अंबाला की मंडियों में किसानों की बढ़ी मुश्किलें, फसल उठान में देरी और खराब मौसम ने बढ़ाई चिंता अंबाला की अनाज मंडियों में धान के उठान में हो रही देरी और खराब मौसम के चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल का गेहूं भी अभी तक नहीं उठाया गया है, जिससे नई फसल को रखने के लिए जगह की कमी हो गई है। अंबाला में किसान दिन-रात खेतों में कड़ा परिश्रम करते हैं और इस आशा के साथ अपनी फसल को तैयार करते हैं कि जब अनाज मंडी पहुंचेगा तो उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त होगा। ऐसे में जब फसल पकने के बाद वर्षा का सामना करती है और मंडी में आने के पश्चात भी उसका समय पर उठान नहीं होता है, तो अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक ही है। इन दिनों अंबाला की अनाज मंडियों में ठीक ऐसी ही बदतर स्थिति बनी हुई है। हाल ही में हुई बारिश की वजह से मंडियों में खुले में रखे धान को काफी नुकसान पहुंचा है। अब किसानों के मन में यह डर बैठा हुआ है कि यदि दोबारा बारिश होती है, तो उनकी खून-पसीने की कमाई पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। अंबाला छावनी की मोहड़ा अनाज मंडी में भारी आवक के बीच किसान लगातार परेशान नजर आ रहे हैं। स्थानिय किसानों की समस्याएं और जगह की किल्लत शाहपुर गांव के रहने वाले किसान जसप्रीत सिंह ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि मंडी में धान के उठान में हो रही लगातार देरी के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पिछले सीजन की गेहूं की फसल भी एक कोने में पड़ी हुई है, जिसका अभी तक उठान नहीं किया गया है। इस वजह से किसानों को अपनी नई फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। जसप्रीत का यह भी कहना है कि पिछले साल भी उन्हें इसी प्रकार की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ा था। अब एक बार फिर से उठान प्रक्रिया में लेटलतीफी होने से उनकी रातों की नींद उड़ गई है। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि यदि आगामी दिनों में फिर से बारिश आ गई, तो मंडी परिसर में खुले आसमान के नीचे रखी धान की फसल को भारी क्षति उठानी पड़ सकती है। पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं का अभाव धन्यौड़ा गांव के किसान रेशम सिंह ने मंडी परिसर के भीतर पीने के पानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि वाटर कूलरों के आसपास भारी गंदगी फैली रहती है, जिसके कारण किसानों को पीने के लिए साफ पानी पाने में भारी कठिनाई होती है। उन्होंने प्रशासन से यह मांग उठाई है कि मंडी में स्थापित सभी वाटर कूलरों के आसपास नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जानी चाहिए ताकि अन्नदाताओं को स्वच्छ पेयजल सुलभ हो सके। रेशम सिंह ने आगे बताया कि पिछले साल का गेहूं शेड के नीचे कब्जा जमाए बैठा है। यदि अधिकारियों द्वारा समय पर उस पुरानी फसल का उठान करवा दिया जाए, तो मंडी में जगह की किल्लत अपने आप दूर हो जाएगी और बारिश के मौसम में नए अनाज को सुरक्षित बचाने में भी बहुत मदद मिलेगी। पोर्टल की तकनीकी बाधाएं और नमी की समस्या एक अन्य किसान कुलदीप सिंह ने जानकारी दी कि मंडी में अपनी फसल लाने के बाद भी उन्हें कई तरह की प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। सरकारी पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याएं बार-बार सामने आकर किसानों का काम अटका देती हैं। इसके अलावा, धान के अंदर नमी की मात्रा को लेकर भी किसानों को पसीना बहाना पड़ता है। किसान कड़ी मेहनत करके अपनी फसल को धूप में सुखाते हैं, लेकिन अचानक मौसम खराब होने या बारिश आ जाने पर नमी का स्तर फिर से बढ़ जाता है। इस प्रकार की स्थिति से फसल बेचने की पूरी प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होती है और किसानों को अपनी फसल खपाने के लिए अतिरिक्त शारीरिक व मानसिक मेहनत करनी पड़ती है। प्रशासनिक दावे और मंडी अधिकारियों का पक्ष अंबाला अनाज मंडी के सचिव नीरज भारद्वाज ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि मंडियों से फसल का उठान निरंतर जारी है। इस प्रक्रिया को और अधिक तेज गति से पूरा कराने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि किसानों की बेची गई फसल का भुगतान बहुत जल्द उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगा। मंडी के भीतर अटल किसान कैंटीन के माध्यम से किसानों को मात्र 10 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सचिव के अनुसार, परिसर में कुल सात वाटर कूलर लगाए गए हैं और किसानों की हर संभव समस्या का त्वरित समाधान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रात के समय के लिए पर्याप्त रोशनी का पुख्ता इंतजाम किया गया है। इसके अलावा सभी आढ़तियों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल रखें और बारिश का कोई भी अलर्ट मिलने पर अनाज को पूरी तरह ढककर सुरक्षित करें। इसका आप पर असर अंबाला और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों को इस संकट के कारण भारी आर्थिक जोखिम और अपनी फसल की बर्बादी का सीधा सामना करना पड़ रहा है। • अंबाला में: मंडियों में जगह की भारी कमी और धान के उठान में हो रही देरी से किसानों को खुले आसमान के नीचे अपनी फसल सुरक्षित रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। • भारत में: सरकारी मंडियों में पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियां और समय पर भुगतान न मिलने की समस्याएं अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। • लागत और मेहनत: बारिश के कारण फसल में नमी बढ़ने से किसानों को अपनी उपज को दोबारा सुखाने और बेचने के लिए अतिरिक्त मेहनत व धन खर्च करना पड़ता है। • बुनियादी सुविधाएं: मंडियों में पीने के साफ पानी की कमी और स्वच्छता के अभाव से किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ अंबाला की मंडियों में उपजे इस मौजूदा संकट के पीछे प्रशासनिक सुस्ती और खराब मौसम मुख्य वजह रहे हैं। पिछले सीजन का अनाज समय पर नहीं उठाए जाने के कारण नए सीजन की आवक के लिए जगह कम पड़ गई। • उठान में देरी: पिछले साल के गेहूं का स्टॉक अभी तक शेड के नीचे और गोदामों में पड़ा हुआ है, जिससे नई धान की फसल को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। • बेमौसम बारिश: हालिया दिनों में हुई अप्रत्याशित बारिश ने खुले में रखे धान को गीला कर दिया, जिससे अनाज में नमी की मात्रा बढ़ गई और फसल बेचने की प्रक्रिया बाधित हुई। • पोर्टल संबंधी बाधाएं: ऑनलाइन सरकारी पोर्टलों की तकनीकी खामियां और सर्वर की धीमी गति किसानों के पंजीकरण और सुचारू खरीद प्रक्रिया में बड़ी बाधा बनती हैं। • प्रशासनिक प्रयास: मंडी अधिकारियों द्वारा अब उठान प्रक्रिया में तेजी लाने और आढ़तियों को तिरपाल से फसल ढकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सवाल-जवाब 1. अंबाला की मंडियों में किसान किस मुख्य समस्या से परेशान हैं? किसान धान के उठान में देरी, पिछले साल का गेहूं रखे होने के कारण जगह की कमी और बारिश से फसल खराब होने के डर से परेशान हैं। 2. मोहड़ा अनाज मंडी किस जिले में स्थित है? मोहड़ा अनाज मंडी हरियाणा के अंबाला छावनी क्षेत्र में स्थित है। 3. किसानों ने पीने के पानी को लेकर क्या शिकायत की है? धन्यौड़ा गांव के किसान रेशम सिंह ने बताया कि वाटर कूलरों के आसपास गंदगी होने के कारण किसानों को साफ पानी पीने में परेशानी होती है। 4. मंडी में किसानों को भोजन किस दर पर मिल रहा है? मंडी में अटल किसान कैंटीन के माध्यम से किसानों को मात्र 10 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। 5. मंडी सचिव नीरज भारद्वाज ने उठान को लेकर क्या कहा है? मंडी सचिव नीरज भारद्वाज ने बताया कि फसल का उठान जारी है और इसे तेजी से पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। 6. धान की फसल में किस बात को लेकर अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है? बारिश और खराब मौसम के कारण धान में नमी बढ़ जाती है, जिसे सुखाने के लिए किसानों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। https://trendkia.com/haryana/ambala-ki-mndiyon-men-kisanon-ki-barhi-mushkilen-phasala-uthana-men-deri-aura-kharaba-mausama-ne-barhai-chinta-48260 TrendKia — Har trend, sabse pehle.