# पेथापुर पुलिस थाने में हंगामा और भड़काऊ बयानबाजी के आरोप में जिग्नेश मेवाणी पर केस दर्ज

> गुजरात में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ गांधीनगर के पेथापुर थाने में पुलिस कार्य में बाधा डालने और भड़काऊ बयान देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई है।

**Type:** article · **Category:** गुजरात · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/pethapura-pulisa-thane-men-hngama-aura-bharakau-bayanabaji-ke-aropa-men-jignesh-mevani-para-kesa-darja-46591 · **Language:** Hindi
**Tags:** जिग्नेश मेवाणी, गुजरात राजनीति, कांग्रेस विधायक, गांधीनगर पुलिस, पेथापुर थाना, गुजरात विधानसभा

गुजरात में विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवाणी की कानूनी परेशानियां अचानक बढ़ गई हैं। गांधीनगर जिले के पेथापुर पुलिस थाने में उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस स्टेशन के भीतर समर्थकों संग पहुंचकर सरकारी काम में रुकावट डाली और तनाव फैलाने वाली बयानबाजी की।

## पेथापुर पुलिस थाने की घटना और दर्ज आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, पूरा घटनाक्रम 9 अक्टूबर का है जब गांधीनगर इलाके में चुनाव प्रचार का दौर चल रहा था। उसी दौरान पेथापुर पुलिस स्टेशन के भीतर अधिकारी कांग्रेस पार्टी के एक प्रत्याशी के खिलाफ प्राप्त हुई अर्जी के सिलसिले में उनका आधिकारिक बयान दर्ज कर रहे थे। उसी वक्त जिग्नेश मेवाणी अपने कई समर्थकों के हुजूम के साथ थाने परिसर में दाखिल हुए।

मुकदमे में कहा गया है कि उन्होंने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के शासकीय कामकाज में सीधा व्यवधान उत्पन्न किया। इतना ही नहीं, उन पर थाने के भीतर आपत्तिजनक शब्दावली का इस्तेमाल करने और बिना किसी तथ्यात्मक आधार के बेहद उत्तेजक व भड़काऊ टिप्पणियां करने का भी आरोप है। पुलिस शिकायत के मुताबिक, उनके इन बयानों का मकसद सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाना और वैमनस्य को हवा देना था।

## सोशल मीडिया पर बयानों को बढ़ाने और कानूनी धाराओं का विवरण
दर्ज शिकायत में यह बात भी रेखांकित की गई है कि जिग्नेश मेवाणी ने केवल थाने में भड़काऊ बातें ही नहीं कहीं, बल्कि समाज को गुमराह करने के इरादे से इन वक्तव्यों को अपने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए बड़े पैमाने पर प्रसारित और साझा भी किया। पिछले काफी समय से वे अपने विवादित बयानों को लेकर लगातार चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन इस तरह का यह पहला मौका है जब उन पर सीधे तौर पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है।

## पेथापुर पुलिस ने इस पूरे मामले में कानून की कई कड़ी धाराएं जोड़ी हैं
- **धारा 189(2):** गैर-कानूनी रूप से भीड़ एकत्र करने के लिए निर्धारित सजा से जुड़ी धारा।
- **धारा 190:** किसी समान उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामूहिक दायित्व तय करने वाला प्रावधान।
- **धारा 191(2):** उपद्रव या दंगा भड़काने के अपराध में सजा का प्रावधान।
- **धारा 221:** ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी के काम में जान-बूझकर बाधा डालना।
- **धारा 351(2):** किसी को आपराधिक धमकी देने के जुर्म में दंड की व्यवस्था।
- **धारा 352:** शांति भंग करने की नीयत से जान-बूझकर किसी का अपमान करना।
- **धारा 353(1)(b):** आम जनता के मन में भय या घबराहट पैदा करने के उद्देश्य से झूठी अफवाहें व आधारहीन बयान फैलाना।
- **धारा 353(1)(c):** किसी एक वर्ग या समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाने की नीयत से झूठी सूचनाएं प्रसारित करना।
- **धारा 353(2):** अलग-अलग धार्मिक, भाषाई, नस्लीय, क्षेत्रीय या जातीय समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देने पर दंड का प्रावधान।

## गुजरात कांग्रेस के अन्य विधायकों से जुड़े हालिया विवाद
गुजरात में विपक्षी पार्टी के विधायकों से जुड़े विवादों की कड़ी में यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले कांग्रेस के एक अन्य विधायक इमरान खेड़ावाला भी विवादों के घेरे में आए थे, जब वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं। उस मामले में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को प्रकरण की बेहद सख्त और विस्तृत जांच करने के औपचारिक निर्देश जारी किए थे।

## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम राजनीतिक प्रचार के दौरान कानूनी सीमाओं और सार्वजनिक प्रतिनिधियों के आचरण को लेकर स्पष्ट संदेश देता है।

- **भारत में:** किसी भी सार्वजनिक पद पर मौजूद व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने पर कानूनी कार्रवाई का दायरा साफ होता है। नागरिकों और नेताओं दोनों के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस परिसर में भीड़ जुटाना और अशांति फैलाना सीधे तौर पर आपराधिक दायरे में आता है।
- **गुजरात में:** गांधीनगर और राज्य के चुनावी क्षेत्रों में प्रचार के दौरान प्रशासनिक सख्ती और निगरानी बढ़ सकती है। स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस थानों या प्रशासनिक कार्यालयों में प्रदर्शन करते समय कड़ी कानूनी सीमाओं का सामना करना पड़ेगा।
- **सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए:** भड़काऊ या असत्यापित बयानों को डिजिटल मंचों पर फैलाना सीधे कानूनी शिकंजे का कारण बन सकता है। किसी भी विवादित राजनीतिक बयान को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता परखना कानूनी जोखिमों से बचा सकता है।
- **राजनीतिक दलों के लिए:** चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रत्याशियों और स्टार प्रचारकों के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य हो गया है। पार्टी पदाधिकारियों को अपने समर्थकों की भीड़ को सरकारी कार्यालयों में ले जाने से बचने की हिदायत दी जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
गांधीनगर में चुनाव प्रचार के दौरान पेथापुर पुलिस थाने के भीतर एक आधिकारिक पूछताछ चल रही थी, जिसमें राजनीतिक नेताओं का दखल कानूनी विवाद की वजह बन गया।

- **सीधा कारण:** 9 अक्टूबर को पुलिस जब कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ आई एक अर्जी पर बयान दर्ज कर रही थी, तब जिग्नेश मेवाणी समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और कथित तौर पर जांच में बाधा डाली।
- **आरोप और बयानबाजी:** दर्ज एफआईआर के अनुसार उन्होंने थाने के अंदर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और बिना तथ्यों वाले भड़काऊ बयान दिए।
- **डिजिटल प्रसार:** पुलिस का आरोप है कि इन बयानों को समाज में दुर्भावना फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रसारित भी किया गया।
- **राजनीतिक पृष्ठभूमि:** जिग्नेश मेवाणी पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन थाने में सीधे टकराव और बाधा डालने के चलते पहली बार यह कानूनी कार्रवाई की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ किस पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज हुआ है?
उनके खिलाफ गुजरात के गांधीनगर जिले के पेथापुर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

### 2. यह घटना किस तारीख की बताई गई है?
एफआईआर के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम 9 अक्टूबर को गांधीनगर में चुनाव प्रचार के दौरान हुआ था।

### 3. मेवाणी पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए हैं?
उन पर पुलिस कार्य में बाधा डालने, आपत्तिजनक भाषा बोलने, भड़काऊ बयान देने और उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाने का आरोप है।

### 4. थाने में उस समय पुलिस क्या कर रही थी जब मेवाणी पहुंचे?
पुलिस एक कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ मिली अर्जी के सिलसिले में उनका आधिकारिक बयान दर्ज कर रही थी।

### 5. क्या मेवाणी के खिलाफ पहले भी ऐसी कानूनी कार्रवाई हुई है?
वे पहले भी अपने बयानों के कारण विवादों में रहे हैं, लेकिन उन पर इस प्रकार की कानूनी कार्रवाई पहली बार की गई है।

### 6. इमरान खेड़ावाला से जुड़ा मामला क्या था?
कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला पर वंदे मातरम के कथित अपमान का आरोप लगा था, जिसकी जांच स्पीकर ने विशेषाधिकार समिति को सौंपी थी।

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