गुजरात में बाल यौन अपराधों पर सख्ती, पांच साल में 16 दोषियों को मौत की सजा और सैकड़ों को उम्रकैद गुजरात सरकार ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए पिछले पांच वर्षों में पॉक्सो मामलों में कड़े फैसले सुनाए हैं। इस दौरान 1,785 मामलों का निस्तारण करते हुए 908 अपराधियों को आजीवन कारावास और 16 को फांसी की सजा दी गई है। गुजरात में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर राज्य प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पॉक्सो मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी न बरतने की नीति लागू की है। पिछले पांच वर्षों के दौरान इस कानून के तहत आए मामलों में अदालतों ने ऐतिहासिक और कड़े फैसले सुनाए हैं। इस समयावधि में कुल 1,785 मामलों में न्यायिक निर्णय दिए गए, जिनमें से 908 मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली है। इसके साथ ही जघन्य अपराध करने वाले 16 दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया गया है, जो अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अपराधों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति राज्य में बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में बिना किसी देरी के त्वरित न्याय सुलभ कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने शून्य सहनशीलता यानी जीरो टॉलरेंस का कड़ा रुख अपनाया है। इस सोची-समझती नीति के सकारात्मक परिणामों के चलते पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सिस) के तहत दर्ज मुकदमों में कानूनी प्रक्रिया अभूतपूर्व तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार और न्यायपालिका के आपसी तालमेल से पीड़ितों को समय पर राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। महज़ 72 घंटों में आजीवन कारावास का ऐतिहासिक फैसला वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन और अपराध की जड़ों तक जाकर संवेदनशीलता के साथ की जाने वाली पुलिस जांच की पद्धति अपराधियों को सजा दिलाने में बेहद असरदार साबित हो रही है। हाल ही में गांधीनगर जिले के कलोल स्थित पॉक्सो अदालत ने एक अनुकरणीय फैसला सुनाया। वहां एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के मात्र 72 घंटों के भीतर ही आरोपी को प्राकृतिक आयु के अंतिम क्षण तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसने न्याय जगत में एक नई मिसाल पेश की है। वर्ष-दर-वर्ष आए फैसलों के आंकड़े वर्ष 2022 से लेकर अगस्त 2026 तक की समयावधि में पॉक्सो अदालतों द्वारा कुल 1,785 फैसले पारित किए गए हैं। इन फैसलों में से 908 अपराधियों को उम्रकैद और 16 अपराधियों को मौत की सजा दी जा चुकी है। अदालतों द्वारा सुनाए गए इन फैसलों के आंकड़ों में हर साल उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में 194 फैसलों के जरिए 107 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2025 में 499 फैसलों में 340 आरोपियों को उम्रकैद की सजा भुगतने का आदेश दिया गया। चालू वर्ष यानी 2026 के शुरुआती आठ महीनों में, यानी अगस्त तक, कुल 346 फैसलों में 241 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। खासतौर पर केवल अगस्त महीने के दौरान ही 48 पॉक्सो मामलों में सजा के फैसले आए, जिनमें से 35 मामलों में अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा मिली है। सरकार और प्रशासन का कड़ा संदेश इस गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने कहा है कि राज्य में बच्चियों पर बुरी नजर डालने वाले किसी भी अपराधी के लिए दया या रियायत की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल के नेतृत्व में सरकार ने पॉक्सो मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट और मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया है, जिसके परिणामस्वरूप अब पीड़ितों को वर्षों इंतजार नहीं करना पड़ता। उन्होंने आगे कहा कि केवल 72 घंटों में चार्जशीट से लेकर फैसले तक पहुंचना पुलिस की उत्कृष्ट वैज्ञानिक जांच और न्यायपालिका के सख्त रुख का नतीजा है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में शामिल गुजरात पुलिस और न्यायपालिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा दिलाकर समाज में मिसाल कायम करना ही उनका स्पष्ट संकल्प है। पुलिस की त्वरित और सघन जांच पद्धति राज्य के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने जानकारी दी है कि इस श्रेणी के सभी मामलों में पुलिस अत्यंत संवेदनशीलता, पूरी गति और सख्ती के साथ अपनी जांच को आगे बढ़ाती है। पीड़िता और उसके परिवार को कम से कम समय में न्याय दिलाने के वास्ते पुलिस मुख्य रूप से 'सघन जांच, कड़ी कार्रवाई और त्वरित न्याय' के त्रि-सूत्रीय सिद्धांत पर काम करती है। पॉक्सो मामलों में तेजी से चार्जशीट तैयार कर प्रत्येक मामले को जल्द से जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट तक पहुँचाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। पुलिस महकमे द्वारा अधिकांश मामलों में घटना के 45 दिनों के भीतर ही चार्जशीट अदालत में पेश कर दी जाती है, जिससे मुकदमे की सुनवाई बिना किसी विलंब के शुरू हो जाती है और दोषियों को रिकॉर्ड समय में कठोर सजा मिल पाती है। रिकॉर्ड समय में चार्जशीट दाखिल करने के आंकड़े विगत पांच वर्षों के दौरान पुलिस ने कुल 140 पॉक्सो मामलों में घटना के एक दिन से लेकर 15 दिनों के भीतर ही अपनी चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। इसके अलावा, 16 से 30 दिनों के भीतर जाँच का काम पूरा करते हुए कुल 1,339 मामलों में चार्जशीट पेश की गई। इसी तरह, 31 से 45 दिनों के अंतराल में चार्जशीट दाखिल किए जाने वाले मामलों की संख्या 5,463 रही है। यह रिकॉर्ड इस बात की गवाही देता है कि पुलिस इन मामलों में कितनी संजीदगी और मुस्तैदी के साथ अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा रही है। सुरक्षा का मजबूत होता ताना-बाना प्रशासन द्वारा खड़े किए गए मजबूत कानूनी ढांचे और पुलिस तथा अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर तालमेल के कारण गुजरात में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा का दायरा पहले से कहीं अधिक पुख्ता हुआ है, जिससे असामाजिक तत्वों के दिलों में कानून का डर बैठा है। इस दिशा में पहले भी सख्त कदम उठाए गए हैं और हर्ष संघवी ने यह स्पष्ट किया था कि प्रेम करना कोई अपराध नहीं है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी असली पहचान छिपाकर और प्यार की आड़ में किसी के साथ धोखा करता है, तो उसके खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा प्रशासन ने अन्य मामलों में भी सख्त रुख अपनाते हुए अवैध रूप से रह रहे लोगों को भी एक निश्चित समय सीमा के भीतर राज्य छोड़ने की सख्त हिदायत दी थी। इसका आप पर असर गुजरात सरकार की इस सख्त नीति का सीधा असर राज्य में बाल सुरक्षा, आपराधिक मामलों की सुनवाई की गति और जनता के बीच कानून के प्रति विश्वास पर पड़ेगा। - भारत में: यह मामला देश भर के अन्य राज्यों के लिए बाल सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और त्वरित अदालती सुनवाई का एक मजबूत मॉडल पेश करता है। - गुजरात में: राज्य के नागरिकों और परिवारों को यह भरोसा मिलता है कि जघन्य मामलों में पुलिस और अदालतें अब महीनों या वर्षों के बजाय गिने-चुने दिनों में फैसले सुना रही हैं। - जांच की गति: अधिकांश मामलों में 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल होने से वकीलों और अदालतों को ट्रायल समय पर शुरू करने में मदद मिलती है। - अपराधियों पर शिकंजा: पिछले पांच वर्षों में 908 आजीवन कारावास और 16 फांसी की सजा मिलने से असामाजिक तत्वों में पुलिस और न्यायपालिका का कड़ा खौफ स्थापित हुआ है। ऐसा क्यों हुआ पॉक्सो मामलों में रिकॉर्ड समय में फैसले आने और कड़ी सजा मिलने के पीछे एक स्पष्ट प्रशासनिक रणनीति और कानूनी सुधार काम कर रहे हैं। - जीरो टॉलरेंस नीति: सरकार द्वारा यौन अपराधों के खिलाफ अपनाई गई शून्य सहनशीलता की नीति ने पुलिस और अभियोजन पक्ष को बिना किसी दबाव के तेजी से काम करने का निर्देश दिया है। - वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन: पुलिस द्वारा मामलों में टॉप टू बॉटम संवेदनशीलता के साथ साइंटिफिक एविडेंस जुटाए जाने से अदालतों में अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत होता है। - विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट: मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने के लिए राज्य में विशेष अदालतों का गठन किया गया है जो नियमित रूप से मामलों की मॉनिटरिंग करती हैं। - त्वरित चार्जशीट दाखिल करना: अधिकांश मामलों में 45 दिनों के भीतर और कई मामलों में 1 से 15 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल होने से ट्रायल की लंबी प्रक्रिया कम हुई है। सवाल-जवाब 1. गुजरात में पिछले 5 साल में कुल कितने पॉक्सो फैसले सुनाए गए हैं? वर्ष 2022 से अगस्त 2026 के बीच पॉक्सो अदालतों द्वारा कुल 1,785 फैसले सुनाए गए हैं। 2. इन पांच वर्षों में कितने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली है? इस अवधि के दौरान कुल 908 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। 3. कितने दोषियों को फांसी की सजा दी गई है? पिछले 5 वर्षों में 16 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। 4. गांधीनगर के कलोल मामले में फैसले में कितना समय लगा? कलोल पॉक्सो कोर्ट ने पुलिस द्वारा चार्जशीट प्रस्तुत किए जाने के मात्र 72 घंटे के भीतर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 5. अधिकांश मामलों में पुलिस कितने दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करती है? पुलिस द्वारा अधिकांश मामलों में 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा रही है। 6. गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने मामलों की त्वरित सुनवाई के बारे में क्या कहा है? उन्होंने कहा कि बेटियों पर बुरी नजर रखने वालों के लिए कोई रियायत नहीं है और सरकार द्वारा तैयार मजबूत कानूनी ढांचे के कारण पीड़ितों को गिने-चुने दिनों में न्याय मिल रहा है। https://trendkia.com/gujarat/gujarat-men-bala-yauna-aparadhon-para-sakhti-pancha-sala-men-16-doshiyon-ko-mauta-ki-saja-aura-saikaron-ko-umrakaida-30704 TrendKia — Har trend, sabse pehle.