म्यूजिक टेक स्टार्टअप रोली दूसरी बार दिवालिया, बिना डिलीवरी फंसे ग्राहकों के लाखों रुपये हाई-टेक म्यूजिकल कीबोर्ड बनाने वाली कंपनी रोली ब्रिटेन में प्रशासन प्रक्रिया में चली गई है, जिससे नए ऑर्डर वाले खरीदार और पुराने हार्डवेयर यूजर्स अधर में लटक गए हैं। म्यूजिक प्रोडक्शन और सिंथेसाइजर की दुनिया में अनूठे टच-सेंसिटिव कीबोर्ड बनाकर पहचान बनाने वाली कंपनी रोली एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट में घिर गई है। कंपनी ने सोमवार को अपने ग्राहकों को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि 20 अक्टूबर को दो लाइसेंस प्राप्त इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स को संयुक्त प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह ब्रिटेन की वही कानूनी प्रशासन प्रक्रिया है जिसके तहत दिवालिया कंपनियों का प्रबंधन देखा जाता है। रोली के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब कंपनी आधिकारिक तौर पर दिवालिया हुई है। कंपनी के भीतर इस साल की शुरुआत में उसके संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोलैंड लैम्ब को पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद से ही कंपनी का संचालन लगभग बिखर चुका था। अगस्त में रोलैंड लैम्ब के नाम से ब्रिटेन सरकार के पास इंस्ट्रूमेंटल इंटेलिजेंस नाम से एक नई फर्म भी दर्ज कराई गई थी, जिसे रोली की संपत्तियों को खरीदने के संभावित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। असमंजस में फंसे खरीदार और सॉफ्टवेयर सपोर्ट का खतरा कंपनी के इस कदम ने उन खरीदारों को गहरे संकट में डाल दिया है जिन्होंने सैकड़ों से लेकर हजारों डॉलर तक का भुगतान करके म्यूजिकल इक्विपमेंट बुक किए थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, फेसबुक ग्रुप्स और रेडिट के आर/रोली कम्युनिटी पर मायूस ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने के रास्ते तलाश रहे हैं। कई ग्राहकों ने बताया कि उन्होंने महीनों पहले या कुछ मामलों में सालों पहले ऑर्डर दिए थे, लेकिन अब तक न तो सामान मिला और न ही कोई रिफंड जारी किया गया। इसके साथ ही, जिन संगीतकारों के पास पहले से रोली के उपकरण मौजूद हैं, वे भी भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। रोली के हार्डवेयर काफी हद तक मालिकाना सॉफ्टवेयर लॉन्चर्स और सहयोगी ऐप्स पर निर्भर रहते हैं, जो साउंड मैपिंग और सेटिंग्स कॉन्फ़िगर करने का काम करते हैं। हालांकि हार्डवेयर उपकरण अभी काम कर रहे हैं, लेकिन अगर क्लाउड सर्वर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट बंद हो गया तो ये महंगे कीबोर्ड पूरी तरह कबाड़ यानी ई-वेस्ट में तब्दील हो सकते हैं। इस पूरी स्थिति पर कंपनी, उसके संस्थापक और मुख्य वित्तीय निवेशक फर्मों ट्रिपलपॉइंट कैपिटल तथा हॉक्सटन वेंचर्स ने कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है। सफलता के सुनहरे दौर से संघर्ष तक का सफर रोली की स्थापना साल 2009 में हुई थी। कंपनी को असली रफ्तार तब मिली जब मशहूर संगीतकार फैरेल विलियम्स ने साल 2017 में इसमें निवेश किया। इसके बाद 2018 में सोनी के इनोवेशन फंड ने भी इसमें पूंजी लगाई। ड्रीम थिएटर बैंड के मशहूर कीबोर्ड वादक जॉर्डन रूडेस ने रोली के उपकरणों का खुलकर प्रचार किया और उनकी सराहना की। साल 2016 की लोकप्रिय फिल्म ला ला लैंड में रयान गोसलिंग के किरदार को सीबोर्ड ग्रैंड बजाते हुए दिखाया गया था। उस दौर में तकनीक और संगीत उद्योग दोनों जगह कंपनी को भविष्य का सितारा माना जा रहा था। लेकिन साल 2020 आते-आते यह सुर पूरी तरह बदल गया। कोविड-19 महामारी के दौरान पैदा हुए वित्तीय संकट से उबारने के लिए ब्रिटिश सरकार के फ्यूचर फंड ने टैक्सपेयर्स के पैसे से रोली को राहत पैकेज दिया था। इसके बावजूद कंपनी साल 2021 में पहली बार दिवालिया होकर प्रशासन प्रक्रिया में चली गई थी। उस वक्त कंपनी ने ल्यूमिनरी रोली के नाम से खुद को दोबारा पेश किया और म्यूजिक-लर्निंग टूल्स पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान लाइट-अप ल्यूमी कीबोर्ड और एयरवेव जैसे डिजिटल उपकरण पेश किए गए, जो डिजिटल थेरेमिन होने के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पियानो टीचर का काम भी करते थे। संवाद की कमी और दफ्तर के अंदरूनी हालात आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच रोली के साथ ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायत हमेशा संवाद की कमी रही। ल्यूमी कीबोर्ड ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को बिना किसी स्पष्ट सूचना के महीनों की देरी का सामना करना पड़ा। कंपनी के उपकरणों की लंबे समय से समीक्षा करने वाले यूट्यूबर लुईस जेरार्ड, जो वासाबीनॉइज़ नाम से चैनल चलाते हैं, ने कहा कि किकस्टार्टर अभियान के समय से ही कंपनी में पारदर्शिता की भारी कमी रही है और चीजें हमेशा जरूरत से ज्यादा गोपनीय रखी जाती थीं। कंपनी के पूर्व कर्मचारियों के बयानों में भी अंदरूनी संस्कृति को लेकर गंभीर बातें सामने आई हैं। कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी पूरी तरह से रोलैंड लैम्ब की निजी पसंद और मिजाज के इर्द-गिर्द घूमती थी। कई लोगों ने उनकी कार्यशैली की तुलना स्टीव जॉब्स से की। एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि वहां काम करना किसी फिल्म के सेट जैसा था, जहां लैम्ब खुद को मुख्य किरदार और बाकी सभी को अतिरिक्त किरदार समझते थे। साल 2021 में एक पूर्व कर्मचारी ने गिटहब पर 16 पन्नों का एक दस्तावेज अपलोड किया था, जिसका शीर्षक कीपिंग रोलैंड हैप्पी था। इसमें बताया गया था कि पैथोलॉजिकल नार्सिसिस्ट व्यवहार वाले व्यक्ति से कैसे निपटा जाए। पूर्व सहयोगियों के मुताबिक लैम्ब बेहद जिद्दी स्वभाव के थे, जो पिछली गलतियों से सीखने के बजाय लगातार नए जोखिम लेना पसंद करते थे। एमआईडीआई पॉलीफोनिक एक्सप्रेशन और बाजार की सीमाएं लिनस्ट्रूमेंट और सेंसल मॉर्फ जैसे उपकरणों के साथ रोली ने एमआईडीआई पॉलीफोनिक एक्सप्रेशन (MPE) तकनीक के प्रसार में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। MPE तकनीक के जरिए वादक अपनी उंगलियों के दबाव और सतह पर गति के आधार पर नोट की पिच और टिम्बर को बारीकी से नियंत्रित कर सकते हैं। उंगलियों को सतह पर दबाने या सरकाने से अत्यधिक संवेदनशील म्यूजिकल नोट्स तैयार होते हैं, जो परंपरागत कीबोर्ड पर संभव नहीं थे। हालांकि यह तकनीक बेहद क्रांतिकारी थी, लेकिन इसका बाजार बहुत सीमित और विशिष्ट था। ऐपल जैसा विशाल ग्राहक वर्ग खड़ा करना इस तरह के वाद्ययंत्रों के लिए हमेशा मुश्किल रहा। रोली ने मुख्यधारा में आने की कोशिश भी की और ऐपल स्टोर्स में अपने रोली ब्लॉक्स बेचने के लिए ऐपल के साथ साझेदारी की। दुर्भाग्य से, महामारी के दौरान ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने उत्पादन ठप कर दिया और कंपनी ऑर्डर पूरा करने में असमर्थ रही। पहले दिवालियेपन और रीब्रांडिंग के बाद कंपनी के पास आगे बढ़ने के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन खत्म हो चुके थे। उपकरणों को जिंदा रखने में जुटी रेडिट कम्युनिटी कंपनी के बिखरने के बाद भी रोली के दीवाने पूरी तरह हताश होकर नहीं बैठे हैं। रेडिट पर उपयोगकर्ता अब अपने महंगे उपकरणों को चालू रखने के लिए तकनीकी समाधान तैयार करने में जुट गए हैं। ब्रिटेन के ऑडियो इंजीनियर सैम हॉकिंग, जो डेमिक्स डॉट मी नाम से ऑडियो टूल्स कंपनी चलाते हैं और खुद कई रोली सीबोर्ड ब्लॉक्स के मालिक हैं, उन्होंने स्वतंत्र सॉफ्टवेयर बनाना शुरू कर दिया था। हॉकिंग ने रेडिट और गिटहब पर ऐसे कॉन्फ़िगरेशन टूल्स साझा किए हैं, जिनकी मदद से रोली के ग्रैंड, राइज, एयरवेव और ब्लॉक डिवाइसेज रोली के आधिकारिक सॉफ्टवेयर लॉन्चर के बिना भी सामान्य MIDI डिवाइस के तौर पर काम कर सकते हैं। हॉकिंग के अनुसार उनके सीबोर्ड उपकरण करीब 10 साल पुराने हैं और आज भी बेहतरीन स्थिति में काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि ये उत्पाद बेहद अनोखे हैं और दुनिया में ऐसा कोई दूसरा कीबोर्ड नहीं है, इसलिए कोई भी व्यक्ति भारी-भरकम रकम खर्च करने के बाद इन्हें बेकार नहीं होने देना चाहता। कम्युनिटी के अन्य सदस्य भी इस ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर में नए सुधार जोड़ रहे हैं ताकि हार्डवेयर हमेशा इस्तेमाल के योग्य बना रहे। इसका आप पर असर रोली के दोबारा दिवालिया होने से महंगे म्यूजिकल हार्डवेयर खरीदने वाले ग्राहकों के पैसे और उपकरण दोनों खतरे में पड़ गए हैं। • नए खरीदारों पर असर: जिन लोगों ने हाल के महीनों या सालों में ऑर्डर दिए थे, उनकी डिलीवरी या रिफंड मिलने की संभावना बेहद कम हो गई है। ऐसे ग्राहकों को अपने क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता या बैंक से चार्जबैक विवाद दर्ज कराने की कोशिश करनी चाहिए। • मौजूदा हार्डवेयर मालिकों पर प्रभाव: कंपनी के सर्वर या मालिकाना सॉफ्टवेयर बंद होने पर कीबोर्ड का इस्तेमाल बंद होने का खतरा है। उपयोगकर्ताओं को रेडिट और गिटहब पर उपलब्ध ओपन-सोर्स कम्युनिटी टूल्स तुरंत डाउनलोड करके अपने सिस्टम में रख लेने चाहिए। • वारंटी और सर्विस का नुकसान: उपकरणों में खराबी आने पर अब आधिकारिक स्पेयर पार्ट्स या रिपेयर सपोर्ट नहीं मिलेगा। संगीतकारों को अब थर्ड-पार्टी रिपेयर तकनीशियनों और कम्युनिटी गाइड्स पर ही निर्भर रहना होगा। • इंडी म्यूजिक डेवलपर्स के लिए सीख: क्लाउड या मालिकाना सॉफ्टवेयर पर अत्यधिक निर्भर हार्डवेयर खरीदने का जोखिम एक बार फिर उजागर हुआ है। संगीत निर्माताओं को केवल उन्हीं डिवाइसों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो ओपन-स्टैंडर्ड MIDI प्रोटोकॉल पर बिना इंटरनेट के काम कर सकें। ऐसा क्यों हुआ रोली का पतन अनियंत्रित खर्च, आला दर्जे के सीमित बाजार और कंपनी के भीतर खराब प्रबंधन की एक लंबी श्रृंखला का नतीजा है। • सीमित बाजार और जटिल मैन्युफैक्चरिंग: एमआईडीआई पॉलीफोनिक एक्सप्रेशन कीबोर्ड बेहद खास और महंगे उपकरण हैं जिनका बाजार बहुत छोटा रहा है। जटिल सिलिकॉन तकनीक के कारण उत्पादन लागत बहुत अधिक रही, जिसकी भरपाई सीमित बिक्री से नहीं हो सकी। • सप्लाई चेन और महामारी का झटका: साल 2020 में कोविड-19 के दौरान दुनिया भर में पुर्जों की सप्लाई रुक गई जिससे रोली के ऑर्डर अटक गए। टैक्सपेयर फंड और रीब्रांडिंग के बावजूद कंपनी अपने कैश फ्लो संकट से कभी पूरी तरह उबर नहीं पाई। • आंतरिक संस्कृति और संवादहीनता: पूर्व कर्मचारियों के अनुसार संस्थापक की हठधर्मिता और यथार्थवादी वित्तीय समझ की कमी ने कंपनी को खोखला किया। ग्राहकों से लगातार सच्चाई छिपाने और गलतियों से न सीखने की आदत ने निवेशकों और खरीदारों का भरोसा तोड़ दिया। सवाल-जवाब 1. रोली कंपनी के साथ असल में क्या हुआ है? रोली 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से ब्रिटेन में प्रशासन प्रक्रिया में चली गई है, जो कि कंपनी का दूसरा दिवालियापन है। 2. रोली के संस्थापक रोलैंड लैम्ब का अब क्या रोल है? लैम्ब को इस साल की शुरुआत में सीईओ पद से हटा दिया गया था और उन्होंने अगस्त में इंस्ट्रूमेंटल इंटेलिजेंस नाम से एक नई फर्म पंजीकृत कराई है। 3. जिन ग्राहकों ने ऑर्डर बुक किए थे, उनके पैसों का क्या होगा? ग्राहकों को महीनों से रिफंड या उत्पाद नहीं मिले हैं और प्रशासन प्रक्रिया के दौरान प्रत्यक्ष रिफंड मिलने की संभावना बेहद कम है। 4. क्या मौजूदा रोली कीबोर्ड हमेशा के लिए बेकार हो जाएंगे? आधिकारिक सॉफ्टवेयर बंद होने पर ऐसा हो सकता है, लेकिन कम्युनिटी डेवलपर्स ने ऐसे ओपन-सोर्स टूल्स बनाए हैं जिनसे हार्डवेयर काम करता रहेगा। 5. रोली की स्थापना कब हुई थी और इसके बड़े निवेशक कौन थे? इसकी स्थापना 2009 में हुई थी और इसमें संगीतकार फैरेल विलियम्स तथा सोनी इनोवेशन फंड ने बड़ा निवेश किया था। 6. क्या रोली पहले भी कभी दिवालिया हुई थी? हां, महामारी के दबाव के चलते रोली 2021 में पहली बार प्रशासन प्रक्रिया में गई थी और बाद में ल्यूमिनरी रोली के रूप में दोबारा शुरू हुई थी। https://trendkia.com/gear/myujika-teka-startaapa-roli-dusari-bara-divaliya-bina-dilivari-phnse-grahakon-ke-lakhon-rupaye-55885 TrendKia — Har trend, sabse pehle.