अंबाला कैंट के ऑल वेदर पूल से तैयार हो रहे अंतरराष्ट्रीय तैराक, जानिए किस उम्र से शुरू करें ट्रेनिंग अंबाला छावनी में 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बने ऑल वेदर स्विमिंग पूल में बच्चों को 3 से 4 साल की उम्र से ट्रेनिंग देकर पेशेवर तैराकी के लिए तैयार किया जा रहा है। खेल के जरिए बेहतर सेहत के साथ उज्ज्वल करियर तलाशने वाले बच्चों और युवाओं के लिए तैराकी एक शानदार रास्ता बनकर उभर रही है। हरियाणा की लड़कियां पहले ही विभिन्न खेल स्पर्धाओं में देश और दुनिया में अपना परचम लहरा रही हैं, और अब तैराकी में भी राज्य की प्रतिभाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अंबाला छावनी में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑल वेदर स्विमिंग पूल तैयार किया गया है। करीब 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बना यह परिसर स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रहा है, जहां वे बिना किसी मौसम की रुकावट के पूरे बारह महीने अभ्यास कर सकते हैं। सर्दियों में भी नहीं थमती खिलाड़ियों की तैयारी अक्सर मौसम बदलने और कड़ाके की ठंड पड़ने पर खुले तालों में तैराकी का अभ्यास रुक जाता है, लेकिन अंबाला कैंट के इस आधुनिक परिसर में ऐसी कोई समस्या नहीं आती। यहां पानी के तापमान को नियंत्रित रखने की आधुनिक व्यवस्था की गई है, जिससे कड़ाके की सर्दियों में भी गर्म पानी के कारण खिलाड़ियों का दैनिक प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के जारी रहता है। इसके साथ ही परिसर में समय-समय पर विभिन्न स्तरों की तैराकी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इन प्रतिस्पर्धी आयोजनों में भाग लेने से युवा तैराकों को दबाव के बीच अपने प्रदर्शन को परखने और खुद को निखारने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। 3 से 4 वर्ष की आयु से शुरू हो सकता है बुनियादी अभ्यास करीब 15 साल से युवाओं को इस विधा में प्रशिक्षित कर रहे स्विमिंग कोच आशीष चौधरी के मुताबिक, अंबाला का यह ऑल वेदर स्विमिंग पूल हर आधुनिक सुविधा से संपन्न है। उन्होंने बताया कि तैराकी की नींव बहुत छोटी उम्र में ही रखी जा सकती है। जब बच्चा 3 से 4 साल का होता है, तब उसे पानी से परिचित कराकर उसका डर दूर किया जा सकता है और सहजता के साथ बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जो बच्चे लगातार अनुशासन के साथ पानी में पसीना बहाते हैं, वे 9 से 11 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते बेहतरीन प्रदर्शन करने लगते हैं। इसके बाद 14 से 15 साल की उम्र में वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर की बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में ताल ठोकने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। 8 से 10 साल की कड़ी मेहनत से बनता है अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफर आशीष चौधरी ने तैराकी में करियर की राह समझाते हुए स्पष्ट किया कि एक खिलाड़ी को राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने के लिए लगभग 8 से 10 साल तक निरंतर और समर्पित तैयारी करनी होती है। इस केंद्र पर पंजीकृत खिलाड़ी हर दिन लगभग 2 से 3 घंटे तक कड़ा अभ्यास करते हैं। कई उत्साही शिक्षार्थी सुबह के समय नियमित रूप से घंटों पानी में तकनीक और गति सुधारने पर काम करते हैं। इस खेल में लड़कियों के लिए भी असीम संभावनाएं मौजूद हैं। आज बड़ी संख्या में छात्राएं अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ पेशेवर तैराकी सीख रही हैं। पदकों के साथ लाखों रुपये के नकद पुरस्कार प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तैराकों को केवल पदक और ट्रॉफियां ही नहीं मिलतीं, बल्कि उनका सम्मान नकद पुरस्कारों से भी किया जाता है। कई प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में विजेताओं को लाखों रुपये तक की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। 2016 के ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला तैराक शिवानी कटारिया का उदाहरण देते हुए आशीष चौधरी ने कहा कि उनके जैसे सफल खिलाड़ी आज की बेटियों को इस विधा में नई ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के लिए किसी न किसी खेल से जरूर जोड़ें, क्योंकि खेल शारीरिक तंदुरुस्ती के साथ जीवन में अनुशासन भी सिखाते हैं। पढ़ाई के साथ पदक जीतने का सपना संवार रहीं युवा प्रतिभाएं इस आधुनिक तरणताल में अभ्यास कर रहीं 11वीं कक्षा की छात्रा आस्था बताती हैं कि वह पिछले चार वर्षों से नियमित तैराकी सीख रही हैं। आस्था के अनुसार, किताबों के साथ खेल के मैदान का संतुलन बनाना एक शानदार अनुभव रहा है और उनका अंतिम लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वहीं दूसरी ओर, 12वीं कक्षा की छात्रा शिवानी पिछले पांच साल से इस खेल में कड़ी मेहनत कर रही हैं। शिवानी रोजाना सुबह लगभग दो घंटे तक तरणताल में अभ्यास करती हैं। वह सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं और अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर कई पदक और नकद पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं। शिवानी का कहना है कि अंबाला में तैयार हुआ यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑल वेदर पूल स्थानीय खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है और उनका सपना भी वैश्विक मंचों पर भारत का नाम रोशन करना है। इसका आप पर असर अंबाला के युवाओं और अभिभावकों के लिए ऑल वेदर स्विमिंग पूल खेल प्रशिक्षण का एक आधुनिक और सुलभ केंद्र उपलब्ध करा रहा है। • अंबाला में: स्थानीय अभिभावक अपने छोटे बच्चों को 3 से 4 वर्ष की उम्र से ही इस आधुनिक पूल में नियमित तैराकी की ट्रेनिंग दिलवा सकते हैं। सर्दियों में गर्म पानी की सुविधा होने के कारण बच्चों की दिनचर्या और अभ्यास का क्रम सालभर बिना रुके चलता रहता है। • हरियाणा भर में: राज्य की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के लिए तैयार होने का एक नया आधुनिक मंच मिल गया है। खिलाड़ी पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में पदक और नकद पुरस्कार जीतकर अपने करियर को आर्थिक मजबूती दे सकते हैं। • युवाओं के स्वास्थ्य पर: नियमित तैराकी से बच्चों का शारीरिक विकास बेहतर होता है और वे अनुशासित जीवनशैली अपनाते हैं। खेल गतिविधियों से जुड़ने के कारण युवा नशे और गलत आदतों से भी सुरक्षित रहते हैं। • खिलाड़ियों के करियर पर: 8 से 10 साल की नियमित ट्रेनिंग लेकर युवा राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहचान बना सकते हैं। पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार के साथ आगे चलकर खेल कोटे से अवसरों का लाभ भी मिलता है। ऐसा क्यों हुआ अंबाला छावनी में इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑल वेदर स्विमिंग पूल का निर्माण इसलिए किया गया ताकि खिलाड़ियों को मौसम की बाधाओं से मुक्त विश्वस्तरीय खेल ढांचा मिल सके। पहले सर्दियों में अभ्यास रुक जाने से स्थानीय प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाती थीं। • मौसम की बाधाओं को खत्म करना: पारंपरिक तरणतालों में कड़ाके की ठंड के दौरान अभ्यास पूरी तरह बंद करना पड़ता था। 38 करोड़ 68 लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट में गर्म पानी की व्यवस्था कर खिलाड़ियों को पूरे बारह महीने अभ्यास की सुविधा दी गई है। • बचपन से खेल प्रतिभा को तराशना: तैराकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए 8 से 10 साल की निरंतर मेहनत की जरूरत होती है। कम उम्र यानी 3 से 4 साल से बच्चों को पानी के अनुकूल बनाकर पेशेवर प्रशिक्षण देना इस सुविधा का मुख्य आधार है। • महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन: शिवानी कटारिया जैसी ओलंपिक तैराकों की सफलता के बाद राज्य की बेटियों में तैराकी के प्रति रुझान बढ़ा है। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के साथ बेटियों को सुरक्षित और आधुनिक खेल माहौल देने के लिए यह मंच तैयार किया गया है। सवाल-जवाब 1. अंबाला कैंट के ऑल वेदर स्विमिंग पूल की निर्माण लागत कितनी है? इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑल वेदर स्विमिंग पूल को करीब 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। 2. बच्चों को किस उम्र से तैराकी की ट्रेनिंग शुरू करवानी चाहिए? कोच आशीष चौधरी के अनुसार, 3 से 4 साल की उम्र से बच्चे को पानी के अनुकूल बनाकर तैराकी की बुनियादी ट्रेनिंग दी जा सकती है। 3. एक तैराक को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में कितना समय लगता है? राज्य स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी को करीब 8 से 10 साल की निरंतर तैयारी की जरूरत होती है। 4. क्या सर्दियों के मौसम में भी अंबाला के इस पूल में अभ्यास चलता रहता है? हां, यह ऑल वेदर स्विमिंग पूल है और सर्दियों में गर्म पानी की आधुनिक व्यवस्था होने के कारण अभ्यास सालभर जारी रहता है। 5. खिलाड़ी प्रतिदिन कितने घंटे अभ्यास करते हैं? इस केंद्र पर तैराक रोजाना लगभग 2 से 3 घंटे तक नियमित अभ्यास करते हैं, जिसमें कई बच्चे सुबह की शिफ्ट में ट्रेनिंग लेते हैं। 6. तैराकी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को क्या पुरस्कार मिलते हैं? सफल तैराकों को पदकों और ट्रॉफियों के अलावा कई प्रमुख प्रतियोगिताओं में लाखों रुपये तक की नकद पुरस्कार राशि भी मिलती है। प्रेरणा और सबक पढ़ाई और खेल के बेहतरीन संतुलन से लेकर शुरुआती उम्र में अनुशासन सीखने तक, यह कहानी युवा पीढ़ी के लिए कई व्यावहारिक सबक पेश करती है। • शुरुआत जितनी जल्दी, नींव उतनी मजबूत: 3 से 4 साल की उम्र में किसी हुनर की शुरुआत करने से बच्चे का डर खत्म होता है और वह कम उम्र में तकनीक पर महारत हासिल कर लेता है। • पढ़ाई और खेल का सफल तालमेल: 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के साथ सुबह दो घंटे कड़ा अभ्यास करने वाली आस्था और शिवानी साबित करती हैं कि समय प्रबंधन से खेल और शिक्षा दोनों में अव्वल रहा जा सकता है। • दीर्घकालिक समर्पण की जरूरत: राज्य स्तर से ओलंपिक या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए 8 से 10 साल की निरंतर मेहनत और धैर्य ही असली सफलता की कुंजी है। • नशे से दूरी और खेलों से जुड़ाव: खेलों में नियमित भागीदारी युवाओं के शरीर को फिट रखती है और उन्हें नकारात्मक प्रवृत्तियों व नशे से दूर रखकर जीवन में अनुशासन लाती है। https://trendkia.com/haryana/ambala-cantt-ke-la-vedara-pula-se-taiyara-ho-rahe-antararashtriya-tairaka-janie-kisa-umra-se-shuru-karen-treninga-35321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.