वयस्क उपयोगकर्ताओं को बिना स्पष्ट सहमति के एक एआई डीपफेक टूल में शामिल करने और फिर कुछ ही दिनों बाद उसे वापस लेने की घटना का जिक्र किया, जिसे उन्होंने विश्वास तोड़ने और हेरफेर करने की पुरानी रणनीति का हिस्सा बताया। दूसरी तरफ, मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स के उपाध्यक्ष और सॉफ्टवेयर इंजीनियर तारेक शीशा ने म्यूज की रिलीज से जुड़े एक ब्लॉग पोस्ट में इस डेटा संग्रह का बचाव किया है। तारेक शीशा का कहना है कि यह एक बेहतर डिफॉल्ट व्यवस्था है क्योंकि सामूहिक उपयोग से मॉडल को मानवीय जीवन की बारीकियों को समझने में मदद मिलती है और हर यूजर को एक बेहतर पर्सनल एजेंट मिल पाता है। मेटा ने यह भी वादा किया है कि वह इस साल के अंत तक अपने वर्चुअल मशीन का एक गोपनीय संस्करण पेश करेगी, जो क्रिप्टोग्राफिक तरीके से कंपनी को अंदरूनी डेटा तक पहुंचने से रोकेगा। अप्रत्यक्ष विज्ञापन और शॉपिंग प्राथमिकताओं के प्रभावित होने का डर यद्यपि म्यूज का डेटा सीधे तौर पर विज्ञापनदाताओं के साथ साझा नहीं किया जाता, फिर भी उपयोगकर्ता की ओर से इंटरनेट ब्राउज करने वाला यह एजेंट वेब-ट्रैकिंग एल्गोरिदम के जरिए दिखने वाली सामग्री को प्रभावित कर सकता है। म्यूज के सुरक्षा ब्लॉग में खुद स्वीकार किया गया है कि यदि एजेंट किसी रेस्टोरेंट में टेबल बुक करता है या फेसबुक मार्केटप्लेस पर कोई उत्पाद चुनता है, तो यह गतिविधि इंस्टाग्राम पर दिखने वाले विज्ञापनों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है। रोरी मीर के अनुसार, यह मेटा के उसी मूल बिजनेस मॉडल का विस्तार है, जिसके तहत लोगों के सामने विज्ञापन परोसने और उन पर नियंत्रण रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा डेटा जुटाया जाता है। किसी भी एआई एजेंट को अपना क्रेडिट कार्ड सौंपना स्वाभाविक रूप से वित्तीय और मनोवैज्ञानिक चिंताएं पैदा करता है। भले ही यह मान लिया जाए कि यह टूल किसी धोखाधड़ी का शिकार होकर अनचाहा खर्च नहीं करेगा, फिर भी अपनी खरीदारी के फैसले मशीन के हवाले करने के कई छिपे हुए नुकसान हो सकते हैं। उपभोक्ता विश्लेषकों का मानना है कि स्वचालित खरीदारी से भविष्य में कंपनियों को प्रायोजित समझौतों के आधार पर खास ब्रांड्स को तरजीह देने का मौका मिल सकता है। मेटा के चीफ एआई ऑफिसर अलेक्जेंड्र वांग ने एक्सिओस के साथ एक बातचीत में इस बात का संकेत दिया था कि कंपनी विज्ञापनों के अलावा म्यूज के जरिए राजस्व कमाने के अन्य रास्ते तलाश रही है, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी। मानवीय निर्णयों का नुकसान और संज्ञानात्मक गिरावट की चेतावनी ऑनलाइन शॉपिंग का एक पहलू बिना कुछ खरीदे केवल वेबसाइट्स को धीरे-धीरे खंगालने का आनंद भी होता है। डिपोप जैसी साइटों पर पुराने लेदर जैकेट देखना भले ही समय की बर्बादी लगे, लेकिन इंटरनेट को खुद खंगालने से इंसान अपनी पसंद और समझ को धीरे-धीरे विकसित करता है। जब कोई एआई एजेंट हर फैसला खुद लेने लगता है, तो इंसान उस पूरी प्रक्रिया से बाहर हो जाता है जिसके जरिए वह किसी निर्णय पर पहुंचता है। कैली श्रोडर इस खतरे को रेखांकित करते हुए कहती हैं कि जब एआई यह तय करने लगे कि आप क्या पहनेंगे, कहां खाएंगे, क्या करेंगे और किस छुट्टी पर जाएंगे, तो यह स्थिति चिंताजनक हो जाती है, क्योंकि विभिन्न चीजों को आजमाकर अपनी पसंद तय करना ही इंसानी जीवन का मूल आनंद है, और इन फैसलों को किसी मशीन को सौंप देना भयावह विचार है। हगिंग फेस की शोधकर्ता और मुख्य आचार वैज्ञानिक मार्गरेट मिशेल का मानना है कि एआई एजेंट्स की बनावट ऐसी है कि वे उपयोगकर्ताओं को निष्क्रिय बना देते हैं। मिशेल ने हाल ही में एक संयुक्त शोध पत्र लिखा है जिसमें बताया गया है कि ये टूल्स मानवीय निगरानी के लिए सही तरीके से डिजाइन नहीं किए गए हैं और ये उपयोगकर्ता की उस क्षमता को कमजोर कर सकते हैं जिसके जरिए वह एजेंट के कामों का मूल्यांकन करता है। साधारण चैटबॉट की तुलना में एजेंट के पास ज्यादा अधिकार और जानकारी होने के कारण लोग इन पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं, जिससे कॉग्निटिव डिग्रेडेशन यानी संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट का जोखिम पैदा होता है। अत्यधिक व्यक्तिगतकरण के कारण यूजर का भरोसा इतना बढ़ जाता है कि वह अपनी और अधिक निजी जानकारियां साझा करने लगता है। शोध यह भी बताते हैं कि ये एआई टूल्स बात करते-करते यूजर के बोलने के लहजे की नकल करने लगते हैं, जिससे एक कृत्रिम अपनापन पैदा होता है। तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद, लगातार निजी जीवन में झांकने की इस प्रवृत्ति के चलते कई जानकार और सतर्क उपयोगकर्ता ऐसे एजेंट्स को अपने फोन से हटाना ही बेहतर समझ रहे हैं, हालांकि डिलीट होने से ठीक पहले भी यह सिस्टम और अधिक ऐप्स कनेक्ट करने की सलाह देकर अपना असली मकसद साफ कर देता है। इसका आप पर असर मेटा के नए एआई एजेंट म्यूज के बढ़ते उपयोग से आम उपयोगकर्ताओं की डिजिटल प्राइवेसी और दैनिक वित्तीय सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। • डेटा प्राइवेसी का जोखिम: यदि आप म्यूज का उपयोग करते हैं, तो आपकी निजी ईमेल और बैंक खातों की जानकारी एआई प्रोसेसिंग का हिस्सा बन सकती है। इससे बचने के लिए आपको ऐप की सेटिंग्स में जाकर डेटा कंट्रोल्स के तहत एआई ट्रेनिंग विकल्प को खुद बंद करना होगा। • शॉपिंग और वित्तीय फैसले: इस एजेंट को क्रेडिट कार्ड सौंपने से आपकी खरीदारी के फैसले स्वचालित हो सकते हैं, जिससे गैर-जरूरी खर्च का अंदेशा रहता है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे भुगतान से पहले ऑर्डर विवरण और बिल राशि की खुद जांच करें। • लक्षित विज्ञापनों का दायरा: म्यूज के जरिए की गई ऑनलाइन सर्च और बुकिंग आपके इंस्टाग्राम और फेसबुक विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती है। इसका अर्थ यह है कि आपकी निजी जरूरतें सोशल मीडिया फीड पर विज्ञापनों के रूप में दिखाई देने लगेंगी। • निर्णय लेने की स्वतंत्रता: हर छोटे काम के लिए ऑटोमेशन पर निर्भर रहने से आपकी खुद की पसंद और निर्णय लेने की आदत कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि महत्वपूर्ण निजी और वित्तीय निर्णयों को पूरी तरह मशीनों के हवाले करने से बचें। ऐसा क्यों हुआ मेटा ने अपने मौजूदा सोशल मीडिया इकोसिस्टम की ताकत का इस्तेमाल करते हुए पारंपरिक चैटबॉट्स से आगे बढ़कर ऑटोनॉमस एआई एजेंट के क्षेत्र में बढ़त बनाने के लिए म्यूज को पेश किया है। • एआई एजेंट्स की बढ़ती मांग: सिलिकॉन वैली में ओपनक्लॉ और इंस्टिंक्ट जैसे टास्क ऑटोमेशन टूल्स की सफलता के बाद कंपनियों में आम उपयोगकर्ताओं के लिए आसान एजेंट्स पेश करने की होड़ मची है। मेटा ने इसी मौके को भुनाने के लिए म्यूज को सीधे वॉट्सऐप और मोबाइल ऐप के जरिए बड़े पैमाने पर जारी किया है। • मेटा का डेटा आधारित बिजनेस मॉडल: कंपनी का प्राथमिक राजस्व मॉडल विज्ञापनों और उपयोगकर्ता के व्यवहार से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने पर टिका है। म्यूज जैसे टूल्स उपयोगकर्ताओं से ईमेल, बैंकिंग और रोजमर्रा के कामों की अतिरिक्त जानकारी हासिल करने का एक नया माध्यम तैयार करते हैं। • मॉडल्स को प्रशिक्षित करने की जरूरत: एआई सिस्टम को मानवीय जीवन की जटिलताओं के अनुकूल बनाने के लिए कंपनियों को लगातार नए और वास्तविक डेटा की आवश्यकता होती है। मेटा ने अपने उपयोगकर्ताओं को डिफॉल्ट रूप से एआई ट्रेनिंग में शामिल करके इस विशाल डेटाबेस को तैयार करने का रास्ता चुना है। सवाल-जवाब 1. मेटा का म्यूज क्या है और यह कैसे काम करता है? मेटा का म्यूज एक ऑटोनॉमस एआई एजेंट है जो वर्चुअल मशीन का उपयोग करके यूजर की तरफ से इंटरनेट ब्राउज करता है, नाश्ता ऑर्डर कर सकता है और ईमेल व मार्केटप्लेस जैसे काम संभालता है। 2. क्या म्यूज इस्तेमाल करने के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं? नहीं, म्यूज का इस्तेमाल पूरी तरह मुफ्त है और यह अलग ऐप के साथ-साथ मेटा के वॉट्सऐप प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। 3. पहले हफ्ते में म्यूज ऐप को कितने लोगों ने डाउनलोड किया है? सेंसर टॉवर के आंकड़ों के अनुसार, रिलीज होने के पहले ही हफ्ते में म्यूज ऐप को 900,000 से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। 4. क्या म्यूज का डेटा मेटा के विज्ञापनों को प्रभावित करता है? म्यूज का डेटा सीधे विज्ञापनदाताओं को नहीं बेचा जाता, लेकिन एजेंट द्वारा की गई ब्राउजिंग और गतिविधियां इंस्टाग्राम पर दिखने वाले विज्ञापनों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती हैं। 5. क्या म्यूज से डेटा ट्रेनिंग को बंद किया जा सकता है? हाँ, उपयोगकर्ता म्यूज ऐप की सेटिंग्स में डेटा कंट्रोल्स विकल्प में जाकर 'हेल्प इम्प्रूव अवर एआई मॉडल्स' वाले टॉगल को बंद करके अपनी बातचीत को एआई ट्रेनिंग में जाने से रोक सकते हैं। 6. म्यूज में यूजर की पसंद कहां सुरक्षित रहती है? म्यूज यूजर की प्राथमिकताओं और आदतों को 'मेमोरी' नामक एक दस्तावेज में सहेजता है, जिसे ऐप के भीतर अवतार पर टैप करके देखा और संपादित किया जा सकता है। https://trendkia.com/gear/meta-ka-naya-ai-ejenta-muse-dijitala-madada-ke-nama-para-gaharati-deta-nigarani-ka-khatara-35274 TrendKia — Har trend, sabse pehle.