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  "type": "article",
  "title": "इलिनॉय बायोमेट्रिक प्राइवेसी केस में एप्पल पर $32.5 Billion का बड़ा दावा, यूजर्स को मिल सकते हैं $5,000 तक",
  "summary": "इलिनॉय में एप्पल के खिलाफ दायर $32.5 Billion के बायोमेट्रिक प्राइवेसी क्लास एक्शन मुकदमे में यूजर्स को $5,000 तक का हर्जाना मिल सकता है। फोटो ऐप में बिना लिखित सहमति के फेसप्रिंट बनाने और डेटा सर्वर पर सिंक करने के आरोपों के बाद जज ने केस को क्लास एक्शन की मंजूरी दी है।",
  "content": "इलिनॉय राज्य में एक बड़ा कानूनी संकट टेक दिग्गज एप्पल के सामने खड़ा हो गया है, जहां बायोमेट्रिक प्राइवेसी नियमों के उल्लंघन को लेकर दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे को अदालत ने हरी झंडी दे दी है। इस कानूनी मामले में आरोप लगाया गया है कि एप्पल ने यूजर्स की बिना स्पष्ट लिखित अनुमति के उनके चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा और स्टोर किया है। यदि अदालत वादियों द्वारा मांगी गई अधिकतम कानूनी क्षतिपूर्ति राशि को स्वीकार कर लेती है, तो प्रत्येक प्रभावित यूजर को $5,000 तक का हर्जाना मिल सकता है। इसका मतलब है कि एप्पल को कुल मिलाकर $32.5 Billion का भारी-भरकम भुगतान करना पड़ सकता है।\n\n \n\nएप्पल के पुराने मुकदमों और बटरफ्लाई कीबोर्ड विवाद का इतिहास\n\nदिग्गज टेक कंपनियों के खिलाफ क्लास एक्शन मुकदमे होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का कानूनी और वित्तीय पैमाना पुराने सभी मामलों से काफी बड़ा है। इससे पहले एप्पल अपने चर्चित बटरफ्लाई कीबोर्ड विवाद में ग्राहकों को $50 Million का भुगतान करने पर सहमत हुआ था। एक अन्य बड़े प्राइवेसी मामले में, कंपनी ने आईफोन मॉडल्स में वादा की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुविधाओं को समय पर न देने के आरोपों के बाद $250 Million का भुगतान किया था। हालांकि, इनमें से कई AI फीचर्स इस साल यूजर्स के लिए जारी किए जा रहे हैं। फिर भी, इलिनॉय के इस ताजा मामले में कंपनी के सामने मौजूद वित्तीय जोखिम पुराने सभी निपटारों के मुकाबले कई गुना ज्यादा बड़ा है।\n\n \n\nइलिनॉय बायोमेट्रिक प्राइवेसी कानून और एप्पल पर लगे मुख्य आरोप\n\nयह अरबों डॉलर का कानूनी विवाद साल 2008 में बने इलिनॉय बायोमेट्रिक इन्फॉर्मेशन प्राइवेसी एक्ट (BIPA) कानून पर टिका हुआ है। यह कानून राज्य के नागरिकों के संवेदनशील बायोमेट्रिक पहचान डेटा, जैसे कि रेटिना स्कैन, आईरिस स्कैन, फिंगरप्रिंट, वॉइसप्रिंट और फेसप्रिंट को कंपनियों द्वारा बिना इजाजत जुटाने और स्टोर करने से रोकने के लिए बनाया गया था। इस कड़े कानून के तहत किसी भी व्यावसायिक कंपनी के लिए अनिवार्य है कि वह यूजर का बायोमेट्रिक डेटा लेने से पहले उसे लिखित सूचना दे और उसकी स्पष्ट लिखित सहमति प्राप्त करे।\n\nमुकदमे में आरोप लगाया गया है कि एप्पल का इन-बिल्ट फोटो ऐप इन नियमों का उल्लंघन करता है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, फोटो ऐप यूजर की लाइब्रेरी में मौजूद हर चेहरे को अपने आप स्कैन करता है और प्रत्येक व्यक्ति का एक अलग फेसप्रिंट तैयार करता है। इसके बाद एक उन्नत एल्गोरिदम इन फेसप्रिंट्स का विश्लेषण करके मुख्य आईफोन यूजर की पहचान करता है। वादियों का दावा है कि एप्पल डिवाइस पर ही यह बायोमेट्रिक प्रोफाइल बनाता और रखता है ताकि फोटो ऐप में पीपल एल्बम तैयार की जा सके। इसके अलावा, असली कानूनी उल्लंघन सर्वर डेटा ट्रांसफर से जुड़ा है। क्योंकि यूजर अपने फोटो डेटा को विभिन्न एप्पल डिवाइसेज के बीच सिंक कर सकते हैं, इसलिए वादियों का तर्क है कि एप्पल इस बायोमेट्रिक फेसप्रिंट डेटा को अपने सर्वर्स पर स्टोर करता है, जो इलिनॉय प्राइवेसी कानून का सीधा उल्लंघन है।\n\n \n\nमुकदमे की तीनों श्रेणियों और शर्तों का विस्तृत विवरण\n\nअदालत द्वारा मंजूर किए गए इस क्लास एक्शन केस में प्रभावित इलिनॉय निवासियों को तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है\n\n - लोकल डिवाइस क्लास: इसमें इलिनॉय के वे सभी निवासी शामिल हैं, जिनके एप्पल डिवाइस ने 13 सितंबर 2016 से लेकर आज तक की अवधि के दौरान किसी भी समय उनकी तस्वीर को पीपल एल्बम में डाला है।\n - आईक्लाउड सबक्लास: इस वर्ग में इलिनॉय के वे नागरिक आते हैं, जिनके नाम या किसी अन्य पहचानकर्ता के साथ पीपल एल्बम टैग किया गया था और जिन्होंने 13 सितंबर 2016 से आज के बीच फोटो स्टोरेज के लिए आईक्लाउड सर्विस ऑन रखी थी।\n - आईक्लाउड फेसप्रिंट सबक्लास: इस विशेष श्रेणी में वे यूजर्स शामिल हैं जो iOS 17.6, iPadOS 17.6 या macOS Sonoma 14.6 या उससे नए ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले एप्पल डिवाइस का उपयोग करते हैं, जिनकी फोटो पीपल एल्बम में डाली गई थी और जिनके आईक्लाउड फोटो लाइब्रेरी में 25 मार्च 2025 से आज के बीच 5,000 या उससे अधिक फोटो और वीडियो मौजूद थे।\n\n \n\nएप्पल का कानूनी बचाव और ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग की दलील\n\nदूसरी तरफ, एप्पल ने इस पूरे मामले को खारिज कराने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं। कंपनी का दावा है कि उसकी फोटो सर्विस में मौजूद प्राइवेसी फीचर्स इलिनॉय कानून के सभी मानकों का पूरी तरह पालन करते हैं। एप्पल के अनुसार, फोटो ऐप द्वारा जनरेट किया जाने वाला बायोमेट्रिक डेटा इतना गुप्त होता है कि उससे किसी व्यक्ति का वास्तविक चेहरा दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता और न ही उसे यूजर की असली पहचान से जोड़ा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, एप्पल का कहना है कि कंपनी का कोई भी कर्मचारी या सिस्टम खुद यूजर के प्राइवेट फोटो डेटा को एक्सेस नहीं कर सकता।\n\nकंपनी का सबसे बड़ा तर्क यह है कि फेस रिकग्निशन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं बाहरी सर्वर पर होने के बजाय यूजर के व्यक्तिगत डिवाइस पर ही निष्पादित होती हैं। जब कोई यूजर अलग-अलग डिवाइसेज के बीच डेटा सिंक करता है, तो सिर्फ नाम और टैग ट्रांसफर होते हैं, न कि बायोमेट्रिक डेटा। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने आईफोन के फोटो ऐप में किसी दोस्त की पहचान टैग करते हैं, तो वही टैग नाम आपके मैक कंप्यूटर पर सिंक हो जाएगा। लेकिन मैक को उस दोस्त की तस्वीरें ढूंढने के लिए अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से लोकल फेस स्कैनिंग करनी होगी, वह आईफोन या सर्वर्स से सीधे फेसप्रिंट डेटा कॉपी नहीं करता।\n\n \n\nछह साल की कानूनी लड़ाई और कोर्ट का अहम फैसला\n\nयह कानूनी मामला हाल में शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इसकी शुरुआत मार्च 2020 में हुई थी। पिछले छह वर्षों के दौरान इसमें कई बदलाव आए और कई कानूनी दलीलें पेश की गईं। इस हफ्ते इलिनॉय की अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार करते हुए फैसला सुनाया कि वादियों ने क्लास एक्शन मुकदमे की सभी कानूनी शर्तों को पूरा कर लिया है, जिससे लाखों प्रभावित यूजर्स के लिए एक साथ मुआवजे की मांग करने का रास्ता साफ हो गया है।\n\n \n\nमेटा के ऐतिहासिक $650 Million निपटारे से तुलना\n\nइलिनॉय के 2008 बायोमेट्रिक कानून के तहत कानूनी पचड़े में फंसने वाली एप्पल पहली कंपनी नहीं है। इससे पहले मेटा (तत्कालीन फेसबुक) को भी 2015 में शुरू हुए ऐसे ही एक क्लास एक्शन मुकदमे का सामना करना पड़ा था। उस मामले में भी आरोप था कि फेसबुक ने बिना यूजर सहमति के ऑटोमैटिक फेस टैगिंग फीचर चालू किया था। हालांकि, मेटा के मामले में डेटा स्टोरेज को लेकर कोई संशय नहीं था क्योंकि फेसबुक स्पष्ट रूप से अपने केंद्रीय सर्वरों पर ही बायोमेट्रिक डेटा प्रोसेस और स्टोर करता था।\n\nमेटा का वह मुकदमा 2021 में $650 Million के भारी-भरकम समझौते के साथ खत्म हुआ था, जिससे इलिनॉय के लगभग 6.9 Million फेसबुक यूजर्स को फायदा मिला था। उस समझौते के तहत अधिकतर पात्र यूजर्स को $345 का भुगतान किया गया था, जबकि तीन मुख्य वादियों को $5,000-$$5,000 मिले थे। इसकी तुलना में, एप्पल का वर्तमान मामला लगभग 6.5 Million यूजर्स को प्रभावित करता है, लेकिन इसमें प्रति व्यक्ति $5,000 के हर्जाने का दावा किया जा रहा है।\n\n \n\nवित्तीय प्रभाव और एप्पल के मार्केट वैल्यूएशन पर असर\n\nजहां मेटा केस में सामान्य यूजर्स को $345 मिले थे, वहीं एप्पल केस में यह रकम बहुत बड़ी हो सकती है। अगर 6.5 Million इलिनॉय यूजर्स में से प्रत्येक को $5,000 का अधिकतम भुगतान मिलता है, तो एप्पल को कुल मिलाकर $32.5 Billion चुकाने पड़ सकते हैं। एप्पल की $4.5 Trillion की कुल मार्केट वैल्यूएशन के हिसाब से देखें तो $32.5 Billion की यह रकम लगभग 0.7% बैठती है। प्रतिशत के लिहाज से यह छोटा आंकड़ा लग सकता है, लेकिन किसी भी टेक कंपनी के लिए $32.5 Billion का जुर्माना साधारण स्पीडिंग टिकट की तुलना में बहुत बड़ा वित्तीय झटका है।\n\nफिलहाल यह तय होना बाकी है कि क्या आम यूजर्स को इस केस से रकम मिलेगी या एप्पल इसे खारिज कराने में सफल रहेगा। फिर भी, कोर्ट द्वारा क्लास एक्शन को मंजूरी देना बिग टेक प्राइवेसी मुकदमों के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nएप्पल डिवाइस यूजर्स के लिए: अगर आप इलिनॉय में रहते हैं और सितंबर 2016 के बाद एप्पल की फोटो सर्विस का इस्तेमाल किया है, तो आप $5,000 तक के हर्जाने के हकदार हो सकते हैं।\n\nवैश्विक प्राइवेसी प्रभाव: यह मुकदमा टेक कंपनियों द्वारा यूजर सहमति के बिना बायोमेट्रिक डेटा जुटाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मिसाल पेश करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इलिनॉय में एप्पल के खिलाफ कुल कितने का मुकदमा दायर किया गया है?\nइलिनॉय में बायोमेट्रिक प्राइवेसी नियमों के उल्लंघन को लेकर एप्पल के खिलाफ $32.5 Billion का क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है।\n\n2. एप्पल पर फोटो ऐप को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं?\nमुकदमे में आरोप है कि एप्पल का फोटो ऐप बिना लिखित सहमति लिए चेहरों को स्कैन कर फेसप्रिंट बनाता है और इस बायोमेट्रिक डेटा को सर्वर पर स्टोर करता है।\n\n3. प्रभावित यूजर्स को व्यक्तिगत रूप से कितनी रकम मिल सकती है?\nमुकदमे के दावों के अनुसार इलिनॉय के प्रत्येक प्रभावित यूजर को $5,000 तक का हर्जाना मिल सकता है।\n\n4. यह मामला मेटा के पुराने कानूनी समझौते से कैसे अलग है?\nमेटा ने 2021 में इलिनॉय के ऐसे ही प्राइवेसी केस को $650 Million देकर सुलझाया था जिसमें 6.9 Million यूजर्स को $345 मिले थे, जबकि एप्पल के केस में 6.5 Million यूजर्स के लिए $5,000 तक के भुगतान का दावा है।\n\n5. इन आरोपों पर एप्पल का बचाव क्या है?\nएप्पल का तर्क है कि फेस रिकग्निशन प्रक्रिया केवल डिवाइस पर होती है, बायोमेट्रिक डेटा से चेहरा दोबारा नहीं बनाया जा सकता, और एप्पल खुद यूजर के फोटो डेटा को एक्सेस नहीं कर सकता।\n\n6. इस क्लास एक्शन मुकदमे में कौन-कौन सी तीन श्रेणियां शामिल हैं?\nइसमें 13 सितंबर 2016 के बाद पीपल एल्बम इस्तेमाल करने वाले इलिनॉय निवासी, आईक्लाउड फोटो सिंक करने वाले यूजर्स, और 25 मार्च 2025 के बाद नए ओएस वर्जन पर 5,000 से अधिक फोटो रखने वाले यूजर्स शामिल हैं।",
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  "publishedAt": "2026-08-05",
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