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  "type": "article",
  "title": "आबकारी सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर सरकारी खजाने को लगाई 21.30 करोड़ की चपत, यमुनानगर में शराब फर्मों की धांधली उजागर",
  "summary": "यमुनानगर में एक्साइज विभाग के सॉफ्टवेयर से फर्जी ई-GRN तैयार कर 21.30 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है, जिसमें विभाग ने 5 करोड़ रुपये वसूलने और कमेटी गठित करने की बात कही है।",
  "content": "हरियाणा के यमुनानगर में शराब के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें सरकारी राजस्व को करीब 21.30 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरे प्रकरण में शराब से जुड़ी दो प्रमुख व्यापारिक फर्मों पर सीधे तौर पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग के आधिकारिक सॉफ्टवेयर की प्रणाली में तकनीकी हेरफेर किया और तय कर चुकाए बिना सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई। सरकारी सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर इतने बड़े पैमाने पर की गई यह अनियमितता अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।\n\nसॉफ्टवेयर में हेरफेर और फर्जी ई-GRN का खेल\nइस पूरे मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने प्रणाली में की गई गड़बड़ियों की विस्तृत जानकारी सामने रखी है। उनके अनुसार, दोनों आरोपी फर्मों ने कथित तौर पर 100 से भी अधिक बार फर्जी ई-GRN नंबर तैयार किए। इन जाली नंबरों के जरिए उत्पाद शुल्क और जरूरी करों से बचते हुए व्यापार किया गया, जिससे सरकारी खाते में जाने वाली एक बड़ी रकम सीधे तौर पर दबा ली गई। इस डिजिटल हेरफेर के जरिए विभाग को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है।\n\nगोदाम सील होने और दो दिन में खुलने पर खड़े हुए सवाल\nशिकायतकर्ता ने विभाग द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई के तरीके पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। जब यह अनियमितता पहली बार संज्ञान में आई थी, तब आबकारी विभाग ने तत्काल कदम उठाते हुए दोनों फर्मों के गोदामों को सील कर दिया था। हालांकि, अभिनव कोहली का दावा है कि इस सख्त कार्रवाई के महज दो दिन के भीतर ही उन गोदामों की सील खोल दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी भारी भरकम रकम की धोखाधड़ी पकड़े जाने के बावजूद दोनों फर्मों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द क्यों नहीं किए गए और उनके संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों बरती जा रही है।\n\nविभागीय जांच और 5 करोड़ की रिकवरी का दावा\nइस पूरे विवाद और आरोपों के जवाब में एक्साइज विभाग के DETC जितेंद्र कुमार ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग ने अब तक 5 करोड़ रुपये की रिकवरी सफलतापूर्वक कर ली है। इसके अतिरिक्त, विभाग के पास सुरक्षा और देनदारी के तौर पर लगभग 31 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों के दस्तावेज पहले से मौजूद हैं। DETC जितेंद्र कुमार के अनुसार, पूरे मामले की गहन पड़ताल के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित कर दी गई है और बाकी बची रकम को जल्द से जल्द वसूलने की प्रक्रिया जारी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गठित कमेटी की जांच में राजस्व क्षति का अंतिम आंकड़ा क्या तय होता है।\n\nइसका आप पर असर\nइस मामले से आबकारी कर प्रणाली, सार्वजनिक राजस्व और स्थानीय शराब वितरण पर सीधे तौर पर निगरानी सख्त होने वाली है।\n\n• भारत में: डिजिटल टैक्स और आबकारी पोर्टलों में ऐसी सुरक्षा खामियां सामने आने से देश भर में सरकारी सॉफ्टवेयर सिस्टम का सुरक्षा ऑडिट तेज हो सकता है। इससे व्यावसायिक अनुपालन प्रक्रियाओं में अतिरिक्त डिजिटल सत्यापन अनिवार्य किए जाने की संभावना है।\n• यमुनानगर में: स्थानीय शराब व्यापार पर आबकारी विभाग का कड़ा पहरा बढ़ेगा और संबंधित फर्मों के संचालन की लगातार जांच होगी। प्रशासन द्वारा बाकी बची देनदारी वसूलने के लिए संपत्ति कुर्क करने जैसी कानूनी प्रक्रियाएं तेजी से अमल में लाई जा सकती हैं।\n• शराब व्यापारियों के लिए: सभी लाइसेंसधारकों को अपनी बिलिंग और ई-GRN प्रक्रिया का संपूर्ण रिकॉर्ड तैयार रखना होगा। तय नियमों में किसी भी तरह की चूक पाए जाने पर भारी जुर्माने और लाइसेंस निलंबन का सामना करना पड़ सकता है।\n• करदाताओं के लिए: सरकारी राजस्व की चोरी रोकने के लिए विभाग रिकवरी की गति तेज करेगा। इससे सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए आवंटित होने वाले सरकारी कोष में नुकसान की भरपाई सुनिश्चित होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआबकारी सॉफ्टवेयर में तकनीकी कमियों का फायदा उठाकर फर्जी चालान बनाना और निगरानी तंत्र की ढिलाई इस बड़े वित्तीय नुकसान का मुख्य कारण बनी।\n\n• सॉफ्टवेयर में हेरफेर: आबकारी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल में सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर फर्जी ई-GRN नंबर तैयार किए गए। इस तकनीकी तोड़फोड़ के कारण बिना सरकारी शुल्क जमा किए सैकड़ों लेन-देन सिस्टम से गुजार दिए गए।\n• कमजोर प्रारंभिक सत्यापन: पोर्टल पर 100 से अधिक बार फर्जी नंबर जनरेट होते रहे लेकिन प्रारंभिक स्तर पर सिस्टम अलर्ट जारी नहीं हो सका। नियमित डिजिटल क्रॉस चेकिंग की कमी ने इस खेल को लंबे समय तक जारी रखने का अवसर दिया।\n• जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया: मामला सामने आते ही गोदाम सील किए गए, जिन्हें दो दिन बाद खोले जाने पर सवाल उठे हैं। फिलहाल विभाग ने आंतरिक जांच के लिए एक कमेटी गठित की है ताकि सॉफ्टवेयर की खामियों और मिलीभगत की सही कड़ी तलाशी जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यमुनानगर में कितने रुपये के शराब घोटाले का मामला सामने आया है?\nयमुनानगर में शराब कारोबार से जुड़ा लगभग 21.30 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व के नुकसान का मामला सामने आया है।\n\n2. इस घोटाले में किन पर गड़बड़ी का आरोप है?\nइस पूरे मामले में शराब की दो बड़ी व्यापारिक फर्मों पर आबकारी विभाग के सॉफ्टवेयर में हेरफेर करने के आरोप लगे हैं।\n\n3. शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?\nउन्होंने आरोप लगाया है कि 100 से ज्यादा फर्जी ई-GRN नंबर तैयार किए गए और सील होने के महज दो दिन बाद ही गोदामों को दोबारा खोल दिया गया।\n\n4. आबकारी विभाग ने अब तक कितनी रिकवरी की है?\nएक्साइज विभाग के DETC जितेंद्र कुमार के अनुसार, विभाग 5 करोड़ रुपये की रिकवरी कर चुका है और करीब 31 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज उसके पास हैं।\n\n5. मामले की जांच के लिए विभाग ने क्या कदम उठाया है?\nविभागीय अधिकारियों ने पूरी अनियमितता और राजस्व हानि की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की है।",
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  "publishedAt": "2026-09-25",
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