अंबाला में तालाब बनाकर मछली पालन शुरू करने पर सरकार देगी लाखों का अनुदान हरियाणा के अंबाला में मत्स्य विभाग किसानों को तालाब बनाकर मछली पालन शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिसमें परियोजना लागत का 40 से 60 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान मिल सकता है। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में सितंबर का महीना खुद का कारोबार शुरू करने के लिहाज से खासा मुफीद माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो नौकरी के भरोसे न रहकर अपना काम खड़ा करना चाहते हैं। जिनके पास खेती की जमीन है, वे उसी में तालाब खुदवाकर मछली पालन का काम शुरू कर सकते हैं। जिनके पास जमीन नहीं है, उनके लिए भी रास्ता बंद नहीं है, क्योंकि 8 से 10 साल के लिए जमीन लीज पर लेकर भी यही कारोबार खड़ा किया जा सकता है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए किसानों और युवाओं को मछली पालन के पेशे से जोड़ने की कोशिश हो रही है, और इसी कड़ी में अंबाला जिले का मत्स्य विभाग गांव-गांव कैंप लगाकर लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचा रहा है। विभाग का कहना है कि जिले में हर साल 50 से ज्यादा किसान इस योजना का सहारा लेकर मछली पालन शुरू करते हैं, जो इस काम के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है। एक हेक्टेयर के तालाब पर कितनी सब्सिडी अंबाला की मत्स्य अधिकारी रूबी के मुताबिक इस योजना के तहत किसान एक हेक्टेयर जमीन पर तालाब तैयार करवा सकते हैं, फिर चाहे वह जमीन उनकी अपनी हो या 8 से 10 साल के लीज एग्रीमेंट पर ली गई हो। एक हेक्टेयर के तालाब को खड़ा करने में करीब 11 लाख रुपये तक की परियोजना लागत आ सकती है। इस पूरी रकम पर सरकार लाभार्थी की श्रेणी के हिसाब से 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देती है। सामान्य वर्ग से आने वाले आवेदकों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है, जबकि महिला लाभार्थियों और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों के लिए यह अनुदान बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यानी वर्ग के हिसाब से 11 लाख रुपये की लागत में से लाभार्थी को खुद अपनी जेब से बाकी की रकम ही जुटानी पड़ती है। सिर्फ तालाब तक सीमित नहीं है योजना, गाड़ी पर भी सब्सिडी रूबी के अनुसार मछली पालन का यह कारोबार सिर्फ तालाब बनाने तक ही सीमित नहीं रहता। मछलियों को तालाब से मंडी या बाजार तक पहुंचाने के लिए फोर व्हीलर वाहन खरीदने पर भी योजना के तहत सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है, और इसकी रकम 2.25 लाख रुपये तक हो सकती है। इससे किसान को मछलियों की लोडिंग-अनलोडिंग के साथ-साथ उन्हें समय पर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है। कारोबार की शुरुआत भले ही एक छोटे तालाब से हो, लेकिन आगे चलकर यही काम मछली उत्पादन, परिवहन और बाजार तक सप्लाई करने वाला पूरा कारोबार बन सकता है, जिससे किसान की कमाई के कई जरिए एक साथ खुल जाते हैं। आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान हरियाणा सरल पोर्टल या मत्स्य विभाग हरियाणा की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा होने के बाद विभाग की ओर से लाभार्थी को बुलाया जाता है और उसकी जानकारी व दस्तावेजों की जांच की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र पाए गए आवेदक को योजना के तहत सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। आवेदन के वक्त आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात या लीज एग्रीमेंट के अलावा जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण पत्र और दूसरे दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले ये सभी कागजात तैयार रखना बेहतर रहेगा। इसका आप पर असर यह योजना सीधे तौर पर उन ग्रामीण परिवारों को फायदा पहुंचा सकती है जो नौकरी के अलावा खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। • भारत में: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पूरे देश में लागू है, इसलिए दूसरे राज्यों के किसान भी अपने यहां के मत्स्य विभाग से संपर्क कर मिलती-जुलती शर्तों पर सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए विकल्प बन सकते हैं। • अंबाला में: जिले में मत्स्य विभाग गांव-गांव कैंप लगाकर जानकारी दे रहा है, इसलिए यहां के किसान सीधे विभाग के दफ्तर या कैंप में जाकर अपने कागजात और जमीन की स्थिति के हिसाब से सलाह ले सकते हैं। हर साल 50 से ज्यादा किसान यहां इस योजना का फायदा उठा चुके हैं। • लागत और सब्सिडी: एक हेक्टेयर तालाब पर करीब 11 लाख रुपये खर्च आ सकता है, जिस पर सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत और महिला, एससी, एसटी वर्ग को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। इच्छुक किसान अपनी श्रेणी के हिसाब से संभावित बचत का अंदाजा पहले ही लगा सकते हैं। • वाहन खरीद पर मदद: मछली बाजार तक पहुंचाने के लिए फोर व्हीलर खरीदने पर 2.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है, जिससे परिवहन का खर्च कुछ हद तक कम होगा। • जमीन न होने पर भी मौका: जिनके पास खुद की जमीन नहीं है, वे 8 से 10 साल के लीज एग्रीमेंट के जरिए भी योजना का फायदा उठा सकते हैं, जिससे यह विकल्प भूमिहीन किसानों के लिए भी खुला रहता है। सवाल-जवाब 1. यह योजना किस नाम से चल रही है? इसका नाम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना है। 2. तालाब बनाने के लिए कितनी जमीन चाहिए? योजना के तहत एक हेक्टेयर जमीन पर तालाब तैयार किया जा सकता है, चाहे वह खुद की हो या लीज पर ली गई हो। 3. अगर खुद की जमीन नहीं है तो क्या करें? जमीन 8 से 10 साल के लिए लीज पर लेकर भी तालाब बनाया जा सकता है। 4. एक हेक्टेयर तालाब बनाने में कितनी लागत आती है? इसकी परियोजना लागत करीब 11 लाख रुपये तक हो सकती है। 5. सरकार कितनी सब्सिडी देती है? सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत तक और महिला, एससी, एसटी वर्ग को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। 6. वाहन खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिल सकती है? मछली ढोने के लिए फोर व्हीलर खरीदने पर 2.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। 7. आवेदन कहां किया जा सकता है? किसान हरियाणा सरल पोर्टल या मत्स्य विभाग हरियाणा की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 8. आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात या लीज एग्रीमेंट और जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। https://trendkia.com/haryana/ambala-men-talaba-banakara-machhali-palana-shuru-karane-para-sarakara-degi-lakhon-ka-anudana-28236 TrendKia — Har trend, sabse pehle.