अहमदाबाद में पकड़ा गया गोल्डी बराड़ का गुर्गा आरिफ उर्फ पिस्तौल, दिल्ली और गुजरात पुलिस ने मिलकर दबोचा अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके में दिल्ली पुलिस और गुजरात पुलिस के साझा अभियान में गोल्डी बराड़ गिरोह का प्रमुख शूटर आरिफ उर्फ पिस्तौल गिरफ्तार हो गया है। आरोपी पर हत्या के प्रयास और जबरन वसूली के 11 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं। संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच, अहमदाबाद ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देर रात एक सटीक और गोपनीय कार्रवाई करते हुए कुख्यात गैंगस्टर आरिफ उर्फ पिस्तौल को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। यह गिरफ्तारी गुजरात के वेजलपुर इलाके से हुई है, जहाँ आरोपी अपनी पहचान छिपाकर शरण लिए हुए था। पकड़ा गया बदमाश कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा हुआ है और उसके नेटवर्क के लिए मैदानी स्तर पर आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। 11 से ज्यादा गंभीर मुकदमों में थी तलाश जांच अधिकारियों के अनुसार पकड़ा गया आरोपी लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहा था। उस पर हत्या के प्रयास, खुलेआम गोलीबारी और बड़े पैमाने पर रंगदारी वसूलने जैसे 11 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग राज्यों में उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और अपनी असल पहचान गोपनीय रखकर नए-नए ठिकानों में छिपता फिर रहा था। खुफिया सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के सटीक विश्लेषण के बाद सुरक्षाबलों ने वेजलपुर में जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। दुबई रूट से रंगदारी और सिंडिकेट संचालन आरिफ इस गिरोह के वित्तीय और ऑपरेशनल ढांचे की एक बेहद अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह गोल्डी बराड़ के इशारे पर कारोबारियों और अन्य लोगों को धमकाने के काम में शामिल था। जांच में यह बात सामने आई है कि वह दुबई के जरिए आने वाली धमकी भरी कॉल्स को प्रबंधित करने और जबरन वसूली से मिलने वाले धन के वितरण में सक्रिय भूमिका निभाता था। यह सिंडिकेट बड़े पैमाने पर व्यवसायियों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की मांग करता था, जिसके लिए आरिफ जमीनी स्तर पर दहशत फैलाने और वसूली का नेटवर्क संभालने का जिम्मा उठाता था। गोल्डी बराड़ का नेटवर्क और 200 करोड़ की रंगदारी का मामला गोल्डी बराड़ का वास्तविक नाम सतिंदरजीत सिंह है और वह मूल रूप से पंजाब के मुक्तसर साहिब का निवासी है। वह छात्र वीजा पर कनाडा गया था और माना जाता है कि वह वहीं बैठकर अपने आपराधिक सिंडिकेट की बागडोर संभाल रहा है। भारत सरकार ने उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया हुआ है। वह पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता भी रहा है। इसके अलावा हाल ही में उसका नाम 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगने के एक मामले में भी सुर्खियों में आया था। पंजाब सरकार ने विदेश में बैठे इस भगोड़े समेत कई अन्य अपराधियों पर पांच लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के नकद इनाम की घोषणा विज्ञापनों के जरिए की थी। नेटवर्क और वित्तीय कड़ियों की संयुक्त जांच आरिफ की गिरफ्तारी को इस आपराधिक सिंडिकेट के वित्तीय तंत्र और रंगदारी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। दिल्ली और गुजरात पुलिस की टीमें अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि गुजरात में उसे स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने पनाह दी थी और उसके पास किन माध्यमों से पैसे पहुंच रहे थे। संयुक्त पूछताछ के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों, हथियारों की आपूर्ति और आगामी योजनाओं के बारे में अहम खुलासे होने की संभावना है। इसका आप पर असर गैंगस्टर नेटवर्क के अहम संचालक की गिरफ्तारी से जबरन वसूली और धमकियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ मजबूत हुई है। • राष्ट्रीय स्तर पर: अंतरराज्यीय सिंडिकेट के प्रमुख संचालक के पकड़े जाने से विभिन्न राज्यों में चल रहे रंगदारी नेटवर्क पर कड़ा अंकुश लगेगा। इससे व्यापारियों और आम नागरिकों को विदेशी नंबरों से आने वाली धमकी भरी कॉल्स और फिरौती के मामलों में कमी देखने को मिलेगी। • अहमदाबाद और गुजरात में: वेजलपुर जैसे रिहायशी इलाके में छिपे इनामी अपराधी की धरपकड़ से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। स्थानीय पुलिस अब उन मददगारों और पनाहगाहों की पहचान कर रही है, जिससे इलाके में छिपे अन्य संदिग्धों पर निगरानी बढ़ेगी। • व्यापारियों और उद्यमियों के लिए: संगठित गिरोहों के निशाने पर रहने वाले व्यवसायियों के लिए यह कार्रवाई राहत लेकर आई है। रंगदारी और धमकी से जुड़े मामलों में पुलिस की तत्परता से कारोबारी बिना खौफ अपना काम जारी रख सकेंगे। • सुरक्षा तंत्र के लिए: दो राज्यों की पुलिस के सफल समन्वय से अन्य राज्यों में छिपे भगोड़ों को पकड़ने के लिए खुफिया तंत्र और सक्रिय होगा। इससे विदेशों से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क की स्थानीय कड़ियां तेजी से टूटने लगेंगी। ऐसा क्यों हुआ यह गिरफ्तारी कई राज्यों की पुलिस द्वारा साझा खुफिया जानकारी जुटाने और अंतरराज्यीय सिंडिकेट के स्थानीय संपर्कों पर लगातार रखी जा रही निगरानी का परिणाम है। • लगातार बढ़ता आपराधिक रिकॉर्ड: आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास, गोलीबारी और जबरन वसूली के 11 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे, जिसके चलते दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इस निरंतर कानूनी दबाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां उसके हर संभावित ठिकाने पर नजर रख रही थीं। • दुबई रूट से रंगदारी संचालन: गिरोह विदेश में बैठकर धमकी भरे कॉल करवा रहा था और भारत में आरिफ जमीनी स्तर पर दहशत फैलाने और वसूली का नेटवर्क संभाल रहा था। इस वित्तीय प्रवाह और जबरन वसूली को रोकने के लिए एजेंसियों ने सटीक तकनीकी ट्रैकिंग का सहारा लिया। • स्थान बदलकर छिपने की रणनीति: आरोपी लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलकर राज्यों की सीमाओं के पार भाग रहा था। तकनीकी सर्विलांस और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच व स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के इनपुट मिलते ही संयुक्त टीम ने वेजलपुर में दबिश देकर उसे पकड़ लिया। सवाल-जवाब 1. आरिफ उर्फ पिस्तौल को किन पुलिस टीमों ने मिलकर गिरफ्तार किया? उसे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच, अहमदाबाद ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त अभियान में पकड़ा। 2. आरिफ को किस इलाके से पकड़ा गया और उस पर कितने मामले दर्ज हैं? उसे गुजरात के अहमदाबाद स्थित वेजलपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया, और उस पर हत्या के प्रयास, फायरिंग और रंगदारी के 11 से ज्यादा केस दर्ज हैं। 3. गोल्डी बराड़ गिरोह में आरिफ की क्या भूमिका थी? वह गिरोह के लिए महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी था, जो दुबई के जरिए धमकी भरी कॉल करवाने और बड़े पैमाने पर रंगदारी रैकेट संचालित करने में मदद करता था। 4. गोल्डी बराड़ कौन है और उसके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई है? गोल्डी बराड़ का असली नाम सतिंदरजीत सिंह है, जिसे भारत सरकार ने UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया हुआ है और वह कनाडा में रहता है। https://trendkia.com/gujarat/ahamadabada-men-pakara-gaya-goldy-brar-ka-gurga-arif-urpha-pistaula-delhi-aura-gujarat-police-ne-milakara-dabocha-37675 TrendKia — Har trend, sabse pehle.