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  "title": "गुजरात में कांग्रेस संग नई पारी की तैयारी में शंकरसिंह वाघेला, राहुल गांधी से मुलाकात के बाद होगा अंतिम फैसला",
  "summary": "गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला 86 वर्ष की आयु में कांग्रेस में लौटने को तैयार हैं, लेकिन उनका औपचारिक फैसला राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही होगा।",
  "content": "गुजरात की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है, जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने लगभग दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस में लौटने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। 86 वर्ष के अनुभवी नेता, जिन्हें समर्थक आदर से बापू भी बुलाते हैं, राज्य की सत्ता पर काबिज भाजपा को कड़ी चुनौती देने के उद्देश्य से मुख्य विपक्षी दल के साथ जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं। उनका कहना है कि इस उम्र में वे संगठन से किसी सरकारी पद, संगठनात्मक ओहदे या निजी लाभ की लालसा नहीं रखते, बल्कि अपने जीवनभर के राजनीतिक अनुभवों को विपक्ष की मजबूती के लिए समर्पित करना चाहते हैं।\n\nराहुल गांधी से मुलाकात पर टिका अंतिम निर्णय\nकांग्रेस के केंद्रीय और प्रांतीय रणनीतिकारों के साथ वरिष्ठ राजनेता की चर्चा अब अंतिम मुकाम पर पहुंच चुकी है। उन्होंने गुजरात मामलों के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी के साथ गहन विचार-विमर्श किया है। इन मुलाकातों के बाद भी उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस में उनकी वापसी की आधिकारिक घोषणा तभी संभव होगी, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत पूरी हो जाएगी।\n\nवाघेला ने 29 सितंबर को साफ शब्दों में कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य मौजूदा सरकार को हटाना है और इसके लिए वे कांग्रेस में शामिल होने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी उजागर किया कि करीब छह महीने पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तत्कालीन राज्य प्रभारी मुकुल वासनिक से भी संपर्क साधा था, लेकिन उस समय उन्हें कोई ठोस उत्तर नहीं मिला था। हाल ही में मुकुल वासनिक की जगह रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का नया प्रभार सौंपा गया है, जिसके बाद बातचीत ने अचानक गति पकड़ी है।\n\n2027 चुनाव को माना अपना अंतिम सियासी संग्राम\nशंकरसिंह वाघेला 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव को सक्रिय चुनावी राजनीति में गहरा असर छोड़ने का अपना आखिरी अवसर मान रहे हैं। अपने राजनीतिक संकल्प को जाहिर करते हुए उन्होंने 2 अक्टूबर से प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के पुनर्गठन और राज्यव्यापी अभियान को तेज करने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा चुनाव उनके जीवन का अंतिम मौका है, क्योंकि आने वाले वर्षों में शारीरिक रूप से इतना सक्रिय रह पाना संभव नहीं होगा। उनका कहना है कि वे भाजपा के खिलाफ संघर्ष में अपना योगदान दर्ज कराना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व के साथ सकारात्मक रुख सामने आने के बाद, 2 अक्टूबर को अपनी अलग पार्टी खड़ी करने की इस योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।\n\nसंगठन के भीतर अलग-अलग राय\nपार्टी गलियारों में इस पुराने दिग्गज की संभावित वापसी को लेकर वरिष्ठ नेताओं के विचार बंटे हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने 29 सितंबर को पत्रकारों से संवाद करते हुए बताया कि कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए ज़मीनी तैयारी तेज कर दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी समय में अनेक असंतुष्ट नेता कांग्रेस के मंच पर साथ आएंगे और राज्य में सत्ता परिवर्तन की दिशा में साझा संघर्ष करेंगे।\n\nवहीं दूसरी तरफ, गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी का कहना है कि आज आम जनता राहुल गांधी को एक ऐसे दृढ़ नेता के तौर पर देख रही है जो देश और संविधान की रक्षा कर सकते हैं, यही वजह है कि पार्टी समान सोच रखने वाले सभी साथियों का स्वागत करने के लिए खुली है। इसके बावजूद पार्टी के एक प्रभावी खेमे में वाघेला को लेकर संशय और सतर्कता बनी हुई है, जिसके पीछे 2017 में उनके अचानक पार्टी छोड़ने की पृष्ठभूमि मुख्य कारण है।\n\n2017 की बगावत और अहमद पटेल का चुनाव\nवाघेला ने अपने 77वें जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करके राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी थी। यह कदम गुजरात में राज्यसभा की प्रतिष्ठापूर्ण सीट के चुनाव से ठीक कुछ हफ्ते पहले उठाया गया था। उस चुनाव में कांग्रेस संसदीय दल की वर्तमान चेयरपर्सन सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे दिवंगत अहमद पटेल बेहद मामूली अंतर से अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए थे। उस दौरान वाघेला गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।\n\nउसी महीने आयोजित राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के कम से कम आठ विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग करने के आरोप सामने आए थे। उस चुनाव में रामनाथ कोविंद दो-तिहाई बहुमत हासिल करके देश के राष्ट्रपति चुने गए थे। इस घटनाक्रम के ठीक चार दिन बाद वाघेला ने अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी से नाता तोड़ लिया था, जिसकी टीस आज भी कांग्रेस के कई नेताओं के मन में बनी हुई है।\n\nविधानसभा में सिमटती कांग्रेस और भविष्य की चुनौती\nसाल 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पिछले तीन दशकों का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था। साल 1995 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद पहली बार कांग्रेस ने हार्दिक पटेल के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौर में 182 सदस्यीय विधानसभा में 77 सीटें हासिल की थीं। हालांकि उस शानदार मुकाबले के बाद के वर्षों में पार्टी की सांगठनिक स्थिति निरंतर कमजोर होती चली गई।\n\nवर्तमान समय में 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक बचे हैं, जो सदन में नेता प्रतिपक्ष का आधिकारिक दर्जा पाने के लिए तय न्यूनतम संख्या से भी कम है। संसदीय चुनावों में भी पार्टी 2014 और 2019 के आम चुनावों में राज्य की एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी थी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बनासकांठा सीट जीतकर अपना खाता खोला, जहां से वर्तमान में गेनीबेन ठाकोर सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व कर रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में गांधीनगर नगर निगम और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले वाघेला का ग्रामीण और क्षत्रिय-ओबीसी वर्ग में प्रभाव कांग्रेस के लिए नया राजनीतिक समीकरण बना सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nशंकरसिंह वाघेला की संभावित कांग्रेस वापसी गुजरात में विपक्ष के समीकरणों को बदलकर आगामी चुनावों की दिशा तय कर सकती है।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस भाजपा विरोधी पुराने क्षत्रपों को जोड़कर विपक्षी गठबंधन के विस्तार का संदेश दे रही है। इससे अन्य राज्यों में भी असंतुष्ट और अनुभवी क्षेत्रीय दिग्गजों को मंच पर लाने का दबाव बढ़ेगा।\n• गुजरात में: वाघेला का क्षत्रिय और ओबीसी वोट बैंक पर मजबूत प्रभाव माना जाता है, जिससे ग्रामीण इलाकों में विपक्ष की पकड़ बेहतर हो सकती है। यदि यह पुनर्मिलन सफल रहा तो 12 विधायकों तक सिमट चुकी कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नया सांगठनिक संबल मिल सकता है।\n• मतदाताओं के लिए: आगामी गांधीनगर नगर निगम और प्रांतीय चुनावों में मतदाताओं को विपक्ष का एक मजबूत और अनुभवी संयुक्त विकल्प देखने को मिल सकता है। इससे सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच सीधा चुनावी मुकाबला तेज होने की उम्मीद है।\n• पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए: जमीनी स्तर पर वर्षों से हाशिए पर चल रहे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नए नेतृत्व और अनुभवी मार्गदर्शन से नया उत्साह भर सकता है। हालांकि 2017 की बगावत याद रखने वाले स्थानीय नेताओं के बीच आंतरिक सामंजस्य बैठाना चुनौती बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nशंकरसिंह वाघेला की कांग्रेस में वापसी की यह पहल उनकी उम्र के अंतिम पड़ाव पर भाजपा को हराने के संकल्प और कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी के कारण संभव हुई है।\n\n• सीधे तौर पर चुनौती देने की मंशा: 86 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री 2027 के विधानसभा चुनाव को सक्रिय राजनीति का अपना अंतिम अवसर मानते हैं और भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए मुख्य विपक्षी दल का हिस्सा बनना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने की योजना को रोककर कांग्रेस नेतृत्व से संवाद साधा।\n• कांग्रेस की घटती विधायी ताकत: गुजरात में 182 में से केवल 12 विधायकों पर सिमटने और लगातार दो बार शून्य रहने के बाद पार्टी को अनुभवी और जनाधार वाले नेताओं की सख्त दरकार है। 2024 में बनासकांठा लोकसभा सीट जीतने के बाद संगठन अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने के रास्ते तलाश रहा है।\n• 2017 की कड़वाहट और पुराना अविश्वास: राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले वाघेला के पार्टी छोड़ने और विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के चलते कांग्रेस का एक धड़ा आज भी उनके प्रति सतर्क रुख अपनाए हुए है। इसी पृष्ठभूमि के कारण अंतिम सहमति के लिए राहुल गांधी के साथ आमने-सामने की बैठक आवश्यक बनाई गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शंकरसिंह वाघेला किस उम्र में कांग्रेस में वापसी कर रहे हैं?\nशंकरसिंह वाघेला 86 वर्ष की उम्र में कांग्रेस में वापसी की तैयारी कर रहे हैं।\n\n2. कांग्रेस में उनकी औपचारिक वापसी किस शर्त पर टिकी है?\nउनकी औपचारिक घर वापसी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ आमने-सामने की बैठक के बाद ही तय होगी।\n\n3. वाघेला ने अपनी किस पार्टी के अभियान को फिलहाल रोका है?\nउन्होंने प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के पुनर्गठन और 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले अभियान को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।\n\n4. वाघेला ने 2017 में कांग्रेस से कब इस्तीफा दिया था?\nउन्होंने अपने 77वें जन्मदिन पर पार्टी छोड़ी थी, जो अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले हुआ था।\n\n5. वर्तमान में गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के कितने विधायक हैं?\n182 सदस्यों वाली गुजरात विधानसभा में इस समय कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं।\n\n6. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने गुजरात में कौन सी सीट जीती?\nपार्टी ने 2024 में बनासकांठा लोकसभा सीट जीती, जिसका प्रतिनिधित्व सांसद गेनीबेन ठाकोर कर रही हैं।",
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  "category": "गुजरात",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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