NRE, NRO और FCNR खातों का सही चुनाव न करने पर NRI को होगा भारी टैक्स नुकसान गलत तरह का बैंक खाता चुनने से NRI और OCI कार्डधारकों को अपनी विदेशी कमाई पर भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है, इसलिए NRE, NRO और FCNR खातों का फर्क समझना जरूरी है। भारत में पैसा मैनेज करने वाले अनिवासी भारतीयों यानी NRI के लिए सही बैंक खाता चुनना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय फैसला है। गलत खाता चुनने पर विदेश में कमाई गई रकम पर भी भारी टैक्स लग सकता है। यह नियम केवल NRI तक सीमित नहीं है, बल्कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी OCI कार्डधारकों पर भी लागू होते हैं। सही प्लानिंग से न सिर्फ पैसा आसानी से इधर से उधर भेजा जा सकता है, बल्कि भारतीय कानूनों का पूरा पालन भी सुनिश्चित होता है। NRE और NRO खाते में क्या फर्क है नॉन रेजिडेंट एक्सटर्नल यानी NRE खाता उन लोगों के लिए बना है जो विदेश में कमाई गई रकम को भारत में लाना चाहते हैं। वहीं नॉन रेजिडेंट ऑर्डिनरी यानी NRO खाता उस कमाई के लिए है जो भारत के अंदर ही जनरेट होती है। इसमें किराए से मिलने वाली आमदनी, डिविडेंड या भारतीय स्रोतों से मिलने वाली पेंशन जैसी रकम शामिल है। दोनों खातों के बीच का यह फर्क समझ लेने से आपकी अंतरराष्ट्रीय कमाई पर अनजाने में लगने वाले टैक्स से बचा जा सकता है। NRE खाते पर मिलती है पूरी टैक्स छूट NRE खाते में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज विदेश में रह रहे लोगों के लिए पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। इस खाते से मूलधन और ब्याज, दोनों को अपने रहने वाले देश में वापस भेजा जा सकता है। इस तरह पैसे को स्वदेश वापस ले जाने की प्रक्रिया, जिसे रेपेट्रिएशन कहा जाता है, पर कोई सीमा नहीं है। यही वजह है कि लंबी अवधि की विदेशी बचत के लिए NRE खाता सबसे लचीला विकल्प माना जाता है। NRO खाते पर TDS और रेपेट्रिएशन की सीमा NRO खातों पर भारतीय इनकम टैक्स कानूनों के तहत बिल्कुल अलग टैक्स ढांचा लागू होता है। इस खाते पर मिलने वाला ब्याज ऊंची दरों पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यानी TDS के दायरे में आता है। फिलहाल इस खाते से साल में अधिकतम दस लाख डॉलर ही विदेश भेजे जा सकते हैं। इस सीमा में मूलधन के साथ-साथ भारतीय संपत्तियों से हुई स्थानीय कमाई भी शामिल होती है। रुपये की उठापटक से बचाता है FCNR खाता फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट यानी FCNR खाता भारतीय रुपये में आने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव करता है। इसमें आपका पैसा अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी विदेशी करेंसी में ही जमा रहता है। इससे करेंसी कन्वर्जन के दौरान रकम की वैल्यू घटने का खतरा टल जाता है। NRE खातों की तरह ही FCNR डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज भी NRI के लिए पूरी तरह टैक्स से मुक्त होता है। बैंक चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान NRI के लिए सबसे बेहतर बैंक चुनने का फैसला अक्सर डिजिटल सर्विस की क्वालिटी पर टिका होता है। आज के बैंकिंग ऐप दूर बैठे-बैठे अकाउंट मैनेज करने और तुरंत फंड ट्रांसफर करने की सुविधा देते हैं। भारत के कई बड़े बैंक हाई वैल्यू वाले OCI खातों के लिए अलग से रिलेशनशिप मैनेजर भी उपलब्ध कराते हैं। खाता खोलने से पहले हमेशा ताजा ब्याज दरों और मिनिमम बैलेंस की शर्तों की जांच जरूर कर लेनी चाहिए। जरूरत के हिसाब से खाता चुनना ही समझदारी भारत के वित्तीय सिस्टम में तालमेल बिठाना तभी आसान होता है जब खाता आपकी जरूरत से मेल खाता हो। लचीलेपन के लिए NRE और करेंसी की स्थिरता के लिए FCNR खाता इस्तेमाल करें। NRO खाते को सिर्फ भारत में होने वाले लेनदेन और देनदारियों तक ही सीमित रखें। पेशेवर सलाह लेने से आपका ग्लोबल पोर्टफोलियो कुशलता से चलता रहता है और साथ ही नियमों का पालन भी बना रहता है। इसका आप पर असर यह जानकारी सीधे उन लोगों के काम की है जो विदेश में रहकर भारत में पैसा मैनेज करते हैं। • NRI और OCI कार्डधारकों के लिए: गलत खाता चुनने पर विदेशी कमाई पर भी भारी टैक्स लग सकता है, जबकि सही खाते से पैसा टैक्स फ्री रह सकता है। • NRO खाताधारकों के लिए: साल में दस लाख डॉलर से ज्यादा रकम विदेश नहीं भेजी जा सकती, इसलिए बड़ी रकम की प्लानिंग पहले से करनी होगी। • करेंसी जोखिम वालों के लिए: रुपये में गिरावट से बचने के लिए FCNR खाता खोलकर डॉलर या यूरो में बचत सुरक्षित रखी जा सकती है। सवाल-जवाब 1. NRE और NRO खाते में मुख्य फर्क क्या है? NRE खाता विदेश में कमाई गई रकम भारत लाने के लिए है, जबकि NRO खाता भारत में ही होने वाली कमाई जैसे किराया, डिविडेंड या पेंशन के लिए इस्तेमाल होता है। 2. क्या NRE खाते पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है? हां, NRE खाते पर मिलने वाला ब्याज विदेश में रह रहे NRI के लिए पूरी तरह टैक्स फ्री है। 3. NRO खाते से एक साल में कितनी रकम विदेश भेजी जा सकती है? NRO खाते से साल में अधिकतम दस लाख डॉलर तक ही रेपेट्रिएट किए जा सकते हैं, जिसमें मूलधन और स्थानीय भारतीय कमाई दोनों शामिल हैं। 4. FCNR खाता क्यों खोला जाता है? FCNR खाता रुपये में उतार-चढ़ाव से बचाव करता है क्योंकि इसमें पैसा डॉलर या यूरो जैसी विदेशी करेंसी में ही जमा रहता है, और इस पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है। 5. क्या ये नियम OCI कार्डधारकों पर भी लागू होते हैं? हां, यह नियम NRI के साथ-साथ ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी OCI कार्डधारकों पर भी लागू होते हैं। 6. NRI के लिए सही बैंक कैसे चुनें? डिजिटल बैंकिंग ऐप की क्वालिटी, रिलेशनशिप मैनेजर की सुविधा, ब्याज दरें और मिनिमम बैलेंस की शर्तें जांचकर बैंक चुनना चाहिए। https://trendkia.com/guides/nre-nro-aura-fcnr-khaton-ka-sahi-chunava-na-karane-para-nri-ko-hoga-bhari-taiksa-nukasana-4130 TrendKia — Har trend, sabse pehle.