केवड़िया में राष्ट्रीय एकता परेड का आयोजन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 10000 सुरक्षाकर्मियों ने दिखाया अदम्य पराक्रम गुजरात के केवड़िया में एकता पथ पर भव्य राष्ट्रीय एकता परेड आयोजित की गई, जहां 25 हजार दर्शकों की मौजूदगी में 10 हजार जवानों ने शौर्य, अनुशासन और विविधता का जोरदार प्रदर्शन किया। गुजरात के केवड़िया में एकता पथ पर आयोजित भव्य एकता परेड में देश के विभिन्न सुरक्षा बलों के 10 हजार जवानों ने अपने असाधारण पराक्रम, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुए इस राष्ट्रीय आयोजन के साक्षी करीब 25 हजार दर्शक बने। इस दौरान न केवल भारत की सैन्य ताकत और आंतरिक सुरक्षा तैयारियों का शानदार नजारा पेश किया गया, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और अटूट राष्ट्रीय एकजुटता की मनमोहक झलक भी पूरी दुनिया के सामने आई। महिला सशक्तिकरण और विशिष्ट कमांडो दस्तों का प्रदर्शन इस ऐतिहासिक परेड में विभिन्न सुरक्षा इकाइयों ने अपनी सामरिक क्षमताओं और पेशेवर प्रशिक्षण की उच्च गुणवत्ता साबित की। छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) टुकड़ी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की महिला सुरक्षाकर्मियों के साहसी मार्च ने देश में नारी शक्ति के बढ़ते कदमों को मजबूती से रेखांकित किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की विशेष 'हेल मार्च' टुकड़ी ने अपनी अचूक सतर्कता और पेशेवर अंदाज से सभी को गहराई से प्रभावित किया। समारोह का रोमांच उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सीआरपीएफ के साहसी बाइकर्स ने बेहद जोखिम भरे और हैरतअंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त बीएसएफ के पारंपरिक ऊंट दस्ते और उसके बैंड, अनुशासित मार्शल आर्ट्स की प्रस्तुतियों तथा देश में ही प्रशिक्षित स्वदेशी श्वान दल के कौशल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। आसमान में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध 'सूर्यकिरण' एयरोबेटिक टीम ने हैरतअंगेज हवाई करतब दिखाते हुए तिरंगे की शान को नई ऊंचाई दी। यह पूरा प्रदर्शन सुरक्षा बलों की कठिन परिस्थितियों में काम करने की अद्वितीय क्षमता और उच्च स्तरीय पेशेवर दक्षता का जीता-जागता प्रमाण बना। 'वंदे मातरम' के 150 साल और 15 विशेष सांस्कृतिक झांकियां इस बार की एकता परेड का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक अवसर रहा। आम नागरिकों की कल्पनाओं और सुझावों के आधार पर तैयार की गई 15 विशेष और आकर्षक झांकियों को परेड में शामिल किया गया। इन झांकियों के जरिए भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत, बहुआयामी पहचान और राष्ट्रीय एकता के सूत्र को बेहद प्रभावशाली तरीके से पिरोया गया। प्रस्तुत की गई कुल 15 झांकियों में से 10 झांकियां गुजरात की समृद्ध संस्कृति और विकास यात्रा को दर्शा रही थीं, जबकि 5 झांकियां देश के अन्य राज्यों के विशिष्ट रंगों और पहचान को सामने ला रही थीं। इस सांस्कृतिक समागम ने विभिन्न प्रांतों के अनूठे लोकाचार, परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को एक साझा मंच प्रदान कर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की मूल भावना को जीवंत कर दिया। नक्सल मोर्चे की चुनौतियां और 126 जिलों के कलाकारों की प्रस्तुति परेड में देश के सुरक्षा परिदृश्य, विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों के संघर्ष और उनके अदम्य समर्पण को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। देश के 126 नक्सल प्रभावित जिलों से आए 2000 लोक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए एक विशेष नाटक मंचित किया। इस नाट्य प्रस्तुति में नक्सली हिंसा का दंश झेल चुके पीड़ितों के वास्तविक अनुभवों, उनकी पीड़ा और उससे उबरने की यात्रा को जीवंत किया गया। कार्यक्रम के दौरान देश की सुरक्षा में तैनात विभिन्न बलों के जीवन और शौर्य पर आधारित विशेष वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं और सुरक्षा बलों के सुसज्जित बैंड्स ने देशभक्ति की धुनों से पूरे एकता पथ को गुंजायमान कर दिया। यह भव्य आयोजन केवल हथियारों और शक्ति के प्रदर्शन तक सीमित न रहकर कला, संगीत और बलिदान की अमर गाथाओं के संगम के रूप में राष्ट्रीय एकजुटता का प्रेरक संदेश देने में सफल रहा। इसका आप पर असर इस राष्ट्रीय आयोजन से आम नागरिकों में सुरक्षा बलों की तैयारियों के प्रति भरोसा मजबूत होता है और पर्यटन को गति मिलती है। • राष्ट्रीय स्तर पर: देश भर के नागरिकों को आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में जुटे जवानों के पराक्रम को समझने का सीधा अवसर मिलता है। इससे सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मियों के प्रति जनता का सम्मान और विश्वास प्रगाढ़ होता है। • गुजरात और केवड़िया में: केवड़िया में इस तरह के विशाल आयोजनों से स्थानीय पर्यटन, आतिथ्य उद्योग और परिवहन सेवाओं को सीधा बढ़ावा मिलता है। स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए 25 हजार से अधिक पर्यटकों का आगमन नए आर्थिक अवसर तैयार करता है। • युवाओं और छात्रों के लिए: परेड में एनसीसी, स्वदेशी श्वान दस्तों और विशेष कमांडो टुकड़ियों का प्रदर्शन युवाओं को सशस्त्र बलों में करियर चुनने के लिए प्रेरित करता है। युवा वर्ग में अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा की भावना का संचार होता है। • सांस्कृतिक जुड़ाव: विभिन्न राज्यों की 15 झांकियों और 126 जिलों के कलाकारों की सहभागिता से देशवासियों को एक ही मंच पर भारत की सांस्कृतिक एकता का अनुभव होता है। यह आयोजन नागरिकों के बीच क्षेत्रीय सीमाओं से परे साझा विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। ऐसा क्यों हुआ यह भव्य आयोजन देश की राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा बलों के सम्मान और राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से किया गया। • राष्ट्रीय एकता का संदेश: केवड़िया में एकता पथ पर आयोजित यह परेड देश के विभिन्न सुरक्षा बलों और सांस्कृतिक घटकों को एक साझा मंच पर लाने के लिए आयोजित की गई। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश की आंतरिक शक्ति, अखंडता और विविधता में एकता को प्रदर्शित करना रहा। • 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष: राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर को राष्ट्रीय स्तर पर यादगार बनाने के लिए नागरिकों की संकल्पना पर आधारित 15 विशेष झांकियां तैयार की गईं। यह आयोजन इस ऐतिहासिक उपलब्धि को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना। • नक्सल मोर्चे पर जवानों का सम्मान: देश के 126 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के लंबे संघर्ष और नक्सली हिंसा के पीड़ितों की पीड़ा को सामने लाने के लिए यह विशेष मंच तैयार किया गया। इसमें 2000 लोक कलाकारों की नाट्य प्रस्तुति के जरिए जमीनी बदलाव और शांति प्रयासों को रेखांकित किया गया। सवाल-जवाब 1. केवड़िया में एकता परेड कहां और किसकी उपस्थिति में आयोजित हुई? यह भव्य परेड गुजरात के केवड़िया में स्थित एकता पथ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित हुई। 2. इस परेड में कितने सुरक्षाकर्मियों और दर्शकों ने हिस्सा लिया? कार्यक्रम में करीब 25 हजार दर्शकों की उपस्थिति के बीच 10 हजार जवानों ने हिस्सा लिया। 3. परेड में शामिल महिला दस्तों में कौन सी प्रमुख टुकड़ियां शामिल थीं? परेड में छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला डीआरजी टुकड़ी और सीआरपीएफ की महिला सुरक्षाकर्मियों ने भाग लिया। 4. परेड में 'वंदे मातरम' की थीम पर कितनी झांकियां निकाली गईं? वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर कुल 15 झांकियां निकाली गईं, जिनमें 10 गुजरात की और 5 अन्य राज्यों की थीं। 5. नक्सलवाद के विषय पर आयोजित विशेष प्रस्तुति में कितने कलाकारों ने भाग लिया? नक्सल प्रभावित 126 जिलों के 2000 कलाकारों ने पीड़ितों के अनुभवों और जवानों के संघर्ष पर आधारित विशेष नाटक प्रस्तुत किया। 6. परेड के दौरान हवाई प्रदर्शन किस टीम द्वारा किया गया? भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण टीम ने परेड के दौरान विशेष हवाई करतबों का प्रदर्शन किया। https://trendkia.com/gujarat/kevadia-men-rashtriya-ekata-pareda-ka-ayojana-pm-narendra-modi-ki-maujudagi-men-10000-surakshakarmiyon-ne-dikhaya-adamya-parakrama-53988 TrendKia — Har trend, sabse pehle.