# गुजरात में बोगस राजनीतिक दलों का महाघोटाला, चंदे के नाम पर 2,284 करोड़ का खेल और 700 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर

> गुजरात सीआईडी क्राइम की आर्थिक अपराध शाखा ने चार गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ चार अलग-अलग मामले दर्ज कर 2,284 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी चंदे और 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी का भंडाफोड़ किया है।

**Type:** article · **Category:** गुजरात · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/gujarat-men-bogasa-rajanitika-dalon-ka-mahaghotala-chnde-ke-nama-para-2-284-karora-ka-khela-aura-700-karora-ki-taiksa-chori-ujagar-40043 · **Language:** Hindi
**Tags:** गुजरात समाचार, राजनीतिक चंदा, टैक्स चोरी, सीआईडी क्राइम, हवाला रैकेट, आयकर विभाग

गुजरात पुलिस के अपराध जांच विभाग की आर्थिक अपराध शाखा ने राज्य में सक्रिय चार गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों के एक सुनियोजित वित्तीय सिंडिकेट को बेनकाब किया है। आयकर विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ओर से दी गई विस्तृत शिकायतों के आधार पर गांधीनगर में चार अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन मुकदमों में 2,284 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का फर्जी राजनीतिक चंदा जुटाने और भारतीय सरकारी खजाने को 700 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का भारी नुकसान पहुंचाने का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क वास्तविक चुनावी या जनसेवा की राजनीति करने के बजाय करदाताओं को सौ फीसदी कर छूट दिलाकर कमीशन ऐंठने और काले धन को सफेद करने का माध्यम बना हुआ था। इस पूरी कार्रवाई को भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत धोखाधड़ी, सुनियोजित आपराधिक साजिश तथा जाली दस्तावेज तैयार करने की गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया है।

## कागजी दलों का संगठित तंत्र और धन वापसी की कार्यप्रणाली
जांच अधिकारियों की प्रारंभिक पड़ताल में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया है कि जिन राजनीतिक संगठनों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं, वे केवल दस्तावेजों पर संचालित किए जा रहे थे। ज़मीनी स्तर पर इन दलों की कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि, सार्वजनिक रैलियां अथवा संगठनात्मक बैठकें नहीं होती थीं। इनका एकमात्र उद्देश्य आयकर अधिनियम की धारा 80GGB तथा 80GGC के तहत मिलने वाली पूर्ण कर रियायत का दुरुपयोग करना था। देश के विभिन्न हिस्सों से करदाताओं को इस बात का लालच दिया जाता था कि वे बैंकिंग चैनलों या आरटीजीएस के माध्यम से इन दलों के खातों में आधिकारिक चंदा जमा करें। बदले में संबंधित व्यक्तियों या कंपनियों को फर्जी और जाली दान रसीदें थमा दी जाती थीं।

बैंक खातों में धनराशि जमा होते ही खेल का दूसरा चरण शुरू होता था। इस प्राप्त पूंजी को तुरंत विभिन्न फर्जी फर्मों, डमी उद्यमों और मुखौटा कंपनियों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था। इसके लिए झूठी व्यापारिक खरीद और फर्जी बिल तैयार किए जाते थे। बैंकों से भारी मात्रा में नकदी निकाली जाती थी और फिर पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार चार से दस प्रतिशत तक का कमीशन काटकर शेष सारी नकदी आंगड़िया पेढ़ी तथा हवाला नेटवर्क के गुप्त रास्तों से मूल दानदाताओं को वापस लौटा दी जाती थी। इस तरह करदाता अवैध नकदी हासिल करते हुए अपने बही-खातों में सौ फीसदी कर कटौती का लाभ उठा लेते थे।

## भारतीय नेशनल जनता दल का सबसे बड़ा घोटाला
गांधीनगर के सेक्टर 11 के पते पर पंजीकृत भारतीय नेशनल जनता दल के खिलाफ आयकर विभाग के उप आयुक्त डॉक्टर राजेंद्र राज जेहरा राम की शिकायत पर पहला मामला दर्ज किया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2024-25 के दौरान इस अकेले संगठन ने 56,238 दानदाताओं से 1,143.85 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल चंदा हासिल किया। इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी खजाने को करीब 343 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष कर चपत लगाई गई। प्राथमिक जांच में पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार विठ्ठलभाई गजेरा, जिन्हें सुरेंद्रकुमार विष्णुभाई गजेरा भी कहा गया है, को पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार पाया गया है। इनके साथ पार्टी महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट आदिल सैयद को नामजद आरोपी बनाया गया है।

जांच के दौरान यह विवरण सामने आया कि सुरेंद्र गजेरा कमीशन की दरें तय करने, डमी कंपनियों के चयन और हवाला संचालन की निगरानी का जिम्मा संभालता था। महासचिव विपुल सोलंकी व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से दानदाताओं के विवरण जुटाकर जाली चंदा रसीदें जारी करता था। तलाशी के दौरान कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा के ठिकाने से हवाला लेन-देन की रसीदें जब्त की गईं और उसके मोबाइल से बिचौलिये अभिषेक शर्मा के साथ बातचीत का ब्योरा मिला, जिसमें छह प्रतिशत का कमीशन काटकर आंगड़िया के जरिए नकद वापसी के पुख्ता प्रमाण मिले। वहीं चार्टर्ड अकाउंटेंट आदिल सैयद पर आरोप है कि उसने बिना किसी पार्टी खाते की जांच किए, बिना कार्यालय गए और पदाधिकारियों से मिले बिना ही डिजिटल हस्ताक्षर करके जाली ऑडिट रिपोर्ट प्रमाणित कर दी। इस संगठन ने जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी डमी इकाइयों में धन स्थानांतरित कर फर्जी खरीद बिल बनाए थे।

## स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी में कमीशन का खेल
अहमदाबाद के पते पर पंजीकृत स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के विरुद्ध आयकर विभाग के सहायक निदेशक मुक्तेंद्र कुमार की शिकायत पर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में टैक्स कंसल्टेंट मेहुलकुमार महेशकुमार खत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र परसोतमप्रकाश तिवारी (जिन्हें सुरेंद्रसिंह परषोत्तमदास तिवारी भी लिखा गया है) तथा मुकुंदभाई चंदनसिंह राठौड़ (सीए मयूरसिंह चंदनसिंह राठौड़) को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। चौदह जुलाई 2025 को कर सलाहकार मेहुल खत्री के व्यावसायिक ठिकानों पर आयकर सर्वेक्षण के दौरान उनके मोबाइल फोन और लैपटॉप से ऐसे करदाताओं की व्यापक सूची बरामद हुई थी, जिन्होंने चंदा दिया था और जिन्हें नकदी लौटाई गई थी।

वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के खाते में चेक और आरटीजीएस के माध्यम से कुल 519 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। दानदाताओं को फर्जी रसीदें बांटकर धारा 80GGC के तहत कर कटौती कराई गई, जिससे राजकोष को करीब 155 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इस दल के बैंक खातों में आए धन को जय ट्रेडिंग कंपनी जैसी मुखौटा इकाइयों में अंतरित किया गया, जहां फर्जी खरीद बिलों के आधार पर बैंक से नकद निकासी हुई। इसके बाद आयोजकों ने आठ से नौ प्रतिशत का कमीशन अपनी जेब में रखा और शेष भारी-भरकम राशि नकदी के रूप में दानदाताओं को लौटा दी।

## गरीब कल्याण पार्टी और फर्जी चुनाव आयोग रिकॉर्ड
अहमदाबाद के नाना चिलोड़ा क्षेत्र में पंजीकृत गरीब कल्याण पार्टी के खिलाफ आयकर विभाग के सहायक निदेशक यतीश शशिकांत काले की शिकायत पर तीसरा आपराधिक मामला दर्ज किया गया। इसमें पार्टी के अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय, सचिव धनंजय सिंह राजपूत, कोषाध्यक्ष धीरज कुमार क्षत्रिय, अविनाश चंद्रकांत तिवारी (जिन्हें अभिषेक चंद्रप्रकाश तिवारी भी दर्ज किया गया है), प्रदीप सिंह परिहार तथा तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट कुलदीपदान टापरिया (कुलदीपचंदन पर्वतसिंह टापरिया), अशोककुमार राधेश्याम शाह और पंकज अग्रवाल को नामजद किया गया है।

साल 2022-23 से 2025-26 के मध्य इस संगठन ने 206.76 करोड़ रुपये (करीब 206.7 करोड़ रुपये) का चंदा अपने खातों में लिया। इस पूरे संग्रह का कोई प्रामाणिक बहीखाता, असली वाउचर या खर्च बिल नहीं रखा गया। निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले वैधानिक अंशदान विवरण फॉर्म 24A में पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली आंकड़े पेश किए गए, जिससे केंद्र सरकार को 62.02 करोड़ रुपये (लगभग 62 करोड़ रुपये) का टैक्स घाटा हुआ। दान की राशि को कृष्णा एंटरप्राइजेज और जलाराम एंटरप्राइजेज के बैंक खातों में कई स्तरों पर घुमाया गया। वहां से फर्जी खरीद दिखा कर नकदी निकाली गई और पांच से सात प्रतिशत का कमीशन काटकर शेष राशि दानदाताओं को थमा दी गई। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि कृष्णा एंटरप्राइजेज और जलाराम एंटरप्राइजेज के खातों में कुल 1,295.76 करोड़ रुपये के क्रेडिट लेन-देन दर्ज हैं, जिनके तार अन्य संदिग्ध राजनीतिक संगठनों और संस्थाओं से जुड़े होने का अंदेशा है।

## सत्यवादी रक्षक पार्टी और अन्य पेशेवरों की संलिप्तता
चौथा आपराधिक मामला सत्यवादी रक्षक पार्टी और उससे जुड़े पेशेवर सलाहकारों के विरुद्ध दर्ज किया गया है। इस संगठन ने अपने बही-खातों में 415 करोड़ रुपये का फर्जी चंदा प्रदर्शित किया था। इसके जरिए लगभग 124 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष आयकर चोरी को अंजाम दिया गया। इस मामले में पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ इस वित्तीय कुचक्र को तकनीकी जामा पहनाने वाले कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट और चार्टर्ड अकाउंटेंट को मुख्य आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार पेशेवर वित्त विशेषज्ञों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर फर्जी बिलिंग, फर्जी ऑडिट और बैंक लेयरिंग का संचालन संभव नहीं था।

## हवाला और आंगड़िया नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा
इस बहु-करोड़ों रुपये के फर्जी दान रैकेट ने गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में फैले पारंपरिक आंगड़िया और अनौपचारिक बैंकिंग तंत्र के दुरुपयोग को एक बार फिर उजागर किया है। सीआईडी क्राइम की आर्थिक अपराध शाखा अब उन तमाम बिचौलियों, फर्जी फर्मों के मालिकों और कमीशन एजेंटों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिन्होंने इस समानांतर अर्थव्यवस्था को गति दी। अधिकारियों का कहना है कि दर्ज की गई चारों प्राथमिकियों में शामिल सभी प्राथमिक आरोपियों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, मुखौटा कंपनियों के निदेशकों और अवैध लाभ लेने वाले बड़े करदाताओं पर शिकंजा और कड़ा किया जाएगा ताकि देश की वित्तीय व्यवस्था में सेंध लगाने वाले ऐसे बोगस संगठनों की जड़ों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

## इसका आप पर असर
इस बड़े खुलासे से फर्जी राजनीतिक चंदे के नाम पर टैक्स छूट लेने वाले करदाताओं और डमी दलों पर कानूनी शिकंजा कसने वाला है।

- **भारत में:** आयकर विभाग अब धारा 80GGB और 80GGC के तहत छूट का दावा करने वाले हजारों करदाताओं के रिटर्न की विस्तृत जांच करेगा। गलत कटौती क्लेम करने वाले वेतनभोगियों और कंपनियों को ब्याज तथा भारी जुर्माने के साथ कर मांग नोटिस जारी हो सकते हैं।
- **गुजरात में:** राज्य में सक्रिय गैर-मान्यता प्राप्त दलों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों और आंगड़िया पेढ़ी संचालकों पर जांच एजेंसियों की सख्त निगरानी रहेगी। अवैध रूप से नकद वापसी और कमीशन का सिंडिकेट चलाने वालों पर पुलिस व कर विभाग की संयुक्त कानूनी कार्रवाई तेज होगी।
- **कर अनुपालन पर:** फर्जी डोनेशन रसीदों के आधार पर टैक्स बचाने की कोशिश करने वाले लोगों पर आपराधिक साजिश की कानूनी धाराएं लग सकती हैं। इससे भविष्य में वास्तविक और पंजीकृत राजनीतिक दलों को मिलने वाले वास्तविक चंदों के नियमों में भी कड़ाई की जा सकती है।
- **पेशेवर सलाहकारों पर:** फर्जी ऑडिट रिपोर्ट प्रमाणित करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटों और टैक्स सलाहकारों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। वित्तीय मामलों में जाली दस्तावेज बनाने वाले पेशेवरों को कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बड़ा वित्तीय घोटाला राजनीतिक दलों को मिलने वाली कर छूट की आड़ में लंबे समय से चल रहे कमीशन और नकद वापसी के अवैध नेटवर्क के कारण सामने आया।

- **सीधा कारण:** आयकर विभाग द्वारा 14 जुलाई 2025 को टैक्स कंसल्टेंट के ठिकानों पर की गई जांच में राजनीतिक चंदे और नकद वापसी के गुप्त रिकॉर्ड मिले, जिससे पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। इसके बाद आयकर अधिकारियों ने सीआईडी क्राइम में औपचारिक आपराधिक शिकायतें दर्ज करवाईं।
- **सक्षम परिस्थितियां:** गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों को आयकर कानून की धारा 80GGB और 80GGC के तहत 100 प्रतिशत कर छूट की सुविधा मिलती है। इसी कानूनी प्रावधान का दुरुपयोग कर बिना कोई चुनाव लड़े केवल कागजों पर दल बनाकर दानदाताओं को नकली रसीदें दी गईं।
- **फर्जी कंपनियों का चक्र:** राजनीतिक दलों के बैंक खातों में आए पैसों को कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर नकली खरीद बिल बनाए गए। इसके बाद बैंक से भारी नकदी निकालकर चार से दस प्रतिशत कमीशन काटकर हवाला और आंगड़िया नेटवर्क से बाकी रकम करदाताओं को लौटा दी गई।
- **जांच और आगे की प्रक्रिया:** सीआईडी क्राइम और आयकर विभाग अब 56 हजार से अधिक दानदाताओं, फर्जी फर्मों के संचालकों और मध्यस्थों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी और संपत्तियों की कुर्की की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. गुजरात में किन प्रमुख राजनीतिक दलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं?
सीआईडी क्राइम ने भारतीय नेशनल जनता दल, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, गरीब कल्याण पार्टी और सत्यवादी रक्षक पार्टी के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।

### 2. इस पूरे मामले में कुल कितने रुपये के फर्जी चंदे और टैक्स चोरी का आरोप है?
आरोपियों पर 2,284 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी राजनीतिक चंदे और लगभग 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी का गंभीर आरोप है।

### 3. यह राजनीतिक दल करदाताओं को किस प्रकार ठग रहे थे और नकद कैसे लौटाते थे?
दल करदाताओं से बैंक खाते में दान लेकर 100% कर छूट की रसीद देते थे, फिर शेल कंपनियों व फर्जी बिलों से नकदी निकालकर 4 से 10 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी पैसा कैश में लौटा देते थे।

### 4. भारतीय नेशनल जनता दल ने कितने दाताओं से चंदा एकत्र किया था?
इस दल ने साल 2019-20 से 2024-25 के दौरान 56,238 दाताओं से 1,143.85 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा जुटाया और करीब 343 करोड़ की टैक्स चोरी की।

### 5. क्या इस रैकेट में चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य पेशेवर भी शामिल थे?
हां, प्राथमिकियों में चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स कंसल्टेंट नामजद हैं, जिन पर बिना जांच फर्जी ऑडिट रिपोर्ट बनाने और डिजिटल हस्ताक्षर करने का आरोप है।

### 6. नकद वापसी के लिए किस तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था?
दानदाताओं को कमीशन काटकर नकद राशि लौटाने के लिए आंगड़िया पेढ़ी और अनौपचारिक हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था।

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