हार्डवेयर की विफलता के बाद रैबिट का बड़ा बदलाव, अब फोन और कंप्यूटर पर काम करेगा नया एजेंटिक ओएस3 आर1 गैजेट बनाने वाली टेक कंपनी रैबिट ने अब अपना रुख सॉफ्टवेयर की तरफ मोड़ते हुए ओएस3 पेश किया है, जो यूजर के मौजूदा कंप्यूटर, आईमैसेज और टेलीग्राम से सीधे जुड़कर काम करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में एक समय जेब में समा जाने वाले अलग गैजेट्स को भविष्य बताया जा रहा था, लेकिन जमीनी हकीकत ने इस धारणा को बदल कर रख दिया है। सीईएस 2024 में भारी चर्चा बटोरने वाले आर1 डिवाइस के निर्माता रैबिट ने अब अपनी दिशा बदलते हुए एक नया सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म ओएस3 पेश किया है। यह एक स्वायत्त एजेंटिक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो किसी एक खास डिब्बे में बंद रहने के बजाय यूजर के कंप्यूटर, फोन और ब्राउज़र पर सीधे काम करता है। कंपनी के संस्थापक ल्यू अब इस तकनीक को उन डिवाइसेज तक पहुंचा रहे हैं जो लोग पहले से हर रोज इस्तेमाल कर रहे हैं। शुरुआती वादे और आर1 डिवाइस की कमजोर शुरुआत जब आर1 को पहली बार बाजार में उतारा गया था, तब इसे उबर की कैब बुक करने और डोरडैश से खाना मंगाने जैसे कामों को केवल आवाज देकर पूरा करने वाले जादुई गैजेट के रूप में पेश किया गया था। टीनेज इंजीनियरिंग द्वारा डिजाइन किए गए इस नारंगी रंग के छोटे उपकरण ने शुरुआत में तकनीकी जगत का ध्यान तो खूब खींचा, लेकिन असल इस्तेमाल में इसके एक्शन मॉडल्स बुरी तरह लड़खड़ा गए। तकनीक की दुनिया में इसे बेहद निराशाजनक समीक्षाएं मिलीं और एक जानी-मानी तकनीकी समीक्षा में इसे 10 में से महज 3 अंक दिए गए थे। उस समय डिवाइस पर मौजूद एजेंट फीचर्स भरोसेमंद तरीके से काम करने में नाकाम साबित हुए थे। हालांकि ल्यू का दावा है कि वित्तीय दृष्टि से आर1 कंपनी के लिए घाटे का सौदा नहीं था। उन्होंने कहा कि कंपनी बिना किसी मासिक सब्सक्रिप्शन के इस गैजेट को बेचकर 45 से 50 प्रतिशत तक का मार्जिन कमाने में सफल रही थी। दुनिया भर में इसके 1,00,000 से अधिक यूनिट्स डिलीवर किए गए और ग्राहकों द्वारा डिवाइस वापस करने की दर 5 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई। इंजीनियरिंग के नजरिए से ल्यू का मानना है कि उनका विचार गलत नहीं था, बल्कि अरबों डॉलर जुटाने वाले बड़े एआई स्टूडियोज की तुलना में सीमित संसाधनों और छोटी टीम के साथ काम करना उनकी असली चुनौती थी। आर्थिक दबाव, कर्मचारियों की हड़ताल और सुधार का दौर खराब शुरुआती समीक्षाओं के बाद रैबिट के सामने अस्तित्व बचाने का संकट खड़ा हो गया था। कंपनी ने अपनी टीम को 15 कर्मचारियों तक सीमित रखने का फैसला किया। लगभग एक साल पहले स्थिति और भी गंभीर हो गई जब भारत में उत्पाद लॉन्च करने की योजना विनियामक अड़चनों में फंस गई। इस नियामक रुकावट के चलते कंपनी गहरे वित्तीय दबाव में आ गई और हालात यहां तक पहुंच गए कि कुछ कर्मचारियों ने वेतन न मिलने का आरोप लगाकर हड़ताल कर दी। ल्यू ने उस कठिन दौर को स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने कर्मचारियों के फैसले का सम्मान किया, जिसके बाद नया फंड हासिल करके कंपनी की स्थिति को स्थिर किया गया। रैबिट अब तक कुल मिलाकर लगभग 60 मिलियन डॉलर का निवेश जुटा चुकी है। बाजार की मार झेलने के बाद कंपनी ने तुरंत नया हार्डवेयर बनाने की हड़बड़ी नहीं दिखाई। इसके बजाय पिछले डेढ़ साल में लगभग 50 सॉफ्टवेयर अपडेट्स जारी करके मौजूदा आर1 को सुधारने पर काम किया गया। करीब 12,000 सदस्यों वाले डिस्कोर्ड समुदाय की मदद से डिवाइस को धीरे-धीरे एक ओपन प्लेटफॉर्म में तब्दील किया गया, जिसमें यूजर्स चाहें तो कंपनी के खुद के मॉडल के बजाय ओपनक्लॉ या हेमीज जैसे बाहरी एजेंट जोड़ सकते हैं। हालांकि कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ अमेज़न, टारगेट और बेस्ट बाय पर मौजूदा स्टॉक अभी भी बिक रहा है, लेकिन रैबिट ने आर1 का नया उत्पादन पूरी तरह रोक दिया है। क्या है ओएस3 और कैसे संभालता है रोजमर्रा के काम? रैबिट का नया ओएस3 एक क्रॉस-प्लेटफॉर्म एजेंटिक सिस्टम है जो मुख्य रूप से क्लाउड पर चलता है, लेकिन विंडोज, मैक या लिनक्स कंप्यूटर पर इंस्टॉल होने वाले लोकल एजेंट नोड के जरिए यूजर की फाइलों, डेस्कटॉप प्रोग्राम्स और वेब पेजों को सीधे नियंत्रित करता है। एक ही खाते से अधिकतम 5 अलग-अलग मशीनों को जोड़ा जा सकता है। यह सिस्टम अपने डायरेक्ट लार्ज एक्शन मॉडल यानी डीएलएएम तकनीक का सहारा लेकर कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर चलाना, फाइलों में फेरबदल करना, कोड लिखना और एरर ठीक करना जैसे काम खुद-ब-खुद निपटा सकता है। इस पूरे सिस्टम को किसी अलग गैजेट की जरूरत नहीं है। यूजर अपने डेस्कटॉप ब्राउज़र, फोन में टेलीग्राम या ऐपल के आईमैसेज के जरिए ओएस3 को निर्देश भेज सकते हैं। इसका इंटरफेस चैट हिस्ट्री के बिखरे हुए साइडबार से मुक्त है और एक सिंगल निरंतर चैट स्ट्रीम पर काम करता है। किसी भी तीसरे पक्ष के एजेंट स्किल का पब्लिक यूआरएल चैट में डालते ही ओएस3 उसे खुद इंस्टॉल कर लेता है। इसके लिए यूजर को किसी तकनीकी ज्ञान की दरकार नहीं होती। ल्यू के अनुसार, जैसे वेंडर्स से हर हफ्ते मिलने वाली एक्सेल सेल्स रिपोर्ट को वे पहले फोन पर देखकर फिर कंप्यूटर पर मैन्युअली मास्टर शीट में जोड़ते थे, अब वे टेलीग्राम पर केवल एक मैसेज भेजकर अपने पीसी पर मौजूद एजेंट से यह काम करवा लेते हैं। एक अन्य हालिया वाकये का जिक्र करते हुए ल्यू ने बताया कि जब वे दिनभर चलने वाले वीडियो शूट में व्यस्त होने के कारण स्लैक पर उपलब्ध नहीं थे, तब उन्होंने ओएस3 एजेंट को अपनी जगह स्लैक संभालने का जिम्मा सौंपा। इस एजेंट ने खुद को ल्यू का प्रतिनिधि बताते हुए एक इंजीनियर के साथ करीब 50 मिनट तक बातचीत की और सवालों के जवाब देने के लिए ल्यू के कंप्यूटर पर मौजूद फाइलों की मदद भी ली। निजता की शर्तें और हार्डवेयर की नई दिशा डेटा सुरक्षा को लेकर कंपनी का कहना है कि लोकल एजेंट यूजर का निजी डेटा अपने पास जमा नहीं करता और न ही किसी को बेचता है। चैट रिकॉर्ड और मेमोरी लॉग्स भले ही कंपनी के सर्वर पर सुरक्षित रखे जाते हैं, लेकिन फाइलें यूजर की अपनी मशीन में ही रहती हैं। हालांकि इसमें एक शर्त शामिल है कि जब किसी जटिल काम के लिए बाहरी एआई मॉडल की मदद ली जाती है, तो जरूरी प्रॉम्प्ट्स संबंधित मॉडल प्रदाता के पास जाते हैं। ओएस3 पूरी तरह ब्रिंग योर ओन की यानी बीवाईओकी मॉडल पर आधारित है, जहां रैबिट कोई मासिक फीस नहीं लेता, बल्कि यूजर को ओपनएआई, एंथ्रोपिक या लोकल ओपन सोर्स मॉडल की अपनी एपीआई की लगानी होती है। रैबिट ने साफ कर दिया है कि वह आर2 नाम का कोई दूसरा गैजेट नहीं बनाएगी। कंपनी का मौजूदा आर1 अब ओएस3 के लिए सिर्फ एक इनपुट और आउटपुट टूल के तौर पर काम कर सकता है। आगामी कुछ महीनों में कंपनी का अगला हार्डवेयर कदम एक समर्पित मशीन के रूप में सामने आएगा जिसे ल्यू ने साइबरडेक का नाम दिया है, जिसे खास तौर पर वाइब कोडिंग करने और सीधे ओएस3 चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। सिलिकॉन वैली में जब मेटा के म्यूज जैसे एजेंट्स को ऑटोमेटेड वर्चुअल मशीन से खरीदारी करने पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है, तब रैबिट का यह सॉफ्टवेयर दांव साबित करता है कि लोगों को एआई से बात करने के लिए अलग जेब खर्च करके नया गैजेट खरीदने की कभी जरूरत ही नहीं थी। इसका आप पर असर रैबिट का यह नया कदम दिखाता है कि यूजर्स को अब एआई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अलग से महंगे गैजेट्स खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। • कंप्यूटर यूजर्स के लिए: अब लोग अपने साधारण लैपटॉप या डेस्कटॉप पर लोकल नोड डालकर स्वचालित रूप से फाइलें अपडेट करने और कोडिंग जैसे काम करवा सकते हैं। इसके लिए अलग से कोई नया हार्डवेयर खरीदने का खर्च बच जाएगा। • रिमोट काम करने वालों के लिए: यूजर्स घर से बाहर रहकर भी अपने मोबाइल के टेलीग्राम या आईमैसेज से सीधे घर के पीसी पर काम करवा सकते हैं। इससे ऑफिस के रोजमर्रा के छोटे-मोटे डेटा काम कहीं से भी निपटाए जा सकते हैं। • खर्च और सब्सक्रिप्शन: कंपनी कोई मासिक शुल्क नहीं ले रही है, लेकिन यूजर्स को अपने ओपनएआई या एंथ्रोपिक के एपीआई टोकन का खर्च खुद वहन करना होगा। इसका मतलब है कि आप जितना इस्तेमाल करेंगे, केवल उसी हिसाब से भुगतान करना होगा। • आर1 खरीदारों के लिए: जिन लोगों ने पहले से आर1 गैजेट खरीद रखा है, उनका उपकरण बेकार नहीं होगा और वे इसे ओएस3 के इनपुट-आउटपुट माइक की तरह इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि कंपनी ने इस डिवाइस का नया उत्पादन हमेशा के लिए बंद कर दिया है। ऐसा क्यों हुआ रैबिट को अपना ध्यान हार्डवेयर से हटाकर सॉफ्टवेयर की तरफ इसलिए मोड़ना पड़ा क्योंकि उनका स्टैंडअलोन गैजेट रोजमर्रा के उपयोग में असफल साबित हुआ था। स्वतंत्र उपकरणों के बजाय मौजूदा कंप्यूटरों पर काम करने वाले एजेंट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। • खराब शुरुआती समीक्षाएं: सीईएस 2024 में लॉन्च के बाद आर1 के ऑटोमेशन फीचर्स सही से काम नहीं कर पाए और तकनीकी समीक्षकों ने इसे बेहद खराब रेटिंग दी। कमजोर कार्यक्षमता की वजह से स्वतंत्र गैजेट्स का आकर्षण तुरंत खत्म हो गया। • वित्तीय और विनियामक संकट: भारत में उत्पाद लॉन्च अटकने की वजह से कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव आ गया था और कर्मचारियों को वेतन न मिलने पर हड़ताल का सामना करना पड़ा। इस झटके ने कंपनी को टीम का आकार 15 तक सीमित रखने और नए हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर किया। • सॉफ्टवेयर एजेंट्स की बढ़ती स्वीकार्यता: पिछले डेढ़ साल में लार्ज एक्शन मॉडल्स और ऑटोमेशन की मांग में भारी उछाल आया है। जब लोगों के पास पहले से शक्तिशाली पीसी और स्मार्टफोन मौजूद हैं, तो उन्हीं स्क्रीन्स पर काम करने वाला ओएस3 बनाना ज्यादा व्यावहारिक साबित हुआ। सवाल-जवाब 1. क्या ओएस3 का इस्तेमाल करने के लिए आर1 गैजेट का होना जरूरी है? नहीं, ओएस3 का उपयोग करने के लिए आर1 डिवाइस की कोई आवश्यकता नहीं है। इसे किसी भी कंप्यूटर, वेब ब्राउज़र, टेलीग्राम या आईमैसेज के जरिए सीधे चलाया जा सकता है। 2. रैबिट ओएस3 का इस्तेमाल करने का शुल्क क्या है? रैबिट ओएस3 के लिए कोई मासिक सब्सक्रिप्शन फीस नहीं लेता है। यूजर्स को इसमें अपने ओपनएआई, एंथ्रोपिक या लोकल ओपन सोर्स मॉडल की एपीआई की लगानी होती है। 3. क्या कंपनी आर2 नाम से कोई नया डिवाइस लॉन्च करेगी? ल्यू के अनुसार कंपनी की आर2 गैजेट लाने की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय वे कुछ महीनों में वाइब कोडिंग के लिए एक साइबरडेक मशीन पेश करने की तैयारी में हैं। 4. एक ओएस3 खाते से कितने कंप्यूटर या डिवाइस जोड़े जा सकते हैं? एक यूजर अकाउंट से अधिकतम 5 अलग-अलग मशीनों को लिंक किया जा सकता है। इसके बाद सिस्टम खुद तय करता है कि किस काम को किस डिवाइस पर पूरा करना है। 5. क्या आर1 डिवाइस का उत्पादन अभी भी जारी है? कंपनी ने आर1 का नया उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया है। मौजूदा बचा हुआ स्टॉक खत्म होने तक ही यह बाजार और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। https://trendkia.com/gear/rabbit-ka-bara-badalava-aba-phona-aura-knpyutara-para-kama-karega-naya-ejentika-os3-36605 TrendKia — Har trend, sabse pehle.