18 से 70 साल की महिलाएं अब एलआईसी एजेंट बनकर हर महीने पा सकती हैं स्टाइपेंड एलआईसी बीमा सखी योजना के तहत 18 से 70 साल की महिलाएं तीन साल तक बीमा एजेंट बनने की ट्रेनिंग ले सकती हैं और पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले कमीशन के अलावा हर महीने 7,000 रुपये तक का स्टाइपेंड कमा सकती हैं। देश के छोटे शहरों और गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए अब बीमा सेक्टर में करियर बनाने का एक व्यवस्थित रास्ता खुल गया है, जिसमें तीन साल तक तय स्टाइपेंड, हाथों-हाथ ट्रेनिंग और सर्टिफाइड बीमा एजेंट बनकर कमीशन कमाने का मौका भी शामिल है। इसे आधिकारिक तौर पर महिला करियर एजेंट स्कीम यानी एमसीए कहा जाता है, लेकिन आम बोलचाल में इसे एलआईसी बीमा सखी योजना के नाम से जाना जाता है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में शुरू किया था। यह योजना क्यों शुरू की गई भारत के बड़े शहरों से बाहर रहने वाली बहुत सी महिलाओं के लिए स्थायी आमदनी का जरिया आज भी एक सपना ही है। स्थानीय स्तर पर काम के मौके बहुत सीमित होते हैं और कई बार महिलाओं के पास कमाई के लिए घर छोड़कर शहर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। एलआईसी बीमा सखी योजना इसी सोच को बदलने के लिए बनाई गई है, इसके तहत महिलाओं को पलायन करने के बजाय अपने ही इलाके में बीमा और वित्तीय जागरूकता फैलाने वाली एजेंट के तौर पर तैयार किया जाता है। इस योजना का लक्ष्य 2 लाख महिलाओं को बीमा सखी के तौर पर नियुक्त करना है, ताकि जिन इलाकों में बीमा और वित्तीय साक्षरता कम है, वहां इसका प्रसार हो सके और साथ ही उन महिलाओं को स्वतंत्र आजीविका मिल सके जो अब तक औपचारिक कार्यबल का हिस्सा नहीं बन पाई थीं। कौन कर सकता है आवेदन यह योजना 18 से 70 साल की उम्र की महिलाओं के लिए है। आवेदन की तारीख तक महिला की उम्र कम से कम 18 साल पूरी होनी चाहिए, जबकि योजना में शामिल होने की अधिकतम उम्र सीमा 70 साल रखी गई है। सिर्फ उम्र पूरी होने से बात नहीं बनती, हर आवेदक को भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई की तरफ से तय भर्ती-पूर्व परीक्षा भी पास करनी होती है, और चुने जाने के बाद एजेंसी के काम के लिए पर्याप्त समय भी देना होता है। हालांकि, हर कोई इस योजना के लिए योग्य नहीं है। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाली महिलाएं, साथ ही जो महिलाएं पहले से ही एलआईसी एजेंट के तौर पर काम कर रही हैं, वे इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकतीं। इसके अलावा मौजूदा या पूर्व एलआईसी एजेंट, एलआईसी कर्मचारी या पूर्व कर्मचारी, अथवा एलआईसी के मेडिकल एग्जामिनर के करीबी रिश्तेदार, यानी पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन या नजदीकी ससुराल वाले भी इसके लिए आवेदन नहीं कर सकते। रिटायर हो चुके एलआईसी कर्मचारी या पूर्व एजेंट जो दोबारा नियुक्ति चाहते हैं, वे भी बीमा सखी के तौर पर शामिल नहीं हो सकते। आवेदन कैसे करें और कौन से दस्तावेज चाहिए योग्यता की शर्तें पूरी करने वाली महिलाएं एलआईसी की आधिकारिक वेबसाइट licindia.in/lic-s-bima-sakhi के जरिए आवेदन कर सकती हैं। आवेदन के लिए कुछ सामान्य दस्तावेजों की जरूरत होती है, जिसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, दसवीं पास का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पते का प्रमाण और बैंक खाते की जानकारी शामिल है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एलआईसी की सामान्य एजेंट नियुक्ति प्रक्रिया के तहत महिला को एजेंसी कोड दिया जाता है। बीमा सखी हर महीने कितना कमा सकती है इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद तीन साल में धीरे-धीरे घटती जाती है, जबकि कमीशन से होने वाली कमाई कारोबार बढ़ने के साथ इसकी भरपाई करती है। चुनी गई महिलाओं को पहले साल हर महीने 7,000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है, दूसरे साल यह घटकर 6,000 रुपये प्रति माह और तीसरे साल 5,000 रुपये प्रति माह रह जाता है। इस स्टाइपेंड के अलावा हर बीमा सखी को पॉलिसी बेचने पर कमीशन भी मिलता है, यानी वह जितनी ज्यादा पॉलिसी बेचेगी, उसकी कुल मासिक कमाई स्टाइपेंड की रकम से कहीं ज्यादा हो सकती है। स्टाइपेंड पाने के लिए शर्तें यह स्टाइपेंड हर महीने अपने आप नहीं मिल जाता। इसे पाने के लिए बीमा सखी को हर महीने तय बिजनेस टारगेट पूरा करना होता है, जिसमें एक न्यूनतम संख्या में पॉलिसी बेचना और पहले साल का तय कमीशन कमाना शामिल है। दूसरे और तीसरे साल के लिए एक और शर्त जुड़ी है, पिछले साल बेची गई कम से कम 65 प्रतिशत पॉलिसी सक्रिय यानी एक्टिव बनी रहनी चाहिए, तभी अगले साल का स्टाइपेंड मिलता रहेगा। अगर किसी महीने कारोबार नहीं हुआ और टारगेट पूरा नहीं हो पाया, तो उस महीने का स्टाइपेंड नहीं दिया जाता। हालांकि यह रकम पूरी तरह खत्म नहीं होती, अगर बीमा सखी उसी साल के भीतर किसी और महीने में जरूरी टारगेट पूरा कर लेती है, तो छूटी हुई रकम का दावा बाद में भी किया जा सकता है। तीन साल बाद क्या होता है तीन साल की स्टाइपेंड अवधि खत्म होने के बाद बीमा सखी का एलआईसी से रिश्ता खत्म नहीं होता। इसके बाद वह एक सामान्य एलआईसी एजेंट के तौर पर काम करती रहती है और सिर्फ कमीशन से कमाई करती है। जो महिलाएं इस राह पर आगे बढ़ती रहती हैं, उनके लिए करियर में एक और पायदान भी है, ग्रेजुएट बीमा सखी अगर एलआईसी एजेंट के तौर पर पांच साल की सेवा पूरी कर लेती हैं और बाकी योग्यता की शर्तें भी पूरी करती हैं, तो वे एडीओ यानी अप्रेंटिस डेवलपमेंट ऑफिसर के पद के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसका आप पर असर यह योजना खासतौर पर उन महिलाओं के लिए मायने रखती है जो शहर गए बिना घर बैठे कमाई का जरिया चाहती हैं। • 18 से 70 साल की महिलाओं के लिए: अब बीमा सेक्टर में तीन साल का व्यवस्थित करियर रास्ता खुला है, जिसमें कमीशन शुरू होने से पहले ही गारंटीड स्टाइपेंड और ट्रेनिंग मिलती है। • घर के बजट पर असर: अगर बीमा सखी ज्यादा पॉलिसी बेचती है तो उसकी कमाई स्टाइपेंड से कहीं ज्यादा हो सकती है, लेकिन इसके लिए हर महीने तय टारगेट और पॉलिसी रिन्यूअल की शर्तें पूरी करनी होंगी। • लंबे करियर के लिए: पांच साल एजेंट रहने के बाद महिलाएं एडीओ के पद के लिए आवेदन कर सकती हैं, यानी यह योजना सिर्फ तीन साल तक सीमित नहीं, बल्कि आगे का करियर रास्ता भी देती है। सवाल-जवाब 1. एलआईसी बीमा सखी योजना क्या है? यह महिला करियर एजेंट यानी एमसीए स्कीम है, जिसमें 18 से 70 साल की महिलाओं को तीन साल तक स्टाइपेंड, ट्रेनिंग और सर्टिफाइड एलआईसी एजेंट बनने का मौका दिया जाता है। 2. यह योजना कब और किसने शुरू की? इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में शुरू किया था। 3. इस योजना के तहत कितनी महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य है? योजना के तहत 2 लाख महिलाओं को बीमा सखी के तौर पर नियुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। 4. इस योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है? 18 से 70 साल की वे महिलाएं आवेदन कर सकती हैं जो आईआरडीएआई की भर्ती-पूर्व परीक्षा पास करती हैं और एजेंसी के काम के लिए पर्याप्त समय दे सकती हैं। 5. हर महीने कितना स्टाइपेंड मिलता है? पहले साल 7,000 रुपये प्रति माह, दूसरे साल 6,000 रुपये प्रति माह और तीसरे साल 5,000 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाता है। 6. स्टाइपेंड पाने के लिए क्या शर्तें पूरी करनी होती हैं? हर महीने तय बिजनेस टारगेट पूरा करना होता है और दूसरे व तीसरे साल के लिए पिछले साल बेची गई कम से कम 65 प्रतिशत पॉलिसी सक्रिय रहनी चाहिए। 7. आवेदन कैसे करें और तीन साल बाद क्या होता है? आवेदन licindia.in/lic-s-bima-sakhi पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, दसवीं पास सर्टिफिकेट, फोटो, पता प्रमाण और बैंक विवरण के साथ किया जा सकता है, और तीन साल बाद बीमा सखी सामान्य एजेंट बनकर सिर्फ कमीशन से कमाती है, पांच साल बाद एडीओ पद के लिए भी आवेदन कर सकती है। https://trendkia.com/guides/18-se-70-sala-ki-mahilaen-aba-lic-ejenta-banakara-hara-mahine-pa-sakati-hain-staipenda-11780 TrendKia — Har trend, sabse pehle.