# वडोदरा जेल में बंद मौत की सजा पाए कैदी विजय पासवान की दिल का दौरा पड़ने से मौत

> भरूच में 10 साल की बच्ची से दरिंदगी और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले कैदी विजय पासवान की वडोदरा सेंट्रल जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।

**Type:** article · **Category:** गुजरात · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/gujarat/vadodara-jela-men-bnda-mauta-ki-saja-pae-kaidi-vijay-paswan-ki-dila-ka-daura-parane-se-mauta-55119 · **Language:** Hindi
**Tags:** वडोदरा सेंट्रल जेल, विजय पासवान, झघड़िया जीआईडीसी, भरूच अपराध, फांसी की सजा, सयाजी अस्पताल

भरूच के बहुचर्चित दुष्कर्म और हत्याकांड में मौत की सजा पाए कैदी विजय पासवान की वडोदरा सेंट्रल जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जेल परिसर में स्वास्थ्य बिगड़ने के तुरंत बाद उसे इलाज के लिए सयाजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अदालत ने बच्ची के साथ हुई अमानवीय दरिंदगी को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि इस अप्रत्याशित मौत के बाद दोषी के परिवार ने पूरी जांच और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

## दिसंबर 2024 की दर्दनाक घटना और पुलिस जांच
यह पूरा मामला दिसंबर 2024 के दौरान सामने आया था। 16 दिसंबर को भरूच जिले के झघड़िया जीआईडीसी औद्योगिक इलाके से 10 वर्षीय एक मासूम बच्ची अचानक रहस्यमय हालात में गायब हो गई थी। बच्ची का परिवार मूल रूप से झारखंड का रहने वाला था और यहां मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर रहा था। खोजबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी मासूम को बहला-फुसलाकर एक सुनसान स्थान पर ले गया था। वहां उसने बच्ची के साथ क्रूरतापूर्वक दुष्कर्म किया और बाद में अपनी पहचान छिपाने के मकसद से उसकी बेरहमी से हत्या करने की कोशिश की।

लापता होने के बाद बच्ची झाड़ियों के बीच अत्यंत गंभीर और लहूलुहान अवस्था में बरामद हुई थी। मासूम के चेहरे, पेट और नाजुक अंगों पर गहरे जख्म पाए गए थे। नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत वडोदरा के सयाजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। डॉक्टरों की गहन निगरानी के बावजूद आठ दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार बच्ची ने दम तोड़ दिया।

## फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी और फांसी की सजा
मासूम के साथ हुई इस बर्बरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच टीमों का गठन किया था। जांच दल ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, आधुनिक तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया और फॉरेंसिक सबूत एकत्र किए। इन ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने विजय पासवान को दबोच लिया।

मामले की कानूनी कार्यवाही बेहद तेज गति से आगे बढ़ी। फरवरी 2025 में अदालत के भीतर नियमित ट्रायल शुरू किया गया। सभी पक्षों की दलीलें और साक्ष्य देखने के बाद मई 2025 के पहले सप्ताह में अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने विजय पासवान को बच्ची के बलात्कार और हत्या का मुख्य दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

## पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग
अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से विजय पासवान की मौत होने के बाद उसकी पत्नी बबीता देवी ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। बबीता देवी ने अपने पति को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए दावा किया कि असली अपराधियों को बचाने के लिए उनके पति को बलि का बकरा बनाया गया।

बबीता देवी ने कहा, "मेरे पति को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। असली आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।"

मृतक की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान सरकारी पक्ष द्वारा उनका पक्ष अदालत के सामने सही ढंग से नहीं रखा गया। उन्होंने जेल के भीतर हुई इस मौत को संदिग्ध करार देते हुए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और न्याय मिलने तक पति का पार्थिव शरीर लेने से इनकार कर दिया है।

## इसका आप पर असर
यह घटना जेलों में कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक जवाबदेही के प्रति जन जागरूकता से जुड़ी है।

- **भारत में:** मौत की सजा पाए कैदियों की जेल में होने वाली मौतों पर तय मानवाधिकार और न्यायिक दिशा-निर्देशों की महत्ता रेखांकित होती है। इससे कानूनी प्रक्रियाओं और जेल प्रशासन की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था पर ध्यान जाता है।
- **गुजरात में:** भरूच और वडोदरा में इस हाई-प्रोफाइल मामले के बंद होने के साथ ही न्यायिक व्यवस्था और पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर जनता की नजरें टिकी रहेंगी। स्थानीय प्रशासन को पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों से जुड़ी कानूनी औपचारिकताओं का निष्पक्ष निपटारा करना होगा।
- **नागरिकों और परिवारों के लिए:** यह मामला गंभीर अपराधों में त्वरित कानूनी कार्रवाई और फॉरेंसिक सबूतों के महत्व को दर्शाता है। आम जनता के लिए यह स्पष्ट करता है कि जघन्य मामलों में अदालतें कड़े से कड़े फैसले देने में देरी नहीं करती हैं।
- **जेल प्रबंधन के संदर्भ में:** गंभीर मामलों के दोषियों की नियमित स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल की समीक्षा अनिवार्य हो जाती है। जेल अधिकारियों को ऐसी मौतों की निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच से गुजरना पड़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब एक जघन्य अपराध के दोषी कैदी का स्वास्थ्य जेल के अंदर अचानक खराब हो गया और उसे बचाया नहीं जा सका।

- **सीधा कारण:** वडोदरा सेंट्रल जेल में बंद विजय पासवान को अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद सयाजी अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित किया गया। कैदी को सीने में गंभीर तकलीफ के बाद अस्पताल स्थानांतरित किया गया था।
- **पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति:** दिसंबर 2024 में 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में त्वरित सुनवाई के बाद अदालत ने मई 2025 में उसे फांसी की सजा सुनाई थी। दोषी जेल में अपनी अंतिम सजा के निष्पादन की प्रतीक्षा कर रहा था।
- **पारिवारिक असंतोष और आरोप:** कैदी की अचानक हुई मौत के बाद उसकी पत्नी ने पूरे मामले की जांच, निष्पक्षता और जेल परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि वास्तविक दोषियों को छोड़ा गया और उनके पक्ष को सही ढंग से नहीं सुना गया।

## सवाल-जवाब

### 1. दोषी विजय पासवान की मौत किस कारण से हुई?
वडोदरा सेंट्रल जेल में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद विजय पासवान को सयाजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई।

### 2. विजय पासवान को अदालत ने क्या सजा सुनाई थी?
अदालत ने उसे 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दुर्लभतम अपराध मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

### 3. यह घटना कब और कहां हुई थी?
यह अपराध 16 दिसंबर 2024 को गुजरात के भरूच जिले में स्थित झघड़िया जीआईडीसी इलाके में हुआ था।

### 4. पीड़ित बच्ची का परिवार कहां का रहने वाला था?
पीड़ित 10 वर्षीय बच्ची का परिवार मूल रूप से झारखंड का रहने वाला था और झघड़िया जीआईडीसी में मजदूरी करता था।

### 5. पुलिस ने आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी कैसे की थी?
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सर्विलांस और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर विजय पासवान की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया था।

### 6. मृतक कैदी की पत्नी ने क्या आरोप लगाए हैं?
पत्नी बबीता देवी ने पति को निर्दोष बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें गलत फंसाया गया था, और उन्होंने न्याय मिलने तक शव लेने से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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