# 'बच जाना ही सबसे बड़ी सज़ा बन गई', AI-171 हादसे के इकलौते जीवित यात्री विश्वास कुमार रमेश की पीड़ा

> एयर इंडिया AI-171 क्रैश में 260 लोगों की मौत हुई थी और बोइंग 787 के मलबे से अकेले विश्वास कुमार रमेश ज़िंदा निकले थे। हादसे के एक साल बाद वे बताते हैं कि बच जाना ही उनकी तकलीफों का अंत नहीं था।

**Category:** गुजरात · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/bacha-jana-hi-sabase-bari-saza-bana-gai-ai-171-hadase-ke-ikalaute-jivita-yatri-v-111

दुनिया भर में विश्वास कुमार रमेश को एयर इंडिया AI-171 हादसे का 'चमत्कार' माना गया, क्योंकि बोइंग 787 के मलबे से जिंदा बाहर निकलने वाले वे इकलौते इंसान थे। इस भीषण हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। मगर त्रासदी के एक साल पूरा होने पर विश्वास कुमार का कहना है कि सिर्फ़ बच जाना उनकी परेशानियों का अंत नहीं था। भले ही वे सबसे ज़्यादा भाग्यशाली माने जाते हों, पर असल में वे खुद इस खौफनाक सदमे से बाहर आने के लिए लगातार जूझ रहे हैं।

## AI-171 हादसे में बचे, मगर मन के घाव नहीं भर पाए

हादसे की पहली बरसी पर दिए एक बयान में विश्वास कुमार ने कहा, "लोग बस इतना देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन बंद दरवाज़ों के पीछे जो लड़ाइयां चलती रहती हैं, उन्हें वे नहीं देख पाते। मुझे आज भी नींद न आने, बेचैनी और तकलीफ़देह यादों से जूझना पड़ता है। पूरा एक साल गुज़र जाने के बावजूद मैं अपनी ज़िंदगी को दोबारा पटरी पर लाने और अपने परिवार की हर मुमकिन मदद करने की कोशिश में लगा हूं।"

## हादसे में भाई को खो चुके हैं विश्वास

12 जून, 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाला बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान भरने के महज़ 32 सेकंड बाद ही BJ मेडिकल कॉलेज परिसर में जा गिरा था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की और ज़मीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश घायल हालत में ज़िंदा बच गए, लेकिन विमान में दूसरी जगह बैठे उनके भाई अजय अपनी जान नहीं बचा सके।

## 'महज़ ज़िंदा रहना ही पूरी कहानी नहीं है'

उन्होंने कहा, "मैं ज़िंदा बच जाने के लिए शुक्रगुज़ार हूं, मगर सिर्फ़ ज़िंदा रहना ही पूरी कहानी नहीं है। उसके बाद मैंने जो कुछ झेला, वह इतना कठिन रहा कि उसे शब्दों में नहीं उतारा जा सकता।" इन शब्दों से 40 वर्षीय विश्वास पर पड़े गहरे भावनात्मक असर का अंदाज़ा होता है, जो भारत के सबसे भयावह विमान हादसों में से एक के इकलौते जीवित यात्री के रूप में अचानक हर तरफ़ चर्चा में आ गए थे।

## 'चारों ओर लाशें देखकर सहम गया था'

हादसे के फ़ौरन बाद खून से सने और लंगड़ाते हुए विश्वास कुमार की तस्वीरें टीवी और सोशल मीडिया पर हर जगह फैल गई थीं। कुछ घंटों बाद अस्पताल के बिस्तर से बात करते हुए उन्होंने बताया था कि किस तरह मलबे और शवों के बीच उनकी आंख खुली और फिर वे किसी तरह सुरक्षित जगह तक पहुंचे। उन्होंने कहा, "जब मेरी आंख खुली तो चारों तरफ़ लाशें बिखरी थीं। मैं सहम गया था। मैं उठा और भाग खड़ा हुआ।"

## एक साल बाद भी नींद और यादों से जूझ रहे हैं विश्वास

इस हादसे में उनके भाई अजय कुमार रमेश की मौत हुई थी, जो भारत में परिवार से मिलने के बाद उनके साथ लंदन लौट रहे थे। बीते एक साल में कई इंटरव्यू में विश्वास ने बार-बार इसका ज़िक्र किया है और इसे इस त्रासदी से मिला सबसे गहरा घाव बताया है। दुर्घटनास्थल के मंज़र, चमत्कारिक रूप से बच निकलने और भाई की मौत की भयावह यादें आज भी उन्हें परेशान करती हैं। उन्होंने कहा कि शरीर के ज़ख्म तो भर गए, मगर मन के घावों से उबरना कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हुआ।

## भाई की मौत, जमा-पूंजी का नुकसान और अब अकेलापन

दोस्तों और परिवारवालों ने बताया है कि हादसे की बार-बार लौटती यादों, नींद न आने और उस घटना के बाद ज़िंदगी में दोबारा संभलने में विश्वास को कितनी कठिनाइयों से गुज़रना पड़ा, जिसमें उनके आस-पास लगभग सभी लोग मारे गए थे। इस हादसे ने आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया। पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक विश्वास कुमार और उनके भाई अजय ने अपनी बचत का बड़ा हिस्सा भारत में मछली पकड़ने के कारोबार में लगाया था। हादसे और अजय की मौत के बाद परिवार की सारी योजनाएं अधर में अटक गईं, जिससे पहले से ही बेहद कठिन रहे उस साल में तनाव और बढ़ गया।

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