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  "title": "अमरेली के दुधला में 40 करोड़ लीटर क्षमता वाले गुजरात गौरव सरोवर का अमित शाह ने किया लोकार्पण, बोले: पीएम नरेंद्र मोदी ने दूर किया राज्य का जल संकट",
  "summary": "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अमरेली जिले के दुधला में 21 एकड़ में बने 'गुजरात गौरव सरोवर' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने नर्मदा परियोजना के इतिहास और राज्य में जल संरक्षण के अभियानों को याद किया।",
  "content": "विश्व झील दिवस के अवसर पर गुजरात के अमरेली जिले स्थित दुधला गांव में एक वृहद जल संरक्षण परियोजना का आधिकारिक लोकार्पण सम्पन्न हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 21 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में निर्मित 'गुजरात गौरव सरोवर' का उद्घाटन किया। यह कृत्रिम सरोवर 40 करोड़ लीटर जल भंडारण की क्षमता रखता है। इस परियोजना का निर्माण हरिकृष्ण ग्रुप और ढोलकिया फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से पूरा किया गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान अमित शाह ने राज्य के लंबे जल संकट और उसे दूर करने के लिए दशकों से चले आ रहे प्रशासनिक व सामाजिक प्रयासों को विस्तार से रेखांकित किया।\n\nअमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह नया सरोवर अमरेली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर को सुधारने में बेहद कारगर साबित होगा। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण की इस तरह की निजी और सामुदायिक पहलें राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने में सक्षम हैं।\n\n \n\nनर्मदा परियोजना का इतिहास और दशकों का इंतजार\nसमारोह के दौरान गृह मंत्री ने नर्मदा परियोजना के लंबे और संघर्षपूर्ण इतिहास को याद किया। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साल 1964 में रखी थी। अमित शाह ने एक व्यक्तिगत संदर्भ साझा करते हुए उल्लेख किया कि उनका जन्म भी उसी वर्ष 1964 में हुआ था। हालांकि, नींव रखे जाने के बावजूद यह परियोजना कई दशकों तक राजनीतिक और प्रशासनिक रुकावटों के कारण अधर में लटकी रही।\n\nशाह के अनुसार, नर्मदा परियोजना के मुख्य द्वार तब जाकर खोले गए जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार ने परियोजना के मार्ग में आ रही सभी पुरानी बाधाओं को तेजी से दूर किया। इसके बाद नर्मदा नदी का पानी सौराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों और कच्छ के सुदूर खावड़ा क्षेत्र तक सुगमता से पहुंच सका। इस कदम ने गुजरात के विशाल भूभाग को भीषण जल संकट से स्थायी मुक्ति दिलाई।\n\n2001 के बाद जल संकट से निपटने की रणनीति\nगुजरात में सूखे के पुराने दौर का स्मरण करते हुए अमित शाह ने 1985, 1986 और 1987 के भयावह सूखे के वर्षों का उल्लेख किया। उन वर्षों में राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया था और बड़े पैमाने पर राहत कार्य चलाने पड़े थे। उन्होंने कहा कि परिस्थिति में वास्तविक बदलाव तब शुरू हुआ जब साल 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली।\n\nमुख्यमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने जल संचयन और सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दूरगामी नीतियां लागू कीं। इस दिशा में एक बड़ा कीर्तिमान साल 2003 में स्थापित हुआ, जब राज्य सरकार ने मात्र एक वर्ष की लघु अवधि में 1.5 लाख चेक डैम का निर्माण पूरा कर दिखाया। इस विशाल कदम से राज्य के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना आसान हुआ और राज्य का कृषि उत्पादन तेजी से बढ़ा।\n\nसौनी योजना से लेकर जल शक्ति मंत्रालय तक की भूमिका\nराज्य और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का ब्योरा देते हुए अमित शाह ने 'सौनी योजना' के महत्व पर प्रकाश डाला। इस योजना के माध्यम से नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी को सौराष्ट्र के विभिन्न बांधों तक मोड़ा गया और प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ा गया। वहीं उत्तर गुजरात के सूखा प्रभावित जिलों में 'सुजलाम सुफलाम योजना' ने जल स्तर बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों को अपनाकर पानी की बर्बादी को न्यूनतम स्तर पर लाया गया।\n\nकेंद्रीय स्तर की पहलों की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में आने के बाद 'जल शक्ति मंत्रालय' का गठन किया। इससे जल संरक्षण के प्रयासों को एक संगठित और संस्थागत रूप मिला। केंद्र के 'कैच द रेन' अभियान ने देश भर में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया। इसके अतिरिक्त, पुराने बांधों की सुरक्षा समीक्षा और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए निरंतर काम किया जा रहा है।\n\nढोलकिया फाउंडेशन के प्रयास और गगाडिया नदी का पुनरुद्धार\nअमित शाह ने गुजरात गौरव सरोवर के निर्माण में हरिकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया के योगदान की विशेष रूप से सराहना की। सावजीभाई ढोलकिया ने दो वर्ष पूर्व शाह के समक्ष इस झील के निर्माण की योजना प्रस्तुत की थी। दो वर्षों के निरंतर कार्य के बाद यह झील पूरी तरह तैयार हुई है, जिसकी लंबाई 360 मीटर, चौड़ाई 260 मीटर और गहराई 4 मीटर है।\n\nढोलकिया फाउंडेशन द्वारा अमरेली क्षेत्र में किए गए जल संरक्षण कार्यों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि फाउंडेशन के प्रयासों से स्थानीय स्तर पर गगाडिया नदी को नवजीवन मिला है। इसके अलावा संस्था ने क्षेत्र में 208 नई झीलों का निर्माण भी कराया है। इन जल संरचनाओं के बनने से आसपास के सूखे कुएं दोबारा जल से भर गए हैं और भूजल स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलों से समाज के सक्षम वर्ग को जल संरक्षण के कार्यों में आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।\n\nइसका आप पर असर\nगुजरात गौरव सरोवर के निर्माण से अमरेली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर में सुधार होगा, जिससे कृषि और पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी।\n\n• भारत में: केंद्र सरकार के कैच द रेन अभियान और जल शक्ति मंत्रालय की नीतियों से देश भर के ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण को संस्थागत बढ़ावा मिलेगा। इससे मानसून के पानी का बेहतर संचयन संभव होगा।\n• अमरेली और गुजरात में: दुधला और अमरेली जिले के किसानों के सूखे कुओं में पानी लौटेगा और सिंचाई की निर्भरता मानसूनी बारिश पर कम होगी। इससे स्थानीय स्तर पर 40 करोड़ लीटर पानी का स्थायी बैकअप उपलब्ध रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुजरात गौरव सरोवर का उद्घाटन किसने और कहां किया?\nकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गांव में गुजरात गौरव सरोवर का उद्घाटन किया।\n\n2. गुजरात गौरव सरोवर की जल क्षमता और आकार कितना है?\nयह सरोवर 21 एकड़ में फैला है, जिसकी जल भंडारण क्षमता 40 करोड़ लीटर है। इसकी लंबाई 360 मीटर, चौड़ाई 260 मीटर और गहराई 4 मीटर है।\n\n3. गुजरात गौरव सरोवर का निर्माण किस संस्था ने किया है?\nइसका निर्माण हरिकृष्ण ग्रुप और ढोलकिया फाउंडेशन द्वारा किया गया है, जिसके संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया हैं।\n\n4. अमित शाह ने नर्मदा परियोजना की नींव और उद्घाटन के बारे में क्या बताया?\nशाह ने बताया कि नर्मदा परियोजना की नींव 1964 में तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन इसके गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए।\n\n5. ढोलकिया फाउंडेशन ने क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए और क्या काम किया है?\nफाउंडेशन ने गगाडिया नदी को पुनर्जीवित करने में मदद की है और इलाके में 208 नई झीलों का निर्माण कराया है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसावजीभाई ढोलकिया और ढोलकिया फाउंडेशन का यह प्रयास दिखाता है कि व्यक्तिगत संकल्प और सामाजिक उत्तरदायित्व से बड़े बदलाव संभव हैं।\n\n• समस्या का समाधान केंद्रित नजरिया: अमरेली के जल संकट को देखने के बाद सावजीभाई ने केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय खुद 208 झीलों का निर्माण कराया।\n• दीर्घकालिक योजना: 2 साल के निरंतर प्रयास से 21 एकड़ की विशाल झील बनाई गई, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।\n• नदी का पुनरुद्धार: गगाडिया नदी को नया जीवन देकर फाउंडेशन ने साबित किया कि सही दिशा में किए गए प्रयास पर्यावरण का संतुलन बहाल कर सकते हैं।",
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  "publishedAt": "2026-08-27",
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