अंबाला में सजेगा सवा सौ साल पुराना वामन द्वादशी मेला, पांच भव्य हिंडोलों के स्वागत में जुटेंगे श्रद्धालु हरियाणा के अंबाला में 21 से 23 सितंबर तक ऐतिहासिक वामन द्वादशी मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पांच पवित्र हिंडोलों की शोभायात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी. हरियाणा का ऐतिहासिक शहर अंबाला सिर्फ अपनी प्राचीन अंग्रेजी हुकूमत के दौर की इमारतों और पारंपरिक बाजारों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां की गहरी धार्मिक जड़ें भी इसकी अनूठी पहचान का हिस्सा हैं. इसी कड़ी में शहर की सदियों पुरानी विरासत को समेटे हुए ऐतिहासिक वामन द्वादशी मेले का आयोजन होने जा रहा है. लगभग 125 वर्षों की शानदार धार्मिक परंपरा को जीवंत रखने वाला यह मेला उत्तर भारत के चुनिंदा आयोजनों में से एक है. पूरे उत्तर भारत में इस खास मेले का आयोजन केवल अंबाला और पंजाब के पटियाला शहर में ही किया जाता है. इस वर्ष यह त्रिवसीय धार्मिक उत्सव अंबाला शहर की पुरानी अनाज मंडी में 21 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक चलेगा. इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान वामन के पांच पावन हिंडोले होंगे, जिन्हें भव्य शोभायात्रा के रूप में शहर के विभिन्न देवालयों से लाकर पुरानी अनाज मंडी में स्थापित किया जाएगा. भव्य शोभायात्रा और हिंडोलों का आगमन अंबाला शहर सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल ने मेले की तैयारियों और इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि सनातन धर्म सभा द्वारा आयोजित किए जाने वाले इस मेले में शहर के विभिन्न मंदिरों से पांच पवित्र हिंडोले पुरानी अनाज मंडी के मुख्य आयोजन स्थल पर लाए जाते हैं. इसके बाद इन सभी हिंडोलों को एक बेहद खूबसूरत और भव्य पंडाल में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित किया जाता है. उत्सव के पहले दिन यानी 21 सितंबर को पूर्व मंत्री असीम गोयल ठाकुरद्वारा मंदिर से इस भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ करेंगे. परंपरा के अनुसार, वह स्वयं प्रथम हिंडोले को अपने कंधों पर उठाकर इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत करेंगे. इसके पश्चात यह शोभायात्रा अंबाला शहर के विभिन्न व्यस्त बाजारों और रास्तों से होकर गुजरेगी. मार्ग में अन्य चार मंदिरों से आने वाले पावन हिंडोले भी इस शोभायात्रा का हिस्सा बनते जाएंगे और अंत में सभी पांचों हिंडोले पुरानी अनाज मंडी पहुंचेंगे. मुख्य अतिथि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पुरानी अनाज मंडी में सभी पांचों हिंडोलों की गरिमामयी स्थापना के उपरांत संध्याकाल में एक भव्य सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. इस पावन बेला में मुख्य आकर्षण आसमान से होने वाली पुष्प वर्षा होगी, जिसमें ड्रोन तकनीक की सहायता से उपस्थित श्रद्धालुओं पर फूलों की बारिश की जाएगी. इस उद्घाटन समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे. इसके साथ ही युवाओं के पसंदीदा पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू अपनी सुरीली आवाज से सांस्कृतिक संध्या में समां बांधेंगे. उत्सव के दूसरे दिन यानी 22 सितंबर को सुबह 10 बजे से ही धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत हो जाएगी. इस दिन के मुख्य अतिथि के रूप में कृष्ण बेदी उपस्थित रहेंगे और श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त भजन गायिका गौरामणी के भक्तिमय गीतों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा. तीसरे दिन की विदाई यात्रा और पवित्र स्नान मेले के अंतिम दिन यानी 23 सितंबर को एक विशाल विदाई शोभायात्रा निकाली जाएगी. इस यात्रा की शुरुआत से पूर्व विभिन्न बैंड दलों द्वारा भगवान वामन के हिंडोलों को सलामी दी जाएगी. इसके बाद यह शोभायात्रा पुरानी अनाज मंडी से प्रस्थान कर शहर के मुख्य बाजारों से गुजरते हुए वापस ठाकुरद्वारा मंदिर पहुंचेगी. इस भव्य यात्रा की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें राजस्थान के जयपुर से आया प्रसिद्ध विष्णु बैंड और उत्तर प्रदेश के आगरा का सुप्रसिद्ध सुदीत बैंड अपनी मधुर धुनें बिखेरेंगे. इनके अलावा बालाजी बैंड, कमल बैंड, ग्रेट पॉपुलर बैंड, रवि बैंड और महादेव बैंड भी इस यात्रा को संगीतमय बनाएंगे. इस शोभायात्रा की भव्यता को बढ़ाने के लिए मेरठ से विशेष रूप से आकर्षक झांकियां मंगवाई गई हैं. ठाकुरद्वारा मंदिर पहुंचने पर सभी हिंडोलों को ऐतिहासिक नवरंग राय तालाब में पवित्र स्नान कराया जाएगा, जिसे स्थानीय भाषा में डुबकी लगाना कहा जाता है. इस पावन स्नान अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद सभी हिंडोलों को अत्यंत आदरपूर्वक उनके मूल मंदिरों में वापस ले जाकर स्थापित कर दिया जाएगा. इसका आप पर असर इस ऐतिहासिक मेले के आयोजन से क्षेत्र के लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. • यातायात में बदलाव: तीन दिनों तक अंबाला शहर के मुख्य बाजारों और पुरानी अनाज मंडी के पास भारी भीड़ रहेगी. इसके चलते स्थानीय प्रशासन यातायात रूटों में बदलाव करेगा, जिससे वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना होगा. • स्थानीय व्यापार को बढ़ावा: मेले के कारण बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल काफी बढ़ जाएगी. इससे स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और छोटे व्यापारियों की कमाई में भारी इजाफा होने की उम्मीद है. • सांस्कृतिक पर्यटन: उत्तर भारत में केवल दो जगहों पर आयोजित होने वाले इस मेले को देखने बाहर से भी लोग आएंगे. इससे क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नई पीढ़ी को अपनी पुरानी विरासत को करीब से जानने का मौका मिलेगा. • धार्मिक समागम का अवसर: स्थानीय लोगों को देश के प्रसिद्ध कलाकारों और गायकों को सुनने का सीधा अवसर मिलेगा. तीन दिनों तक चलने वाले भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहेगा. ऐसा क्यों हुआ अंबाला में वामन द्वादशी मेले का आयोजन पिछले सवा सौ सालों से एक स्थापित परंपरा के रूप में किया जा रहा है. • धार्मिक विरासत का संरक्षण: सनातन धर्म सभा इस ऐतिहासिक उत्सव को अंबाला की प्राचीन धार्मिक पहचान बनाए रखने के लिए हर साल आयोजित करती है. यह आयोजन शहर की आध्यात्मिक जड़ों को मजबूत करता है. • हिंडोला परंपरा: भगवान वामन के सम्मान में विभिन्न मंदिरों से सजे-धजे हिंडोले निकालने की प्रथा है. इन सभी हिंडोलों को एक स्थान पर लाकर एकता और सामूहिक श्रद्धा का प्रदर्शन किया जाता है. • पवित्र स्नान अनुष्ठान: नवरंग राय तालाब में हिंडोलों को स्नान कराने की प्राचीन परंपरा है. इस पवित्र डुबकी के साथ ही तीन दिवसीय अनुष्ठान का समापन होता है, जिसे स्थानीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना जाता है. सवाल-जवाब 1. अंबाला का वामन द्वादशी मेला कितने साल पुराना है? यह मेला लगभग 125 साल पुराना है और उत्तर भारत में केवल अंबाला व पटियाला में ही आयोजित होता है. 2. इस साल यह मेला कब और कहां आयोजित किया जा रहा है? यह मेला 21, 22 और 23 सितंबर को अंबाला शहर की पुरानी अनाज मंडी में आयोजित किया जाएगा. 3. मेले का सबसे खास आकर्षण क्या है? मेले का मुख्य आकर्षण भगवान वामन के पांच पवित्र हिंडोले हैं, जिन्हें शहर के विभिन्न मंदिरों से भव्य शोभायात्रा के रूप में लाया जाता है. 4. मेले के दौरान कौन से वीआईपी मेहमान शामिल होंगे? हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहले दिन मुख्य अतिथि होंगे, जबकि दूसरे दिन कृष्ण बेदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. 5. मेले के अंतिम दिन हिंडोलों के साथ कौन सी रस्म निभाई जाती है? अंतिम दिन (23 सितंबर) शोभायात्रा के बाद सभी पांचों हिंडोलों को नवरंग राय तालाब में पवित्र स्नान (डुबकी) कराया जाता है. https://trendkia.com/haryana/ambala-men-sajega-sava-sau-sala-purana-vaman-dwadashi-mela-pancha-bhavya-hindolas-ke-svagata-men-jutenge-shraddhalu-32683 TrendKia — Har trend, sabse pehle.