गुजरात में 25 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सरगना गिरफ्तार सूरत और अहमदाबाद अपराध शाखा ने संयुक्त अभियान चलाकर एक्सप्रेसवे टोल नाके पर एक वाहन से हेरोइन और एमडी की बड़ी खेप जब्त की। डेढ़ साल तक चले इस खुफिया ऑपरेशन में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के तीन कुख्यात तस्कर पकड़े गए हैं। अहमदाबाद एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर एक सुनियोजित घेराबंदी के दौरान कानून प्रवर्तन टीमों ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ सिंडिकेट के तीन मुख्य संचालकों को धर दबोचा। अधिकारियों ने एक काली महिंद्रा एक्सयूवी को रोककर उसकी गहन तलाशी ली, जिसके भीतर बेहद शातिर तरीके से छिपाकर रखी गई हेरोइन और एमडी नशीले पदार्थों की बड़ी खेप बरामद हुई। बाजार में इस प्रतिबंधित माल की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये आंकी गई है। पकड़े गए तीनों आरोपी कई वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में फैले अवैध नेटवर्क की बागडोर संभाल रहे थे। डेढ़ साल की लंबी पड़ताल से खुला नेटवर्क इस बड़े ऑपरेशन की नींव करीब अठारह महीने पहले रखी गई थी। उस दौरान एक स्थानीय स्तर के छोटे सप्लायर की गिरफ्तारी हुई थी, जिससे मिले सुरागों ने पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने का काम किया। सूरत अपराध शाखा के डीसीपी भावेश रोजिया और उस वक्त सूरत के पुलिस कमिश्नर रहे अनुपम सिंह गहलोत ने इस गिरोह की अंतिम जड़ तक पहुंचने की ठोस कार्ययोजना तैयार की थी। जांचकर्ताओं का स्पष्ट लक्ष्य केवल कूरियर पकड़ना नहीं, बल्कि सप्लाई चेन के शीर्ष पर बैठे सिंडिकेट प्रमुखों तक हाथ पहुंचाना था। निगरानी और तस्करों की पैंतरेबाजी जांच अधिकारियों के मजबूत खुफिया तंत्र को भांपते हुए सिंडिकेट के सरगनाओं ने सीधे तौर पर इलाके में कदम रखना पूरी तरह बंद कर दिया था। अपने स्थानीय खरीदारों और संपर्कों को सक्रिय रखने के लिए गिरोह ने रणनीति बदली और महिलाओं के जरिए छोटी-छोटी मात्रा में नशीला पदार्थ भेजना शुरू किया। इस युक्ति का मकसद सुरक्षा एजेंसियों के रडार से बचना और यह परखना था कि परिवहन के मार्ग सुरक्षित हैं या नहीं। इसी वर्ष बकरीद के त्योहार के आसपास कफील अहमद नामक संदिग्ध बिना किसी माल के जायजा लेने के इरादे से अहमदाबाद पहुंचा। हालांकि, निगरानी दल ने अपनी मौजूदगी का कोई अहसास नहीं होने दिया और उसे पूरी तरह आश्वस्त होकर लौटने दिया। इसी साल जुलाई के महीने में जब अनुपम सिंह गहलोत का तबादला अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर के पद पर हुआ, तब गिरोह के सदस्यों को लगा कि जांच की रफ्तार अब थम जाएगी। अक्सर वरिष्ठ पदों पर प्रशासनिक फेरबदल के बाद पुरानी योजनाएं पीछे छूट जाती हैं, लेकिन इस बार समन्वय और व्यापक हो गया। गहलोत ने पदभार संभालते ही अहमदाबाद अपराध शाखा को भी इस मिशन का हिस्सा बना दिया, जिससे दोनों शहरों की जांच इकाइयों के बीच जानकारियों का त्वरित आदान-प्रदान शुरू हो गया। रूट बदलकर आ रहे तस्कर टोल नाके पर घिरे गिरोह को यह गलतफहमी हो गई कि लंबे समय से शांत माहौल उनके बड़े मुनाफे का रास्ता साफ कर चुका है। लगभग दस दिन पहले सुरक्षा एजेंसियों को पुख्ता जानकारी मिली कि कफील अपने साथियों के साथ भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्री लेकर रवाना हो रहा है और इस बार वह शहर में बिना रुके सीधे निकलने की योजना में है। पीछा करने वाली टीमों को भ्रमित करने के लिए तस्करों ने दिल्ली से निकलते हुए मार्ग में चार से पांच बार रास्ते बदले। वे अंत में वड़ोदरा पहुंचे और वहां से एक्सप्रेसवे के रास्ते अहमदाबाद की ओर बढ़े। हालांकि, उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी और जैसे ही उनका वाहन टोल बूथ पर पहुंचा, घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया गया। सीट के भीतर छिपाया गया था माल तस्करों ने प्रतिबंधित सामग्री को कार की पिछली सीट के भीतर विशेष जगह बनाकर छिपाया था, ताकि सामान्य जांच के दौरान किसी को शक न हो। सघन तलाशी के बाद सुरक्षाकर्मियों ने पूरी खेप बरामद कर ली। राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। इससे पहले भरूच के दाहेज में सुरक्षा बलों ने 2,153 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों को नष्ट करने की कार्रवाई की थी, जिसमें बेहतरीन काम करने वाले 278 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड पकड़े गए तीनों आरोपियों का इतिहास गंभीर अपराधों और तस्करी से भरा रहा है • तीफेल नोखेज: नई दिल्ली का निवासी 44 वर्षीय तीफेल पहले भी बड़े मामलों में संलिप्त रहा है। उसे वर्ष 2014 में अमृतसर में 100 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया था। इसके अलावा 2019 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 330 किलोग्राम मादक पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी थी, जिसमें 54 किलोग्राम हेरोइन शामिल थी, और उस मामले में भी तीफेल की गिरफ्तारी हुई थी। • कफील अहमद: नई दिल्ली के रहने वाले 59 वर्षीय कफील का नेटवर्क पुराना है। उसे अलग-अलग तीन मुकदमों में कुल 45 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें गुजरात का एक 10 वर्ष की सजा वाला मामला भी शामिल है। इसके पूर्व वह जयपुर में 18.5 किलोग्राम चरस, अहमदाबाद में 100 ग्राम एमडी और राजस्थान में पैरोल की अवधि के दौरान 3 किलोग्राम अल्प्राजोलम के साथ पकड़ा जा चुका है। • मोहम्मद इमरान अल्वी: उत्तर प्रदेश के मेरठ का 38 वर्षीय इमरान वाहनों और अन्य सामानों में माल छिपाने के नए-नए तरीके ईजाद करने का माहिर माना जाता है। नशीले पदार्थों के कारोबार के अलावा उसके खिलाफ उत्पीड़न, मानव तस्करी और धोखाधड़ी के संगीन मामले पहले से दर्ज हैं। इसका आप पर असर अंतरराज्यीय ड्रग कार्टेल के मुख्य संचालकों की गिरफ्तारी से नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ा प्रहार हुआ है। • भारत में: कई राज्यों में फैली आपूर्ति श्रृंखला टूटने से महानगरों में अवैध नशीले पदार्थों के बड़े प्रवाह में कमी आएगी। इससे युवा वर्ग को नशे के जाल में धकेलने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क की कमर टूटी है। • गुजरात में: राजमार्गों और टोल नाकों पर निगरानी प्रणाली अधिक सख्त होगी जिससे संदिग्ध वाहनों की चेकिंग बढ़ेगी। राज्य के भीतर सक्रिय स्थानीय पेडलरों तक कच्चा माल पहुंचना अब बेहद मुश्किल हो जाएगा। • कानून व्यवस्था: लंबी अवधि के अंतर-जिला खुफिया समन्वय से संगठित अपराध से जुड़े गिरोहों पर कानूनी शिकंजा मजबूत होगा। बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों के लिए जमानत और पैरोल के नियमों में सख्ती की मिसाल बनेगी। • आम नागरिकों के लिए: स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने वाले तंत्र पर पुलिस का फोकस और बढ़ेगा। समाज में नशीली दवाओं की पहुंच घटने से अपराध दर और सामाजिक असुरक्षा में गिरावट आएगी। ऐसा क्यों हुआ यह बड़ा खुलासा और गिरफ्तारी करीब डेढ़ साल तक चली गोपनीय निगरानी और समन्वित योजना के बाद संभव हो सकी। • पुराने मामले से मिला सुराग: अठारह महीने पहले सूरत में एक छोटे ड्रग पेडलर की गिरफ्तारी से पुलिस को सिंडिकेट के शीर्ष संचालकों के बारे में बुनियादी जानकारी मिली थी। जांचकर्ताओं ने निचले स्तर पर कार्रवाई रोकने के बजाय पूरे आपूर्ति तंत्र की पहचान करने का निर्णय लिया। • सतर्कता और रणनीति में बदलाव: पुलिस की सक्रियता देखकर गिरोह ने महिलाओं के जरिए कम मात्रा में नशीला पदार्थ भेजकर रास्तों की टोह लेना शुरू किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने इस चालाकी को भांप लिया और आरोपियों को यह आभास होने दिया कि वे सुरक्षित हैं। • समन्वित पुलिस कार्रवाई: उच्चाधिकारियों के तबादले के बाद सूरत और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने संयुक्त सूचना तंत्र स्थापित किया। जैसे ही तस्करों ने भारी खेप के साथ दिल्ली से अहमदाबाद का रुख किया, उन्हें तय योजना के तहत टोल नाके पर घेर लिया गया। सवाल-जवाब 1. अहमदाबाद टोल बूथ पर पुलिस ने कितनी कीमत के नशीले पदार्थ जब्त किए? पुलिस ने महिंद्रा एक्सयूवी से करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन और एमडी ड्रग्स बरामद की। 2. इस कार्रवाई में कौन-कौन से मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं? पुलिस ने नई दिल्ली निवासी तीफेल नोखेज (44), कफील अहमद (59) और मेरठ निवासी मोहम्मद इमरान अल्वी (38) को गिरफ्तार किया है। 3. यह ऑपरेशन कितने समय से चलाया जा रहा था? सूरत और अहमदाबाद की अपराध शाखा टीमें पिछले डेढ़ साल से इस पूरे गिरोह की गतिविधियों को ट्रैक कर रही थीं। 4. तस्करों ने गाड़ी में मादक पदार्थों को कहां छिपा रखा था? आरोपियों ने हेरोइन और एमडी की खेप को कार की पिछली सीट के भीतर विशेष जगह बनाकर छिपाया हुआ था। 5. आरोपी कफील अहमद का आपराधिक इतिहास क्या रहा है? कफील को तीन अलग-अलग मुकदमों में 45 साल की जेल की सजा हो चुकी है और वह चरस, एमडी और अल्प्राजोलम तस्करी के मामलों में शामिल रहा है। https://trendkia.com/gujarat/gujarat-men-25-karora-rupaye-ke-nashile-padarthon-ke-satha-antararajyiya-giroha-ke-tina-saragana-giraphtara-52771 TrendKia — Har trend, sabse pehle.