# अंबाला में सवा सदी पुरानी परंपरा के साथ वामन द्वादशी मेले का आगाज़, पांच हिंडोलों की स्थापना से गूंजा शहर

> हरियाणा के अंबाला में करीब 125 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए वामन द्वादशी मेले का आयोजन शुरू हुआ, जहां पांच विभिन्न मंदिरों से आए पावन हिंडोलों को पुरानी अनाज मंडी के भव्य पंडाल में विधि-विधान से स्थापित किया गया।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/ambala-men-sava-sadi-purani-parnpara-ke-satha-vaman-dwadashi-mele-ka-agaza-pancha-hindolon-ki-sthapana-se-gunja-shahara-36227 · **Language:** Hindi
**Tags:** अंबाला, वामन द्वादशी मेला, श्री सनातन धर्म सभा, हरियाणा समाचार, धार्मिक परंपरा, नवरंग राय तालाब

हरियाणा के ऐतिहासिक शहर अंबाला में लगभग 125 वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर एक बार फिर जीवंत हो उठी है। वामन द्वादशी के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय वार्षिक मेले की विधिवत शुरुआत हो गई है। सोमवार की शाम ढलते ही शहर की पुरानी अनाज मंडी में बने विशाल और भव्य पंडाल में भगवान वामन के पांचों पावन हिंडोलों को पूरे धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ स्थापित कर दिया गया। विभिन्न देवालयों से गाजे-बाजे और शोभायात्रा के साथ निकले इन हिंडोलों के पंडाल में विराजते ही समूचा परिसर भक्ति के रंग में रंग गया। अब 23 सितंबर तक यहां लगातार धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर चलेगा।

## उत्तर भारत में अंबाला और पटियाला की अनूठी परंपरा
उत्तर भारत के सांस्कृतिक इतिहास में वामन द्वादशी पर निकलने वाले इस प्रकार के सामूहिक हिंडोला उत्सव की विशिष्ट पहचान मुख्य रूप से अंबाला और पटियाला शहरों से ही जुड़ी हुई है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और परंपरा के अनुसार अंबाला शहर में यह मेला वर्ष 1913-14 के आसपास से अनवरत आयोजित होता आ रहा है। इस भव्य आयोजन के संचालन और प्रबंधन से श्री सनातन धर्म सभा वर्ष 1913 से ही सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है, जिसका औपचारिक पंजीकरण वर्ष 1963 में संपन्न हुआ था। यही कारण है कि यह मेला सिर्फ एक सामान्य धार्मिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि अंबाला की सामाजिक एकता, साझी संस्कृति और सदियों पुरानी ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न अंग बन चुका है।

## विभिन्न देवालयों से निकली शोभायात्रा और हिंडोलों का मिलन
इस वर्ष के महोत्सव के लिए शहर के अलग-अलग ऐतिहासिक मंदिरों से कुल पांच हिंडोले पारंपरिक मर्यादा के साथ निकाले गए। इनमें परंपरा अनुसार सबसे पहला हिंडोला बड़ा ठाकुरद्वारा मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा के रूप में रवाना किया गया। इसके उपरांत शहर के अन्य प्रमुख देवालयों से भी श्रद्धा और उल्लास के साथ शेष चार हिंडोले निकले। स्थानीय बाजारों, गलियों और मुख्य मार्गों से होते हुए जब यह शोभायात्रा आगे बढ़ी तो श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर इसका स्वागत किया। अंततः सभी पांचों हिंडोलों को पुरानी अनाज मंडी के मुख्य आयोजन स्थल पर बनाए गए विशेष पंडाल में गरिमापूर्ण ढंग से प्रतिष्ठित किया गया, ताकि शहर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु सुगमतापूर्वक भगवान वामन के दर्शन कर सकें।

## विरासत को संभालने आगे आई नई पौध
इस प्राचीन उत्सव की निरंतरता और प्रबंधन को लेकर बड़ा ठाकुरद्वारा मंदिर के पुजारी सुमन पांडेय ने साझा किया कि वामन द्वादशी का यह अनुष्ठान अंबाला की आत्मा में रचा-बसा है। अलग-अलग मंदिरों से प्रभु के स्वरूपों को लाकर एक केंद्रीय स्थल पर एक साथ विराजमान करना इस मेले की सबसे अनूठी और केंद्रीय परंपरा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि मेले में न केवल स्थानीय निवासी बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होने आते हैं। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि युवा पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के उद्देश्य से इस बार करीब 40 से 50 युवाओं की टोली ने पंडाल प्रबंधन, सुरक्षा और व्यवस्थाओं की पूरी कमान संभाल रखी है।

## क्विंटलों पंजीरी का महाप्रसाद और भव्य वाटरप्रूफ पंडाल
श्रद्धालुओं की भारी आमद को ध्यान में रखते हुए श्री सनातन धर्म सभा और मंदिर कमेटियों ने विशेष बंदोबस्त किए हैं। भक्तों में वितरित करने के लिए मुख्य सभा की ओर से लगभग 7 क्विंटल पंजीरी का पावन प्रसाद तैयार करवाया गया है। इसके अतिरिक्त, शोभायात्रा में शामिल अन्य मंदिरों की ओर से भी करीब डेढ़ से दो क्विंटल तक पंजीरी का प्रसाद तैयार किया गया है। मौसम के मिजाज और संभावित वर्षा को देखते हुए पूरे पंडाल को पूरी तरह वाटरप्रूफ टेंट तकनीक से सुरक्षित बनाया गया है। पंडाल की नयनाभिराम सज्जा के लिए विशेष रूप से दिल्ली और कोलकाता से ताजे व दुर्लभ फूल मंगाए गए हैं, जिन्होंने पूरे परिसर को एक अलौकिक और मनोहारी धार्मिक स्वरूप प्रदान किया है।

## ड्रोन से पुष्पवर्षा, सांस्कृतिक संध्या और आतिशबाजी का आकर्षण
मेले के तीनों दिनों के लिए आयोजकों ने विविध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। 21 सितंबर की रात को मुख्य कार्यक्रमों के दौरान एकत्र हुए श्रद्धालुओं पर ड्रोन की मदद से आकाश से पुष्पवर्षा की गई, जो पूरे मेले में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी। इसके साथ ही सुप्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा प्रस्तुतियां और भक्ति संगीत का कार्यक्रम देर रात तक चला। उत्सव के दूसरे दिन यानी 22 सितंबर को भी दिनभर भजन-कीर्तन का क्रम जारी रहेगा, जबकि रात के समय विशेष विद्युत सज्जा और सहारनपुर से मंगवाई गई भव्य आतिशबाजी का प्रदर्शन आकाश को जगमगाएगा।

## 23 सितंबर को अंतिम शोभायात्रा और सरोवर में डुबकी
तीन दिवसीय वामन द्वादशी मेले का समापन 23 सितंबर को एक विशाल शोभायात्रा के साथ होगा। पुरानी अनाज मंडी से निकलने वाली इस विदाई शोभायात्रा में विभिन्न राज्यों से आए ब्रास बैंड और मेरठ के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा तैयार की गई आकर्षक देवी-देवताओं की झांकियां शामिल रहेंगी। यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख बाजारों की परिक्रमा करते हुए पुनः ठाकुरद्वारा मंदिर पहुंचेगी। इसके पश्चात ऐतिहासिक नवरंग राय तालाब में भगवान वामन के पांचों हिंडोलों को विधि-विधानपूर्वक डुबकी लगवाई जाएगी। जल क्रीड़ा और स्नान की यह प्राचीन परंपरा संपन्न होते ही सभी हिंडोलों को आदरपूर्वक उनके संबंधित मूल मंदिरों में वापस स्थापित कर दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
अंबाला के 125 साल पुराने वामन द्वादशी मेले के आरंभ से शहर के निवासियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों की दैनिक दिनचर्या और आवागमन पर सीधा असर पड़ेगा।

- **हरियाणा और पड़ोसी राज्यों में:** उत्तर भारत की इस दुर्लभ परंपरा के दर्शन करने के लिए हरियाणा और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंबाला पहुंच रहे हैं। यदि आप दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो 21 से 23 सितंबर के बीच पुरानी अनाज मंडी पहुंचकर सुगमता से भगवान वामन के पांचों स्वरूपों के दर्शन कर सकते हैं।
- **अंबाला शहर में:** मुख्य बाजारों से शोभायात्रा निकलने के कारण पुरानी अनाज मंडी, बड़ा ठाकुरद्वारा और नवरंग राय तालाब के आसपास के मार्गों पर 23 सितंबर तक यातायात बाधित रह सकता है। स्थानीय खरीदारों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे भीड़भाड़ से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें और शोभायात्रा के समय बाजार यात्रा की योजना पहले से बनाएं।
- **भक्तों और दर्शनार्थियों के लिए:** पंडाल में करीब 7 क्विंटल मुख्य पंजीरी के अलावा डेढ़ से दो क्विंटल अतिरिक्त प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। वाटरप्रूफ टेंट होने के कारण बरसात की स्थिति में भी श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के सांस्कृतिक संध्या और भजनों का आनंद ले सकेंगे।
- **स्थानीय व्यापार और बाजार:** तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन के चलते अंबाला के मध्यवर्ती बाजारों में ग्राहकों की भारी आवाजाही से स्थानीय खुदरा व्यापारियों और खान-पान के स्टॉलों की बिक्री में उल्लेखनीय उछाल आएगा। दुकानदारों को भारी भीड़ के मद्देनजर दुकानों के आगे आवागमन सुचारू रखने के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अंबाला में वामन द्वादशी मेले का यह आयोजन करीब सवा सदी पुरानी सामाजिक और धार्मिक परंपरा की निरंतरता के तहत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर संपन्न किया जाता है।

- **पौराणिक और धार्मिक मान्यता:** यह पर्व भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन के प्राकट्य दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान वामन ने राजा बलि की परीक्षा लेकर तीनों लोकों का उद्धार किया था, जिसकी स्मृति में विभिन्न मंदिरों से हिंडोले निकालकर उत्सव मनाया जाता है।
- **अंबाला का 1913 से जुड़ा ऐतिहासिक सिलसिला:** अंबाला में इस सामूहिक आयोजन की शुरुआत लगभग 1913-14 में शहर के संभ्रांत नागरिकों और श्री सनातन धर्म सभा द्वारा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। विभिन्न मोहल्लों और देवालयों के हिंडोलों को एक सांझे पंडाल में लाकर बैठाने का उद्देश्य शहर की एकता को प्रदर्शित करना रहा है।
- **वार्षिक विसर्जन परंपरा:** उत्सव के तीसरे दिन भगवान वामन के हिंडोलों को नवरंग राय तालाब में प्रतीकात्मक डुबकी लगवाने का नियम है। यह जल-क्रीड़ा अनुष्ठान पूरा होते ही हिंडोले पुनः अपने-अपने मंदिरों में प्रतिस्थापित कर दिए जाते हैं, जो मेले के औपचारिक समापन का कारण बनता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अंबाला में वामन द्वादशी मेला कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?
यह मेला सोमवार 21 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है।

### 2. मेले में कुल कितने हिंडोले स्थापित किए गए हैं और वे कहां रखे गए हैं?
मेले में शहर के विभिन्न मंदिरों से पांच हिंडोले लाकर पुरानी अनाज मंडी में बने भव्य पंडाल में स्थापित किए गए हैं।

### 3. अंबाला में वामन द्वादशी मेले का इतिहास कितना पुराना है?
अंबाला में यह मेला लगभग 125 साल पुराना है और वर्ष 1913-14 के आसपास से निरंतर आयोजित होता आ रहा है।

### 4. इस आयोजन से कौन सी प्रमुख धार्मिक संस्था जुड़ी हुई है?
श्री सनातन धर्म सभा वर्ष 1913 से इस मेले के आयोजन से जुड़ी है और इसका पंजीकरण वर्ष 1963 में हुआ था।

### 5. श्रद्धालुओं के लिए कितना प्रसाद तैयार किया गया है?
सभा की ओर से करीब 7 क्विंटल और विभिन्न मंदिरों की ओर से डेढ़ से दो क्विंटल पंजीरी का प्रसाद तैयार किया गया है।

### 6. मेले के समापन पर 23 सितंबर को क्या विशेष परंपरा निभाई जाएगी?
23 सितंबर को भव्य शोभायात्रा के बाद नवरंग राय तालाब में भगवान वामन के हिंडोलों को पवित्र डुबकी लगाई जाएगी।

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