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  "type": "article",
  "title": "एम्स से डॉक्टर बनकर सिविल सेवा में आए गौरव दहिया को सरकार ने दी अनिवार्य सेवानिवृत्ति, निजी जिंदगी के विवादों से चर्चा में रहे गुजरात कैडर के अधिकारी",
  "summary": "एम्स से एमबीबीएस करने के बाद यूपीएससी में 76वीं रैंक हासिल करने वाले गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया को केंद्र सरकार के डीओपीटी ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है।",
  "content": "प्रशासनिक सेवा के गलियारों में अनुशासनात्मक कार्रवाई का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां गुजरात कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी गौरव दहिया को सरकार की तरफ से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। कभी प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान से डिग्री और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में बेहतरीन रैंक हासिल कर सुर्खियों में आए दहिया का सफर पिछले कुछ वर्षों में लगातार विवादों से घिरा रहा। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी ने उनके सेवा रिकॉर्ड की गहन समीक्षा के बाद जबरन रिटायर करने का यह कड़ा फैसला लिया है।\n\nएम्स से मेडिकल की पढ़ाई और सिविल सेवा में चयन\nहरियाणा के गुरुग्राम स्थित सेक्टर-4 के मूल निवासी गौरव दहिया की शैक्षणिक यात्रा काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने वर्ष 2007 में देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली से एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की थी। चिकित्सा क्षेत्र की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में शामिल होने का निर्णय लिया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए।\n\nअपनी कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में पूरे देश में 76वीं रैंक हासिल की। इस शानदार सफलता के साथ वह वर्ष 2010 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी बने। सेवा में आने के बाद उन्हें राज्य प्रशासन के तहत कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के मोर्चों पर काम किया।\n\nप्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी और जिम्मेदारियों का सफर\nगुजरात कैडर में सेवा देते हुए दहिया ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व संभाले। उन्होंने नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर के पद पर कार्य किया, जहां राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उन पर थी। इसके अलावा वह बनासकांठा और पाटन जिलों में जिला विकास अधिकारी यानी डीडीओ के पद पर भी तैनात रहे।\n\nप्रशासनिक करियर की शुरुआत में उन्होंने कई योजनाओं के प्रबंधन में अपनी भूमिका निभाई। हालांकि, बाद के वर्षों में उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़े गंभीर विवाद सार्वजनिक मंचों पर आ गए, जिसका सीधा असर उनके प्रशासनिक कामकाज और सेवा छवि पर पड़ा। हालिया समय में वह गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर कार्यरत थे, जहां उनके संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन करने के बाद केंद्र सरकार ने सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।\n\nविवाह विवाद, निलंबन और हनी ट्रैप के दावे\nआईएएस अधिकारी के करियर में गतिरोध तब शुरू हुआ, जब दिल्ली की एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना था कि दहिया ने अपनी पहली पत्नी से विधिवत तलाक लिए बिना, धोखे में रखकर 28 फरवरी 2018 को तिरुपति में उससे विवाह किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक दोनों की एक बेटी भी है। मामला तूल पकड़ने पर गुजरात सरकार ने आरोपों की पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति बैठाई।\n\nजांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद गुजरात सरकार ने अगस्त 2019 में दहिया को सेवा से निलंबित कर दिया था। दूसरी ओर, दहिया ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि उन्होंने कोई दूसरी शादी नहीं की है। उनका कहना था कि वह केवल उस महिला के साथ रिश्ते में थे और उन्हें हनी ट्रैप का शिकार बनाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही थी। निलंबन अवधि पूरी होने के बाद वर्ष 2023 में उन्हें दोबारा बहाल किया गया और गांधीनगर में नई तैनाती दी गई। इसके बावजूद सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुशासन के मानकों पर सेवा समीक्षा के दौरान उनके मामलों को गंभीरता से लिया गया और उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश थमा दिया गया।\n\nइसका आप पर असर\nइस प्रशासनिक फैसले का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सिविल सेवा में आचरण और व्यक्तिगत शुचिता के नियमों का उल्लंघन करियर समाप्ति की वजह बन सकता है।\n\n• प्रशासनिक सेवा पर प्रभाव: अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट चेतावनी है कि व्यक्तिगत जीवन से जुड़े गंभीर विवाद सेवा नियमावली के दायरे में आते हैं। सरकार आचरण नियमों के उल्लंघन पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे कड़े कदम उठाने में संकोच नहीं कर रही है।\n• नागरिकों और शिकायतकर्ताओं के लिए: यह दर्शाता है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे उच्चाधिकारियों के खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों पर विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय होती है। उच्चस्तरीय जांच के बाद शासन स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।\n• सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए: परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल करना ही अंतिम उपलब्धि नहीं है, बल्कि सेवा में लगातार अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य है। अधिकारी की प्रतिष्ठा और करियर व्यक्तिगत और पेशेवर निष्ठा पर ही निर्भर करते हैं।\n• गुजरात राज्य प्रशासन में: कैडर में इस कार्रवाई से नियमों के कड़ाई से पालन का संदेश गया है। लंबे समय से विवादों में रहे मामले पर अंतिम प्रशासनिक फैसला आने से असमंजस समाप्त हुआ है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई आईएएस अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा और उन पर लगे गंभीर आरोपों की जांच के बाद केंद्र और राज्य सरकार द्वारा की गई है।\n\n• विवाह और कदाचार के आरोप: दिल्ली की एक महिला ने आरोप लगाया था कि दहिया ने अपनी पहली पत्नी से तलाक लिए बिना 28 फरवरी 2018 को उससे दूसरा विवाह किया, जिसके बाद एक उच्चस्तरीय समिति ने मामले की पड़ताल की।\n• जांच समिति की रिपोर्ट और निलंबन: जांच रिपोर्ट के आधार पर गुजरात सरकार ने उन्हें अगस्त 2019 में निलंबित कर दिया था, जबकि दहिया ने इसे हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला बताया था।\n• सेवा रिकॉर्ड की अनिवार्य समीक्षा: वर्ष 2023 में बहाली के बाद भी डीओपीटी और सरकार द्वारा प्रशासनिक आचरण और अनुशासन के मानकों के तहत उनके पूरे रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें समय पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईएएस गौरव दहिया को किस आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई?\nकार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनके सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा और उन पर लगे कदाचार के गंभीर आरोपों के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला लिया।\n\n2. गौरव दहिया किस बैच और कैडर के आईएएस अधिकारी थे?\nगौरव दहिया वर्ष 2010 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी थे।\n\n3. आईएएस बनने से पहले उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या थी?\nउन्होंने साल 2007 में एम्स दिल्ली से एमबीबीएस किया था और बाद में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 76वीं रैंक हासिल की थी।\n\n4. महिला ने गौरव दहिया पर क्या आरोप लगाए थे?\nमहिला का आरोप था कि दहिया ने पहली पत्नी से तलाक लिए बिना 28 फरवरी 2018 को तिरुपति में उससे दूसरी शादी की थी।\n\n5. आरोपों पर गौरव दहिया का क्या कहना था?\nदहिया ने दूसरी शादी से इनकार करते हुए दावा किया था कि वह केवल रिलेशनशिप में थे और उन्हें हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा था।\n\n6. गौरव दहिया ने गुजरात में किन प्रमुख पदों पर कार्य किया था?\nवह नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर, बनासकांठा और पाटन के डीडीओ तथा गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त रहे थे।",
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  "category": "हरियाणा",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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