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  "type": "article",
  "title": "गुजरात में ड्रग्स पर महाप्रहार: दाहेज में ₹2,153 करोड़ का नशा खाक, 278 पुलिसकर्मी हुए सम्मानित",
  "summary": "गुजरात पुलिस ने भरूच के दाहेज में 2,153 करोड़ रुपये के भारी-भरकम नशीले पदार्थों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट कर दिया है। इस महा-अभियान के दौरान शानदार काम करने वाले 278 जांबाज पुलिसकर्मियों को 59.42 लाख रुपये का इनाम देकर सम्मानित भी किया गया।",
  "content": "गुजरात पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार करते हुए भरूच जिले के दाहेज में हजारों करोड़ रुपये के ड्रग्स को आग के हवाले कर दिया। इस महा-अभियान के तहत ₹2,153 करोड़ की भारी-भरकम कीमत वाले अवैध नशीले पदार्थों को पूरी तरह से नष्ट किया गया है। दाहेज स्थित प्रतिष्ठित एनवायरो इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी मुख्य रूप से मौजूद रहे। उनके साथ ड्रग डिस्पोजल कमेटी के कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस महकमे के आला अधिकारी भी उपस्थित थे। इन सभी ने मिलकर सबसे पहले जब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थों के विशाल भंडार का बारीकी से निरीक्षण किया और चल रहे कानूनी मामलों की विस्तृत स्तर पर समीक्षा की। पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, इस पूरी खेप को बहुत ही वैज्ञानिक तरीकों से और बंद भट्टियों में नष्ट किया गया ताकि आसपास के वातावरण, हवा या मिट्टी को कोई नुकसान न पहुंचे। इसी कार्यक्रम के विशाल मंच से उपमुख्यमंत्री ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए लकड़िया में आयोजित होने वाले एक अन्य नारकोटिक्स डिस्ट्रक्शन प्रोग्राम का भी वर्चुअली उद्घाटन किया और पूरे राज्य में नशे के खिलाफ एक बेहद कड़ा संदेश प्रसारित किया है।\n\nविशाल पैमाने पर की गई ऐतिहासिक जब्ती\n\nदाहेज में आयोजित यह कार्यक्रम कोई साधारण पुलिसिया कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह तस्करों के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत का जश्न था। यहाँ राज्य की चौबीस अलग-अलग पुलिस यूनिट्स द्वारा पिछले कुछ समय में पकड़े गए मादक पदार्थों को एक साथ, एक ही स्थान पर नष्ट किया गया। पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर 867 अलग-अलग आपराधिक मामलों में ये ड्रग्स जब्त किए गए थे। अगर नष्ट किए गए पदार्थों की कुल मात्रा की बात करें, तो पुलिस ने 13,249.127 किलोग्राम भारी ठोस नशीले पदार्थ और 5,71,028 तरल नारकोटिक बोतलें नष्ट की हैं। यह विशाल आंकड़ा साफ तौर पर दुनिया को यह बताता है कि तस्करों और ड्रग माफियाओं ने राज्य में किस पैमाने पर नशे का जाल बिछाने की नापाक कोशिश की थी, जिसे पुलिस की दिन-रात की मुस्तैदी ने पूरी तरह नाकाम कर दिया। राज्य सरकार ने इस पूरी विनाशीकरण कार्रवाई को पूरी तरह पारदर्शी रखा है और यह सुनिश्चित किया है कि कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जब्त किया गया एक-एक ग्राम मादक पदार्थ सुरक्षित और वैध रूप से नष्ट हो जाए।\n\nपूरे राज्य में चला व्यापक धरपकड़ अभियान\n\nड्रग्स के इस इतने विशाल भंडार को इकट्ठा करने और माफियाओं को पकड़ने में गुजरात के लगभग हर हिस्से की पुलिस यूनिट्स ने अपना बेहद अहम योगदान दिया है। इस व्यापक और समन्वित अभियान में भरूच और नर्मदा जिले की स्थानीय पुलिस के अलावा सूरत रूरल, सूरत सिटी, नवसारी, तापी-व्यारा, दाहोद, छोटा उदयपुर और पंचमहल की विशेष टीमें शामिल थीं। इसके साथ ही डांग-अहवा, वलसाड, वडोदरा रूरल, वडोदरा सिटी, आणंद और खेड़ा-नडियाद के साहसी अधिकारियों ने भी अपनी जान पर खेलकर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए। अपराधियों ने ट्रेनों का भी सहारा लिया, लेकिन वेस्टर्न रेलवे की वडोदरा और अहमदाबाद यूनिट्स ने भी ट्रेनों के जरिये होने वाली इस साइलेंट तस्करी को पूरी तरह रोक दिया। अहमदाबाद रूरल, अहमदाबाद सिटी, गांधीनगर, मेहसाणा और साबरकांठा पुलिस ने भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में तस्करों पर भारी नकेल कसी। इन सभी स्थानीय और जिला स्तर की पुलिस यूनिट्स के साथ-साथ राज्य की सीआईडी क्राइम ब्रांच और एटीएस ने भी एक-दूसरे के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए कई बड़े और बेहद जटिल अंडरकवर ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे आज तस्करों की कमर पूरी तरह से टूट चुकी है।\n\nNDPS हैंडबुक और नई जागरूकता पहल\n\nतस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और ज्यादा धारदार और अचूक बनाने के लिए दाहेज की जीएसीएल कंपनी के सुरक्षित परिसर में एक खास NDPS हैंडबुक को भी बड़े स्तर पर लॉन्च किया गया। गुजरात पुलिस की विशेष एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा बहुत ही गहन रिसर्च के बाद तैयार की गई यह किताब जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए एक बेहद काम का टूल और अचूक हथियार साबित होगी। इसका मुख्य उद्देश्य फील्ड में दिन-रात काम कर रहे अधिकारियों को बहुत ही प्रैक्टिकल, कानूनी और तकनीकी मार्गदर्शन देना है, ताकि NDPS कानून की हर धारा को और ज्यादा सख्ती से लागू किया जा सके। इस कार्यक्रम में केवल पुलिसिया कार्रवाई और सजा पर ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने पर भी भरपूर जोर दिया गया। इस खास मौके पर पुलिस विभाग ने \"ड्रग-फ्री गुजरात\" नामक एक बहुत ही प्रेरक जागरूकता वीडियो का बड़े पर्दे पर प्रदर्शन किया। साथ ही, नशे की गहरी दलदल से बाहर निकल चुके असल युवाओं की जिंदगी और उनके संघर्ष पर बनी एक भावुक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा भविष्य में नशे के खिलाफ चलाई जाने वाली तमाम नई पहलों को समझाने के लिए एक विस्तृत और तकनीकी प्रेजेंटेशन भी पेश किया गया।\n\nअंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स और समुद्री रास्तों पर सीधा प्रहार\n\nकार्यक्रम में मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने मादक पदार्थों की तस्करी को आज के सभ्य समाज की सबसे खतरनाक बुराइयों में से एक करार दिया। उन्होंने राज्य पुलिस के अदम्य साहस की जमकर पीठ थपथपाई और कहा कि पुलिस बल ने बेहद चुनौतीपूर्ण और विपरीत परिस्थितियों में भी संगठित आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने में बेमिसाल सफलता पाई है। इसमें खास तौर पर अशांत और गहरे समुद्र के बीच भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर चलाए गए बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन और भारत के दूसरे राज्यों की सीमाओं पर की गई गुप्त कार्रवाइयां शामिल हैं। पुलिस के इन्हीं लगातार, आक्रामक और ठोस कदमों की वजह से आज अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी के बड़े नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है और उनके मंसूबे पस्त हुए हैं। उन्होंने गर्व के साथ जानकारी दी कि केवल पिछले डेढ़ साल के भीतर ही पूरे राज्य में नशे के खिलाफ एक निरंतर, बिना रुके अभियान चलाया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक हजारों करोड़ रुपये के मादक पदार्थ पकड़े और नष्ट किए जा चुके हैं।\n\nकठोर सजा और 100 प्रतिशत दोषसिद्धि का लक्ष्य\n\nउपमुख्यमंत्री ने ड्रग माफियाओं और अपराधियों को बहुत ही स्पष्ट और सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि गुजरात में ड्रग्स से जुड़े मामलों में अपराधियों को अदालत से सजा दिलाने की दर इस वक्त लगभग पैंसठ प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। यह महत्वपूर्ण आंकड़ा इस बात का सीधा प्रमाण है कि गुजरात पुलिस केवल सड़कों पर जब्ती नहीं कर रही, बल्कि मजबूत चार्जशीट बनाकर मुजरिमों को अदालत से सख्त से सख्त सजा भी दिलवा रही है। राज्य सरकार, अभियोजन पक्ष और पुलिस विभाग अब इस सजा दिलाने की दर को पूरे सौ प्रतिशत तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आने वाले समय में ड्रग तस्करी के धंधे या इसकी फंडिंग में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी फंदा और अधिक कसा जाएगा। फोरेंसिक और कानूनी जांच प्रक्रिया को इतना मजबूत बनाया जा रहा है कि बड़े से बड़े तस्करों या उनके वकीलों को बचने के लिए कानून की किसी भी कमी या खामी का फायदा उठाने का कोई मौका ही न मिले।\n\nसम्मान और सुधार की दोहरी नीति\n\nगुजरात पुलिस नशे के खिलाफ केवल कानून और डंडे का इस्तेमाल नहीं कर रही है, बल्कि वह इस सामाजिक समस्या से निपटने के लिए एक बेहद संवेदनशील, मनोवैज्ञानिक और मानवीय नजरिया भी अपना रही है। हर्ष सांघवी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर जोर देते हुए बताया कि जब भी पेडलर्स या तस्करों को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनसे पूछताछ में मिली जानकारी का इस्तेमाल कर पुलिस उन भटके हुए युवाओं तक पहुंचती है जो अनजाने में नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। इसके बाद पुलिस विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी इन युवाओं और उनके परेशान परिवारों की विशेष मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग करते हैं, ताकि वे लोग इस बुरी और जानलेवा लत को छोड़कर फिर से एक सामान्य, स्वस्थ जिंदगी जी सकें। समाज की सामूहिक भूमिका पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों, युवाओं और गैर-सरकारी संगठनों से भी इस महा-अभियान में आगे आने की जोरदार अपील की। उन्होंने मंच से साफ किया कि \"ड्रग-फ्री गुजरात\" का यह विशाल संकल्प केवल पुलिस की सख्ती या सरकार के आदेशों से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए हर एक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और सतर्कता बहुत जरूरी है। इस खतरनाक काम में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जवानों का हौसला आसमान तक बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी के तहत 278 जांबाज पुलिसकर्मियों को भारी भरकम नकद पुरस्कार दिए गए। इन सभी जवानों ने 21 प्रमुख और खतरनाक ड्रग मामलों में अपनी जान की परवाह किए बिना शानदार प्रदर्शन किया था, जिसके लिए उन्हें कुल ₹59.42 लाख की इनामी राशि देकर मंच से पूरे सम्मान के साथ सम्मानित किया गया।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कार्रवाई देश भर में फैले अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ एक कड़ा संदेश है, जो युवाओं को नशे की लत से बचाने में मदद करेगा।\n• गुजरात में: राज्य में तस्करों पर पुलिस की इस सख्ती से स्थानीय स्तर पर अपराध कम होंगे और युवाओं के लिए एक सुरक्षित, नशामुक्त माहौल बनेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दाहेज में कितने रुपये के ड्रग्स नष्ट किए गए?\nगुजरात पुलिस ने दाहेज में कुल ₹2,153 करोड़ रुपये की कीमत के अवैध नशीले पदार्थ नष्ट किए।\n\n2. नष्ट किए गए मादक पदार्थों की कुल मात्रा कितनी थी?\nइस अभियान में 13,249.127 किलोग्राम ठोस नशीले पदार्थ और 5,71,028 बोतलें नष्ट की गईं।\n\n3. ड्रग्स नष्ट करने के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से कौन शामिल हुआ?\nइस विशेष कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और ड्रग डिस्पोजल कमेटी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।\n\n4. ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी के तहत कितने पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया?\nनशे के खिलाफ बेहतरीन काम करने वाले 278 पुलिसकर्मियों को कुल ₹59.42 लाख के इनाम से सम्मानित किया गया।\n\n5. गुजरात में ड्रग्स के मामलों में सजा दिलाने की दर क्या है?\nवर्तमान में गुजरात में ड्रग्स से जुड़े मामलों में सजा दिलाने की दर लगभग 65 प्रतिशत है, जिसे सरकार 100 प्रतिशत तक ले जाने का प्रयास कर रही है।",
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  "category": "गुजरात",
  "publishedAt": "2026-07-20",
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