# गुजरात यूनिवर्सिटी वित्तीय विवाद: पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने छोड़ा केंद्रीय प्रोजेक्ट, 14 करोड़ से अधिक की राशि वापस की

> गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी नीरजा गुप्ता ने वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बीच पीएमजेवीके योजना के पद से त्यागपत्र देकर चौदह करोड़ रुपये से अधिक लौटा दिए हैं। कार्यवाहक कुलपति ने पुष्टि की कि बाकी खर्च राशि का ऑडिट कराया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** गुजरात · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/gujarat-university-vittiya-vivada-purva-kulapati-neerja-gupta-ne-chhora-kendriya-projekta-14-karora-se-adhika-ki-rashi-vapasa-ki-37333 · **Language:** Hindi
**Tags:** गुजरात यूनिवर्सिटी, नीरजा गुप्ता, जगदीश जोशी, एनएसयूआई, पीएमजेवीके, अहमदाबाद, शिक्षा

गुजरात यूनिवर्सिटी में वित्तीय व्यवस्था को लेकर खड़े हुए विवादों के उपरांत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संस्थान की पूर्व वाइस चांसलर नीरजा गुप्ता ने केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के मुख्य अन्वेषक दायित्व से अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। पद छोड़ने के साथ ही उन्होंने अपने पास रखी 14 करोड़ रुपये से अधिक की अव्ययित निधि भी विश्वविद्यालय प्रशासन को वापस सौंप दी है।

## परियोजना फंड की वापसी और ऑडिट की प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी ने बुधवार को इस पूरे मामले की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त केंद्रीय परियोजना के संचालन के लिए कुल 16.53 करोड़ रुपये का सरकारी अनुदान पूर्व कुलपति के खाते में हस्तांतरित किया गया था। नीरजा गुप्ता ने 11 अगस्त को ईमेल भेजकर रजिस्ट्रार के समक्ष परियोजना समन्वयक पद से अलग होने की औपचारिक घोषणा की थी।

परियोजना से जुड़े पूर्व के खर्चों का समायोजन करने के पश्चात, उनके पास शेष बची 14.60 करोड़ रुपये की धनराशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से विश्वविद्यालय को लौटा दी गई। इसके उपरांत विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 सितंबर को यह पूरी रकम प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के नए खाते में जमा करा दी। कार्यवाहक कुलपति के अनुसार, परियोजना के तहत व्यय किए गए बाकी बचे लगभग 2 करोड़ रुपये का विशेष ऑडिट कराया जाएगा और उसकी विस्तृत रिपोर्ट संस्थान को प्रस्तुत की जाएगी।

## छात्र संगठन के आरोप और प्रशासनिक उठापटक
इस परियोजना से पूर्व ही विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा था। कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने पूर्व कुलपति के कार्यकाल पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों में संलिप्त रहने के सीधे आरोप लगाए थे। छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन आयोजित कर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।

## कार्यकाल समाप्ति और पूर्व में हुई कार्रवाई
नीरजा गुप्ता ने इसी वर्ष जुलाई में गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति पद पर अपने तीन वर्षों का निर्धारित सेवाकाल पूर्ण किया था। सर्वोच्च पद से कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वह केंद्र सरकार की इस विशेष कल्याणकारी योजना के प्रमुख पद पर लगातार कार्य कर रही थीं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में उनके कार्यकाल के दौरान भर्ती किए गए 10 तदर्थ कर्मियों को निलंबित किया जा चुका था। यह दंडात्मक कदम वित्तीय विसंगतियों की पड़ताल के लिए गठित जांच समिति के सुझावों के आधार पर उठाया गया था, जिससे विश्वविद्यालय कोष को भारी आर्थिक क्षति पहुंची थी।

## इसका आप पर असर
विश्वविद्यालयों में केंद्रीय अनुदान की वापसी और वित्तीय जांच से उच्च शिक्षण संस्थानों की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** केंद्रीय योजनाओं के फंड प्रबंधन में कड़े ऑडिट नियमों के पालन का संदेश अन्य सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा। इसके चलते सार्वजनिक धन के आवंटन और खर्च की निगरानी प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त हो सकती है।
- **अहमदाबाद में:** गुजरात यूनिवर्सिटी के छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए संस्थान के विकास प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। वहीं विवादित योजनाओं के नए खाते में जाने से लंबित कल्याणकारी कार्यों को उचित निगरानी के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- **कर्मचारियों और प्रशासन के लिए:** विश्वविद्यालय प्रशासन में नियुक्तियों और फंड हस्तांतरण की प्रक्रिया में नियम-कायदों की समीक्षा तेज होगी। इससे भविष्य में तदर्थ नियुक्तियों और परियोजना खातों के संचालन में मनमानी पर रोक लग सकेगी।
- **छात्र राजनीति और निगरानी:** कैंपस में छात्र संगठनों द्वारा वित्तीय निगरानी की भूमिका को मजबूती मिलेगी। आम छात्रों के हितों से जुड़ी योजनाओं के बजट पर सीधी नजर रखना आसान होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम गुजरात यूनिवर्सिटी में लंबे समय से जारी वित्तीय विसंगतियों के आरोपों, छात्र विरोध और पूर्व कुलपति के कार्यकाल समाप्ति के बाद सामने आया है।

- **सीधा कारण:** पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो चुका था, जिसके बाद केंद्रीय योजना के पद से इस्तीफा देकर उन्होंने 14.60 करोड़ रुपये की अव्ययित निधि डिमांड ड्राफ्ट से वापस की। 11 अगस्त को ईमेल द्वारा इस्तीफा भेजने के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत यह धन नए खाते में हस्तांतरित किया गया।
- **पृष्ठभूमि और छात्र आंदोलन:** कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने पूर्व कुलपति के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी के आरोप लगाए थे और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग को लेकर कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया था।
- **पूर्व में हुई प्रशासनिक कार्रवाई:** एक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व कुलपति द्वारा नियुक्त किए गए 10 अस्थायी कर्मियों को पहले ही निलंबित किया गया था, जिनसे संस्थान के खजाने को भारी नुकसान हुआ था।
- **आगे की जांच:** कुल 16.53 करोड़ रुपये के आवंटन में से खर्च किए गए लगभग 2 करोड़ रुपये की सत्यता जांचने के लिए ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. नीरजा गुप्ता ने किस पद से इस्तीफा दिया है?
नीरजा गुप्ता ने गुजरात यूनिवर्सिटी में केंद्र सरकार की योजना प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर पद से इस्तीफा दिया है।

### 2. पूर्व कुलपति ने विश्वविद्यालय को कुल कितनी राशि वापस लौटाई?
उन्होंने हिसाब-किताब के बाद अव्ययित बची 14.60 करोड़ रुपये की राशि डिमांड ड्राफ्ट के जरिए विश्वविद्यालय को सौंपी।

### 3. केंद्रीय योजना के लिए कुल कितना फंड आवंटित हुआ था?
परियोजना के लिए कुल 16.53 करोड़ रुपये का अनुदान पूर्व कुलपति के खाते में जमा कराया गया था।

### 4. शेष खर्च हुए 2 करोड़ रुपये को लेकर क्या कदम उठाया जा रहा है?
कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी के अनुसार खर्च हुए बाकी 2 करोड़ रुपये का ऑडिट कराया जाएगा और उसकी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपी जाएगी।

### 5. नीरजा गुप्ता का कुलपति के रूप में कार्यकाल कब समाप्त हुआ था?
उन्होंने इसी साल जुलाई में गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के तौर पर अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया था।

### 6. विश्वविद्यालय में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर किस छात्र संगठन ने विरोध किया था?
कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाकर रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग की थी।

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