# गोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवाल

> गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं छूटेगा।

**Type:** article · **Category:** गोवा · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/goa/goa-votara-lista-vivada-para-election-commission-ka-rukha-sapha-matadata-suchi-snshodhana-para-vipaksha-ne-uthae-savala-38175 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोवा, चुनाव आयोग, मतदाता सूची, ज्ञानेश कुमार, कांग्रेस, विजय सरदेसाई, आम आदमी पार्टी

गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उपजे सियासी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के मकसद से मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रहे हैं। इस पर चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर आश्वस्त किया कि फरवरी 2026 में जारी की गई अंतिम मतदाता सूची से छूटे 97 मामलों में बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर फॉर्म 6 भरवाने की प्रक्रिया पूरी की है। इनमें से कई लोगों के नाम सूची में दर्ज किए जा चुके हैं और बाकी मामलों की जांच जारी है, जिससे कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।

## मतदाता सूची पर कांग्रेस के गंभीर आरोप
विपक्षी खेमे ने हाल ही में सामने आई उन चर्चाओं का हवाला दिया, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा गोवा सहित विभिन्न स्थानों पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। इस मुद्दे को उठाते हुए गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कवथंकर ने पणजी में कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एसआईआर प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाकर चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है, क्योंकि जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए दोबारा सत्ता हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो चुका है।

कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से गायब करना चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर हेरफेर के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग सत्ताधारी दल के एक सहयोगी तंत्र की तरह बर्ताव कर रहा है। देश भर में विपक्षी दलों को मिल रहे जनसमर्थन से घबराकर ही इस प्रकार के कदम उठाए जा रहे हैं। इसी आधार पर कांग्रेस ने मांग की कि एसआईआर की इस पूरी कवायद को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

## गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग
इस विवाद में गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने भी सख्त रुख अपनाया है। पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने एक अलग संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मांग रखी कि मृत व्यक्तियों को छोड़कर उन सभी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में तुरंत दोबारा जोड़े जाएं जिन्हें बाहर किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान लगभग 1.8 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो राज्य के चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकता है।

विजय सरदेसाई ने राज्य की चुनावी परिस्थितियों की ओर ध्यान दिलाते हुए रेखांकित किया कि गोवा में विधानसभा सीटों पर जीत-हार का फैसला बेहद करीबी अंतर से होता है। कई मौकों पर यह अंतर 100 वोटों से भी कम का रहता है। ऐसे संवेदनशील माहौल में इतनी बड़ी तादाद में नाम कटने से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के परिणाम गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। चूंकि चुनाव का समय नजदीक आ रहा है और आयोग के पास इस पूरी कवायद को नए सिरे से दोहराने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, इसलिए सबसे व्यावहारिक समाधान यही है कि इस विवादित प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाए।

## आम आदमी पार्टी ने उठाए निर्वाचन अधिकारियों के अधिकारों पर सवाल
आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। पार्टी की गोवा इकाई के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने आरोप लगाया कि एसआईआर व्यवस्था ने जमीनी स्तर पर तैनात स्थानीय चुनाव अधिकारियों के संवैधानिक अधिकारों और स्वायत्तता को कमजोर किया है। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि राज्य में पहले लोगों की जमीनें छीनी जा रही थीं और अब नागरिकों के मताधिकार को निशाना बनाया जा रहा है।

वाल्मीकि नाइक के अनुसार, गोवा में सामने आई यह विसंगति किसी बड़े राष्ट्रीय संकट का एक छोटा सा हिस्सा हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि जो मतदाता सत्ताधारी दल के समर्थक नहीं हैं, उनके नाम चुन-चुनकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं ताकि चुनावी संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। चुनाव आयोग द्वारा सफाई दिए जाने के बावजूद राज्य के विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार लामबंद हो रहे हैं।

## इसका आप पर असर
गोवा में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद से आम नागरिकों के लिए अपने मताधिकार की जांच करना अनिवार्य हो गया है।

- **भारत में:** देश भर के नागरिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की अद्यतन मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हैं। यदि नाम कट गया हो तो तुरंत स्थानीय बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 भरकर पुनः पंजीकरण कराया जा सकता है।
- **गोवा में:** राज्य के निवासियों के लिए फरवरी 2026 की अंतिम मतदाता सूची में अपनी प्रविष्टि की पुष्टि करना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि संकीर्ण चुनावी अंतर में हर वोट निर्णायक होता है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूटे हैं, वे बीएलओ के माध्यम से फॉर्म 6 जमा करके अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
- **नागरिक प्रक्रिया:** यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से हट गया है, तो उसे दोबारा जुड़वाने के लिए निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के अनुसार छूटे हुए 97 मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- **आगामी चुनाव:** वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं की सक्रियता यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी वैध मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। अपनी मतदाता पर्ची और ऑनलाइन पोर्टल पर विवरण का समय रहते मिलान करना जरूरी है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब गोवा में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात सामने आई और विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

- **मतदाता सूची संशोधन:** चुनाव आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत सूचियों की समीक्षा की गई थी, जिसके दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए। विपक्षी दलों का दावा है कि इस दौरान करीब 1.8 लाख नाम काटे गए।
- **चुनाव आयुक्तों की आंतरिक चिंताएं:** विपक्षी दलों ने उन विवरणों का संदर्भ दिया जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा गोवा सहित विभिन्न इलाकों में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर चिंता जताई गई थी। इस आंतरिक समीक्षा की खबरों ने राजनीतिक दलों के विरोध को और हवा दी।
- **संकीर्ण चुनावी अंतर:** गोवा में कई विधानसभा क्षेत्रों में जीत-हार का फैसला 100 से भी कम मतों से होता है, जिसके चलते किसी भी बड़े पैमाने पर नाम हटने से परिणाम बदलने की आशंका पैदा हुई। इसी पृष्ठभूमि में विपक्षी दलों ने प्रक्रिया को रद्द करने और हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग की।

## सवाल-जवाब

### 1. गोवा में मतदाता सूची को लेकर क्या विवाद है?
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाकर आगामी चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

### 2. विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फरवरी 2026 की सूची से छूटे 97 मामलों में फॉर्म 6 भरवाने की प्रक्रिया पूरी की गई है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं छूटेगा।

### 3. गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने क्या मांग की है?
विजय सरदेसाई ने दावा किया कि 1.8 लाख नाम हटाए गए हैं, इसलिए मृत व्यक्तियों को छोड़कर सभी के नाम बहाल किए जाएं या फिर पूरी एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए।

### 4. कांग्रेस और आप ने चुनाव आयोग की भूमिका पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आयोग सत्ताधारी दल के हित में काम कर रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी ने कहा कि इस प्रक्रिया ने स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अधिकारों को कमजोर किया है।

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