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  "type": "article",
  "title": "गोवा में पार्सल और डेड ड्रॉप के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने कूरियर सेवाओं पर कसा शिकंजा",
  "summary": "गोवा में तस्करों ने कूरियर पार्सल और डेड ड्रॉप तकनीक से ड्रग्स सप्लाई करने के नए तरीके अपनाए हैं। पुलिस ने कूरियर एजेंसियों को सतर्क करते हुए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।",
  "content": "गोवा में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अब पारंपरिक तरीकों की जगह बेहद आधुनिक और चालाक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। तस्कर ऐसे रास्ते चुन रहे हैं जिससे पुलिस और स्थानीय एजेंसियों को शक तक न हो। इस नई कार्यप्रणाली के तहत कूरियर कंपनियों, डाक सेवाओं और एक्सप्रेस डिलीवरी पार्टनर्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में एक मामले के दौरान पुलिस ने जब तलाशी ली, तो एक स्टीम आयरन यानी भाप वाली इस्त्री के निचले हिस्से में छिपाकर भेजी जा रही चरस की एक बड़ी खेप बरामद की। ऊपर से दिखने में यह केवल एक सामान्य घरेलू उपकरण की डिलीवरी लग रही थी, लेकिन उसके भीतर प्रतिबंधित सामग्री बंद थी। जिस ड्राइवर के हाथ से यह पार्सल भेजा जा रहा था, उसे इस बात की भनक तक नहीं थी कि वह ड्रग्स ले जा रहा है।\n\nछोटे कूरियर पैकेटों से बढ़ रही तस्करी\nइस तरह के चौंकाने वाले मामले सामने आने के बाद एंटी नारकोटिक्स सेल सतर्क हो गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक तस्कर विशेष रूप से गांजा और चरस जैसी सामग्रियां छोटे आकार के कूरियर पार्सल में रखकर भेज रहे हैं। हालांकि इन संदिग्ध पार्सल को पहचानने के लिए कुछ संकेत तय किए गए हैं। फर्जी नाम से बुकिंग कराना, अधूरा या गलत पता देना, पैकेट की असामान्य पैकेजिंग और घोषित कीमत तथा वस्तु के वास्तविक मूल्य में अंतर होना इसके मुख्य लक्षण हैं। पुलिस ने कूरियर सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिए हैं कि वे बुकिंग के समय भेजने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों के पहचान पत्रों की जांच करें, ग्राहक पहचान नियमों यानी केवाईसी का पूरी सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार का संदेह होने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।\n\nडेड ड्रॉप रणनीति और अनजाने राइडर्स का इस्तेमाल\nतस्करी के इस नए नेटवर्क में 'डेड ड्रॉप' का तरीका भी तेजी से फैल रहा है। इस व्यवस्था में खरीदार सबसे पहले डिजिटल माध्यम से पैसे ट्रांसफर करता है। इसके बाद तस्कर उसे एक निश्चित स्थान और निर्देश भेजता है। इसके बाद किसी डिलीवरी राइडर के जरिए पार्सल को उस गुप्त जगह पर छोड़ दिया जाता है। अधिकतर मामलों में डिलीवरी करने वाले राइडर को यह पता ही नहीं होता कि पैकेट के अंदर गैरकानूनी सामग्री मौजूद है। बाद में खरीदार जाकर उस स्थान से पार्सल उठा लेता है। इस पूरी प्रक्रिया से तस्करों की पहचान पूरी तरह छिपी रहती है और कूरियर एजेंसियां अनजाने में इस अवैध काम का जरिया बन जाती हैं।\n\nविभिन्न राज्यों से गोवा पहुंचने वाले ड्रग्स के मार्ग\nजांच अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार गोवा में गांजा, चरस, एलएसडी, एमडीएमए, एक्स्टेसी और कोकीन की मांग और जब्ती सबसे अधिक देखी जाती है। इन पदार्थों की आपूर्ति अलग-अलग राज्यों से की जा रही है। गांजा मुख्य रूप से झारखंड और ओड़िशा से गोवा भेजा जा रहा है। चरस की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश और नेपाल के रास्तों से होती है। एलएसडी की खेप में केरल का नाम सामने आया है। इसके अलावा मेथामफेटामाइन की आपूर्ति केरल और बेंगलुरु से की जा रही है, जबकि एमडीएमए और एक्स्टेसी की सप्लाई केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली से हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, किराए के मकान, पर्यटक स्थल और नाइटलाइफ कार्यक्रम इस तस्करी नेटवर्क के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों और पार्टी स्थलों को बेहद संवेदनशील माना गया है।\n\nपुलिस का चार सूत्रीय एक्शन प्लान और आंकड़े\nराज्य में नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत तीन साल का विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत पुलिस प्रशासन ने कूरियर और डाक सेवा प्रदान करने वाले लगभग 75 प्रतिनिधियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। पुलिस की रणनीति मुख्य रूप से चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी है जिसमें खुफिया कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके कच्चे माल पर सख्त नियंत्रण, नशीले पदार्थों की मांग कम करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल शामिल है।\n\nगोवा पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या इस प्रकार है\n\n• 2023: कुल 140 मामले दर्ज किए गए और 166 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 21 विदेशी नागरिक शामिल थे।\n• 2024: कुल 162 मामले दर्ज हुए और 192 लोगों की गिरफ्तारी की गई।\n• 2025: मामलों की संख्या बढ़कर 163 हुई और 213 लोग पकड़े गए।\n• 2026 (12 अगस्त तक): अब तक 122 मामले सामने आ चुके हैं और 135 गिरफ्तारियां हुई हैं।\n\nसूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए पुलिस ने कूरियर ऑपरेटरों को मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 की जानकारी दी है। साथ ही त्वरित सूचना साझा करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप भी तैयार किए गए हैं। विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों, स्कूलों और पब या क्लबों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: देश भर में कूरियर और होम डिलीवरी सेवाओं में पहचान पत्र (KYC) की जांच अधिक सख्त हो सकती है।\n• गोवा में: पर्यटन स्थलों, तटीय क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सुरक्षा जांच और कूरियर पार्सल की निगरानी बढ़ाई जाएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गोवा में तस्कर ड्रग्स भेजने के लिए क्या नया तरीका अपना रहे हैं?\nतस्कर कूरियर सेवाओं, डाक पार्सल और 'डेड ड्रॉप' तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें डिलीवरी राइडर को बिना जानकारी दिए पार्सल गुप्त जगहों पर छोड़ दिया जाता है।\n\n2. गोवा पुलिस ने कूरियर कंपनियों को क्या निर्देश दिए हैं?\nपुलिस ने कूरियर कंपनियों को ग्राहकों के केवाईसी नियमों का सख्ती से पालन करने, संदिग्ध पार्सल की पहचान करने और तुरंत 1933 हेल्पलाइन या पुलिस ग्रुप पर सूचना देने के निर्देश दिए हैं।\n\n3. गोवा में मुख्य रूप से कौन-कौन सी ड्रग्स पकड़ी जा रही हैं?\nराज्य में मुख्य रूप से गांजा, चरस, एलएसडी, एमडीएमए, एक्स्टेसी, मेथामफेटामाइन और कोकीन जब्त की जा रही हैं।\n\n4. मादक पदार्थों से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए कौन सा हेल्पलाइन नंबर है?\nनागरिक और कूरियर ऑपरेटर मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।",
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  "category": "गोवा",
  "publishedAt": "2026-08-18",
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    "गोवा पुलिस",
    "ड्रग्स तस्करी",
    "कूरियर सर्विस",
    "एंटी नारकोटिक्स सेल",
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