फॉरेक्स ट्रेडर्स कैसे मेटाट्रेडर 4 पर चार्ट देखकर ऑर्डर लगाते और पोजीशन मैनेज करते हैं मेटाट्रेडर 4 एक मुफ्त और हल्का ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसमें डेमो या रियल अकाउंट खोलते ही लाइन, बार और कैंडलस्टिक चार्ट, दर्जनों इंडिकेटर, ऑटोमेटेड एक्सपर्ट एडवाइजर और फॉरेक्स, CFD, कमोडिटी, इंडेक्स व क्रिप्टोकरेंसी के हर तरह के ऑर्डर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। फॉरेक्स मार्केट में उतरने वाले ज्यादातर ट्रेडर्स की स्क्रीन पर एक ही प्लेटफॉर्म दिखता है, मेटाट्रेडर 4, जिसे शॉर्ट में MT4 कहा जाता है। दुनियाभर में इसकी लोकप्रियता की वजह इसकी सादगी है। यह मुफ्त में डाउनलोड होता है, कंप्यूटर पर ज्यादा जगह या पावर नहीं मांगता और कुछ ही मिनट में इंस्टॉल हो जाता है। इसके बावजूद इसमें प्रोफेशनल लेवल के चार्ट, हजारों एनालिसिस टूल्स, ऑटोमेटेड ट्रेडिंग की सुविधा और हर तरह के ऑर्डर मौजूद होते हैं। कौन-कौन से एसेट्स ट्रेड किए जा सकते हैं, यह पूरी तरह ब्रोकर पर निर्भर करता है, लेकिन प्लेटफॉर्म की बुनियादी सुविधाएं हर जगह एक जैसी रहती हैं, तीन तरह के चार्ट, प्लगइन से बढ़ाए जा सकने वाले हजारों चार्टिंग टूल्स, एक्सपर्ट एडवाइजर के जरिए अपने आप चलने वाली ऑटोमेटेड ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी, और इंडिकेटर, स्क्रिप्ट व टेम्पलेट को अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज करने की सुविधा। यह सब कुछ कंप्यूटर पर इंस्टॉल किए गए ऐप, वेब ब्राउज़र या मोबाइल फोन, हर जगह एक जैसा काम करता है। शुरुआत करना बेहद आसान है, प्रोग्राम डाउनलोड कीजिए, अकाउंट बनाइए और पासवर्ड सेट कीजिए। इसके बाद अपने ब्रोकर की डिटेल्स से रियल अकाउंट में लॉगिन कर सकते हैं या फिर सीधे MT4 से ही एक डेमो अकाउंट खोल सकते हैं, जो इसकी एक और बड़ी सुविधा मानी जाती है। अकाउंट सेट होते ही चार्ट, इंडिकेटर और हर तरह के ऑर्डर इस्तेमाल करने के लिए तैयार हो जाते हैं। डाउनलोड, इंस्टॉलेशन और अकाउंट सेटअप की पूरी प्रक्रिया मेटाट्रेडर 4 को इसकी आधिकारिक वेबसाइट से या फिर उस ब्रोकर की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है जो अपने ग्राहकों को यह प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने का विकल्प देता है। ब्रोकर की वेबसाइट पर आमतौर पर एक अलग प्लेटफॉर्म सेक्शन होता है, जहां MT4 डाउनलोड करने का लिंक साफ तौर पर दिया होता है। लिंक पर क्लिक करते ही एक छोटी सी इंस्टॉलेशन फाइल डाउनलोड होती है, जो साइज में हल्की होने की वजह से जल्दी डाउनलोड हो जाती है। इसके बाद इस फाइल को रन करते ही इंस्टॉलेशन शुरू हो जाती है। इस दौरान वह फोल्डर चुनना होता है जहां प्रोग्राम इंस्टॉल होगा, साथ ही एक स्क्रीन पर नियम व शर्तें स्वीकार करनी होती हैं। पूरी इंस्टॉलेशन प्रक्रिया तेज और आसान है और इसके पूरा होते ही कंप्यूटर को रीस्टार्ट किए बिना MT4 खोला जा सकता है। प्रोग्राम खोलते ही सबसे पहले लॉगिन स्क्रीन आती है। अगर ब्रोकर के पास पहले से रियल या डेमो अकाउंट बना हुआ है, तो वहां अकाउंट नंबर और पासवर्ड डालकर सही सर्वर चुनना होता है। यह सर्वर की जानकारी आमतौर पर ब्रोकर की वेबसाइट पर या फिर लॉगिन डिटेल्स वाले ईमेल में दी होती है। जिन लोगों का अभी कोई अकाउंट नहीं है, उनके लिए यहीं से नया डेमो अकाउंट खोलने का विकल्प भी मिल जाता है। इस विकल्प को चुनकर दिए गए स्टेप्स फॉलो करने पर वर्चुअल फंड वाला एक ट्रेडिंग अकाउंट तैयार हो जाता है, जिसमें प्लेटफॉर्म की हर सुविधा पूरी तरह इस्तेमाल की जा सकती है। अकाउंट चाहे डेमो हो या रियल, इसके बाद वर्कस्पेस को अपनी सुविधा के हिसाब से पूरी तरह कस्टमाइज किया जा सकता है। MT4 का इंटरफेस समझिए, मेन विंडो, चार्ट और टूलबार MT4 का इंटरफेस देखने में आसान है, लेकिन इसमें ट्रेडिंग के लिए जरूरी हर टूल मौजूद रहता है। स्क्रीन पर दिखने वाली विंडो, चार्ट, आइकन और टूलबार, इन सबको अपनी पसंद और सुविधा के हिसाब से सेट किया जा सकता है। सबसे ऊपर एक हेडर होता है, जिसमें मौजूदा अकाउंट नंबर, एप्लिकेशन का नाम और जो चार्ट खुला है उसका नाम व टाइमफ्रेम दिखता है। यह जानकारी एनालिसिस करते समय और ऑर्डर लगाते समय बेहद काम आती है। इसके अलावा एक फुल स्क्रीन मोड भी मिलता है, जिसमें सिर्फ चार्ट पर फोकस किया जा सकता है, चाहे वह एक एसेट का चार्ट हो या एक साथ कई एसेट्स के चार्ट। मेन मेन्यू में प्लेटफॉर्म के सभी कमांड और फंक्शन मौजूद रहते हैं, जबकि टूलबार इन्हीं कमांड को शॉर्टकट के तौर पर दिखाते हैं और इन्हें भी सिर्फ सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले टूल्स तक सीमित किया जा सकता है। मार्केट वॉच नाम की विंडो में सभी उपलब्ध ट्रेडिंग सिंबल की लिस्ट दिखती है और इसी से ट्रेड पोजीशन व चार्ट को मैनेज करने के कमांड भी मिलते हैं। डेप्थ ऑफ मार्केट नाम का टूल किसी सिंबल में मौजूदा बाजार की स्थिति दिखाता है, जिससे ऑर्डर लगाना और मैनेज करना आसान हो जाता है। डेटा विंडो में प्राइस, इंडिकेटर और इस्तेमाल हो रहे एक्सपर्ट एडवाइजर की जानकारी मिलती है, जबकि नेविगेटर विंडो में खुले हुए अकाउंट, एक्सपर्ट एडवाइजर, इंडिकेटर और स्क्रिप्ट एक साथ ग्रुप होकर दिखते हैं। टर्मिनल विंडो प्लेटफॉर्म का सबसे व्यस्त हिस्सा है, यहां ट्रेड पोजीशन, न्यूज़, अकाउंट हिस्ट्री, अलर्ट, इंटरनल मेल, प्रोग्राम लॉग, सिग्नल और इंस्टॉल किए गए मार्केट प्लगइन तक, सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है। जो ट्रेडर्स एक्सपर्ट एडवाइजर टेस्ट करना चाहते हैं, उनके लिए टेस्टर विंडो दी गई है, जहां टेस्ट चलाकर रिपोर्ट देखी जा सकती है और एक्सपर्ट एडवाइजर की सेटिंग को बेहतर बनाया जा सकता है। इसी विंडो में टिक चार्ट भी मिलते हैं, जो हर प्राइस बदलाव को दिखाते हैं और इन पर भी ट्रेंड लाइन, इंडिकेटर, टेक्स्ट और ज्यामितीय आकृतियां जोड़ी जा सकती हैं। टर्मिनल के सबसे नीचे एक स्टेटस बार होता है, जो सर्वर कनेक्शन, डेटा ट्रैफिक, इस्तेमाल हो रहे टेम्पलेट का नाम और प्राइस जैसी जानकारी दिखाता है। इसके साथ हॉटकी और नेविगेशन बार जैसे टूल्स भी दिए गए हैं, जिनसे माउस के बिना भी प्लेटफॉर्म में तेजी से मूवमेंट की जा सकती है। कुल मिलाकर MT4 का इंटरफेस इस्तेमाल में आसान है और इसे हर ट्रेडर अपने हिसाब से ढाल सकता है। चार्ट के तीन प्रकार, लाइन, बार और कैंडलस्टिक MT4 में प्राइस देखने के लिए तीन तरह के चार्ट मिलते हैं और इनमें से किसी एक से दूसरे पर जाना बेहद आसान है, बस एक क्लिक करना है या फिर कीबोर्ड शॉर्टकट इस्तेमाल करना है। चार्ट चाहे जो भी हो, उस पर सभी टेक्निकल एनालिसिस टूल्स एक जैसे काम करते हैं। लाइन चार्ट सबसे सादा तरीका है, जिसमें तय की गई अवधि के क्लोजिंग प्राइस को जोड़कर एक सीधी लाइन बनाई जाती है। इसमें कोई और जानकारी न होने की वजह से बाजार की बड़ी दिशा को समझना बहुत आसान हो जाता है, बिना छोटी-छोटी उतार-चढ़ाव में उलझे। बार चार्ट लाइन चार्ट से ज्यादा जानकारी देता है। इसमें हर बार एक तय समय अवधि को दिखाता है, जिसमें उस दौरान की ओपनिंग प्राइस, क्लोजिंग प्राइस और सबसे ऊंची व सबसे नीची कीमत शामिल होती है। बार की खड़ी लाइन उस अवधि की पूरी प्राइस रेंज बताती है, जबकि बाईं तरफ की छोटी लाइन ओपनिंग प्राइस और दाईं तरफ की छोटी लाइन क्लोजिंग प्राइस को दिखाती है। जो ट्रेडर बाजार की उतार-चढ़ाव और प्राइस के व्यवहार को गहराई से समझना चाहते हैं, वे अक्सर इसी चार्ट का इस्तेमाल करते हैं। कैंडलस्टिक चार्ट को ज्यादातर ट्रेडर पहली पसंद के तौर पर चुनते हैं, क्योंकि यह एक नजर में ही बहुत कुछ बता देता है। हर कैंडलस्टिक में एक बॉडी होती है, जो ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस दिखाती है, और ऊपर-नीचे निकली हुई विक्स होती हैं, जो सबसे ऊंची और सबसे नीची कीमत बताती हैं। कैंडलस्टिक के अलग-अलग पैटर्न बाजार का मूड और संभावित उलटफेर के संकेत देते हैं, यही वजह है कि टेक्निकल एनालिसिस में इसे इतना अहम माना जाता है। इंडिकेटर और ड्रॉइंग टूल्स से एनालिसिस को गहरा बनाना सिर्फ चार्ट देखकर फैसला लेना काफी नहीं होता, इसलिए MT4 में शुरू से ही कई बिल्ट-इन इंडिकेटर दिए गए हैं, जैसे मूविंग एवरेज, RSI, बॉलिंगर बैंड्स, MACD और स्टोकास्टिक ऑसिलेटर। हर इंडिकेटर का अपना काम है, मूविंग एवरेज प्राइस के उतार-चढ़ाव को स्मूथ करके ट्रेंड को साफ दिखाता है, जबकि RSI यह बताता है कि बाजार ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड। इन सभी को चार्ट पर आसानी से लगाया जा सकता है, अपने हिसाब से सेटिंग बदली जा सकती है और उससे मिले डेटा से स्ट्रैटेजी बनाई जा सकती है। इंडिकेटर जोड़ने की कोई सीमा नहीं है, जितने चाहें उतने एक साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इंडिकेटर के साथ-साथ MT4 में कई ड्रॉइंग टूल्स भी मिलते हैं, जिन्हें एक साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे ट्रेंड लाइन, होरिजॉन्टल लाइन, चैनल और फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल। ट्रेंड लाइन से सपोर्ट और रेजिस्टेंस के संभावित लेवल पहचानने में मदद मिलती है, जबकि फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल प्राइस के करेक्शन का अंदाजा लगाने में काम आते हैं। इन ड्रॉइंग टूल्स की मदद से किसी भी अहम प्राइस लेवल या पैटर्न को चार्ट पर हाइलाइट किया जा सकता है, जिससे बाजार का व्यवहार समझना आसान हो जाता है। इंडिकेटर और ड्रॉइंग टूल्स के बीच स्विच करना भी बेहद आसान है। टूलबार में दिए गए इंडिकेटर मेन्यू से या फिर चार्ट पर राइट क्लिक करके इन्हें तुरंत चुना जा सकता है। इससे बाजार में आ रहे बदलाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान हो जाता है। चार्ट पर लगाए गए इंडिकेटर और ड्रॉइंग अपने आप सेव हो जाते हैं। इसके अलावा किसी खास इंडिकेटर सेटिंग को टेम्पलेट के तौर पर सेव भी किया जा सकता है, ताकि उसे बाद में किसी दूसरे एसेट पर भी सीधे इस्तेमाल किया जा सके। मार्केट ऑर्डर और पेंडिंग ऑर्डर, ट्रेड में एंट्री के तरीके MT4 में ट्रेड शुरू करने के दो बुनियादी तरीके हैं, या तो तुरंत एंट्री ली जाए या फिर प्राइस के तय लेवल तक आने का इंतजार किया जाए। मार्केट ऑर्डर वह तरीका है जिसमें ट्रेड तुरंत मौजूदा प्राइस पर एक्जीक्यूट हो जाता है। यह उन ट्रेडर्स के लिए सही है जो बिना देरी किए पोजीशन में एंट्री या एग्जिट करना चाहते हैं। मार्केट ऑर्डर लगाने का मतलब है ब्रोकर को मौजूदा कीमत पर खरीदने या बेचने का निर्देश देना, और ऑर्डर पूरा होते ही ट्रेड पोजीशन खुल जाती है। खरीदारी आस्क प्राइस पर होती है और बिक्री बिड प्राइस पर, और इस ऑर्डर के साथ ही स्टॉप लॉस या टेक प्रॉफिट भी जोड़ा जा सकता है। पेंडिंग ऑर्डर अलग तरीके से काम करते हैं, यह तब तक निष्क्रिय रहते हैं जब तक प्राइस पहले से तय किए गए लेवल तक नहीं पहुंच जाता। इसके चार प्रकार होते हैं। बाय लिमिट ऑर्डर तब लगाया जाता है जब प्राइस मौजूदा कीमत से नीचे किसी तय लेवल तक गिर जाए, इसका इस्तेमाल तब होता है जब ट्रेडर को उम्मीद हो कि इतना गिरने के बाद प्राइस वापस ऊपर आएगा। बाय स्टॉप ऑर्डर तब लगाया जाता है जब प्राइस मौजूदा कीमत से ऊपर किसी तय लेवल तक पहुंच जाए, इसका इस्तेमाल तब होता है जब ट्रेडर को लगे कि उस लेवल को पार करने के बाद प्राइस और ऊपर जाएगा। सेल लिमिट ऑर्डर तब लगाया जाता है जब प्राइस मौजूदा कीमत से ऊपर किसी तय लेवल तक पहुंचे, आमतौर पर इसका इस्तेमाल तब होता है जब ट्रेडर को लगे कि उस लेवल पर पहुंचने के बाद प्राइस नीचे आएगा। सेल स्टॉप ऑर्डर तब लगाया जाता है जब प्राइस मौजूदा कीमत से नीचे किसी तय लेवल तक गिर जाए, इसका इस्तेमाल तब होता है जब ट्रेडर को उम्मीद हो कि उस लेवल को तोड़ने के बाद प्राइस और गिरेगा। इन ऑर्डर के प्राइस लेवल को बाद में बदला जा सकता है, लेकिन ऑर्डर का वॉल्यूम बदलने के लिए पुराना ऑर्डर हटाकर नए वॉल्यूम के साथ नया ऑर्डर लगाना पड़ता है। स्टॉप लॉस, ट्रेलिंग स्टॉप, टेक प्रॉफिट और स्लिपेज स्टॉप लॉस अपने आप में कोई अलग ऑर्डर नहीं है, बल्कि यह किसी मौजूदा मार्केट या पेंडिंग ऑर्डर के साथ जोड़ा जाने वाला फीचर है। जब बाजार तय की गई सीमा तक ट्रेडर के खिलाफ चला जाता है, तो यह ट्रेड को अपने आप बंद कर देता है, जिससे नुकसान एक तय सीमा तक ही सीमित रहता है। इसे सीधे चार्ट से भी एडिट किया जा सकता है, जहां पिप्स की संख्या और ट्रेड की रकम दोनों साफ दिखती हैं। यही वजह है कि इसे रिस्क मैनेजमेंट का सबसे अहम टूल माना जाता है। ट्रेलिंग स्टॉप भी स्टॉप लॉस जैसा ही है, बस यह प्राइस के साथ खुद-ब-खुद ऊपर खिसकता रहता है। जैसे-जैसे मार्केट प्राइस ऊपर जाता है, ट्रेलिंग स्टॉप भी उसके साथ ऊपर बढ़ता जाता है और मुनाफा लॉक करता रहता है, लेकिन अगर प्राइस नीचे आता है तो यह वापस नीचे नहीं खिसकता। इससे ट्रेड में पहले से बना मुनाफा सुरक्षित रहता है, भले ही बाद में ट्रेड पलट क्यों न जाए। टेक प्रॉफिट इसके उलट काम करता है, यह तय लेवल पर पहुंचते ही पोजीशन को अपने आप बंद कर देता है और मुनाफा बुक हो जाता है। स्टॉप लॉस की तरह ही टेक प्रॉफिट भी हमेशा किसी खुली पोजीशन या पेंडिंग ऑर्डर के साथ जुड़ा रहता है, इसे अकेले नहीं लगाया जा सकता। MT4 पर ट्रेडिंग करते समय स्लिपेज से भी सामना होता है, जब कोई ऑर्डर मांगी गई कीमत के बजाय किसी और कीमत पर पूरा होता है। यह ज्यादा वोलैटिलिटी या कम लिक्विडिटी वाले समय में ज्यादा देखने को मिलता है। बड़ी आर्थिक रिपोर्ट जारी होने के दौरान या हफ्ते की ट्रेडिंग शुरू होने के वक्त भी स्लिपेज होना आम बात है। ओपन ट्रेड मैनेज करना, मॉडिफाई और क्लोज करने के तरीके एक बार ट्रेड खुल जाने के बाद MT4 पर उसे बदलते बाजार हालात के हिसाब से एडजस्ट करने के कई तरीके मिलते हैं। स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट लेवल कभी भी सीधे चार्ट से बदले जा सकते हैं, और जो पेंडिंग ऑर्डर अभी एक्टिव नहीं हुए हैं, उनके बाय या सेल लिमिट और स्टॉप के प्राइस लेवल भी बदले जा सकते हैं। ट्रेड विंडो में सभी खुली पोजीशन एक साथ दिखती हैं, और किसी भी पोजीशन पर राइट क्लिक करते ही उसे मॉडिफाई या क्लोज करने के विकल्प मिल जाते हैं। पोजीशन बंद करने के भी कई तरीके हैं। सबसे सीधा तरीका है टर्मिनल में ट्रेड पर राइट क्लिक करके क्लोज ऑर्डर चुनना, जिससे मौजूदा मार्केट प्राइस पर तुरंत ट्रेड बंद हो जाता है। इंटरफेस में हर खुली पोजीशन के साथ एक क्लोज बटन भी दिया गया है, ताकि जल्दी एग्जिट किया जा सके। जरूरी नहीं कि पूरी पोजीशन एक साथ बंद की जाए, आंशिक क्लोजर के जरिए पोजीशन का एक हिस्सा बंद करके कुछ मुनाफा या नुकसान बुक किया जा सकता है, जबकि बाकी ट्रेड चलता रहता है। इसके अलावा पोजीशन बिना किसी मैनुअल एक्शन के भी अपने आप बंद हो जाती है, जब प्राइस स्टॉप लॉस या टेक प्रॉफिट के लेवल पर पहुंच जाता है। मेटाट्रेडर 4 पर किन एसेट्स में ट्रेडिंग की जा सकती है MT4 सिर्फ एक तरह के बाजार तक सीमित नहीं है। ब्रोकर के हिसाब से इस पर फॉरेक्स, CFD, कमोडिटी और भी कई एसेट्स में ट्रेडिंग की जा सकती है, और ज्यादातर ब्रोकर करेंसी, कमोडिटी और एनर्जी जैसे व्यापक विकल्प देते हैं। कुछ ब्रोकर MT4 पर स्टॉक ट्रेडिंग की सुविधा भी देते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह से शेयर बाजार में ट्रेडिंग या एक्सचेंज पर होने वाले फ्यूचर्स के लिए नहीं बनाया गया है। MT4 पर किसी स्टॉक में ट्रेडिंग करते समय ट्रेडर असल शेयर नहीं खरीदता, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस, यानी CFD के जरिए उस स्टॉक की कीमत में होने वाले बदलाव पर दांव लगाता है। यह फॉरेक्स जैसी सीधी स्पॉट ट्रेडिंग से अलग तरीका है। CFD के इसी ढांचे के तहत MT4 पर बड़े मार्केट इंडेक्स में ट्रेडिंग की जा सकती है, धातु और कृषि उत्पादों से जुड़ी कमोडिटी में भी ट्रेडिंग होती है, और एनर्जी सेगमेंट में कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस में भी ट्रेडिंग की सुविधा मिलती है। इन सभी में CFD फीचर की वजह से लचीले तरीके से ट्रेडिंग करना संभव होता है। MT4 में सबसे नई एंट्री क्रिप्टोकरेंसी की रही है, और यह एसेट क्लास एक खास सुविधा लेकर आती है, वीकेंड पर भी ट्रेडिंग करने की सुविधा, जो पारंपरिक बाजारों में सीमित ट्रेडिंग घंटों की तुलना में एक बड़ा फायदा है। यही वजह है कि प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग लगातार लोकप्रिय होती जा रही है, क्योंकि यह एक बेहद वोलैटाइल और डायनामिक एसेट के तौर पर सामने आई है। इसका आप पर असर अगर आप फॉरेक्स या CFD ट्रेडिंग शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह जानकारी सीधे आपके काम की है। • नए ट्रेडर्स के लिए: असली पैसा लगाने से पहले डेमो अकाउंट में वर्चुअल फंड से प्लेटफॉर्म, चार्ट और ऑर्डर सिस्टम को बिना किसी जोखिम के समझा जा सकता है। • मौजूदा ट्रेडर्स के लिए: स्टॉप लॉस, ट्रेलिंग स्टॉप और टेक प्रॉफिट जैसे टूल्स का सही इस्तेमाल नुकसान सीमित करने और बना हुआ मुनाफा सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। सवाल-जवाब 1. मेटाट्रेडर 4 (MT4) क्या है? यह एक मुफ्त ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है जिस पर चार्ट देखकर टेक्निकल एनालिसिस की जा सकती है और फॉरेक्स समेत कई एसेट्स में ऑर्डर लगाए जा सकते हैं। 2. MT4 डाउनलोड करने का सही तरीका क्या है? मेटाट्रेडर 4 की आधिकारिक वेबसाइट या MT4 सपोर्ट करने वाले ब्रोकर की वेबसाइट से इंस्टॉलेशन फाइल डाउनलोड करके कुछ ही मिनट में इंस्टॉल की जा सकती है। 3. MT4 पर डेमो अकाउंट कैसे खोलें? लॉगिन स्क्रीन पर नए डेमो अकाउंट का विकल्प चुनकर दिए गए स्टेप्स फॉलो करने पर वर्चुअल फंड वाला डेमो अकाउंट तुरंत बन जाता है। 4. MT4 में कौन-कौन से चार्ट मिलते हैं? लाइन, बार और कैंडलस्टिक, यह तीन तरह के चार्ट मिलते हैं और इनके बीच एक क्लिक में स्विच किया जा सकता है। 5. मार्केट ऑर्डर और पेंडिंग ऑर्डर में क्या फर्क है? मार्केट ऑर्डर मौजूदा कीमत पर तुरंत एक्जीक्यूट होता है, जबकि पेंडिंग ऑर्डर तय की गई भविष्य की कीमत पर पहुंचने पर ही एक्टिव होता है। 6. स्लिपेज क्या होता है? स्लिपेज तब होता है जब कोई ऑर्डर मांगी गई कीमत के बजाय किसी और कीमत पर पूरा होता है, यह ज्यादा वोलैटिलिटी या कम लिक्विडिटी के दौरान ज्यादा होता है। 7. MT4 पर किन एसेट्स में ट्रेडिंग की जा सकती है? ब्रोकर के हिसाब से फॉरेक्स, CFD, कमोडिटी, मार्केट इंडेक्स, एनर्जी और क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग की जा सकती है। https://trendkia.com/guides/phoreksa-tredarsa-kaise-metatrader-4-para-charta-dekhakara-rdara-lagate-aura-pojishana-maineja-karate-hain-5043 TrendKia — Har trend, sabse pehle.