# अहमदाबाद में बैंक धोखाधड़ी मामले पर ईडी का कड़ा शिकंजा, स्टील कनेक्ट इंडिया की 4.53 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

> प्रवर्तन निदेशालय की अहमदाबाद इकाई ने स्टील कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 79.56 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले में 4.53 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है।

**Type:** article · **Category:** गुजरात · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/ahmedabad-men-bainka-dhokhadhari-mamale-para-ed-ka-kara-shiknja-steel-connect-india-ki-4-53-karora-rupaye-ki-snpatti-kurka-38564 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रवर्तन निदेशालय, अहमदाबाद, बैंक धोखाधड़ी, पीएमएलए, सीबीआई, मनी लॉन्ड्रिंग, स्टील कनेक्ट इंडिया

बैंकों से लिए गए कर्ज में हेराफेरी करने वालों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय की अहमदाबाद जोनल शाखा ने स्टील कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों की लगभग 4.53 करोड़ रुपये मूल्य की अचल तथा चल परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कानूनी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA 2002 के कानूनी प्रावधानों के तहत अमल में लाई गई है। जांच अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में लगभग 79.56 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन को अंजाम दिया गया था।

## सीबीआई की प्राथमिकी से शुरू हुई थी व्यापक जांच
इस पूरे आर्थिक अपराध की आधिकारिक जांच की नींव केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट के साथ पड़ी थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न कठोर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया था। आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के बुनियादी पहलुओं की जांच के उपरांत मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों का पता लगाने के लिए मामले को प्रवर्तन निदेशालय ने अपने हाथ में लिया। वित्तीय लेनदेन के दस्तावेजी साक्ष्यों की छानबीन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी के तत्कालीन निदेशकों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वित्तीय संस्थानों के साथ गंभीर विश्वासघात किया था।

## कर्ज के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए बनाई गई रणनीति
जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों से उजागर हुआ कि आरोपियों ने बैंकिंग तंत्र से स्वीकृत कराए गए व्यावसायिक ऋण के नियमों और अनुबंधों का खुला उल्लंघन किया। कंपनी ने कारोबार विस्तार और निर्धारित व्यावसायिक गतिविधियों के नाम पर बैंकों से भारी भरकम पूंजी हासिल की थी। हालांकि, स्वीकृत राशि का उपयोग घोषित उद्देश्यों में करने के बजाय धन को सुनियोजित तरीके से दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया। भारी मात्रा में नकदी की सीधी निकासी की गई ताकि पैसों के मूल स्रोत और अंतिम गंतव्य की कड़ी को छुपाया जा सके।

## फर्जी लेनदेन और सहयोगी फर्मों के जरिए डायवर्जन
वित्तीय विश्लेषण में यह भी पाया गया कि बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक लेन-देन के रकम को कई सहयोगी और सिस्टर कंपनियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कंसोर्टियम व्यवस्था से बाहर के बैंक खातों का दुरुपयोग किया गया ताकि ऋणदाता बैंकों को इसकी भनक न लग सके। डायवर्ट की गई धनराशि का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के तत्कालीन निदेशकों के व्यक्तिगत बैंक खातों तथा सहायक फर्मों में भी जमा कराया गया। जब वित्तीय लेन-देन की यह श्रृंखला पूरी तरह स्पष्ट हो गई, तब निदेशालय ने अनंतिम कुर्की आदेश जारी करते हुए 4.53 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया।

## इसका आप पर असर
बैंक धोखाधड़ी के मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की यह कार्रवाई बैंकिंग अनुशासन और वित्तीय जवाबदेही को मजबूत बनाती है।

- **भारत में:** सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में वित्तीय जालसाजी पर सख्त कार्रवाई से आम नागरिकों की जमा पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कड़े नियमों और कुर्की की कार्रवाई से कॉरपोरेट स्तर पर कर्ज लेकर हेराफेरी करने की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगता है।
- **अहमदाबाद में:** स्थानीय औद्योगिक इकाइयों और कारोबारी हलकों में वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है। गैर-कानूनी ढंग से फंड डायवर्ट करने वाली फर्मों पर कानूनी शिकंजा कसने से स्थानीय वित्तीय संस्थानों में ऋण वितरण की प्रक्रिया और सख्त होगी।
- **बैंकिंग ग्राहकों के लिए:** जब डूबे हुए कर्ज की वसूली के लिए संपत्तियां जब्त होती हैं, तो बैंकों का गैर-निष्पादित कर्ज कम करने में मदद मिलती है। इससे ईमानदार कर्जदारों और छोटे व्यापारियों के लिए ऋण मिलना अपेक्षाकृत आसान और सुरक्षित बनता है।
- **निवेशकों के लिए:** वित्तीय अनियमितताओं पर तुरंत कार्रवाई होने से कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार होता है। पारदर्शिता बढ़ने से बाजार में वैध कारोबारियों और निवेशकों का भरोसा कायम रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी कार्रवाई बैंकों के साथ हुए 79.56 करोड़ रुपये के सुनियोजित वित्तीय गबन और नियमों के उल्लंघन के बाद सामने आई है।

- **सीबीआई की आरंभिक प्राथमिकी:** केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इस आपराधिक मामले के आधार पर ही मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की अलग से जांच शुरू हुई।
- **लोन शर्तों का खुला उल्लंघन:** कंपनी प्रबंधन ने व्यावसायिक कार्यप्रणाली के लिए स्वीकृत कराए गए कोष का दुरुपयोग किया। घोषित व्यावसायिक गतिविधियों में निवेश करने के बजाय रकम को बड़े पैमाने पर नकद निकासी के जरिए गायब किया गया।
- **गैर-कंसोर्टियम खातों का उपयोग:** वित्तीय निगरानी तंत्र से बचने के लिए आरोपियों ने कंसोर्टियम से बाहर के खातों का उपयोग करते हुए सिस्टर कंपनियों में रकम ट्रांसफर की। इसके अलावा बिना किसी वास्तविक व्यापार के पैसा निदेशकों के निजी खातों में भेजा गया था।
- **जांच और अनंतिम कुर्की:** मनी ट्रेल के पूरे सबूत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए 4.53 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रवर्तन निदेशालय ने किस कंपनी के खिलाफ यह कुर्की की कार्रवाई की है?
प्रवर्तन निदेशालय की अहमदाबाद यूनिट ने स्टील कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों पर यह कार्रवाई की है।

### 2. इस मामले में कितने रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है?
जांच एजेंसी ने कंपनी से संबंधित लगभग 4.53 करोड़ रुपये की चल और अचल परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।

### 3. कंपनी पर कुल कितने रुपये के घोटाले का आरोप है?
जांच के अनुसार कंपनी से जुड़े लोगों पर करीब 79.56 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले और गबन का आरोप है।

### 4. यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है?
यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के कानूनी प्रावधानों के तहत की गई है।

### 5. इस घोटाले की शुरुआत में किस एजेंसी ने केस दर्ज किया था?
घोटाले की प्राथमिक जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

### 6. कंपनी के निदेशकों पर फंड को किस तरह डायवर्ट करने का आरोप है?
निदेशकों पर बड़े पैमाने पर कैश निकालने, नॉन-कंसोर्टियम बैंक खातों का उपयोग करने और बिना बिजनेस के सिस्टर फर्मों व निजी खातों में पैसे भेजने का आरोप है।

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